पुलिस महानिरीक्षक गौरव राजपूत के निर्देश पर प्रदेशभर में चल रहे अवैध नशे के कारोबार के खिलाफ अभियान के बावजूद, मैहर जिले के अमदरा थाना क्षेत्र के कई ग्रामीण इलाकों से अवैध शराब बिक्री के गंभीर आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि उनके गांवों में खुलेआम शराब बेची जा रही है और इसके पीछे एक संगठित नेटवर्क सक्रिय है। ग्रामीणों के अनुसार, सफेद रंग की एक बोलेरो गाड़ी के ज़रिए अलग-अलग गांवों में शराब पहुँचाई जाती है, और एक कथित वीडियो भी सामने आने का दावा किया जा रहा है, जिसमें दुकानों पर शराब बिकती दिखाई दे रही है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि यह कारोबार लंबे समय से जारी है, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही, जिससे इस नेटवर्क को मिल रहे कथित संरक्षण पर सवाल उठ रहे हैं। यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो आवकारी विभाग की भूमिका की निष्पक्ष जांच की माँग की गई है। जब संबंधित कंपनी के मैनेजर धीरज सिंह से इस मामले पर संपर्क किया गया, तो उन्होंने कहा कि उनके पास सभी आवश्यक लाइसेंस हैं। हालांकि, इस पर बड़ा सवाल खड़ा होता है कि क्या आबकारी विभाग ने वास्तव में संबंधित कंपनी या उसके अधिकृत विक्रेताओं को ग्रामीण क्षेत्रों में गांव-गांव शराब बेचने की अनुमति दी है? यदि ऐसी अनुमति नहीं है, तो फिर यह सप्लाई किस आधार पर की जा रही है, और यदि है, तो उसकी शर्तें क्या हैं? एक ओर मैहर पुलिस अवैध शराब के खिलाफ लगातार कार्रवाई का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर अमदरा थाना क्षेत्र के गांवों में शराब की कथित बिक्री के ये आरोप प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर रहे हैं। इस पूरे मामले में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या मैहर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में यह कथित अवैध शराब कारोबार आबकारी विभाग की मिलीभगत से संचालित हो रहा है, या यह केवल स्थानीय लोगों का आरोप है। इसका जवाब निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के बाद ही सामने आ सकेगा। फ़िलहाल, इस पूरे मामले की तथ्यपरक और निष्पक्ष पड़ताल जारी रहेगी। उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि कहीं अवैध शराब का कारोबार चल रहा है, तो उस पर कानून के अनुसार निष्पक्ष जांच हो और दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए।
पुलिस महानिरीक्षक गौरव राजपूत के निर्देश पर प्रदेशभर में चल रहे अवैध नशे के कारोबार के खिलाफ अभियान के बावजूद, मैहर जिले के अमदरा थाना क्षेत्र के कई ग्रामीण इलाकों से अवैध शराब बिक्री के गंभीर आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि उनके गांवों में खुलेआम शराब बेची जा रही है और इसके पीछे एक संगठित नेटवर्क सक्रिय है। ग्रामीणों के अनुसार, सफेद रंग की एक बोलेरो गाड़ी के ज़रिए अलग-अलग गांवों में शराब पहुँचाई जाती है, और एक कथित वीडियो भी सामने आने का दावा किया जा रहा है, जिसमें दुकानों पर शराब बिकती दिखाई दे रही है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि यह कारोबार लंबे समय से जारी है, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही, जिससे इस नेटवर्क को मिल रहे कथित संरक्षण पर सवाल उठ रहे हैं। यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो आवकारी विभाग की भूमिका की निष्पक्ष जांच की माँग की गई है। जब संबंधित कंपनी के मैनेजर धीरज सिंह से इस मामले पर संपर्क किया गया, तो उन्होंने कहा कि उनके पास सभी आवश्यक लाइसेंस हैं। हालांकि, इस पर बड़ा सवाल खड़ा होता है कि क्या आबकारी विभाग ने वास्तव में संबंधित कंपनी या उसके अधिकृत विक्रेताओं को ग्रामीण क्षेत्रों में गांव-गांव शराब बेचने की अनुमति दी है? यदि ऐसी अनुमति नहीं है, तो फिर यह सप्लाई किस आधार पर की जा रही है, और यदि है, तो उसकी शर्तें क्या हैं? एक ओर मैहर पुलिस अवैध शराब के खिलाफ लगातार कार्रवाई का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर अमदरा थाना क्षेत्र के गांवों में शराब की कथित बिक्री के ये आरोप प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर रहे हैं। इस पूरे मामले में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या मैहर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में यह कथित अवैध शराब कारोबार आबकारी विभाग की मिलीभगत से संचालित हो रहा है, या यह केवल स्थानीय लोगों का आरोप है। इसका जवाब निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के बाद ही सामने आ सकेगा। फ़िलहाल, इस पूरे मामले की तथ्यपरक और निष्पक्ष पड़ताल जारी रहेगी। उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि कहीं अवैध शराब का कारोबार चल रहा है, तो उस पर कानून के अनुसार निष्पक्ष जांच हो और दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए।
- कटनी जीआरपी पुलिस ने रेल यात्रियों के कीमती सामान पर हाथ साफ करने वाले एक बड़े अंतर-जिला/राज्य स्तरीय चोर गिरोह का पर्दाफाश किया है। रेल क्षेत्र में अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत पुलिस ने पांच शातिर चोरों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की, जिनके पास से 10 लाख 30 हजार 848 रुपये कीमत के सोने के जेवरात बरामद किए गए। रेल पुलिस अधीक्षक जबलपुर सुंदर सिंह कनेश ने एक पत्रकार वार्ता में इस मामले का खुलासा करते हुए बताया कि कटनी जीआरपी ने मुस्तैदी दिखाते हुए गिरोह के पांच सदस्यों को दबोचा है। पकड़े गए आरोपियों के नाम शरद उर्फ गोलू झारिया, अमित सिंह खंगार, सौरभ कुल्हाड़ा, राहुल ठाकुर और हर्ष खंगार हैं। पुलिस ने चोरों के पास से भारी मात्रा में सोने के आभूषण बरामद किए, जिसमें एक सोने का हार, तीन सोने के मंगलसूत्र, एक जोड़ी सोने के झुमके, एक जोड़ी सोने के टॉप्स, दो सोने की अंगूठियां और एक सोने की बाली शामिल हैं। पुलिस की तफ्तीश में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि पकड़े गए आरोपियों में से दो मुख्य आरोपी पुराने हिस्ट्रीशीटर हैं। ये दोनों आरोपी कटनी जीआरपी थाना के ही रिकॉर्डेड 'निगरानी बदमाश' हैं, जो लंबे समय से रेल क्षेत्र में चोरी और अन्य आपराधिक वारदातों को अंजाम दे रहे थे। पुलिस ने सभी पांचों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया है। इस अंधी चोरी और गिरोह का पर्दाफाश करने में कटनी जीआरपी पुलिस की भूमिका बेहद सराहनीय रही, जिसके लिए रेल पुलिस अधीक्षक सुंदर सिंह कनेश ने टीम के उत्कृष्ट कार्य की पीठ थपथपाई और कार्रवाई में शामिल सभी अधिकारियों व कर्मचारियों को नकद पुरस्कार देने की घोषणा की है।1
- सतना जिले के नागौद ब्लॉक में स्थित छुलहा गांव की सड़क की दुर्दशा को दर्शाने वाला एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है।1
- मैहर स्थित माँ शारदा शक्तिपीठ में आज दिनांक 02 जुलाई 2026, गुरुवार को दिव्य प्रातःकालीन दर्शन और आरती की गई। इस पावन अवसर पर देवी माँ का विशेष दिव्य श्रंगार भी किया गया। जय माई की।1
- स्मार्ट सिटी सतना के निवासियों के लिए एक निराशाजनक खबर सामने आई है, जहाँ आधुनिक और प्रदूषण मुक्त परिवहन के लिए स्वीकृत 20 इलेक्ट्रिक बसों की मंजूरी अचानक निरस्त कर दी गई है। इस निर्णय से शहर में भारी आक्रोश है। इसी आक्रोश के चलते मंगलवार को कांग्रेस पार्टी के पदाधिकारियों ने इस फैसले का कड़ा विरोध करते हुए जिला कलेक्ट्रेट में ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी की और इसे सतना के साथ अन्याय बताया। ये बसें केंद्र सरकार की 'प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना' के तहत सतना के लिए स्वीकृत की गई थीं, जिनके संचालन के लिए नगर निगम स्तर पर तैयारियां भी शुरू हो चुकी थीं। हालांकि, ग्वालियर में परिवहन विभाग की एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद अचानक इन बसों का आवंटन रद्द कर दिया गया। अब इन बसों को भोपाल और इंदौर जैसे बड़े शहरों में संचालित किया जाएगा। नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, बसों की मंजूरी निरस्त करने के पीछे विभाग की ओर से कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया है, जिससे सतना की प्रस्तावित इलेक्ट्रिक सिटी बस सेवा फिलहाल अधर में लटक गई है।1
- मध्य प्रदेश के सतना जिले में स्थित ग्राम पंचायत क्यों बेरमा में अनियमितता के आरोप लगाए गए हैं, और इस विषय पर सवाल उठाया जा रहा है कि आखिर ये आरोप क्यों लगे हैं।1