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मेरठ के लिसाड़ी गेट थाना क्षेत्र के खुशहाल नगर से एक बुजुर्ग महिला संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गई हैं। वह अपनी किराना दुकान से अचानक गायब हुईं, जिसके बाद परिवार ने किसी अनहोनी की आशंका व्यक्त की है। परिजनों ने गुमशुदा महिला की शिकायत थाने में दर्ज कराई है। परिवार का आरोप है कि शिकायत दर्ज कराए जाने के पांच दिन बाद भी बुजुर्ग महिला का कोई सुराग नहीं लगा है। उन्होंने थाना पुलिस पर मामले में कोई कार्रवाई न करने का आरोप लगाया है। परिवार ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) से लापता बुजुर्ग महिला की सकुशल बरामदगी की मांग की है।

2 hrs ago
user_मोहम्मद अतीक
मोहम्मद अतीक
Photographer मेरठ, मेरठ, उत्तर प्रदेश•
2 hrs ago

मेरठ के लिसाड़ी गेट थाना क्षेत्र के खुशहाल नगर से एक बुजुर्ग महिला संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गई हैं। वह अपनी किराना दुकान से अचानक गायब हुईं, जिसके बाद परिवार ने किसी अनहोनी की आशंका व्यक्त की है। परिजनों ने गुमशुदा महिला की शिकायत थाने में दर्ज कराई है। परिवार का आरोप है कि शिकायत दर्ज कराए जाने के पांच दिन बाद भी बुजुर्ग महिला का कोई सुराग नहीं लगा है। उन्होंने थाना पुलिस पर मामले में कोई कार्रवाई न करने का आरोप लगाया है। परिवार ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) से लापता बुजुर्ग महिला की सकुशल बरामदगी की मांग की है।

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  • लंबी सड़क यात्राओं के दौरान अक्सर हाईवे और सड़कों के किनारे बड़ी संख्या में बबूल के पेड़ दिखाई देते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इसके पीछे एक प्राकृतिक कारण है, जिसमें बबूल के बीज हवा, पक्षियों और जानवरों के माध्यम से दूर-दूर तक फैल जाते हैं। ये बीज सड़क किनारे की खाली भूमि और कम देखभाल वाले क्षेत्रों में आसानी से अंकुरित होकर पेड़ का रूप ले लेते हैं। बबूल का पेड़ कम पानी और कठिन परिस्थितियों में भी तेजी से बढ़ने की क्षमता रखता है। यही विशेषता इसे सड़क किनारे, बंजर भूमि और खुले क्षेत्रों में अत्यधिक रूप से दिखाई देने का मुख्य कारण बनाती है। हालांकि, कई लोगों को बबूल के फूलों की गंध पसंद नहीं आती और वे इसे सूंघने पर बेचैनी या उल्टी जैसा महसूस करते हैं। यह अनुभव हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकता है, जहाँ कुछ लोग इसकी गंध के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं, वहीं अन्य को इससे कोई परेशानी नहीं होती। प्रकृति की यह खासियत है कि कुछ पौधे और पेड़ अपने वातावरण के अनुसार खुद को आसानी से ढाल लेते हैं, और बबूल भी उन्हीं पेड़ों में से एक है जो सीमित संसाधनों में भी तेजी से बढ़कर पर्यावरण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाता है।
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    लंबी सड़क यात्राओं के दौरान अक्सर हाईवे और सड़कों के किनारे बड़ी संख्या में बबूल के पेड़ दिखाई देते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इसके पीछे एक प्राकृतिक कारण है, जिसमें बबूल के बीज हवा, पक्षियों और जानवरों के माध्यम से दूर-दूर तक फैल जाते हैं। ये बीज सड़क किनारे की खाली भूमि और कम देखभाल वाले क्षेत्रों में आसानी से अंकुरित होकर पेड़ का रूप ले लेते हैं।

बबूल का पेड़ कम पानी और कठिन परिस्थितियों में भी तेजी से बढ़ने की क्षमता रखता है। यही विशेषता इसे सड़क किनारे, बंजर भूमि और खुले क्षेत्रों में अत्यधिक रूप से दिखाई देने का मुख्य कारण बनाती है।

हालांकि, कई लोगों को बबूल के फूलों की गंध पसंद नहीं आती और वे इसे सूंघने पर बेचैनी या उल्टी जैसा महसूस करते हैं। यह अनुभव हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकता है, जहाँ कुछ लोग इसकी गंध के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं, वहीं अन्य को इससे कोई परेशानी नहीं होती।

प्रकृति की यह खासियत है कि कुछ पौधे और पेड़ अपने वातावरण के अनुसार खुद को आसानी से ढाल लेते हैं, और बबूल भी उन्हीं पेड़ों में से एक है जो सीमित संसाधनों में भी तेजी से बढ़कर पर्यावरण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाता है।
    user_SACHIN SHIVALIA
    SACHIN SHIVALIA
    Journalist Meerut, Uttar Pradesh•
    11 hrs ago
  • मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने मेरठ में 'मोहल्ला मीटिंग कैंपेन' का आगाज किया है, जिसके तहत लोगों से सियासत में सक्रिय भागीदारी निभाने का पुरजोर आह्वान किया जा रहा है। AIMIM के महानगर अध्यक्ष इमरान अंसारी ने जनता से अपील की है कि वे उठें और जागो, क्योंकि राजनीति में जितनी देर से हिस्सा लिया जाएगा, नुकसान उतना ही बड़ा होगा। अंसारी ने लोगों को 'तथाकथित सेकुलर पार्टियों' के जाल से बाहर निकलने और अपने बच्चों के बेहतर भविष्य की हिफाज़त के लिए AIMIM का साथ देने के लिए प्रेरित किया। इस अभियान का उद्देश्य लोगों को राजनीतिक रूप से जागरूक करना है ताकि वे अपने मुस्तकबिल के लिए सही निर्णय ले सकें।
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    मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने मेरठ में 'मोहल्ला मीटिंग कैंपेन' का आगाज किया है, जिसके तहत लोगों से सियासत में सक्रिय भागीदारी निभाने का पुरजोर आह्वान किया जा रहा है। AIMIM के महानगर अध्यक्ष इमरान अंसारी ने जनता से अपील की है कि वे उठें और जागो, क्योंकि राजनीति में जितनी देर से हिस्सा लिया जाएगा, नुकसान उतना ही बड़ा होगा।

अंसारी ने लोगों को 'तथाकथित सेकुलर पार्टियों' के जाल से बाहर निकलने और अपने बच्चों के बेहतर भविष्य की हिफाज़त के लिए AIMIM का साथ देने के लिए प्रेरित किया। इस अभियान का उद्देश्य लोगों को राजनीतिक रूप से जागरूक करना है ताकि वे अपने मुस्तकबिल के लिए सही निर्णय ले सकें।
    user_Media fast news 24
    Media fast news 24
    मेरठ, मेरठ, उत्तर प्रदेश•
    21 hrs ago
  • cut godi dono bhai ki inki masti rog deko ye dono best bhi h inko dekne ke ley cement kero cut bhi
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    cut godi dono bhai ki inki masti rog deko ye dono best bhi h 
inko dekne ke ley cement kero cut bhi
    user_Rohan khan
    Rohan khan
    Tailor मेरठ, मेरठ, उत्तर प्रदेश•
    21 hrs ago
  • मेरठ के कंकरखेड़ा थाना क्षेत्र में एक वीभत्स घटना सामने आई है, जहाँ युवाओं की ईंटों से बेरहमी से कूच-कूच कर हत्या कर दी गई।
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    मेरठ के कंकरखेड़ा थाना क्षेत्र में एक वीभत्स घटना सामने आई है, जहाँ युवाओं की ईंटों से बेरहमी से कूच-कूच कर हत्या कर दी गई।
    user_अंजली मलिक
    अंजली मलिक
    सरधना, मेरठ, उत्तर प्रदेश•
    11 hrs ago
  • सुबह की पहली किरण के साथ ही गांव में मुर्गों की बांग सुनाई देने लगी, जिससे पूरे माहौल में एक नई ताजगी छा गई। मुर्गों की आवाज़ के साथ ही ग्रामीणों की दिनचर्या भी शुरू हो गई; कोई खेतों की ओर निकल पड़ा, तो कोई पशुओं की देखभाल में जुट गया। गांव की सुबह का यह दृश्य आज भी अपनी पुरानी पहचान बनाए हुए है। जहां शहरों में लोग मोबाइल और अलार्म की आवाज से जागते हैं, वहीं गांवों में आज भी मुर्गों की बांग लोगों को नए दिन का संदेश देती है। सुबह की ठंडी हवा, पक्षियों की चहचहाहट और मुर्गों की बांग से पूरा वातावरण जीवंत नज़र आया, जिसे ग्रामीण गांव की असली पहचान और खूबसूरती का आधार मानते हैं। तेजी से बदलते दौर में भी गांवों की यह परंपरा लोगों को प्रकृति से जोड़ने का काम कर रही है। मुर्गों की बांग के साथ शुरू होने वाली यह सुबह आज भी ग्रामीण जीवन की सादगी और खूबसूरती को बखूबी बयां करती है।
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    सुबह की पहली किरण के साथ ही गांव में मुर्गों की बांग सुनाई देने लगी, जिससे पूरे माहौल में एक नई ताजगी छा गई। मुर्गों की आवाज़ के साथ ही ग्रामीणों की दिनचर्या भी शुरू हो गई; कोई खेतों की ओर निकल पड़ा, तो कोई पशुओं की देखभाल में जुट गया।

गांव की सुबह का यह दृश्य आज भी अपनी पुरानी पहचान बनाए हुए है। जहां शहरों में लोग मोबाइल और अलार्म की आवाज से जागते हैं, वहीं गांवों में आज भी मुर्गों की बांग लोगों को नए दिन का संदेश देती है। सुबह की ठंडी हवा, पक्षियों की चहचहाहट और मुर्गों की बांग से पूरा वातावरण जीवंत नज़र आया, जिसे ग्रामीण गांव की असली पहचान और खूबसूरती का आधार मानते हैं।

तेजी से बदलते दौर में भी गांवों की यह परंपरा लोगों को प्रकृति से जोड़ने का काम कर रही है। मुर्गों की बांग के साथ शुरू होने वाली यह सुबह आज भी ग्रामीण जीवन की सादगी और खूबसूरती को बखूबी बयां करती है।
    user_SACHIN SHIVALIA
    SACHIN SHIVALIA
    Journalist Meerut, Uttar Pradesh•
    11 hrs ago
  • एक सड़क पर लगाए गए सफेद डिस्प्ले वाले एक होर्डिंग ने लोगों का ध्यान खींचा है, जिस पर खाद्य बर्बादी को रोकने के संबंध में एक महत्वपूर्ण और मार्मिक संदेश दिया गया है। इस होर्डिंग के निचले हिस्से में एक पट्टी पर स्पष्ट रूप से लिखा है कि "देश में 20 करोड़ देशवासी प्रतिदिन भूखे सोते हैं इसलिए थाली में उतना ही पड़ोसी जो फेंकना पड़े।" यह संदेश भारत में व्याप्त भूखमरी की गंभीर वास्तविकता को दर्शाता है और लोगों से अन्न का सम्मान करने तथा उतनी ही मात्रा में भोजन परोसने का आग्रह करता है, जितना आवश्यक हो, ताकि कोई भी अन्न व्यर्थ न जाए। इस शक्तिशाली संदेश को पढ़कर लोगों की आँखें खुल गईं और जिसने भी इसे देखा, वह हैरान रह गया। इस अनूठे और 'गजब के' संदेश को राष्ट्रीय विकास संगठन के बिजनौर पदाधिकारी रविंद्र ककराज ने इस सफेद होर्डिंग के माध्यम से प्रसारित किया है, जिसकी लोगों द्वारा व्यापक रूप से सराहना की जा रही है।
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    एक सड़क पर लगाए गए सफेद डिस्प्ले वाले एक होर्डिंग ने लोगों का ध्यान खींचा है, जिस पर खाद्य बर्बादी को रोकने के संबंध में एक महत्वपूर्ण और मार्मिक संदेश दिया गया है। इस होर्डिंग के निचले हिस्से में एक पट्टी पर स्पष्ट रूप से लिखा है कि "देश में 20 करोड़ देशवासी प्रतिदिन भूखे सोते हैं इसलिए थाली में उतना ही पड़ोसी जो फेंकना पड़े।" यह संदेश भारत में व्याप्त भूखमरी की गंभीर वास्तविकता को दर्शाता है और लोगों से अन्न का सम्मान करने तथा उतनी ही मात्रा में भोजन परोसने का आग्रह करता है, जितना आवश्यक हो, ताकि कोई भी अन्न व्यर्थ न जाए।

इस शक्तिशाली संदेश को पढ़कर लोगों की आँखें खुल गईं और जिसने भी इसे देखा, वह हैरान रह गया। इस अनूठे और 'गजब के' संदेश को राष्ट्रीय विकास संगठन के बिजनौर पदाधिकारी रविंद्र ककराज ने इस सफेद होर्डिंग के माध्यम से प्रसारित किया है, जिसकी लोगों द्वारा व्यापक रूप से सराहना की जा रही है।
    user_PARUL SIROHI BC MEERUT
    PARUL SIROHI BC MEERUT
    सरधना, मेरठ, उत्तर प्रदेश•
    3 hrs ago
  • उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के पुरनिया इलाके में स्थित एक कोचिंग सेंटर में भीषण आग लग गई। इस घटना की सूचना मिलते ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे।
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    उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के पुरनिया इलाके में स्थित एक कोचिंग सेंटर में भीषण आग लग गई। इस घटना की सूचना मिलते ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे।
    user_Mohd Waseem
    Mohd Waseem
    मेरठ, मेरठ, उत्तर प्रदेश•
    23 hrs ago
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