गाँवों के हर मकान की अद्वितीय आईडी है घरौनी बदायूँ: 18 फरवरी। उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाली आबादी के घरों का कोई नक्शा या नम्बर नहीं होता है। जमीन के जिस भाग पर विभिन्न वर्गों के परिवार मकान बनाकर रहते हैं, उस क्षेत्र को राजस्व विभाग के नक्शे में आबादी क्षेत्र घोषित किया गया है। आबादी क्षेत्र में बहुत से परिवारों के घर होते है, किन्तु इस घर पर किसी के नाम से वह मकान नहीं होता है। ऐसी स्थिति में स्वामित्व व कब्जों को लेकर गाँवों में पारिवारिक या पडोसी से विवाद मारपीट व मुकदमेबाजी भी होती है। ग्रामीण समाज में शान्ति, सौहार्द आपसी भाई चारा बनाये रखने और आवासों का स्वामित्व बनाये रखने के उद्देश्य से भारत सरकार की ष्स्वामित्व योजनाष् के अन्तर्गत उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्रामीण आबादी सर्वेक्षण, एवं अभिलेख संक्रिया विनियामली, 2020 प्रख्यापित की है। जिसके अन्तर्गत आवास स्वामी को घरौनी दी जाती है। राज्य सरकार की इस विनियमावली के अन्तर्गत ग्रामीण आबादी क्षेत्रों में अवस्थित भूमि, भवन एवं सम्पत्तियों का सर्वेक्षण कराकर ग्रामीण आवासीय अभिलेख (घरौनी) तैयार कर सम्बन्धित गृह स्वामियों को उपलब्ध कराया जाता है। राज्य सरकार द्वारा अधिसूचना जारी कर ग्रामीण आबादी क्षेत्र के सर्वेक्षण का कार्य जिलाधिकारियों/जिला अभिलेख अधिकारियों द्वारा प्रसारित कर कराया जा रहा है। सर्वेक्षण प्रक्रिया में सर्वप्रथम ग्राम सभाओं की बैठक कर सभी ग्रामवासियों को इस विनियमावली की जानकारी दी जाती है। तत्पश्चात ग्राम के आबादी क्षेत्र की सभी निजी, सरकारी अर्ध सरकारी भूमि, भवन एवं सम्पत्तियों को चिन्हीकरण किया जाता है। चिन्हीकरण के पश्चात आबादी क्षेत्र को ड्रोन द्वारा सर्वेक्षण फोटो लिए जाते हैं, जिसके आधार पर आबादी क्षेत्र का मानचित्र तैयार किया गया है। मानचित्र के आधार पर आबादी भूखण्डों की नम्बरिंग कर सभी गृह स्वामियों एवं सरकारी सम्पत्तियों की सूची बनाकर ग्राम पंचायत की बैठक में प्रकाशित किया जाता है। घरौनियों हेतु सम्पत्तियों की सूची के प्रकाशन के उपरान्त उप जिलाधिकारी द्वारा आपत्तियों आमंत्रित कर उनका निस्तारण सुलह समझौते के आधार पर किया जाता है। उप जिलाधिकारी/सहायक अभिलेख अधिकारी के निस्तारण के विरुद्ध जिलाधिकारी/जिला अभिलेख के समक्ष आपत्ति दाखिल की जा सकती है। जिलाधिकारी/जिला अभिलेख अधिकारी द्वारा सम्बन्धित पक्षों को सुनवाई का अवसर देकर आपत्ति का निस्तारण करते है। सभी त्रुटियों, समझौते एवं आपत्तियों के निस्तारण के पश्चात गृह स्वामीवार ग्रामीण आवासीय अभिलेख (घरौनी) एवं संशोधित मानचित्र तैयार किया जाता है। जिसकी पुष्टि सहायक अभिलेख अधिकारी द्वारा की जाती है। ग्रामीण आवासीय अभिलेख (घरौनी) तैयारी हो जाने के पश्चात जिलाधिकारी द्वारा ग्राम के आबादी सर्वेक्षण एवं अभिलेख संक्रिया पूर्ण होने की अधिसूचना का प्रस्ताव शासन को प्रेषित किया जाता है। प्रदेश में नवीनतम ड्रोन प्रौद्योगिकी के उपयोग से ग्रामीण आबादी वाले क्षेत्रों का सर्वेक्षण कर उनके स्वामित्व संबंधी अभिलेख तैयार कराने हेतु प्रदेश में कुल 1,10,344 ग्रामों को अधिसूचित किया गया है, जिनमें संचालित ‘‘स्वामित्व योजना‘‘ के अन्तर्गत प्रदेश में गैर आबाद आदि ग्रामों को छोड़कर कुल 90530 ग्रामों में वास्तविक रूप से ड्रोन सर्वेक्षण एवं घरौनी तैयार किये जाने की कार्यवाही की जा रही है। दिसम्बर, 2025 तक समेकित रूप से सभी 90530 ग्रामों का ड्रोन सर्वेक्षण पूर्ण हो गया है। प्रदेश में अब तक 71344 ग्रामों में कुल 1,09,11,057 ग्रामीण आवासीय अभिलेख (घरौनी) तैयार/वितरित की जा चुकी है।
गाँवों के हर मकान की अद्वितीय आईडी है घरौनी बदायूँ: 18 फरवरी। उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाली आबादी के घरों का कोई नक्शा या नम्बर नहीं होता है। जमीन के जिस भाग पर विभिन्न वर्गों के परिवार मकान बनाकर रहते हैं, उस क्षेत्र को राजस्व विभाग के नक्शे में आबादी क्षेत्र घोषित किया गया है। आबादी क्षेत्र में बहुत से परिवारों के घर होते है, किन्तु इस घर पर किसी के नाम से वह मकान नहीं होता है। ऐसी स्थिति में स्वामित्व व कब्जों को लेकर गाँवों में पारिवारिक या पडोसी से विवाद मारपीट व मुकदमेबाजी भी होती है। ग्रामीण समाज में शान्ति, सौहार्द आपसी भाई चारा बनाये रखने और आवासों का स्वामित्व बनाये रखने के उद्देश्य से भारत सरकार की ष्स्वामित्व योजनाष् के अन्तर्गत उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्रामीण आबादी सर्वेक्षण, एवं अभिलेख संक्रिया विनियामली, 2020 प्रख्यापित की है। जिसके अन्तर्गत आवास स्वामी को घरौनी दी जाती है। राज्य सरकार की इस विनियमावली के अन्तर्गत ग्रामीण आबादी क्षेत्रों में अवस्थित भूमि, भवन एवं सम्पत्तियों का सर्वेक्षण कराकर ग्रामीण आवासीय अभिलेख (घरौनी) तैयार कर सम्बन्धित गृह स्वामियों को उपलब्ध कराया जाता है। राज्य सरकार द्वारा अधिसूचना जारी कर ग्रामीण आबादी क्षेत्र के सर्वेक्षण का कार्य जिलाधिकारियों/जिला अभिलेख अधिकारियों द्वारा प्रसारित कर कराया जा रहा है। सर्वेक्षण प्रक्रिया में सर्वप्रथम ग्राम सभाओं की बैठक कर सभी ग्रामवासियों को इस विनियमावली की जानकारी दी जाती है। तत्पश्चात ग्राम के आबादी क्षेत्र की सभी निजी, सरकारी अर्ध सरकारी भूमि, भवन एवं सम्पत्तियों को चिन्हीकरण किया जाता है। चिन्हीकरण के पश्चात आबादी क्षेत्र को ड्रोन द्वारा सर्वेक्षण फोटो लिए जाते हैं, जिसके आधार पर आबादी क्षेत्र का मानचित्र तैयार किया गया है। मानचित्र के आधार पर आबादी भूखण्डों की नम्बरिंग कर सभी गृह स्वामियों एवं सरकारी सम्पत्तियों की सूची बनाकर ग्राम पंचायत की बैठक में प्रकाशित किया जाता है। घरौनियों हेतु सम्पत्तियों की सूची के प्रकाशन के उपरान्त उप जिलाधिकारी द्वारा आपत्तियों आमंत्रित कर उनका निस्तारण सुलह समझौते के आधार पर किया जाता है। उप जिलाधिकारी/सहायक अभिलेख अधिकारी के निस्तारण के विरुद्ध जिलाधिकारी/जिला अभिलेख के समक्ष आपत्ति दाखिल की जा सकती है। जिलाधिकारी/जिला अभिलेख अधिकारी द्वारा सम्बन्धित पक्षों को सुनवाई का अवसर देकर आपत्ति का निस्तारण करते है। सभी त्रुटियों, समझौते एवं आपत्तियों के निस्तारण के पश्चात गृह स्वामीवार ग्रामीण आवासीय अभिलेख (घरौनी) एवं संशोधित मानचित्र तैयार किया जाता है। जिसकी पुष्टि सहायक अभिलेख अधिकारी द्वारा की जाती है। ग्रामीण आवासीय अभिलेख (घरौनी) तैयारी हो जाने के पश्चात जिलाधिकारी द्वारा ग्राम के आबादी सर्वेक्षण एवं अभिलेख संक्रिया पूर्ण होने की अधिसूचना का प्रस्ताव शासन को प्रेषित किया जाता है। प्रदेश में नवीनतम ड्रोन प्रौद्योगिकी के उपयोग से ग्रामीण आबादी वाले क्षेत्रों का सर्वेक्षण कर उनके स्वामित्व संबंधी अभिलेख तैयार कराने हेतु प्रदेश में कुल 1,10,344 ग्रामों को अधिसूचित किया गया है, जिनमें संचालित ‘‘स्वामित्व योजना‘‘ के अन्तर्गत प्रदेश में गैर आबाद आदि ग्रामों को छोड़कर कुल 90530 ग्रामों में वास्तविक रूप से ड्रोन सर्वेक्षण एवं घरौनी तैयार किये जाने की कार्यवाही की जा रही है। दिसम्बर, 2025 तक समेकित रूप से सभी 90530 ग्रामों का ड्रोन सर्वेक्षण पूर्ण हो गया है। प्रदेश में अब तक 71344 ग्रामों में कुल 1,09,11,057 ग्रामीण आवासीय अभिलेख (घरौनी) तैयार/वितरित की जा चुकी है।
- बदायूं। भारतीय किसान यूनियन टिकैत ने मथुरा बरेली सिक्सलेन हाइवे पर ग्रामीण अंचलों के सम्पर्क मार्ग के आवागमन के लिए अंडरपास बनबाने को लेकर ग्रामीणों की पंचायत ग्राम बहेड़ी में बुधवार को आयोजित की। इस अवसर पर भाकियू नेताओं ने कहा कि केन्द्रीय और यूपी की सरकारों को हाइवे के विकास के साथ ग्रामीणों को सुरक्षित रास्ता अंडरपास के जरिए देकर उनकी कीमती जान की भी रक्षा करनी चाहिए। इस दौरान भाकियू की ओर से केंद्रीय सड़क परिवहन राजमार्ग मंत्री के नाम ज्ञापन निर्माण कार्य में लगे इंजीनियर को सौंपा। पंचायत को भाकियू के मंडल प्रवक्ता राजेश कुमार सक्सेना ने संबोधित करते हुए कहा सड़क बनना जनता के हित के कार्य हैं परंतु जनता को जो सैकड़ो वर्षों से अपने गांव और गलियारों के लिए इस मार्ग से निकलते थे उस मार्ग को मिट्टी डाल कर ऊंचा कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि बन रहे सिक्सलेन हाइवे पर बदायूं जिले के करुऊ, बहेड़ी लिंक रोड से कई गांव जुड़ते हैं परंतु यहां पर अंडर पास नहीं दिया गया है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि ग्रामीणों की जान की सुरक्षा हेतु अंडरपास बनाए जाते हैं परंतु इसमें कोताही बरती जा रही है। केन्द्रीय मंत्री को भेजे गए ज्ञापन में बहेड़ी, गुनौरा वाजिदपुर, जिरौली, बुटला बोडर्, फूलपुर, समेत अन्य जरूरत के हिसाब के अंडरपास बनबाने की मांग की गई साथ ही चेतावनी दी गई कि अगर हाइवे पर अंडरपास न बने तो आंदोलन किया जाएगा।1
- Post by राजेश कुमार वर्मा1
- बदायूं जिले में दूसरी मीटिंग का दिन, बच्चों के साथ अभिभावकों की भी परीक्षा बदायूं। जिले में आयोजित दूसरी मीटिंग के दिन स्कूल और कॉलेज परिसरों के बाहर अभिभावकों की भारी भीड़ देखने को मिली। सुबह से ही अभिभावक अपने बच्चों को परीक्षा/मीटिंग के लिए स्कूल-कॉलेज छोड़ने पहुंचे और फिर दिनभर वहीं इंतजार करते नजर आए। अभिभावकों ने बच्चों को सुरक्षित परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने के बाद बाहर बैठकर समय बिताया। कई अभिभावक छांव की तलाश में तो कुछ स्कूल गेट के पास समूह बनाकर चर्चा करते दिखाई दिए। बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता और उम्मीद—दोनों ही भाव उनके चेहरों पर साफ झलक रहे थे। दोपहर तक धूप बढ़ने के बावजूद अभिभावकों का धैर्य बना रहा। परीक्षा समाप्त होने पर बच्चों को बाहर आते देख उनके चेहरे खिल उठे। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह दृश्य अभिभावकों की जिम्मेदारी और बच्चों के प्रति उनके समर्पण को दर्शाता है। कुल मिलाकर, बदायूं में दूसरी मीटिंग का यह दिन बच्चों के साथ-साथ अभिभावकों के लिए भी एक लंबा और महत्वपूर्ण दिन साबित हुआ।1
- म्यूचुअल फंड में पैसा लगाना क्यों जरूरी है, क्योंकि यहां कुछ ही साल में आपका पैसा आपका करोड़पति बना देता है. ये पावर केवल म्यूचुअल फंड में ही है,1
- "रिपोर्ट : आदित्य भारद्वाज" आंवला। भमोरा थाना क्षेत्र की ग्राम पंचायत सरारी निवासी भारती ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को शिकायती पत्र देकर सुरक्षा की गुहार लगाई है। उन्होंने बताया कि उन्होंने 17 फरवरी को भुता क्षेत्र के ग्राम विशेषरपुर निवासी अमित कुमार से आर्य समाज मंदिर में विवाह कर लिया है। विवाह के बाद उन्हें अपने परिवार से जान का खतरा है। दंपति ने पुलिस से सुरक्षा प्रदान किए जाने की मांग की है।1
- स्थान: वाराणसी, उत्तर प्रदेश एक हिंदुत्व संगठन बकरा मंडी में घुस गया और मंदिर की निकटता का हवाला देते हुए पशुओं की बलि देने का आरोप लगाया, जो निराधार पाया गया। इसके बाद उन्होंने सांप्रदायिक तनाव भड़काने का प्रयास किया।1
- थाना मीरगंज #bareillyPolice द्वारा 01 अभियुक्त को चोरी की मोटर साइकिल के साथ किया गिरफ्तार।1
- बदायूं। बधाई और नेक की उगाही को लेकर किन्नरों में चल रहे विवाद में एक किन्नर की विवाहिता बहन की फोटो एडिट कर उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया गया है। पीड़ित ने फोटो बना कर वायरल करने का आरोप कुंवरगांव के किन्नर रज्जो उर्फ यशपाल पर लगाते हुए एसएसपी को पत्र भेज कर कार्रवाई की मांग की है। उझानी कोतवाली क्षेत्र के गांव पतरघटना की रहने वाली एक महिला ने एसएसपी को भेजे गए पत्र में लिखा है कि उसका एक भाई पिछले काफी समय से किन्नर बन चुका है और वह अन्य किन्नरों के साथ उझानी, कछला, मुजरिया, बिल्सी आदि स्थानों से बधाई मांगता है इसी को लेकर कुंवरगांव निवासी किन्नर रज्जों उर्फ यशपाल उसके किन्नर भाई से रंजिश मानता है लेकिन उसका इस विवाद और रंजिश से कोई लेना देना नही है। पीड़ित का कहना है कि उसके फोटो फेसबुक समेत अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म से उठा कर रज्जों किन्नर ने गंदे आडियों और आपत्तिजनक व अश्लील फोटो एडिट कर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिए है। महिला ने बताया कि जब उसके अश्लील फोटो वायरल हुए तब उसके पति ने एसएसपी को पत्र भेज कर रज्जों किन्नर के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। पति का कहना है कि रज्जों उसकी पत्नी को आत्महत्या करने के लिए उकसा रही है।1