हरियाणा में अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति के एक प्रतिनिधिमंडल ने विपक्ष के नेता व पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने 33% महिला आरक्षण विधेयक को आगामी मानसून सत्र में ही लागू करवाने की पुरजोर मांग उठाई। प्रतिनिधिमंडल में संगठन की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जगमति सांगवान, राज्य महासचिव उषा सरोहा, कोषाध्यक्ष अमिता मलिक, पूर्व महासचिव राजकुमारी दहिया, रोहतक जिला सह सचिव मुनमुन हजारिका और पूनम नेहरा शामिल रहीं। प्रतिनिधिमंडल ने देश की राजनीति में महिलाओं के अत्यंत कम प्रतिनिधित्व पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि भारतीय संसद में महिलाओं की भागीदारी केवल 13 प्रतिशत और विधानसभाओं में महज 9 प्रतिशत ही है। इसके विपरीत, क्यूबा, मैक्सिको, रवांडा, निकारागुआ, बोलीविया, अंडोरा और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व 50 प्रतिशत से भी अधिक है। समिति ने स्पष्ट किया कि नीतियों के निर्माण में महिलाओं की समान भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए इस आरक्षण को तुरंत लागू किया जाना बेहद जरूरी है, जिसके लिए प्रगतिशील संगठनों ने दशकों तक संघर्ष किया है। प्रतिनिधिमंडल ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि महिला आरक्षण कानून को संसद से पारित हुए तीन साल पूरे होने वाले हैं, लेकिन इसे आज तक लागू नहीं किया गया है। भाजपा सरकार ने इसके क्रियान्वयन को जनगणना और परिसीमन जैसी शर्तों से जोड़कर महिलाओं के राजनीतिक अधिकारों को अनिश्चितकाल के लिए टाल दिया है और इस बीच यह दुष्प्रचार किया जा रहा है कि कुछ पार्टियां इसे लागू नहीं होने दे रहीं। संगठन का स्पष्ट मत है कि महिला आरक्षण को किसी अन्य राजनीतिक एजेंडे, परिसीमन या सीटों की संख्या बढ़ाने जैसी विवादास्पद प्रक्रियाओं से कतई नहीं जोड़ा जाना चाहिए। जनवादी महिला समिति ने भूपेंद्र सिंह हुड्डा से मांग की कि उनकी पार्टी संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण तुरंत लागू करने के लिए सरकार पर दबाव बनाए और जनगणना व परिसीमन की शर्तों को हटाने की मांग उठाए। इसके साथ ही विपक्षी दल इस मुद्दे पर एकजुट होकर संसद के भीतर और बाहर एक साझा अभियान चलाएं और आगामी चुनावों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाते हुए उन्हें पर्याप्त टिकट देने की प्रतिबद्धता सार्वजनिक करें। भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि वे इन मांगों पर निश्चित रूप से कार्रवाई करेंगे।
हरियाणा में अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति के एक प्रतिनिधिमंडल ने विपक्ष के नेता व पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने 33% महिला आरक्षण विधेयक को आगामी मानसून सत्र में ही लागू करवाने की पुरजोर मांग उठाई। प्रतिनिधिमंडल में संगठन की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जगमति सांगवान, राज्य महासचिव उषा सरोहा, कोषाध्यक्ष अमिता मलिक, पूर्व महासचिव राजकुमारी दहिया, रोहतक जिला सह सचिव मुनमुन हजारिका और पूनम नेहरा शामिल रहीं। प्रतिनिधिमंडल ने देश की राजनीति में महिलाओं के अत्यंत कम प्रतिनिधित्व पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि भारतीय संसद में महिलाओं की भागीदारी केवल 13 प्रतिशत और विधानसभाओं में महज 9 प्रतिशत ही है। इसके विपरीत, क्यूबा, मैक्सिको, रवांडा, निकारागुआ, बोलीविया, अंडोरा और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व 50 प्रतिशत से भी अधिक है। समिति ने स्पष्ट किया कि नीतियों के निर्माण में महिलाओं की समान भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए इस आरक्षण को तुरंत लागू किया जाना बेहद जरूरी है, जिसके लिए प्रगतिशील संगठनों ने दशकों तक संघर्ष किया है। प्रतिनिधिमंडल ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि महिला आरक्षण कानून को संसद से पारित हुए तीन साल पूरे होने वाले हैं, लेकिन इसे आज तक लागू नहीं किया गया है। भाजपा सरकार ने इसके क्रियान्वयन को जनगणना और परिसीमन जैसी शर्तों से जोड़कर महिलाओं के राजनीतिक अधिकारों को अनिश्चितकाल के लिए टाल दिया है और इस बीच यह दुष्प्रचार किया जा रहा है कि कुछ पार्टियां इसे लागू नहीं होने दे रहीं। संगठन का स्पष्ट मत है कि महिला आरक्षण को किसी अन्य राजनीतिक एजेंडे, परिसीमन या सीटों की संख्या बढ़ाने जैसी विवादास्पद प्रक्रियाओं से कतई नहीं जोड़ा जाना चाहिए। जनवादी महिला समिति ने भूपेंद्र सिंह हुड्डा से मांग की कि उनकी पार्टी संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण तुरंत लागू करने के लिए सरकार पर दबाव बनाए और जनगणना व परिसीमन की शर्तों को हटाने की मांग उठाए। इसके साथ ही विपक्षी दल इस मुद्दे पर एकजुट होकर संसद के भीतर और बाहर एक साझा अभियान चलाएं और आगामी चुनावों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाते हुए उन्हें पर्याप्त टिकट देने की प्रतिबद्धता सार्वजनिक करें। भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि वे इन मांगों पर निश्चित रूप से कार्रवाई करेंगे।
- गुरुग्राम जिले के फर्रुखनगर स्थित मोहम्मदपुर के पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय में हरियाणा राज्य नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो द्वारा नशा मुक्ति जन-जागरूकता अभियान के तहत एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम ब्यूरो के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक संजय कुमार (आईपीएस) के दिशा-निर्देशों तथा संयुक्त पुलिस आयुक्त फरीदाबाद एवं ब्यूरो के पुलिस उप-महानिरीक्षक राजेंद्र कुमार मीणा (आईपीएस) के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ। विद्यालय के प्राचार्य राधाकृष्ण पंवार की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में ब्यूरो के जागरूकता कार्यक्रम एवं पुनर्वास प्रभारी उपनिरीक्षक डॉक्टर अशोक कुमार वर्मा मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। संबोधन के दौरान मुख्य वक्ता डॉक्टर अशोक कुमार वर्मा ने अत्यंत संवेदनशील और प्रभावी लहजे में विद्यार्थियों से कहा कि यदि नशा अच्छा होता, तो माता-पिता खुद इसे लेने की सलाह देते। युवाओं को सचेत करते हुए उन्होंने कहा कि नशा शौक से आरम्भ होता है और इसका अंत शोक पर होता है, इन दोनों शब्दों में केवल एक मात्रा का ही अंतर है। उन्होंने आगे कहा कि मादक पदार्थों की तस्करी को रोकने के लिए भारतीय बल पूरी तरह सक्षम हैं, लेकिन जागरूकता के अभाव में नशा कारोबारी अपने स्वार्थ के लिए युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करते हैं, जिसे बिल्कुल स्वीकार नहीं किया जा सकता। विद्यालय के प्राचार्य राधाकृष्ण पंवार और उप-प्राचार्य पवन कुमार ने ब्यूरो के इस जनहितकारी अभियान की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों में अनुशासन, नैतिक मूल्यों, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्र निर्माण की भावना को सुदृढ़ करते हैं। इस कार्यक्रम में विद्यालय के 451 छात्र-छात्राओं और 30 शिक्षकों ने हिस्सा लिया और अंत में नशामुक्त भारत के निर्माण का सामूहिक संकल्प लिया। हरियाणा राज्य नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने आमजन से अपील की है कि नशे की बिक्री, तस्करी या सेवन से जुड़ी किसी भी सूचना के लिए राष्ट्रीय हेल्पलाइन 1933 या 9050891508 पर संपर्क करें, जहां सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।1
- दिल्ली में अरविंद केजरीवाल द्वारा आयोजित किए जा रहे श्री सुंदरकांड पाठ को प्रदेश अध्यक्ष श्री हर्ष मल्होत्रा ने महज एक राजनीतिक छलावा करार दिया है। उनका कहना है कि अरविंद केजरीवाल इस आयोजन के जरिए केवल अपनी राजनीतिक स्थिति को सुधारने का प्रयास कर रहे हैं। आज रोहिणी में आयोजित हो रहे इस कार्यक्रम पर तीखा हमला करते हुए उन्होंने केजरीवाल की इस भक्ति पर गंभीर सवाल उठाए हैं। प्रदेश अध्यक्ष श्री हर्ष मल्होत्रा ने पूछा कि अरविंद केजरीवाल कब तक श्री हनुमान जी और श्री सुंदरकांड पाठ के नाम पर अपनी बगुला भक्ति दिखाकर हिंदू धर्म की भावनाओं का अपमान करते रहेंगे। इसके साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि वर्ष 2024 में घोषित की गई श्री सुंदरकांड पाठ की श्रृंखला को उन्होंने आखिर बीच में क्यों छोड़ दिया था, इसका जवाब भी अरविंद केजरीवाल को देना चाहिए।1
- दिल्ली के सदर बाजार में अखाड़े के पास थोड़ी सी बारिश के बाद ही भारी जलजमाव हो गया है, जिससे वहां बेहद बुरा हाल है। बारिश का पानी गलियों और लोगों की दुकानों के भीतर तक पहुंच गया है। इस समस्या को देखते हुए प्रशासन की टीम मौके पर सक्रिय है और मोटर लगाकर पानी को बाहर निकालने के काम में जुटी हुई है।1
- अयोध्या और श्रीकृष्ण जन्मभूमि को लेकर देश की सियासत एक बार फिर से गर्मा गई है। इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम में अखिलेश यादव के बयान, उस पर उठ रहे सवालों और विभिन्न राजनीतिक प्रतिक्रियाओं को लेकर बहस तेज हो गई है। झूठ के खिलाफ जंग का दावा करने वाले चैनल 'एसभारतन्यूज' ने इस मुद्दे पर सीधे तौर पर अखिलेश यादव को घेरते हुए सवाल उठाया है कि अगर वे धर्म की बात करते हैं, तो श्रीकृष्ण जन्मभूमि के गंभीर विषय पर चुप्पी क्यों साध लेते हैं?1
- दक्षिण पश्चिम दिल्ली के कापसहेड़ा में पूर्व नगर निगम पार्षद प्रदीप दहिया का 40वां जन्मदिन धूमधाम से मनाया गया है।1
- दिल्ली में करीब 30 साल से लंबित एक बड़े फैसले को हमारी भाजपा सरकार ने आगे बढ़ाया है। इसके तहत, 5,000 हेक्टेयर रिज क्षेत्र को संरक्षित वन (Protected Forest) घोषित किया गया है। भाजपा सरकार के इस फैसले के बाद, अब अगले तीन वर्षों में इस रिज को और अधिक हरा-भरा बनाकर दिल्ली के ‘ग्रीन लंग्स’ के रूप में विकसित किया जाएगा ताकि #ViksitDelhi का संकल्प पूरा हो सके।1
- गुरुग्राम के अशोक विहार में नियमों को ताक पर रखकर बिना एनओसी (NOC) के 6-7 मंजिला इमारत का धड़ल्ले से निर्माण किया जा रहा है, जिससे स्थानीय लोगों की जान खतरे में पड़ गई है। इस लापरवाही का एक सीसीटीवी (CCTV) फुटेज भी सामने आया है, जिसमें साफ देखा जा सकता है कि निर्माण स्थल से किस तरह भारी ईंटें और कंस्ट्रक्शन का सामान नीचे गिर रहा है। इस खतरनाक हादसे में वहाँ रह रहे लोग बेहद बाल-बाल बचे हैं। इलाके के लोगों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि इस बहुमंजिला इमारत में पहले भी आग लगने की घटना हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन पूरी तरह मौन साधे बैठा है। गुरुग्राम प्रशासन पर सीधे तौर पर लापरवाही के आरोप लग रहे हैं कि वह दिल्ली जैसे किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है। लोगों का पूछना है कि क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही अधिकारियों की नींद खुलेगी? इस असुरक्षित निर्माण के खिलाफ आवाज उठाने और इसे रोकने के लिए अधिकारियों तक बात पहुँचाने की माँग की जा रही है।1