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जनगणना 2027 की राष्ट्रीय टोल-फ्री हेल्पलाइन अब देश के सभी राज्यों और संघ राज्यक्षेत्रों में शुरू हो गई है। पहले चरण में मकानसूचीकरण से जुड़े सवालों के लिए लोग 1855 डायल कर सकते हैं। यह केंद्रीय सहायता हेल्पलाइन क्षेत्रीय भाषाओं और अंग्रेजी में मार्गदर्शन देगी ताकि जनगणना में सभी की भागीदारी आसान और परेशानी मुक्त हो।
जनहित आवाज
जनगणना 2027 की राष्ट्रीय टोल-फ्री हेल्पलाइन अब देश के सभी राज्यों और संघ राज्यक्षेत्रों में शुरू हो गई है। पहले चरण में मकानसूचीकरण से जुड़े सवालों के लिए लोग 1855 डायल कर सकते हैं। यह केंद्रीय सहायता हेल्पलाइन क्षेत्रीय भाषाओं और अंग्रेजी में मार्गदर्शन देगी ताकि जनगणना में सभी की भागीदारी आसान और परेशानी मुक्त हो।
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- चौथकाबरवाड़ा :गांव की चौपाल में ‘आम आदमी’ बनेंगे मुख्यमंत्री, भेडोला में रात्रि प्रवास की तैयारियां तेज1
- Village Gambhira sawai madhopur हैंडपंप not working 10 years यह हेड पंप विलेज गंभीर सवाई माधोपुर में है जिसे खराब हुए कम से कम 10 साल से ज्यादा हो चुके हैं सबसे बड़ी समस्या तब आती है जब लाइट ना आए टंकी का पानी खत्म होने पर पानी की बहुत ज्यादा समस्या आती है तो अगर यह हेड पंप चालू होता है तो पानी की समस्या संपूर्ण रूप से सॉल्व हो जाती है लेकिन खराब होने के कारण बहुत ज्यादा प्रॉब्लम आती है गर्मियों में तो निवेदन है कि जल्दी से जल्दी इसे ठीक किया जाए2
- सवाई माधोपुर में हरियाली पर संकट,अब तक 400 पेड़ो की हुई कटाई,पर्यावरण प्रेमियों में भारी आक्रोश सवाई माधोपुर। देश के यशस्वी प्रधानमंत्री ओर राजस्थान सरकार द्वारा हर वर्ष एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत देश भर में लाखों करोड़ों रूपये खर्च कर पौधारोपण किए जाते हे। वही पौधारोपण में प्रधानमंत्री से लेकर मंत्री,विधायक,सांसद सहित उच्च अधिकारी भी इसका हिस्सा बनते हे,ओर पेड़ को बचाने व पौधारोपण करने के लिए आमजन को प्रेरित करते हैं। लेकिन सवाई माधोपुर जिला मुख्यालय पर सड़क निर्माण के दौरान सैकड़ों पेड़ जो अनुमानित वर्षों पुराने पेड़ हे उनको काटकर धराशाई किया जा रहा हे। जहां पेड़ो की कटाई को लेकर स्थानीय नागरिकों,पर्यावरण प्रेमियों ओर सामाजिक कार्यकर्ताओं में भारी रोष व्याप्त है। हालांकि जिले पर बैठे उच्च अधिकारियों का इस ओर ध्यान नहीं हे जबकि इससे पूर्व भी सामाजिक कार्यकर्ताओं ओर आमजन ने पेड़ो की कटाई को लेकर जिला प्रशासन को अवगत कराया था लेकिन उसके बाउजूद आज भी मुख्यालय पर हरे पेड़ो पर आरी चलती हुई नजर आ रही हे। आपको बता दे इन्हीं लोगों के द्वारा बजरिया क्षेत्र में अब तक करीबन 400 पेड़ो की कटाई किए जाने का दावा किया गया है। जानकारी के अनुसार इससे पहले 311 पेड़ काटे गए थे,वही 5 मई से 9 मई के बीच लगभग 70 पेड़ काट दिए गए। जहां शनिवार रात को सिविल लाइन रोड की शोभा ओर हरियाली बढ़ा रहे कई सालों पुराने हरे पेड़ो को काट दिए गए। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना हे कि यह पूरी कार्यवाही केवल तहसीलदार की अनुमति के आधार पर की जा रही है। उनका कहना हे कि पर्यावरणीय कानून ओर न्यायिक निर्देशों के अनुसार इतनी भरी संख्या में पेड़ो की कटाई के लिए उच्च स्तरीय पर्यावरणीय एवं वन स्वीकृति आवश्यक होती है। कार्यकर्ताओं ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल एनजीटी की केंद्रीय क्षेत्र पीठ भोपाल के महत्वपूर्ण फैसले जब्बू लाल मीणा बनाम राजस्थान राज्य एवं अन्य के महत्वपूर्ण निर्णय का उल्लेख करते हुए भोपाल स्थित ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट रूप से कहा था कि केवल तहसीलदार द्वारा दी गई अनुमति को पर्यावरणीय दृष्टि से पर्याप्त नहीं माना जा सकता।उक्त मामले में सड़क चौड़ीकरण के दौरान पेड़ो की कटाई पर एनजीटी ने सेटेलाइट इमेजरी के आधार पर वास्तविक क्षति का आकलन करते हुए दो हजार पेड़ लगाने के निर्देश दिए थे। पर्यावरण प्रेमियों का कहना हे कि सवाई माधोपुर का मामला ओर भी संवेदनशील हे जहां महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधानों की अनदेखी कर बेड़े पैमाने पर पेड़ो की कटाई की जा रही है।उनका कहना हे कि न्यायलय में भी वास्तविक स्थिति ओर पूर्ण तथ्य प्रस्तुत नहीं किए जा रहे है।उनका कहना हे कि वर्तमान में यह मामला स्थाई लोक अदालत में विचाराधीन है लेकिन उसके बाउजूद पेड़ो की कटाई लगातार जारी है जिसके चलते लोगों में रोष व्याप्त है। वही मामले से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता मुकेश भूप्रेमी,रत्नाकर गोयल,राजेश पहाड़िया,अवधेश शर्मा सहित लोगो का कहना हे कि पिछले दो महीनों में ज्ञापन,शिकायतें ओर कानूनी प्रयास किए जा रहे हे।लेकिन जिला प्रशासन,पुलिस विभाग,वन विभाग ओर जनप्रतिनिधियों द्वारा प्रभावी कार्यवाही नहीं की गई। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की हे कि तत्काल प्रभाव से पेड़ो की कटाई पर रोक लगाई जाए,संपूर्ण परियोजना की सार्वजनिक जानकारी जारी की जाए ओर पर्यावरण व वन विभाग की अनुमति सार्वजनिक की जाए वही जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध वैधानिक कार्यवाही की जाए। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना हे कि यदि स्थानीय स्तर पर न्याय नहीं मिला तो मामले को NGT ओर सर्वोच्च न्यायालय तक ले जाया जाएगा।1
- जवासा से आए भाइयों का बल्लू टी स्टॉल फेमस श्योपुर पर हार्दिक स्वागत किया गया। आप सभी से मिलकर और साथ में चाय की मिठास साझा करके बहुत अच्छा लगा। ऐसे अपनेपन और भाईचारे के पल ही हमारी पहचान हैं। बल्लू टी स्टॉल फेमस श्योपुर की तरफ से आप सभी भाइयों को बहुत-बहुत शुभकामनाएं ❤️🙏 ईश्वर से प्रार्थना है कि आप सभी हमेशा खुश रहें, स्वस्थ रहें और जीवन में निरंतर तरक्की करते रहें। ☕😊1
- सवाई माधोपुर के गंगापुर सिटी में आधार कार्ड कलेक्शन केंद्रों पर लोगों को लंबी कतारों में खड़ा रहना पड़ रहा है। दो-तीन घंटे के इंतजार के बाद जाकर कहीं उनका नंबर आता है, जिससे आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।1
- टोंक: देवली-उनियारा में गहराया जल संकट, नरेश मीणा ने किया अनिश्चितकालीन धरने का ऐलान टोंक। देवली-उनियारा विधानसभा क्षेत्र में पेयजल और बिजली की गंभीर किल्लत को लेकर राजनीति गर्मा गई है। किसान नेता नरेश मीणा ने क्षेत्र की जनता की समस्याओं को लेकर अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। उन्होंने प्रशासन को चेतावनी देते हुए अनिश्चितकालीन धरने का ऐलान किया है। कल कलेक्टर को सौंपेंगे ज्ञापन नरेश मीणा ने बताया कि क्षेत्र में पानी की समस्या विकराल रूप ले चुकी है। अपनी मांगों को लेकर वे कल दोपहर 12 बजे जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि प्रशासन और सरकार ने उनकी मांगों पर तत्काल ध्यान नहीं दिया, तो वे वहीं अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ जाएंगे। मंत्रियों पर साधा तीखा निशाना मीणा ने इस दौरान प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री कन्हैयालाल चौधरी और प्रभारी मंत्री हीरालाल नागर पर जमकर प्रहार किए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा: "यह विडंबना है कि कैबिनेट मंत्री कन्हैयालाल चौधरी के अपने गृह जिले में ग्रामीण पानी की एक-एक बूंद को तरस रहे हैं। उपचुनावों के दौरान जनता से बड़े-बड़े वादे किए गए थे, लेकिन आज धरातल पर लोग बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं।" मुख्य मुद्दे और नाराजगी वादाखिलाफी: उपचुनाव के समय किए गए विकास के दावों का खोखला साबित होना। बिजली-पानी का संकट: भीषण गर्मी और जरूरतों के बीच सुचारू आपूर्ति न होना। प्रशासनिक उदासीनता: समस्याओं के बावजूद जिम्मेदार मंत्रियों और अधिकारियों की चुप्पी। नरेश मीणा के इस ऐलान के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया है। अब देखना यह होगा कि कल ज्ञापन के बाद प्रशासन क्या ठोस कदम उठाता है या टोंक में एक बड़ा आंदोलन शुरू होता है।1
- पश्चिम बंगाल में नए मुख्यमंत्री के तौर पर सुवेंदु ने पद और गोपनीयता की शपथ ली। इस शपथ ग्रहण समारोह के साथ राज्य में एक नए राजनीतिक युग की शुरुआत हुई है।1