दुकान का किरायेदारी एग्रीमेंट, जिसे कानूनी भाषा में कमर्शियल रेंट एग्रीमेंट या कमर्शियल लीज एग्रीमेंट कहा जाता है, एक अत्यंत महत्वपूर्ण कानूनी दस्तावेज है। इसमें की गई कोई भी लापरवाही भविष्य में बड़े विवादों का कारण बन सकती है। यह दुकान के मालिक और किरायेदार के बीच होने वाला एक कानूनी दस्तावेज है, जिसमें दुकान को किराये पर देने की सभी नियम और शर्तें लिखित रूप में दर्ज होती हैं और जिन पर दोनों पक्षों की सहमति होती है। यह एग्रीमेंट विवादों से बचने, दोनों पक्षों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करने और किरायेदार को जीएसटी नंबर लेने, ट्रेड लाइसेंस बनवाने या बैंक में करंट अकाउंट खोलने जैसे सरकारी कार्यों के लिए पता प्रमाण के तौर पर आवश्यक होता है। इसे दुकान का कब्ज़ा सौंपने और किरायेदारी शुरू होने से ठीक पहले, मालिक और किरायेदार की आपसी सहमति से, आमतौर पर किसी वकील या डीड राइटर द्वारा कानूनी भाषा में ड्राफ्ट करवाया जाता है ताकि कोई महत्वपूर्ण क्लॉज़ छूट न जाए। स्टाम्प पेपर की कीमत एग्रीमेंट की अवधि और संबंधित राज्य के नियमों पर निर्भर करती है। 11 महीने के एग्रीमेंट के लिए इसे सामान्यतः ₹100 या ₹500 के नॉन-ज्यूडिशियल स्टाम्प पेपर पर बनवाया जाता है और नोटरी करवाया जाता है। यदि एग्रीमेंट 1 साल या उससे अधिक का है, तो कुल किराये और सिक्यूरिटी डिपॉजिट के आधार पर स्टाम्प ड्यूटी की गणना प्रतिशत में (आमतौर पर 1% से 5% के बीच, राज्य के अनुसार) होती है, जिसके लिए ई-स्टाम्प निकाला जाता है। इस एग्रीमेंट के कुल खर्च में स्टाम्प ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन फीस (यदि सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में रजिस्टर हो रहा हो, तो ₹1000 से ₹5000 के बीच) और वकील की फीस (₹1000 से ₹5000+ तक) शामिल होती है। व्यावसायिक एग्रीमेंट का खर्च आमतौर पर मकान मालिक और किरायेदार आधा-आधा बांटते हैं, जो आपसी सहमति पर निर्भर करता है। भारत में 11 महीने का एग्रीमेंट सबसे ज्यादा चलन में है क्योंकि इसमें रजिस्ट्रेशन अनिवार्य नहीं होता और नोटरी से काम चल जाता है। हालांकि, रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1908 की धारा 17 के अनुसार, यदि कोई भी रेंट एग्रीमेंट 11 महीने से ज्यादा का है, तो उसका सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में रजिस्ट्रेशन होना अनिवार्य है, अन्यथा वह कोर्ट में मान्य नहीं होता। व्यावसायिक एग्रीमेंट अक्सर 3 साल, 5 साल या 9 साल के लिए भी बनाए जाते हैं। एक सही एग्रीमेंट में किराये और जमा राशि, किराया वृद्धि (Escalation Clause, आमतौर पर 5% से 10% वार्षिक), लॉक-इन पीरियड (जिससे पहले कोई भी पक्ष एग्रीमेंट नहीं तोड़ सकता), नोटिस पीरियड (1 से 3 महीने), सब-लेटिंग की अनुमति और बिजली, पानी, मेंटेनेंस व प्रॉपर्टी टैक्स के बिल कौन भरेगा, जैसी कानूनी शर्तें शामिल होनी चाहिए। यह एग्रीमेंट किरायेदार को लॉक-इन पीरियड तक बेदखली से कानूनी सुरक्षा देता है, जिससे उसे बिज़नेस स्थापित करने में स्थिरता मिलती है और जीएसटी व सरकारी लाइसेंस आसानी से मिल जाते हैं। वहीं, मालिक को समय पर किराया मिलने की कानूनी गारंटी मिलती है और अगर किरायेदार दुकान खाली नहीं करता, तो रजिस्टर्ड एग्रीमेंट के आधार पर कोर्ट से तुरंत बेदखली का आदेश मिल सकता है। हालांकि, इसके दुरुपयोग और जोखिम भी हैं। किरायेदार दुकान में गैर-कानूनी काम कर सकता है, एग्रीमेंट खत्म होने के बाद भी कब्ज़ा कर सकता है या मालिक की अनुमति के बिना स्ट्रक्चर में तोड़-फोड़ कर सकता है। मालिक लॉक-इन पीरियड के बीच में ज्यादा किराये के लालच में दुकान खाली करने का दबाव बना सकता है, बिना वाजिब कारण के सिक्यूरिटी डिपॉजिट काट सकता है या बिजली-पानी की सप्लाई काट सकता है। इन सभी दुरुपयोगों से बचने का एकमात्र तरीका यह है कि एग्रीमेंट को बहुत बारीकी से पढ़ा जाए और मरम्मत या रंग-रोगन जैसी हर छोटी बात को स्पष्ट रूप से एग्रीमेंट में लिखा जाए। यदि कोई व्यक्ति व्यावसायिक काम के लिए भारी निवेश कर रहा है, तो उसे हमेशा रजिस्टर्ड एग्रीमेंट ही बनवाना चाहिए और केवल नोटरी वाले 11 महीने के एग्रीमेंट पर भरोसा नहीं करना चाहिए। यह जानकारी केवल सामान्य शिक्षा के उद्देश्य से है और इसे कानूनी सलाह नहीं माना जाना चाहिए, क्योंकि हर मामला अलग होता है और कोई भी कानूनी कार्रवाई करने से पहले योग्य वकील से सलाह लेना आवश्यक है।
दुकान का किरायेदारी एग्रीमेंट, जिसे कानूनी भाषा में कमर्शियल रेंट एग्रीमेंट या कमर्शियल लीज एग्रीमेंट कहा जाता है, एक अत्यंत महत्वपूर्ण कानूनी दस्तावेज है। इसमें की गई कोई भी लापरवाही भविष्य में बड़े विवादों का कारण बन सकती है। यह दुकान के मालिक और किरायेदार के बीच होने वाला एक कानूनी दस्तावेज है, जिसमें दुकान को किराये पर देने की सभी नियम और शर्तें लिखित रूप में दर्ज होती हैं और जिन पर दोनों पक्षों की सहमति होती है। यह एग्रीमेंट विवादों से बचने, दोनों पक्षों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करने और किरायेदार को जीएसटी नंबर लेने, ट्रेड लाइसेंस बनवाने या बैंक में करंट अकाउंट खोलने जैसे सरकारी कार्यों के लिए पता प्रमाण के तौर पर आवश्यक होता है। इसे दुकान का कब्ज़ा सौंपने और किरायेदारी शुरू होने से ठीक पहले, मालिक और किरायेदार की आपसी सहमति से, आमतौर पर किसी वकील या डीड राइटर द्वारा कानूनी भाषा में ड्राफ्ट करवाया जाता है ताकि कोई महत्वपूर्ण क्लॉज़ छूट न जाए। स्टाम्प पेपर की कीमत एग्रीमेंट की अवधि और संबंधित राज्य के नियमों पर निर्भर करती है। 11 महीने के एग्रीमेंट के लिए इसे सामान्यतः ₹100 या ₹500 के नॉन-ज्यूडिशियल स्टाम्प पेपर पर बनवाया जाता है और नोटरी करवाया जाता है। यदि एग्रीमेंट 1 साल या उससे अधिक का है, तो कुल किराये और सिक्यूरिटी डिपॉजिट के आधार पर स्टाम्प ड्यूटी की गणना प्रतिशत में (आमतौर पर 1% से 5% के बीच, राज्य के अनुसार) होती है, जिसके लिए ई-स्टाम्प निकाला जाता है। इस एग्रीमेंट के कुल खर्च में स्टाम्प ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन फीस (यदि सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में रजिस्टर हो रहा हो, तो ₹1000 से ₹5000 के बीच) और वकील की फीस (₹1000 से ₹5000+ तक) शामिल होती है। व्यावसायिक एग्रीमेंट का खर्च आमतौर पर मकान मालिक और किरायेदार आधा-आधा बांटते हैं, जो आपसी सहमति पर निर्भर करता है। भारत में 11 महीने का एग्रीमेंट सबसे ज्यादा चलन में है क्योंकि इसमें रजिस्ट्रेशन अनिवार्य नहीं होता और नोटरी से काम चल जाता है। हालांकि, रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1908 की धारा 17 के अनुसार, यदि कोई भी रेंट एग्रीमेंट 11 महीने से ज्यादा का है, तो उसका सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में रजिस्ट्रेशन होना अनिवार्य है, अन्यथा वह कोर्ट में मान्य नहीं होता। व्यावसायिक एग्रीमेंट अक्सर 3 साल, 5 साल या 9 साल के लिए भी बनाए जाते हैं। एक सही एग्रीमेंट में किराये और जमा राशि, किराया वृद्धि (Escalation Clause, आमतौर पर 5% से 10% वार्षिक), लॉक-इन पीरियड (जिससे पहले कोई भी पक्ष एग्रीमेंट नहीं तोड़ सकता), नोटिस पीरियड (1 से 3 महीने), सब-लेटिंग की अनुमति और बिजली, पानी, मेंटेनेंस व प्रॉपर्टी टैक्स के बिल कौन भरेगा, जैसी कानूनी शर्तें शामिल होनी चाहिए। यह एग्रीमेंट किरायेदार को लॉक-इन पीरियड तक बेदखली से कानूनी सुरक्षा देता है, जिससे उसे बिज़नेस स्थापित करने में स्थिरता मिलती है और जीएसटी व सरकारी लाइसेंस आसानी से मिल जाते हैं। वहीं, मालिक को समय पर किराया मिलने की कानूनी गारंटी मिलती है और अगर किरायेदार दुकान खाली नहीं करता, तो रजिस्टर्ड एग्रीमेंट के आधार पर कोर्ट से तुरंत बेदखली का आदेश मिल सकता है। हालांकि, इसके दुरुपयोग और जोखिम भी हैं। किरायेदार दुकान में गैर-कानूनी काम कर सकता है, एग्रीमेंट खत्म होने के बाद भी कब्ज़ा कर सकता है या मालिक की अनुमति के बिना स्ट्रक्चर में तोड़-फोड़ कर सकता है। मालिक लॉक-इन पीरियड के बीच में ज्यादा किराये के लालच में दुकान खाली करने का दबाव बना सकता है, बिना वाजिब कारण के सिक्यूरिटी डिपॉजिट काट सकता है या बिजली-पानी की सप्लाई काट सकता है। इन सभी दुरुपयोगों से बचने का एकमात्र तरीका यह है कि एग्रीमेंट को बहुत बारीकी से पढ़ा जाए और मरम्मत या रंग-रोगन जैसी हर छोटी बात को स्पष्ट रूप से एग्रीमेंट में लिखा जाए। यदि कोई व्यक्ति व्यावसायिक काम के लिए भारी निवेश कर रहा है, तो उसे हमेशा रजिस्टर्ड एग्रीमेंट ही बनवाना चाहिए और केवल नोटरी वाले 11 महीने के एग्रीमेंट पर भरोसा नहीं करना चाहिए। यह जानकारी केवल सामान्य शिक्षा के उद्देश्य से है और इसे कानूनी सलाह नहीं माना जाना चाहिए, क्योंकि हर मामला अलग होता है और कोई भी कानूनी कार्रवाई करने से पहले योग्य वकील से सलाह लेना आवश्यक है।
- पाली में रविवार को 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर जिलास्तरीय कार्यक्रम लाखोटिया उद्यान के रंगमंच पर आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में 5 साल के बच्चों से लेकर 70 साल के बुजुर्गों तक ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। करीब एक घंटे तक चले योगाभ्यास में आमजन, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने योग के विभिन्न आसन और प्राणायाम किए। इस दौरान मंत्री जोराराम कुमावत ने योग को जीवनशैली का हिस्सा बनाने पर जोर दिया, क्योंकि यह तन और मन दोनों को स्वस्थ रखने के साथ लंबी आयु देने का काम करता है। जिला प्रशासन, आयुर्वेद विभाग और नगर निगम के संयुक्त तत्वावधान में हुए इस कार्यक्रम में सुबह 7 बजे से 8 बजे तक योग प्रशिक्षकों की देखरेख में योगाभ्यास कराया गया। जिले के प्रभारी मंत्री झाबरसिंह खर्रा ने दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। मंत्री कुमावत ने बताया कि योग हमारी पुरानी पद्धति है और आज 130 से ज्यादा देश योग दिवस मना रहे हैं, इसलिए इसे केवल एक दिन तक सीमित न रखकर नियमित रूप से जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। कार्यक्रम के दौरान शहरवासियों ने ताड़ासन, वृक्षासन, पादहस्तासन, मकरासन, भुजंगासन और शवासन जैसे कई योगासनों का अभ्यास किया। लाखोटिया उद्यान का माहौल विशेष नजर आया और हर कोई खुद को फिट रखने के लिए योग करता दिखा। इस अवसर पर सरस डेयरी की ओर से सभी को छाछ भी पिलाई गई। कार्यक्रम में मंत्री जोराराम कुमावत, प्रभारी मंत्री झाबरसिंह खर्रा, भाजपा जिलाध्यक्ष सुशील भंडारी, पूर्व विधायक ज्ञानचंद पारख, पूर्व सभापति महेंद्र बोहरा, जिला कलेक्टर डॉ. रविंद्र गोस्वामी, एसपी मोनिका सैन, नगर निगम आयुक्त नवीन भारद्वाज, भाजपा नेता पुखराज पटेल, राकेश पंवार, रमेश परिहार, तिलोक चौधरी, अशोक बाफना, अशोक तलेसरा, दोलाराम पटेल सहित जिला स्तरीय अधिकारी, पुलिसकर्मी, स्काउट-गाइड, एनएसएस कैडेट्स, खिलाड़ी, युवा, विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में शहरवासी उपस्थित रहे।4
- पाली शहर के शिवाजी सर्किल स्थित अचलेश्वर महादेव मंदिर में 21 जून 2026 को शिवसेना (शिंदे) की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। जिला प्रमुख तख्तसिंह सोलंकी और जिला प्रवक्ता राजू देवासी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में सर्वसम्मति से संगठन की जिला और नगर कार्यकारिणी का विस्तार किया गया। इस दौरान नवनियुक्त पदाधिकारियों की घोषणा कर उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई गई। शिवसेना शिंदे के मीडिया प्रभारी प्रहलाद सिसोदिया द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, बैठक में संगठन को और मजबूत करने के साथ-साथ समाज सेवा के कार्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया गया। शपथ ग्रहण के साथ ही सभी पदाधिकारियों को गौ-रक्षा, देश रक्षा और धर्म रक्षा के कार्यों में सदैव अग्रणी रहने के निर्देश दिए गए। संगठन की नई कमान संभालने वालों में अर्जुनसिंह टाइगर को जिला संयोजक, नरपत सिंह भाटी को उप जिला प्रमुख, दीपक पंवार को नगर संयोजक और पिंटू आहुजा को जिला अखाड़ा प्रमुख नियुक्त किया गया है। महिला सेना में सजना शर्मा को नगर महामंत्री, मनीषा कुमारी को नगर संगठन प्रमुख, सन्तोष माली को नगर मंत्री, बाली कंवर को नगर सचिव, प्रियंका लखारा को नगर प्रचारक, संगीता चौहान को नगर प्रभारी, गीता मेवाड़ा को सह प्रभारी, पिस्ता कंवर को संयुक्त मंत्री और भगवती परिहार को सह प्रचारक जैसी बड़ी जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। इस महत्वपूर्ण बैठक में सुरेंद्र विश्नोई, नगर प्रमुख उदय शेट्टी, उप नगर प्रमुख प्रवीण सिंह इंदा, नगर संगठन प्रमुख राजू सिंह रावत, एडवोकेट नरेश प्रजापत, दिलखुश वैष्णव, किशन भाई वैष्णव, केसर सिंह, जितेंद्र राव, जितेंद्र सिंह, भरत सांखला, मानक चन्द सोलंकी, पृथ्वी राज चौहान, तेजाराम भायल, विजेंदर राठौर, नरेश गोयल, गगन बोरवाल, केवल चंद गोयल, किशन गोयल, भरत सुथार, परमेश्वर राजपुरोहित, दिपेश गोयल, महेन्द्र मांडा सहित बड़ी संख्या में शिवसैनिक और वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे।2
- पूर्व विधायक ज्ञानचंद पारख ने रविवार को पाली के सर्वोदय नगर स्थित अंडरब्रिज का दौरा किया, जहाँ उन्होंने जल भराव की समस्या के समाधान के लिए रेलवे द्वारा किए जा रहे कार्यों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने पूर्व सभापति मूलसिंह भाटी से समस्या के बारे में पूरी जानकारी हासिल की। पारख ने वॉइस ऑफ मारवाड़ को बताया कि यह समस्या कई वर्षों से बनी हुई है, जिसके स्थाई समाधान के लिए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रेलवे के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। इन निर्देशों के पालन में, पुरानी सड़क को फिर से खोदा गया है और नई तकनीक से कंक्रीट बिछाकर सड़क का पुनर्निर्माण किया जा रहा है। इस कार्य के पूरा होने से सर्वोदय नगर अंडरब्रिज में जल भराव की समस्या का इस बार स्थाई समाधान होने की उम्मीद जताई गई है।1
- रोहट में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की कार्रवाई के दौरान BCMO डॉ. हार्दिक राजपुरोहित की संलिप्तता की आशंका सामने आई है। ACB जोधपुर की टीम ने डॉ. राजपुरोहित के घर की तलाशी ली, लेकिन कार्रवाई की भनक लगते ही वह फरार हो गए। इस मामले में, आरोपी लेखा सहायक देवकीनंदन शर्मा ने रिश्वत की राशि BCMO कार्यालय के प्रथम तल में रखी लकड़ी की दराज में छिपा रखी थी, जिसे ACB टीम ने बरामद कर लिया। आरोपी देवकीनंदन एक संविदाकर्मी के रूप में कार्यरत था। यह रिश्वत रोहट BCMO कार्यालय में टेंडर में लगी एक गाड़ी को निरंतर चालू रखने और उसके बिल पास करने की एवज में मांगी गई थी। एसीबी ASP देरावरसिंह सोढ़ा की टीम की निगरानी से इस कार्रवाई में सफलता मिली, जिसकी देखरेख एसीबी DGP रेंज जोधपुर नारायण टोगस ने की।3
- पाली के कैशव नगर में, गौशाला के पास और नए बस स्टैंड के पीछे स्थित राकेश कुमार जावा के आवासीय मकान के बाहर सीवर लाइन ओवरफ्लो होने से गंभीर समस्या पैदा हो गई है। सड़क पर बदबूदार पानी फैलने के कारण आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित और अस्त-व्यस्त हो गया है। इस स्थिति की जानकारी राकेश कुमार जावा ने संबंधित उच्च अधिकारी श्री ईश्वर सिंह शैखावत को मोबाइल पर दी। अधिकारी ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि 'अपने स्तर पर कार्रवाई क्यों' और सीवर लाइन ओवरफ्लो की समस्या का समाधान किया जाना चाहिए। अब देखना यह है कि इस मामले में आगे क्या कदम उठाए जाते हैं और समस्या का समाधान किस करवट बैठता है।1
- Post by District.reporter.babulaljogaw1
- जोधपुर के पाल गांव की RIICO 9 नंबर नई बस्ती में रिहायशी कॉलोनी के बिल्कुल बीचों-बीच मोबाइल टावर लगाए गए हैं, जिससे स्थानीय निवासियों में भारी भय और असुरक्षा का माहौल है। ये टावर कई मकानों से केवल लगभग एक मीटर की दूरी पर स्थित हैं, जबकि कॉलोनी में बड़ी संख्या में परिवार निवास करते हैं। निवासियों को आशंका है कि क्षेत्र में तेज आंधी-तूफान के दौरान ये टावर गिर सकते हैं, जिससे बड़े पैमाने पर जनहानि और संपत्ति को गंभीर नुकसान पहुँच सकता है। इसी खतरे के कारण स्थानीय लोग डरे हुए हैं। प्रशासन और संबंधित मोबाइल कंपनियों से तत्काल मांग की गई है कि वे इन टावरों की सुरक्षा और वैधानिक स्थिति की जांच करें। यदि जाँच में मानकों का उल्लंघन पाया जाता है, तो इन टावरों को तुरंत हटाया जाना चाहिए, ताकि जनहित में सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।2
- रविवार को पाली शहर के पाँच परीक्षा केंद्रों पर NEET UG परीक्षा आयोजित की गई, जिसमें 2079 अभ्यर्थियों ने पंजीकरण करवाया था। शहर के बांगड़ कॉलेज परीक्षा केंद्र सहित बांगड़ स्कूल, बालिया स्कूल और गर्ल्स कॉलेज परीक्षा केंद्रों पर प्रवेश से पहले अभ्यर्थियों की कड़ी जाँच की गई। इस प्रक्रिया में मन्नत के धागे तक खुलवाए गए और नजर के चश्मों की भी बारीकी से जाँच की गई। परीक्षा केंद्रों में प्रवेश के लिए अभ्यर्थियों को वीडियोग्राफी और बायोमेट्रिक प्रक्रिया से भी गुजरना पड़ा। यह सुनिश्चित करने के लिए कि परीक्षा शांतिपूर्ण और नकल-मुक्त माहौल में संपन्न हो, सभी केंद्रों पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। परीक्षा दोपहर 2 बजे से शाम 5:15 बजे तक आयोजित की गई, जबकि अभ्यर्थियों को सुबह 11:30 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक प्रवेश दिया गया। इस वर्ष की परीक्षा में गर्मी के मौसम को ध्यान में रखते हुए विशेष व्यवस्थाएँ की गई थीं। परीक्षा केंद्र परिसर में अभ्यर्थियों के लिए टेंट लगवाए गए थे, और उनकी बॉयोमेट्रिक हाज़िरी भी कॉलेज परिसर के भीतर छत के नीचे ली गई, ताकि उन्हें धूप से राहत मिल सके।4