यह नजारा 25 अगस्त 2026 के उस 'विश्व गुरु' वाले भारत के प्रधानमंत्री के निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी से लेकर उनके बहुचर्चित 'गुजरात मॉडल' के मूल राज्य तक का है, जहाँ का ढिंढोरा पूरे देश में पीट-पीटकर 140 करोड़ लोगों को विकास के नाम पर बेवकूफ बनाया गया। यह नजारा 25 अगस्त 2026 के उस 'विश्व गुरु' वाले भारत के प्रधानमंत्री के निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी से लेकर उनके बहुचर्चित 'गुजरात मॉडल' के मूल राज्य तक का है, जहाँ का ढिंढोरा पूरे देश में पीट-पीटकर 140 करोड़ लोगों को विकास के नाम पर बेवकूफ बनाया गया। जब 25 अगस्त 2026 की मूसलाधार बारिश के बाद गुजरात के 12 से अधिक जिलों में जलप्रलय जैसे हालात पैदा हुए, तो तथाकथित 100% स्मार्ट शहरों और 50,000 करोड़ रुपये के बुनियादी ढांचे का वो शर्मनाक सच सामने आया जिसे मुख्यधारा का मीडिया दबाने में लगा था। राज्य के 45 से अधिक सरकारी और निजी अस्पतालों के बाहर 3 से 4 फीट तक गंदा, बदबूदार पानी भरा हुआ था, जहाँ लाचार नागरिक अपने गंभीर रूप से बीमार परिजनों को कंधों पर उठाकर, छोटे-छोटे मासूम बच्चों को अपनी गोदी में समेटकर और स्ट्रेचर को 80 सेंटीमीटर गहरे गंदे पानी में खुद खींचते हुए ले जाने के लिए मजबूर थे। अस्पतालों के आईसीयू (ICU) और इमरजेंसी वार्डों में जमा 2 फीट पानी के साथ बायो-मेडिकल कचरा, 10,000 से अधिक इस्तेमाल की जा चुकी संक्रमित सुइयां (syringes), सिरिंज, इस्तेमाल की हुई पट्टियां, रक्त से भरी बोतलें और खतरनाक कचरा बहकर सीधे मुख्य सड़कों, 500 से ज्यादा दुकानों और हजारों रिहाइशी मकानों तक पहुंच गया, जिसने हेपेटाइटिस-बी, हेपेटाइटिस-सी, एचआईवी (HIV) और टाइफाइड जैसी जानलेवा बीमारियों के संक्रमण का खतरा 400% तक बढ़ा दिया है। तथ्य और आंकड़े यह बताने के लिए काफी हैं कि जिस 'गुजरात मॉडल' को पूरे भारत में 2014 के बाद एक ईश्वरीय चमत्कार की तरह बेचा गया, उसने 22 वर्षों में गुजरात के 33 जिलों की बुनियादी व्यवस्था को पूरी तरह से खोखला कर दिया। पंडित जवाहरलाल नेहरू के दौर में जब 1950 और 1960 के दशक में चंडीगढ़ जैसे योजनाबद्ध शहरों का निर्माण किया गया था, तो 12 विशेषज्ञों की उच्चस्तरीय प्लानिंग कमेटी और 50 साल आगे की सोच वाली टाउन प्लानिंग रणनीति अपनाई जाती थी, जिसमें 100 मिलीमीटर प्रति घंटे की बारिश को भी झेलने वाले 100% भूमिगत ड्रेनेज नेटवर्क, अस्पतालों में 500 से अधिक गाड़ियों की भूमिगत पार्किंग व्यवस्था और हर 2 किलोमीटर पर 60 फीट चौड़ी सड़कों का खाका खींचा जाता था। नेहरू जी से लेकर श्रीमती इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और डॉ. मनमोहन सिंह के 60 सालों के कार्यकाल में बिना किसी ढिंढोरे के 1,00,000 किलोमीटर से अधिक राष्ट्रीय राजमार्ग, 800 से अधिक बड़े बांध और 150 से अधिक आधुनिक शिक्षण संस्थान (IIT, IIM, AIIMS) देश को दिए गए, जहाँ कभी 'हिमाचल मॉडल' या 'गुजरात मॉडल' जैसे खोखले विज्ञापनों पर 4,000 करोड़ रुपये का सरकारी पैसा पानी की तरह नहीं बहाया गया। लेकिन इसके ठीक विपरीत, 2001 से 2014 के बीच मुख्यमंत्री रहते हुए और उसके बाद प्रधानमंत्री पद पर रहकर नरेंद्र मोदी ने जिस मॉडल का ढांचा खड़ा किया, उसमें केवल कंक्रीट के बेतरतीब जंगल, 2,000 से अधिक ऐतिहासिक संरचनाओं, बस्तियों और सैकड़ों पुराने मंदिरों-मस्जिदों का विनाश तथा बिना किसी वाटर-निकासी योजना के 30,000 करोड़ रुपये के मॉल और 1,000 से ज्यादा फ्लाइओवर खड़े कर दिए गए। नतीजा यह है कि आज गुजरात के 8 प्रमुख महानगरों में हर साल 1,500 से ज्यादा जगहों पर सड़कें 10 से 15 फीट गहरे गड्ढों में धंस जाती हैं, 2,500 करोड़ रुपये से बने स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स 2 घंटे की 50 मिलीमीटर बारिश में 100% जलमग्न हो जाते हैं, और 120 से अधिक बड़े शॉपिंग मॉल का निचला हिस्सा तैरिंग पूल में बदल जाता है। 'विश्व गुरु', '56 इंच की छाती', 'आत्मनिर्भर भारत' और 'विश्व में भारत का डंका' जैसे खोखले, भारी-भरकम और लच्छेदार शब्दों के पीछे का कड़वा सच यह है कि अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों की रिपोर्टों के अनुसार 2024-25 में वैश्विक विकास संकेतकों पर भारत की रैंकिंग 180 देशों में 126वें स्थान पर खिसक चुकी है। गुजरात में बीते 15 वर्षों में 45,000 से अधिक छोटे एवं मध्यम उद्योग (MSMEs) बंद हो चुके हैं, 350 से ज्यादा सरकारी प्राथमिक स्कूलों को बुनियादी सुविधाओं की कमी बताकर ताला लगा दिया गया है, और राज्य के 68% युवा 15,000 रुपये महीने की संविदा नौकरियों के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। 2014 से 2026 के बीच विज्ञापनों और इवेंट मैनेजमेंट पर खर्च किए गए 8,500 करोड़ रुपये से अधिक के बजट का 1% हिस्सा भी अगर अस्पतालों के ड्रेनेज सिस्टम और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) पर लगाया गया होता, तो आज भारत के नागरिकों को अपने परिवार के सदस्यों की जान बचाने के लिए 4 फीट गंदे पानी में संक्रमण से जूझते हुए स्ट्रेचर नहीं खींचना पड़ता। यह तथाकथित 'गुजरात मॉडल' कुछ और नहीं बल्कि 140 करोड़ भारतीयों के विश्वास के साथ किया गया प्रशासनिक और बौद्धिक छल है, जिसने भारत की 70 साल पुरानी सुदृढ़ अवसंरचनात्मक नींव को उखाड़कर केवल 200 बड़े उद्योगपतियों के मुनाफे और 50,000 कंक्रीट की इमारतों के छलावे में तब्दील कर दिया है। जब किसी देश की व्यवस्था में अस्पतालों से बहता हुआ हज़ारों लीटर दूषित खून और इंफेक्टेड सुइयां आम जनता की रसोई और दुकानों तक पहुँचने लगें, तो 5,000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था और 'विश्वगुरु' बनने का दावा एक बेहद घटिया, क्रूर और शर्मनाक मजाक बन जाता है। अब देश की जागरूक जनता को इन विज्ञापनों के रंगीन चश्मे को उतारकर इस 'ब्रांडेड तबाही' और राजनीतिक जुमलेबाज़ियों के खिलाफ आंकड़े और तथ्य लेकर सवाल पूछना ही होगा, वरना गुजरात के अस्पतालों से निकली यह जलभराव और संक्रमण की महामारी पूरे भारत के भविष्य को पूरी तरह से गर्क कर देगी।
यह नजारा 25 अगस्त 2026 के उस 'विश्व गुरु' वाले भारत के प्रधानमंत्री के निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी से लेकर उनके बहुचर्चित 'गुजरात मॉडल' के मूल राज्य तक का है, जहाँ का ढिंढोरा पूरे देश में पीट-पीटकर 140 करोड़ लोगों को विकास के नाम पर बेवकूफ बनाया गया। यह नजारा 25 अगस्त 2026 के उस 'विश्व गुरु' वाले भारत के प्रधानमंत्री के निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी से लेकर उनके बहुचर्चित 'गुजरात मॉडल' के मूल राज्य तक का है, जहाँ का ढिंढोरा पूरे देश में पीट-पीटकर 140 करोड़ लोगों को विकास के नाम पर बेवकूफ बनाया गया। जब 25 अगस्त 2026 की मूसलाधार बारिश के बाद गुजरात के 12 से अधिक जिलों में जलप्रलय जैसे हालात पैदा हुए, तो तथाकथित 100% स्मार्ट शहरों और 50,000 करोड़ रुपये के बुनियादी ढांचे का वो शर्मनाक सच सामने आया जिसे मुख्यधारा का मीडिया दबाने में लगा था। राज्य के 45 से अधिक सरकारी और निजी अस्पतालों के बाहर 3 से 4 फीट तक गंदा, बदबूदार पानी भरा हुआ था, जहाँ लाचार नागरिक अपने गंभीर रूप से बीमार परिजनों को कंधों पर उठाकर, छोटे-छोटे मासूम बच्चों को अपनी गोदी में समेटकर और स्ट्रेचर को 80 सेंटीमीटर गहरे गंदे पानी में खुद खींचते हुए ले जाने के लिए मजबूर थे। अस्पतालों के आईसीयू (ICU) और इमरजेंसी वार्डों में जमा 2 फीट पानी के साथ बायो-मेडिकल कचरा, 10,000 से अधिक इस्तेमाल की जा चुकी संक्रमित सुइयां (syringes), सिरिंज, इस्तेमाल की हुई पट्टियां, रक्त से भरी बोतलें और खतरनाक कचरा बहकर सीधे मुख्य सड़कों, 500 से ज्यादा दुकानों और हजारों रिहाइशी मकानों तक पहुंच गया, जिसने हेपेटाइटिस-बी, हेपेटाइटिस-सी, एचआईवी (HIV) और टाइफाइड जैसी जानलेवा बीमारियों के संक्रमण का खतरा 400% तक बढ़ा दिया है। तथ्य और आंकड़े यह बताने के लिए काफी हैं कि जिस 'गुजरात मॉडल' को पूरे भारत में 2014 के बाद एक ईश्वरीय चमत्कार की तरह बेचा गया, उसने 22 वर्षों में गुजरात के 33 जिलों की बुनियादी व्यवस्था को पूरी तरह से खोखला कर दिया। पंडित जवाहरलाल नेहरू के दौर में जब 1950 और 1960 के दशक में चंडीगढ़ जैसे योजनाबद्ध शहरों का निर्माण किया गया था, तो 12 विशेषज्ञों की उच्चस्तरीय प्लानिंग कमेटी और 50 साल आगे की सोच वाली टाउन प्लानिंग रणनीति अपनाई जाती थी, जिसमें 100 मिलीमीटर प्रति घंटे की बारिश को भी झेलने वाले 100% भूमिगत ड्रेनेज नेटवर्क, अस्पतालों में 500 से अधिक गाड़ियों की भूमिगत पार्किंग व्यवस्था और हर 2 किलोमीटर पर 60 फीट चौड़ी सड़कों का खाका खींचा जाता था। नेहरू जी से लेकर श्रीमती इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और डॉ. मनमोहन सिंह के 60 सालों के कार्यकाल में बिना किसी ढिंढोरे के 1,00,000 किलोमीटर से अधिक राष्ट्रीय राजमार्ग, 800 से अधिक बड़े बांध और 150 से अधिक आधुनिक शिक्षण संस्थान (IIT, IIM, AIIMS) देश को दिए गए, जहाँ कभी 'हिमाचल मॉडल' या 'गुजरात मॉडल' जैसे खोखले विज्ञापनों पर 4,000 करोड़ रुपये का सरकारी पैसा पानी की तरह नहीं बहाया गया। लेकिन इसके ठीक विपरीत, 2001 से 2014 के बीच मुख्यमंत्री रहते हुए और उसके बाद प्रधानमंत्री पद पर रहकर नरेंद्र मोदी ने जिस मॉडल का ढांचा खड़ा किया, उसमें केवल कंक्रीट के बेतरतीब जंगल, 2,000 से अधिक ऐतिहासिक संरचनाओं, बस्तियों और सैकड़ों पुराने मंदिरों-मस्जिदों का विनाश तथा बिना किसी वाटर-निकासी योजना के 30,000 करोड़ रुपये के मॉल और 1,000 से ज्यादा फ्लाइओवर खड़े कर दिए गए। नतीजा यह है कि आज गुजरात के 8 प्रमुख महानगरों में हर साल 1,500 से ज्यादा जगहों पर सड़कें 10 से 15 फीट गहरे गड्ढों में धंस जाती हैं, 2,500 करोड़ रुपये से बने स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स 2 घंटे की 50 मिलीमीटर बारिश में 100% जलमग्न हो जाते हैं, और 120 से अधिक बड़े शॉपिंग मॉल का निचला हिस्सा तैरिंग पूल में बदल जाता है। 'विश्व गुरु', '56 इंच की छाती', 'आत्मनिर्भर भारत' और 'विश्व में भारत का डंका' जैसे खोखले, भारी-भरकम और लच्छेदार शब्दों के पीछे का कड़वा सच यह है कि अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों की रिपोर्टों के अनुसार 2024-25 में वैश्विक विकास संकेतकों पर भारत की रैंकिंग 180 देशों में 126वें स्थान पर खिसक चुकी है। गुजरात में बीते 15 वर्षों में 45,000 से अधिक छोटे एवं मध्यम उद्योग (MSMEs) बंद हो चुके हैं, 350 से ज्यादा सरकारी प्राथमिक स्कूलों को बुनियादी सुविधाओं की कमी बताकर ताला लगा दिया गया है, और राज्य के 68% युवा 15,000 रुपये महीने की संविदा नौकरियों के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। 2014 से 2026 के बीच विज्ञापनों और इवेंट मैनेजमेंट पर खर्च किए गए 8,500 करोड़ रुपये से अधिक के बजट का 1% हिस्सा भी अगर अस्पतालों के ड्रेनेज सिस्टम और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) पर लगाया गया होता, तो आज भारत के नागरिकों को अपने परिवार के सदस्यों की जान बचाने के लिए 4 फीट गंदे पानी में संक्रमण से जूझते हुए स्ट्रेचर नहीं खींचना पड़ता। यह तथाकथित 'गुजरात मॉडल' कुछ और नहीं बल्कि 140 करोड़ भारतीयों के विश्वास के साथ किया गया प्रशासनिक और बौद्धिक छल है, जिसने भारत की 70 साल पुरानी सुदृढ़ अवसंरचनात्मक नींव को उखाड़कर केवल 200 बड़े उद्योगपतियों के मुनाफे और 50,000 कंक्रीट की इमारतों के छलावे में तब्दील कर दिया है। जब किसी देश की व्यवस्था में अस्पतालों से बहता हुआ हज़ारों लीटर दूषित खून और इंफेक्टेड सुइयां आम जनता की रसोई और दुकानों तक पहुँचने लगें, तो 5,000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था और 'विश्वगुरु' बनने का दावा एक बेहद घटिया, क्रूर और शर्मनाक मजाक बन जाता है। अब देश की जागरूक जनता को इन विज्ञापनों के रंगीन चश्मे को उतारकर इस 'ब्रांडेड तबाही' और राजनीतिक जुमलेबाज़ियों के खिलाफ आंकड़े और तथ्य लेकर सवाल पूछना ही होगा, वरना गुजरात के अस्पतालों से निकली यह जलभराव और संक्रमण की महामारी पूरे भारत के भविष्य को पूरी तरह से गर्क कर देगी।
- रक्षाबंधन पर चौबेपुर चौराहे पर पुलिस की मुस्तैदी, थाना प्रभारी ने संभाली सुरक्षा व्यवस्था जनता न्यूज़ टीवी संवाददाता पंकज कुमार वाराणसी चौबेपुर (वाराणसी)। रक्षाबंधन पर्व को लेकर गुरुवार शाम चौबेपुर चौराहा पुलिस की निगरानी में नजर आया। बाजार और चौराहे पर बढ़ती भीड़ को देखते हुए चौबेपुर थाना प्रभारी अनिल कुमार शर्मा अपने हमराहियों के साथ मौके पर पहुंचे और सुरक्षा व्यवस्था की कमान संभाली। थाना प्रभारी ने चौराहे पर पैदल भ्रमण कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। इस दौरान पुलिसकर्मियों को यातायात व्यवस्था सुचारु रखने, भीड़ को नियंत्रित करने और किसी भी तरह की अव्यवस्था न होने देने के निर्देश दिए गए। पुलिस ने चौराहे से गुजरने वाले वाहनों को व्यवस्थित कराया और लोगों से यातायात नियमों का पालन करने की अपील की। रक्षाबंधन पर्व को शांतिपूर्ण एवं सुरक्षित तरीके से संपन्न कराने के लिए पुलिस लगातार निगरानी करती रही। पुलिस की सक्रियता से चौराहे पर व्यवस्था बनी रही। चौबेपुर पुलिस ने लोगों को भरोसा दिलाया कि पर्व के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस पूरी तरह मुस्तैद है और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।1
- गर्लफ्रेंड से कार पर किए 3400 Kiss! बॉयफ्रेंड को एक-एक Kiss की चुकानी पड़ी कीमत गर्लफ्रेंड से कार पर किए 3400 Kiss! बॉयफ्रेंड को एक-एक Kiss की चुकानी पड़ी कीमत सोशल मीडिया पर वायरल होने और रील पर ज्यादा से ज्यादा व्यूज पाने के चक्कर में एक युवक ने अपनी कार को ही ‘किसिंग कार’ बना दिया। दरअसल, युवक की गर्लफ्रेंड ने कार की पूरी बॉडी पर लिपस्टिक से किस करने के निशान बनाए। इसके बाद कार का वीडियो इंस्टाग्राम पर अपलोड कर दिया गया। वीडियो देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और एक दिन में करीब 55 लाख व्यूज पहुंच गए। वीडियो में कार की बॉडी पर बड़ी संख्या में लिपस्टिक के निशान साफ दिखाई दे रहे थे। यातायात पुलिस के मुताबिक दो दिन पहले एक कार का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था। वीडियो में कार तेज रफ्तार से सड़क पर दौड़ती नजर आ रही थी। पुलिस की नजर जब वीडियो पर पड़ी तो कार की बॉडी पर बने लिपस्टिक के निशान भी दिखाई दिए। इसके बाद यातायात पुलिस ने वीडियो के आधार पर कार की पहचान की। यातायात पुलिस ने कार के बारे में जानकारी जुटाई तो उसका पता थाटीपुर क्षेत्र में मिला। इसके बाद पुलिस टीम ने कार को थाटीपुर से बरामद कर यातायात थाने पहुंचाया। पुलिस के मुताबिक कार मालिक को जब थाने बुलाया गया तो उसने अपनी गलती स्वीकार कर ली। इसके बाद युवक ने खुद कार की बॉडी पर बने लिपस्टिक के निशान पानी से साफ किए। यातायात थाना प्रभारी अभिषेक रघुवंशी ने बताया कि मोटर व्हीकल एक्ट के विभिन्न प्रावधानों के तहत कार पर 5,500 रुपए का जुर्माना किया गया है। #MPNews #KissingCar #Police #Gwalior #ViralVideo #ZeeNews1
- योगी सरकार का बड़ा ऐलान: रक्षाबंधन पर 3 दिन महिलाओं के लिए फ्री बस सेवा न्यूज टू इंडिया से उप संपादक प्रदीप कुमार वर्मा उर्फ राजन की खास रिपोर्ट वाराणसी/लखनऊ।उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश की महिलाओं के लिए बड़ी सौगात का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घोषणा की है कि आगामी 27, 28 और 29 तारीख को रक्षाबंधन के अवसर पर हर बेटी, बहन और माता अपने एक सहयात्री के साथ उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) की बसों और सिटी बसों में निःशुल्क यात्रा कर सकेंगी।मुख्यमंत्री ने यह घोषणा एक कार्यक्रम के दौरान की। उन्होंने कहा कि यह सुविधा रक्षाबंधन के पर्व को देखते हुए महिलाओं के सम्मान में दी जा रही है, ताकि बहनें आसानी से अपने भाइयों के पास जा सकें।60 साल से ऊपर की महिलाओं के लिए हमेशा फ्री यात्रा।सीएम योगी ने इसके साथ ही बुजुर्ग माताओं के लिए एक और बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा कि 29 तारीख के बाद से 60 वर्ष से अधिक आयु की सभी माताओं और बहनों के लिए उत्तर प्रदेश के भीतर बस यात्रा पूरी तरह से मुफ्त रहेगी।इसके लिए उन्हें बस में सिर्फ अपना वोटर आईडी कार्ड या आधार कार्ड दिखाना होगा। उम्र की पुष्टि होने के बाद उन्हें किसी भी प्रकार का किराया नहीं देना होगा और वे प्रदेश में कहीं भी निःशुल्क यात्रा कर सकेंगी।क्या बोले सीएम योगी?मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में सरकार आधी आबादी को शासन की योजनाओं से जोड़ने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। सरकार का लक्ष्य बेटी के जन्म से लेकर उसकी शिक्षा, रोजगार,उद्यमिता और जीवन के हर पड़ाव पर नारी का सम्मान और स्वावलंबन सुनिश्चित करना है।इस फैसले से प्रदेश की लाखों महिलाओं को सीधा लाभ मिलेगा।1
- चीन का हेलीकॉप्टर उस जगह पहुंचा जहां ग्लेशियर टूटा था और उससे निकले पानी ने नेपाल में भारी तबाही मचाई थी। इस घटना को GLOF कहते हैं!* ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड तब आ सकता है, जब ग्लेशियर द्वारा रोकी गई झील का बांध अचानक टूट जाए* *पानी के दबाव और ग्लेशियर में बनी दरारों से बाहर निकलने का रास्ता बन जाता है। इसके बाद झील में जमा भारी मात्रा में पानी और मलबा बेहद तेज़ रफ्तार से पहाड़ों से नीचे की ओर बहता है, जिससे अचानक और विनाशकारी बाढ़ आ सकती है।*1
- नेपाल तबाही के बीच एक बच्चे की साहस और सेना द्वारा हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू #NepalFlood #Nepal #FloodRescue #ViralVideo #Humanity #NepalArmy #RescueOperation #BraveChild #Inspirational #fbreels #fypシ゚ #FacebookPage #viralreel1
- वाराणसी मे आयोजित असि नदी पुनरुत्थान पर गोष्ठी विश्व वैदिक सनातन न्यास द्वारा वाराणसी मे विश्व वैदिक सनातन न्यास द्वारा आयोजित असि नदी पुनरुत्थान पर गोष्ठी जिसमे लोगों ने नदी का उत्थान पर गोष्ठी किया है। Varanasi Breking News1
- योगी सरकार का बड़ा ऐलान: रक्षाबंधन पर 3 दिन महिलाओं के लिए फ्री बस सेवा 60+ महिलाओं के लिए हमेशा के लिए मुफ्त यात्रा न्यूज टू इंडिया से उप संपादक प्रदीप कुमार वर्मा उर्फ राजन की खास रिपोर्ट वाराणसी/लखनऊ।उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश की महिलाओं के लिए बड़ी सौगात का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घोषणा की है कि आगामी 27, 28 और 29 तारीख को रक्षाबंधन के अवसर पर हर बेटी, बहन और माता अपने एक सहयात्री के साथ उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) की बसों और सिटी बसों में निःशुल्क यात्रा कर सकेंगी।मुख्यमंत्री ने यह घोषणा एक कार्यक्रम के दौरान की। उन्होंने कहा कि यह सुविधा रक्षाबंधन के पर्व को देखते हुए महिलाओं के सम्मान में दी जा रही है, ताकि बहनें आसानी से अपने भाइयों के पास जा सकें।60 साल से ऊपर की महिलाओं के लिए हमेशा फ्री यात्रा।सीएम योगी ने इसके साथ ही बुजुर्ग माताओं के लिए एक और बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा कि 29 तारीख के बाद से 60 वर्ष से अधिक आयु की सभी माताओं और बहनों के लिए उत्तर प्रदेश के भीतर बस यात्रा पूरी तरह से मुफ्त रहेगी।इसके लिए उन्हें बस में सिर्फ अपना वोटर आईडी कार्ड या आधार कार्ड दिखाना होगा। उम्र की पुष्टि होने के बाद उन्हें किसी भी प्रकार का किराया नहीं देना होगा और वे प्रदेश में कहीं भी निःशुल्क यात्रा कर सकेंगी।क्या बोले सीएम योगी?मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में सरकार आधी आबादी को शासन की योजनाओं से जोड़ने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। सरकार का लक्ष्य बेटी के जन्म से लेकर उसकी शिक्षा,रोजगार,उद्यमिता और जीवन के हर पड़ाव पर नारी का सम्मान और स्वावलंबन सुनिश्चित करना है।इस फैसले से प्रदेश की लाखों महिलाओं को सीधा लाभ मिलेगा।1
- टांडाकला सोनबरसा में दुर्गा पूजा समिति की बैठक, नए पदाधिकारियों का हुआ चयन जनता न्यूज़ टीवी ब्यूरो चीफ़ राजमणी पाण्डेय चंदौली टांडाकला। सोनबरसा गांव स्थित रामसाला प्रांगण में सार्वजनिक क्षेत्रीय श्री दुर्गा पूजा समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में आगामी दुर्गा पूजा महोत्सव को भव्य एवं शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने को लेकर विचार-विमर्श किया गया। बैठक में समिति के पिछले वर्ष के आय-व्यय का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया गया, जिसे सदस्यों ने सर्वसम्मति से पारित किया। इसके बाद आगामी आयोजन के लिए नए पदाधिकारियों का चयन किया गया। समिति के अध्यक्ष दीपक प्रजापति, प्रबंधक राजन गोंड, उपाध्यक्ष सरवन प्रजापति, कोषाध्यक्ष सुरेश निषाद, सहायक मंत्री धर्मजीत सोनकर और सूचना मंत्री प्रदीप कनौजिया को जिम्मेदारी सौंपी गई। नवनिर्वाचित पदाधिकारियों ने दुर्गा पूजा को आपसी सहयोग और सौहार्द के साथ भव्य रूप से संपन्न कराने का संकल्प लिया। बैठक में पूर्व पदाधिकारियों सहित कई वरिष्ठ सदस्य एवं ग्रामीण मौजूद रहे।1