बीएसए कॉलेज विवाद पर हाईकोर्ट ने वित्तीय अधिकारों पर लगाई रोक ।अगली सुनवाई तक रोक रहेगी बरकरार बीएसए (पीजी) कॉलेज प्रकरण में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए सशर्त अनुमोदित प्रबंध समिति को कड़ी चेतावनी दी है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि समिति को कॉलेज के वित्तीय खातों के संचालन की अनुमति नहीं दी गई है और उन पर लगे गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप भविष्य में दंडात्मक कार्रवाई का आधार बन सकते हैं। बताया गया कि बीएसए कॉलेज, मथुरा एक अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालय है, जिसका संचालन पिछले लगभग डेढ़ दशक से एकल व्यवस्था के तहत चल रहा था। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा की कुलपति द्वारा 17 अक्टूबर 2025 को 9 शर्तों के अधीन धीरेन्द्र कुमार अग्रवाल की प्रबंध समिति को सशर्त अनुमोदन दिया गया था। हालांकि, सैकड़ों करोड़ रुपये के कथित घोटालों की जांच के चलते यह प्रबंध समिति कॉलेज के संचालन में सक्रिय भूमिका निभाने से बचती रही। जिला प्रशासन और विश्वविद्यालय से सहयोग की मांग के बावजूद गंभीर आरोपों के कारण उन्हें अपेक्षित सहयोग नहीं मिल सका। इस बीच, उत्तर प्रदेश शासन के निर्देश पर एसटीएफ आगरा यूनिट ने वित्तीय अनियमितताओं की जांच की, जिसमें प्रबंध समिति के पदाधिकारियों को दोषी पाया गया। जांच रिपोर्ट गृह विभाग को भेजते हुए वैधानिक कार्रवाई की संस्तुति की गई है। वहीं, संयुक्त शिक्षा निदेशक द्वारा की गई जांच में भी कॉलेज खातों से अवैध धन हस्तांतरण और भूमि के दुरुपयोग जैसे गंभीर मामले सामने आए हैं। शासन को रिपोर्ट भेजकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की जा चुकी है। ऑडिट रिपोर्टों में भी कई सौ करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितताओं की पुष्टि हुई है, जिसके आधार पर उत्तर प्रदेश शासन के निर्देश पर विशेष ऑडिट कराया गया। इसके अलावा, यह मामला विधान परिषद की संसदीय समिति में भी उठ चुका है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि प्रबंध समिति को अत्यंत सावधानी बरतनी होगी, क्योंकि उनके खिलाफ लगे आरोप गंभीर हैं। साथ ही, राज्य सरकार, उच्च शिक्षा विभाग, विश्वविद्यालय और कॉलेज प्रशासन को कानून के तहत आवश्यक कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र बताया गया है। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि आदेश में कहीं भी बैंक खातों के संचालन या वित्तीय अधिकारों की बहाली का निर्देश नहीं दिया गया है। साथ ही, लंबित जांच को दो माह के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। महाविद्यालय प्रशासन ने न्यायालय के इस आदेश का स्वागत करते हुए कहा कि इससे स्पष्ट हो गया है कि प्रबंध समिति को फिलहाल वित्तीय अधिकार नहीं दिए गए हैं और आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।
बीएसए कॉलेज विवाद पर हाईकोर्ट ने वित्तीय अधिकारों पर लगाई रोक ।अगली सुनवाई तक रोक रहेगी बरकरार बीएसए (पीजी) कॉलेज प्रकरण में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए सशर्त अनुमोदित प्रबंध समिति को कड़ी चेतावनी दी है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि समिति को कॉलेज के वित्तीय खातों के संचालन की अनुमति नहीं दी गई है और उन पर लगे गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप भविष्य में दंडात्मक कार्रवाई का आधार बन सकते हैं। बताया गया कि बीएसए कॉलेज, मथुरा एक अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालय है, जिसका संचालन पिछले लगभग डेढ़ दशक से एकल व्यवस्था के तहत चल रहा था। डॉ. भीमराव
आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा की कुलपति द्वारा 17 अक्टूबर 2025 को 9 शर्तों के अधीन धीरेन्द्र कुमार अग्रवाल की प्रबंध समिति को सशर्त अनुमोदन दिया गया था। हालांकि, सैकड़ों करोड़ रुपये के कथित घोटालों की जांच के चलते यह प्रबंध समिति कॉलेज के संचालन में सक्रिय भूमिका निभाने से बचती रही। जिला प्रशासन और विश्वविद्यालय से सहयोग की मांग के बावजूद गंभीर आरोपों के कारण उन्हें अपेक्षित सहयोग नहीं मिल सका। इस बीच, उत्तर प्रदेश शासन के निर्देश पर एसटीएफ आगरा यूनिट ने वित्तीय अनियमितताओं की जांच की, जिसमें प्रबंध समिति के पदाधिकारियों को दोषी पाया गया। जांच रिपोर्ट गृह विभाग को भेजते हुए वैधानिक कार्रवाई की संस्तुति
की गई है। वहीं, संयुक्त शिक्षा निदेशक द्वारा की गई जांच में भी कॉलेज खातों से अवैध धन हस्तांतरण और भूमि के दुरुपयोग जैसे गंभीर मामले सामने आए हैं। शासन को रिपोर्ट भेजकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की जा चुकी है। ऑडिट रिपोर्टों में भी कई सौ करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितताओं की पुष्टि हुई है, जिसके आधार पर उत्तर प्रदेश शासन के निर्देश पर विशेष ऑडिट कराया गया। इसके अलावा, यह मामला विधान परिषद की संसदीय समिति में भी उठ चुका है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि प्रबंध समिति को अत्यंत सावधानी बरतनी होगी, क्योंकि उनके खिलाफ लगे आरोप गंभीर हैं। साथ
ही, राज्य सरकार, उच्च शिक्षा विभाग, विश्वविद्यालय और कॉलेज प्रशासन को कानून के तहत आवश्यक कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र बताया गया है। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि आदेश में कहीं भी बैंक खातों के संचालन या वित्तीय अधिकारों की बहाली का निर्देश नहीं दिया गया है। साथ ही, लंबित जांच को दो माह के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। महाविद्यालय प्रशासन ने न्यायालय के इस आदेश का स्वागत करते हुए कहा कि इससे स्पष्ट हो गया है कि प्रबंध समिति को फिलहाल वित्तीय अधिकार नहीं दिए गए हैं और आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।
- Post by Subhash Chand1
- गोवर्धन। गोवर्धन स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पर शनिवार सुबह स्वच्छता अभियान चलाया गया। इस अभियान का नेतृत्व समाजसेवी एवं भाजपा नेत्री पूनम सिंह एडवोकेट ने अपनी टीम के साथ किया। उनके साथ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की प्रभारी डॉ. नेहा चौधरी भी मौजूद रहीं। अभियान के दौरान सभी ने हाथों में झाड़ू लेकर अस्पताल परिसर की सफाई की और जगह-जगह फैली गंदगी को हटाया। समाजसेवी पूनम सिंह ने स्वयं भी परिसर में पड़ी गंदगी को साफ कर स्वच्छता का संदेश दिया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि अपने आसपास साफ-सफाई रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। स्वच्छ वातावरण से ही स्वस्थ समाज का निर्माण संभव है, इसलिए हर व्यक्ति को स्वच्छता को अपनी आदत बनानी चाहिए। पूनम सिंह ने बताया कि यह स्वच्छता अभियान वह 17 तारीख से लगातार चला रही हैं, जिसका उद्देश्य लोगों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। बाइट.. डॉ.नेहा चौधरी प्रभारी सी एस सी गोवर्धन बाइट.. पूनम सिंह भाजपा नेत्री4
- कान्हा माखन पब्लिक स्कूल के मैनेजर ने पीड़िता के पति को दी धमकी उतरवा देंगे तुम्हारी वर्दी1
- Post by RPR NEWS TV1
- Post by Brajvir Singh1
- #mathura छत से घुसे बदमाश, पूरे परिवार को बंधक बनाकर लाखों की चोरी मांट रिपोर्ट - गोपाल अग्रवाल1
- up मे पारा 45 के पार1
- मथुरा। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्लोक कुमार के निर्देशन में जनपद में सुदृढ़ कानून व्यवस्था बनाए रखने तथा अपराधियों के विरुद्ध ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति के तहत एक महत्वपूर्ण कार्रवाई की गई है। सी ओ छाता भूषण वर्मा ने बताया कि थाना शेरगढ़ पर पंजीकृत मुकदमा अपराध संख्या 44/2026, जो भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 318(4), 336, 338, 340(2), 111(3), 61(2) एवं सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की धाराओं 66सी व 66डी के अंतर्गत दर्ज है, में लंबे समय से वांछित चल रहे कुल 26 अभियुक्तों (साइबर अपराधियों) की गिरफ्तारी हेतु ₹25,000-₹25,000 का इनाम घोषित किया गया है। पुलिस प्रशासन द्वारा इन अभियुक्तों की गिरफ्तारी सुनिश्चित करने के लिए विशेष टीमों का गठन कर लगातार दबिश दी जा रही है। साथ ही आम जनता से अपील की गई है कि यदि इन अपराधियों के संबंध में कोई भी सूचना प्राप्त हो, तो तत्काल पुलिस को सूचित करें, जिससे उनके विरुद्ध शीघ्र विधिक कार्रवाई की जा सके। बाइट-भूषण वर्मा सीओ छाता मथुरा4