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अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है, जहां अमेरिकी सेना ने ईरान के दक्षिणी तटीय और रणनीतिक सैन्य ठिकानों पर ताबड़तोड़ कई एयरस्ट्राइक की हैं। इस भीषण सैन्य कार्रवाई से पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। हमलों के बाद ईरान के कई इलाकों में तेज धमाकों की आवाजें सुनाई दीं और आसमान में धुएं के गुबार उठते हुए देखे गए। इस अचानक हुए हमले के बाद ईरानी अधिकारियों ने नुकसान का आकलन करना शुरू कर दिया है और वर्तमान हालात को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट पर हैं। क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों के कारण मध्य पूर्व में तनाव और अधिक गहराने की आशंका जताई जा रही है। इस नाजुक स्थिति को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी दोनों देशों से संयम बरतने की लगातार अपील कर रहा है।
Mohit Badtiya
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है, जहां अमेरिकी सेना ने ईरान के दक्षिणी तटीय और रणनीतिक सैन्य ठिकानों पर ताबड़तोड़ कई एयरस्ट्राइक की हैं। इस भीषण सैन्य कार्रवाई से पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। हमलों के बाद ईरान के कई इलाकों में तेज धमाकों की आवाजें सुनाई दीं और आसमान में धुएं के गुबार उठते हुए देखे गए। इस अचानक हुए हमले के बाद ईरानी अधिकारियों ने नुकसान का आकलन करना शुरू कर दिया है और वर्तमान हालात को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट पर हैं। क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों के कारण मध्य पूर्व में तनाव और अधिक गहराने की आशंका जताई जा रही है। इस नाजुक स्थिति को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी दोनों देशों से संयम बरतने की लगातार अपील कर रहा है।
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- सोनम वांगचुक जी से अपना अनशन समाप्त करने की विनम्र अपील की गई है। सरकार को घेरते हुए कहा गया है कि जिस सत्ता से संवाद और संवेदनशीलता की उम्मीद की जा रही है, वह जनता की आवाज़ सुनने के बजाय उसे कुचलने में विश्वास रखती है। आज की व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा गया है कि महात्मा गांधी के अनशन के आगे तो अंग्रेज हुकूमत भी बातचीत के लिए मजबूर हो जाती थी, लेकिन आज खुद को लोकतंत्र का दावा करने वाली यह सत्ता देश के एक सम्मानित सामाजिक कार्यकर्ता की बात सुनने तक को तैयार नहीं है।1
- दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा आयोजित धरने में आजाद समाज पार्टी शामिल हो गई है। इस विरोध प्रदर्शन में आजाद समाज पार्टी ने अपनी भागीदारी दर्ज कराई है।1
- देश में बदलाव का हिस्सा बनने के लिए सच्चे देशभक्तों से आज ही BJKS से जुड़ने की अपील की गई है। इस मुहिम से जुड़ने के लिए लोगों को व्हाट्सऐप पर 'Join' लिखकर भेजने के लिए कहा गया है। संदेश के अंत में 'जय हिंद' के नारे के साथ लोगों को इस बदलाव का हिस्सा बनने का आमंत्रण दिया गया है।1
- गाजियाबाद के लोनी में सेवा धाम रोड का कोई नामोनिशान ही नहीं बचा है। सड़क न होने के कारण लोग अब पुलिस चौकी के सामने से होकर गुजरने को मजबूर हैं।1
- कर्नाटक के चिकबल्लापुर में अंधविश्वास का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां सिविल कोर्ट के मुकदमे का फैसला अपने पक्ष में कराने के लिए एक बुजुर्ग महिला को जज की कुर्सी पर टोटका करना भारी पड़ गया। आरोपी महिला ने कोर्ट के जज की कुर्सी और मेज (डायस) पर सरसों छिड़ककर काला जादू करने की कोशिश की थी, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। गिरफ्तार की गई महिला की पहचान चिकबल्लापुर शहर की रहने वाली 65 वर्षीय मंजुला के रूप में हुई है। यह घटना गुरुवार, 9 जुलाई की सुबह 9:30 बजे चिकबल्लापुर शहर के प्रथम अतिरिक्त सिविल और जेएमएफसी (JMFC) कोर्ट में हुई। आरोपी महिला ने उस जगह सरसों डाल दी थी जहां जज बैठते हैं। जब कोर्ट के कर्मचारियों की नजर इस पर पड़ी, तो उन्होंने फौरन सीसीटीवी फुटेज की जांच की, जिसमें आरोपी महिला सरसों डालती हुई कैद पाई गई। इस घटना के बाद कोर्ट प्रशासक ने चिकबल्लापुर थाने में आरोपी महिला के खिलाफ 'कर्नाटक अमानवीय दुराचार और अंधविश्वास निवारण एवं उन्मूलन अधिनियम' (काला जादू विरोधी कानून) के तहत मामला दर्ज कराया। जिला पुलिस अधीक्षक (SP) कुशल चौकसे ने बताया कि मंजुला का कोर्ट में एक जमीन का विवाद चल रहा था, जिसकी उसी दिन सुनवाई होनी थी। पूछताछ के दौरान महिला ने कबूल किया कि वह जमीन का फैसला अपने पक्ष में कराने के लिए यह टोटका कर रही थी। पुलिस ने आरोपी महिला को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया, जहां से उसे 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।1
- अमेरिका और ईरान के बीच जंग लगातार और भी खतरनाक होती जा रही है। अमेरिकी सेना ने ईरान के कई रणनीतिक ठिकानों पर एक बार फिर बड़ा हमला किया है, जिसके बाद चाबहार, बंदर अब्बास, केश्म द्वीप, सीरिक, कोनारक, रास्क, खोंदाब, खुर्रमाबाद और सेमनान समेत कई शहरों में विस्फोटों की खबरें सामने आई हैं। पहली बार उत्तरी ईरान के कुछ इलाकों में भी धमाके हुए हैं। ईरानी मीडिया के मुताबिक, राजधानी तेहरान, पकदश्त और परचिन के ऊपर एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय कर दिए गए थे। वहीं सेमनान एयरपोर्ट के कुछ हिस्सों को भी निशाना बनाया गया, हालांकि ईरानी अधिकारियों के अनुसार इस हमले में कोई हताहत नहीं हुआ है और सिर्फ एक शेड तथा टर्मिनल की खिड़कियों को नुकसान पहुंचा है। अमेरिकी सेना का कहना है कि इन हमलों का मकसद होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों को खतरा पहुंचाने वाली ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना है। अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट से बढ़ रहे एक ईरानी ऑयल टैंकर पर हेलफायर मिसाइल दागकर उसे रोकने और दो अन्य जहाजों का रास्ता बदलने का भी दावा किया है। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने भी खाड़ी मुल्कों में हमले तेज कर दिए हैं। ईरानी सेना और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्म्स (IRGC) ने 'ऑपरेशन लाइटनिंग' के तहत कुवैत और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। ईरान के मुताबिक, कुवैत के अली अल सलेम एयरबेस पर अमेरिकी रडार, पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम और ईंधन भंडार को निशाना बनाया गया, जबकि बहरीन के शेख ईसा एयरबेस पर संचार प्रणाली और रडार ठिकानों पर ड्रोन हमले किए गए। इस बीच, जॉर्डन ने अपनी वायुसेना द्वारा आठ ईरानी मिसाइलों को रास्ते में ही मार गिराने की पुष्टि की है, जबकि ईरान ने दक्षिण-पश्चिमी शहर अंदिमेश्क के ऊपर एक अमेरिकी MQ-9 ड्रोन को मार गिराने का दावा किया है। ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, इन अमेरिकी हमलों में अब तक कम से कम 35 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 300 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। हालात के मद्देनजर अहवाज के शहीद बघाई अस्पताल से 211 मरीजों को सुरक्षित दूसरे अस्पतालों में स्थानांतरित किया गया है। इस जंग का सीधा असर वैश्विक व्यापार पर भी दिख रहा है। समुद्री व्यापार संस्था लॉयड्स लिस्ट के अनुसार, होर्मुज स्ट्रेट से गैर-ईरानी जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है और ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़कर 85.28 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ गई है।1
- दिल्ली के शकरपुर गली नंबर 5 में अभी तक सड़क का निर्माण नहीं हो पाया है। इस समस्या को लेकर स्थानीय निवासी ने विधायक मनीष जी के कार्यालय में लिखित आवेदन भी दिया था, लेकिन वहां से अब तक कोई जवाब नहीं आया है। विधायक कार्यालय से कोई प्रतिक्रिया न मिलने के बाद अब पीड़ित बेहद परेशान हैं और पूछ रहे हैं कि इस समस्या के समाधान के लिए अब आगे क्या किया जाना चाहिए।4
- एक रिपोर्टर और मारवाड़ी कॉलेज से एलएलबी कर रही एक लड़की के बीच हुई बातचीत का बेहद ही हास्यास्पद मामला सामने आया है। जब रिपोर्टर ने इस लड़की से सवाल किया कि गणतंत्र दिवस क्यों मनाया जाता है, तो उसने बड़े आत्मविश्वास के साथ जवाब दिया कि क्योंकि झारखंड को बिहार से अलग किया गया था। लड़की के इस अजीबोगरीब सामान्य ज्ञान पर तंज कसते हुए पूछा गया है कि क्या लड़की ने सही उत्तर बताया या गलत? इस पूरे घटनाक्रम पर चुटकी लेते हुए 'लड़की हूँ, लड़ सकती हूँ' और 'धर्मेंद्र प्रधान जी इस्तीफा दो' जैसे नारों के साथ जमकर मज़ाक उड़ाया गया है।1