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पटना कोचिंग विवाद मामले में ज्ञान बिंदु कोचिंग के संचालक रोशन आनंद को अदालत से जमानत मिल गई है। यह राहत तब मिली जब उनके अधिवक्ता ने अदालत के समक्ष मामले की परिस्थितियाँ, प्रस्तुत तथ्य और कानूनी आधारों को रखा। उनके अधिवक्ता ने जानकारी दी कि अदालत ने इन्हीं पहलुओं पर गौर करते हुए जमानत मंजूर की है। गौरतलब है कि इससे पहले रोशन आनंद की जमानत याचिका खारिज हो चुकी थी, जिसके बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था और फिर उन्हें यह राहत प्रदान की गई।
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पटना कोचिंग विवाद मामले में ज्ञान बिंदु कोचिंग के संचालक रोशन आनंद को अदालत से जमानत मिल गई है। यह राहत तब मिली जब उनके अधिवक्ता ने अदालत के समक्ष मामले की परिस्थितियाँ, प्रस्तुत तथ्य और कानूनी आधारों को रखा। उनके अधिवक्ता ने जानकारी दी कि अदालत ने इन्हीं पहलुओं पर गौर करते हुए जमानत मंजूर की है। गौरतलब है कि इससे पहले रोशन आनंद की जमानत याचिका खारिज हो चुकी थी, जिसके बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था और फिर उन्हें यह राहत प्रदान की गई।
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- खान सर ने रोशन आनंद जी के परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है, यह कहते हुए कि दुख की इस घड़ी में वे सभी उनकी पीड़ा में सहभागी हैं। उन्होंने स्वर्गीय प्रिंस यादव को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए ईश्वर से उनकी आत्मा की शांति तथा उनके परिजनों को इस अपार दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की। खान सर ने इस अवसर पर सभी से दुख और शोक के ऐसे क्षणों में सभी मतभेदों से ऊपर उठकर मानवता, संवेदना और एकजुटता का परिचय देने का आग्रह किया। उन्होंने यह भी कहा कि दिवंगत प्रिंस यादव की स्मृति सदैव लोगों के हृदय में जीवित रहेगी।1
- Post by Arun1
- फारबिसगंज मुहर्रम कमिटी की एक बैठक सम्पन्न हुई, जिसमें मुहर्रम के जुलूस रूट और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।1
- खान सर और ज्ञान बिंदु कोचिंग के बीच चल रहे विवाद से संबंधित एक महत्वपूर्ण और एक्सक्लूसिव खबर सामने आई है।1
- सुपौल जिला एक बार फिर अपनी समृद्ध सांस्कृतिक एवं बौद्धिक विरासत के कारण राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। राघोपुर प्रखंड के त्रिलोकधाम गोसपुर ग्राम में 15वीं शताब्दी का एक अत्यंत दुर्लभ काव्य-अलंकार ग्रंथ "कुवलयानंद" और देश में उपलब्ध एकमात्र हस्तलिखित "भृगुसंहिता" के संरक्षित होने की जानकारी सामने आई है। इस महत्वपूर्ण धरोहर की जानकारी मिलने पर सावन कुमार एवं शरथ आर. एस. ने स्वयं गोसपुर पहुंचकर इन दुर्लभ पांडुलिपियों का अवलोकन किया। विशेषज्ञों के अनुसार, लगभग 600 वर्ष पुरानी ये पांडुलिपियाँ संस्कृत, हिंदी और मिथिलाक्षर लिपि में लिखी गई हैं। यह खोज इस बात का महत्वपूर्ण प्रमाण है कि सुपौल और समूचा मिथिलांचल सदियों से ज्ञान, न्याय, व्याकरण और शास्त्रीय अध्ययन का एक प्रमुख केंद्र रहा है। यह दुर्लभ धरोहर महान विद्वान और दरभंगा महाराज के राजपंडित रहे त्रिलोकनाथ मिश्रा की ज्ञान परंपरा से जुड़ी हुई है। उनके पौत्र शचींद्रनाथ मिश्रा एवं प्रपौत्र धर्मेंद्रनाथ मिश्रा ने इन अमूल्य पांडुलिपियों को पीढ़ी-दर-पीढ़ी सुरक्षित रखकर भारतीय ज्ञान परंपरा की अमूल्य सेवा की है। यह ऐतिहासिक खोज न केवल सुपौल जिले के लिए, बल्कि पूरे बिहार और भारत की सांस्कृतिक विरासत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। विद्वानों और बुद्धिजीवियों ने इस अमूल्य धरोहर के संरक्षण तथा प्रशासनिक पहल की सराहना करते हुए जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया है।1
- बिहार सप्त क्रांति एक्सप्रेस दरभंगा से चलकर नई दिल्ली जाती है।1
- ग्राम पंचायत राज चहटपुर समिति पद के लिए वर्ष 2026 के चुनाव में एक उम्मीदवार ने अपनी पहली प्रतिबद्धता जनता के नाम की है। प्रत्याशी ने घोषणा की है कि यदि जनता उन्हें प्रतिनिधि के रूप में चुनती है, तो वे अपना संपूर्ण जीवन बिना किसी लालच, घमंड या गुरुर के जनता को समर्पित कर देंगे। उन्होंने दृढ़ता से कहा कि वे जनता के सुख और दुख की हर घड़ी में हमेशा उनके साथ खड़े रहेंगे, अपनी इस निष्ठा को "जय हिंद जय भारत" के आह्वान के साथ दोहराया।1
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