बालाघाट जिले के लांजी क्षेत्र में अवैध रेत उत्खनन करने वाले रेत माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि वे अब कानून, प्रशासन और मीडिया को भी खुली चुनौती दे रहे हैं। 5 जून की रात, पौनी नदी घाट से ट्रैक्टर की लाइटें बंद कर अवैध रूप से रेत निकाली जा रही थी। इसी दौरान, हरदीटोला-परसवाड़ा मार्ग से ग्राम पंचायत दुल्हापुर में सीसी सड़क निर्माण कार्य के लिए रेत ले जा रहे ट्रैक्टर चालक अंकित नागवंशी ने पत्रकार पवन कश्यप को दो बार ट्रैक्टर से कुचलने का प्रयास किया, जब कश्यप ने उसे रोकने की कोशिश की। इस घटना से यह स्पष्ट होता है कि अवैध कारोबार में लिप्त तत्वों को कानून का कोई भय नहीं रह गया है। इस मामले में सबसे चिंताजनक पहलू लांजी थाना पुलिस की निष्क्रियता रही। पत्रकार पवन कश्यप द्वारा रात में ही शिकायत दर्ज कराने के बावजूद, पुलिस ने तत्काल एफआईआर दर्ज नहीं की और अगले दिन सुबह 11 बजे आने को कहा। जब पत्रकार 11 बजे पहुंचा, तो पुलिस द्वारा टालमटोल की जा रही थी। इसे प्रशासनिक निष्क्रियता और संदिग्ध कार्यप्रणाली का गंभीर उदाहरण बताया गया है। रेत माफियाओं की बढ़ती दबंगई और जिम्मेदार तंत्र की यह खामोशी कानून व्यवस्था पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर रही है। यह स्थिति इसलिए भी अधिक गंभीर है क्योंकि कुछ दिन पहले ही जिले के लालबर्रा क्षेत्र में रेत माफियाओं ने पुलिस के एक हेडकांस्टेबल को ट्रैक्टर से कुचलकर जान से मारने का प्रयास किया था। अब हालात ऐसे हो गए हैं कि रेत माफियाओं से पुलिस और पत्रकार भी सुरक्षित नहीं हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए, जिले के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक से निवेदन किया गया है कि वे इस घटना का तत्काल संज्ञान लें और दोषियों के खिलाफ कार्यवाही करें, ताकि आम जनता का विश्वास बना रहे।
बालाघाट जिले के लांजी क्षेत्र में अवैध रेत उत्खनन करने वाले रेत माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि वे अब कानून, प्रशासन और मीडिया को भी खुली चुनौती दे रहे हैं। 5 जून की रात, पौनी नदी घाट से ट्रैक्टर की लाइटें बंद कर अवैध रूप से रेत निकाली जा रही थी। इसी दौरान, हरदीटोला-परसवाड़ा मार्ग से ग्राम पंचायत दुल्हापुर में सीसी सड़क निर्माण कार्य के लिए रेत ले जा रहे ट्रैक्टर चालक अंकित नागवंशी ने पत्रकार पवन कश्यप को दो बार ट्रैक्टर से कुचलने का प्रयास किया, जब कश्यप ने उसे रोकने की कोशिश की। इस घटना से यह स्पष्ट होता है कि अवैध कारोबार में लिप्त तत्वों को कानून का कोई भय नहीं रह गया है। इस मामले में सबसे चिंताजनक पहलू लांजी थाना पुलिस की निष्क्रियता रही। पत्रकार पवन कश्यप द्वारा रात में ही शिकायत दर्ज कराने के बावजूद, पुलिस ने तत्काल एफआईआर दर्ज नहीं की और अगले दिन सुबह 11 बजे आने को कहा। जब पत्रकार 11 बजे पहुंचा, तो पुलिस द्वारा टालमटोल की जा रही थी। इसे प्रशासनिक निष्क्रियता और संदिग्ध कार्यप्रणाली का गंभीर उदाहरण बताया गया है। रेत माफियाओं की बढ़ती दबंगई और जिम्मेदार तंत्र की यह खामोशी कानून व्यवस्था पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर रही है। यह स्थिति इसलिए भी अधिक गंभीर है क्योंकि कुछ दिन पहले ही जिले के लालबर्रा क्षेत्र में रेत माफियाओं ने पुलिस के एक हेडकांस्टेबल को ट्रैक्टर से कुचलकर जान से मारने का प्रयास किया था। अब हालात ऐसे हो गए हैं कि रेत माफियाओं से पुलिस और पत्रकार भी सुरक्षित नहीं हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए, जिले के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक से निवेदन किया गया है कि वे इस घटना का तत्काल संज्ञान लें और दोषियों के खिलाफ कार्यवाही करें, ताकि आम जनता का विश्वास बना रहे।
- शराब पीकर वाहन चलाने और बिना लाइसेंस के भारी वाहन चलाने पर ₹20,000 का जुर्माना लगाया जाएगा।1
- सिवनी में आयोजित जिला पंचायत अध्यक्ष की प्रेस वार्ता में विकास के दावों से ज़्यादा उनके जवाबों की लड़खड़ाहट चर्चा का विषय बनी रही। पत्रकारों के तीखे सवालों के बीच कई बार माहौल ऐसा बन गया जैसे यह प्रेस कॉन्फ्रेंस महज़ एक औपचारिकता बनकर रह गई हो। अध्यक्ष अधूरे विकास कार्यों और पंचायत योजनाओं पर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दे पाए, जिससे सवालों की गहराई और बढ़ गई। बताया गया कि वे लगातार मोबाइल देखकर जवाब दे रहे थे, जिस पर वहां मौजूद लोगों में उनकी तैयारी को लेकर कानाफूसी तेज़ रही। अब पूरे ज़िले में इस बात की चर्चा चल रही है कि प्रेस कॉन्फ्रेंस जवाब देने के लिए बुलाई गई थी या सिर्फ़ अपनी छवि बचाने का प्रयास था।1
- दलित समाज के एक बच्चे को कुछ हिंदुओं ने हैंडपंप से पानी पीते हुए देखने के बाद मारा।1
- विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर सिवनी जिला पंचायत परिसर में वृक्षारोपण का कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम के तहत पौधे लगाए गए।1
- मंडला जिले के सारस डोली के पोषक ग्राम मोहगांव में जल जीवन मिशन जमीनी हकीकत में पूरी तरह से फेल साबित हुआ है। यहां के ग्रामीण पीने के पानी के लिए नाले पर निर्भर होने को मजबूर हैं, क्योंकि महीनों से बंद पड़े हैंडपंपों के कारण उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।1
- विकासखंड मवई के ग्राम दाडी में आयोजित 'रात्रि चौपाल और रात्रि विश्राम' कार्यक्रम के दौरान एक अनूठी तस्वीर देखने को मिली। इस पहल के तहत, कलेक्टर, एसपी, सीईओ जिला पंचायत और पूरा प्रशासनिक दल ग्रामीणों के साथ ज़मीन पर बैठा और उनके साथ भोजन किया। इस दौरान, प्रशासनिक अधिकारियों ने ग्रामीणों की समस्याओं को बेहद करीब से समझा, जिससे क्षेत्र में प्रशासन और जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित हुआ।1
- बालाघाट जिले के सेलवा स्थित शराब दुकान के सामने अवैध कब्जा बरकरार है। बताया गया है कि शराब दुकान के अहाते बंद होने के बावजूद भी उन पर कब्जा बना हुआ है। इसके अतिरिक्त, बिजली के खंभों पर भी अतिक्रमण किया गया है, जिससे किसी बड़े हादसे का खतरा पैदा हो गया है।1
- सार्वजनिक सड़कों पर अवैध कब्जे को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, जिस पर नगर परिषद की चुप्पी पर भी प्रश्नचिह्न लगाया जा रहा है। लोगों द्वारा यह चिंता व्यक्त की जा रही है कि क्या संबंधित जिम्मेदार अधिकारी किसी बड़े हादसे के बाद ही इस समस्या पर ध्यान देंगे और अपनी नींद से जागेंगे?1
- मध्य प्रदेश के सिवनी में लाखों की लागत से बनी एक नई पुलिया महज सात दिनों के भीतर ही दरक गई है, जिसने एरिगेशन विभाग द्वारा किए गए निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस घटना ने एक सप्ताह के अंदर ही घटिया निर्माण की सारी पोल खोलकर रख दी है, क्योंकि पुलिया में चौड़ी दरारें उभर आई हैं और विकास के दावे बारिश से पहले ही बहने लगे हैं। कागजों पर मजबूत दिखने वाली यह पुलिया जमीन पर कमजोर साबित हुई है, जिससे करोड़ों के विकास दावों पर सीधे तौर पर प्रश्नचिन्ह लग गया है। इस विभागीय लापरवाही और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी पुलिया को लेकर ग्रामीणों में जबरदस्त आक्रोश है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह घटिया निर्माण का नतीजा है या कमीशनखोरी का खेल, क्योंकि जनता के पैसों से बनी यह सरकारी पुलिया एक सप्ताह के भीतर ही टूटने लगी है। इस घटना को विकास के नाम पर जनता के साथ खिलवाड़ के तौर पर देखा जा रहा है, और भोमा की यह दरकी हुई पुलिया अब एक भ्रष्ट सिस्टम की पहचान बन गई है।1