बंगाल में SIR पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा सवाल: 401 वोट से जीत, 8,785 नाम हटे 401 वोट से जीत, 8,785 नाम हटे… क्या कोर्ट नए चुनाव का आदेश दे सकता है? नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में Special Intensive Revision (SIR) के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए नामों और विधानसभा चुनाव के नतीजों के बीच संभावित संबंध का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। बुधवार, 26 अगस्त 2026 को सुनवाई के दौरान तृणमूल कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बंदोपाध्याय ने दावा किया कि 31 विधानसभा क्षेत्रों में BJP उम्मीदवारों की जीत का अंतर SIR के दौरान हटाए गए मतदाताओं की संख्या से कम था। मामले की सुनवाई CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ कर रही थी। 401 वोट की जीत, 8,785 मतदाता हटे दलील के दौरान AC-145 (सतगछिया) का उदाहरण दिया गया। बताया गया कि यहां जीत का अंतर महज 401 वोट था, जबकि SIR की प्रक्रिया में 8,785 मतदाताओं के नाम हटाए गए। इसी तरह एक अन्य निर्वाचन क्षेत्र में जीत का अंतर 316 वोट बताया गया, जबकि हटाए गए मतदाताओं की संख्या इससे कई गुना अधिक थी। इन आंकड़ों के आधार पर याचिकाकर्ता पक्ष ने चुनाव परिणामों पर संभावित प्रभाव की न्यायिक जांच की मांग का मुद्दा उठाया। CJI ने पूछा—क्या कोर्ट नए चुनाव करा सकता है? दलील सुनने के बाद CJI सूर्यकांत ने महत्वपूर्ण सवाल किया— “You can file the application, but can the Court direct fresh elections like this?” अर्थात, यदि SIR में नाम हटाए जाने और चुनावी जीत के अंतर के बीच ऐसा संबंध बताया जा रहा है, तो क्या सुप्रीम कोर्ट इस आधार पर सीधे किसी निर्वाचन क्षेत्र में नए चुनाव कराने का आदेश दे सकता है? कोर्ट की टिप्पणी से स्पष्ट है कि मतदाता सूची से नाम हटने का दावा और चुनाव परिणाम को कानूनी रूप से चुनौती देना दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। कोर्ट ने पूछा—चुनाव याचिकाएं दाखिल हुईं या नहीं? पीठ ने यह भी जानना चाहा कि जिन 31 विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव परिणाम प्रभावित होने का दावा किया जा रहा है, वहां निर्वाचित उम्मीदवारों के खिलाफ Election Petitions दाखिल की गई हैं या नहीं। यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि चुनाव परिणाम को चुनौती देने के लिए कानून में निर्धारित चुनाव याचिका की प्रक्रिया मौजूद है। पहले भी ECI की ओर से कहा गया था कि चुनाव परिणामों को चुनौती देने का उचित माध्यम चुनाव याचिका है। जस्टिस बागची ने उठाया सबसे अहम सवाल सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने एक महत्वपूर्ण व्यावहारिक पहलू पर ध्यान केंद्रित किया—SIR में जिन मतदाताओं के नाम हटाए गए, उनमें से कितने लोगों ने वास्तव में इस कार्रवाई के खिलाफ अपील की? उदाहरण के तौर पर उन्होंने सवाल का सार यह रखा कि यदि 100 नाम हटाए गए हों, जीत का अंतर 50 वोट हो और 60-70 लोग नाम हटाए जाने के खिलाफ अपील कर चुके हों, तो उस स्थिति का चुनाव परिणाम पर संभावित प्रभाव अलग तरीके से देखा जा सकता है। यानी केवल हटाए गए नामों की संख्या पर्याप्त नहीं होगी; यह भी देखना महत्वपूर्ण होगा कि कितने प्रभावित लोगों ने अपील की और उनकी अपीलों का क्या परिणाम रहा। सिर्फ 31 सीटों तक सीमित नहीं रहेगा मामला? सुनवाई में अदालत ने लंबित अपीलों की स्थिति और उनके समयबद्ध निपटारे को भी महत्वपूर्ण माना। पहले की सुनवाइयों में सुप्रीम कोर्ट ने SIR से जुड़ी अपीलों के शीघ्र निपटारे पर जोर दिया था। अब मामला केवल यह नहीं है कि कितने नाम हटाए गए, बल्कि यह भी महत्वपूर्ण हो सकता है कि उनमें से कितने लोगों ने अपील की, कितनी अपीलें लंबित हैं और क्या किसी निर्वाचन क्षेत्र में इन लंबित मामलों का चुनाव परिणाम से कोई कानूनी रूप से स्थापित संबंध बनता है। आंकड़ों ने बढ़ाई चुनावी बहस SIR के आंकड़ों को लेकर पहले भी विश्लेषण सामने आया है। एक स्वतंत्र विश्लेषण में 49 विधानसभा क्षेत्रों में SIR के दौरान adjudication के तहत गए मतदाताओं की संख्या उस समय के जीत के अंतर से अधिक बताई गई थी; हालांकि यह आंकड़ा अपने-आप चुनाव परिणाम पर प्रभाव साबित नहीं करता। यही अब इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा कानूनी सवाल है—क्या मतदाता सूची में हुई ऐसी संभावित गड़बड़ी को चुनाव परिणाम से जोड़ने के लिए पर्याप्त ठोस सबूत मौजूद हैं? 📌 Case: Mostari Banu v. Election Commission of India & Ors. W.P.(C) No. 1089/2025 & Connected Matters ⚖️ कोर्ट का रुख फिलहाल: सुप्रीम कोर्ट ने नए चुनाव का आदेश नहीं दिया है। अदालत ने इस दावे को अलग आवेदन के जरिए उठाने और संबंधित कानूनी प्रक्रिया के तहत जांचे जाने की संभावना पर सवाल किए हैं। बड़ा सवाल: अगर किसी सीट पर जीत का अंतर कुछ सौ वोट हो और SIR में हटाए गए मतदाताओं की संख्या हजारों में हो, तो क्या चुनाव परिणाम की न्यायिक समीक्षा के लिए यह अपने-आप में पर्याप्त आधार है—या फिर हर मामले में अलग चुनाव याचिका और ठोस साक्ष्य जरूरी होंगे?
बंगाल में SIR पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा सवाल: 401 वोट से जीत, 8,785 नाम हटे 401 वोट से जीत, 8,785 नाम हटे… क्या कोर्ट नए चुनाव का आदेश दे सकता है? नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में Special Intensive Revision (SIR) के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए नामों और विधानसभा चुनाव के नतीजों के बीच संभावित संबंध का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। बुधवार, 26 अगस्त 2026 को सुनवाई के दौरान तृणमूल कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बंदोपाध्याय ने दावा किया कि 31 विधानसभा क्षेत्रों में BJP उम्मीदवारों की जीत का अंतर SIR के दौरान हटाए गए मतदाताओं की संख्या से कम था। मामले की सुनवाई CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ कर रही थी। 401 वोट की जीत, 8,785 मतदाता हटे दलील के दौरान AC-145 (सतगछिया) का उदाहरण दिया गया। बताया गया कि यहां जीत का अंतर महज 401 वोट था, जबकि SIR की प्रक्रिया में 8,785 मतदाताओं के नाम हटाए गए। इसी तरह एक अन्य निर्वाचन क्षेत्र में जीत का अंतर 316 वोट बताया गया, जबकि हटाए गए मतदाताओं की संख्या इससे कई गुना अधिक थी। इन आंकड़ों के आधार पर याचिकाकर्ता पक्ष ने चुनाव परिणामों पर संभावित प्रभाव की न्यायिक जांच की मांग का मुद्दा उठाया। CJI ने पूछा—क्या कोर्ट नए चुनाव करा सकता है? दलील सुनने के बाद CJI सूर्यकांत ने महत्वपूर्ण सवाल किया— “You can file the application, but can the Court direct fresh elections like this?” अर्थात, यदि SIR में नाम हटाए जाने और चुनावी जीत के अंतर के बीच ऐसा संबंध बताया जा रहा है, तो क्या सुप्रीम कोर्ट इस आधार पर सीधे किसी निर्वाचन क्षेत्र में नए चुनाव कराने का आदेश दे सकता है? कोर्ट की टिप्पणी से स्पष्ट है कि मतदाता सूची से नाम हटने का दावा और चुनाव परिणाम को कानूनी रूप से चुनौती देना दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। कोर्ट ने पूछा—चुनाव याचिकाएं दाखिल हुईं या नहीं? पीठ ने यह भी जानना चाहा कि जिन 31 विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव परिणाम प्रभावित होने का दावा किया जा रहा है, वहां निर्वाचित उम्मीदवारों के खिलाफ Election Petitions दाखिल की गई हैं या नहीं। यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि चुनाव परिणाम को चुनौती देने के लिए कानून में निर्धारित चुनाव याचिका की प्रक्रिया मौजूद है। पहले भी ECI की ओर से कहा गया था कि चुनाव परिणामों को चुनौती देने का उचित माध्यम चुनाव याचिका है। जस्टिस बागची ने उठाया सबसे अहम सवाल सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने एक महत्वपूर्ण व्यावहारिक पहलू पर ध्यान केंद्रित किया—SIR में जिन मतदाताओं के नाम हटाए गए, उनमें से कितने लोगों ने वास्तव में इस कार्रवाई के खिलाफ अपील की? उदाहरण के तौर पर उन्होंने सवाल का सार यह रखा कि यदि 100 नाम हटाए गए हों, जीत का अंतर 50 वोट हो और 60-70 लोग नाम हटाए जाने के खिलाफ अपील कर चुके हों, तो उस स्थिति का चुनाव परिणाम पर संभावित प्रभाव अलग तरीके से देखा जा सकता है। यानी केवल हटाए गए नामों की संख्या पर्याप्त नहीं होगी; यह भी देखना महत्वपूर्ण होगा कि कितने प्रभावित लोगों ने अपील की और उनकी अपीलों का क्या परिणाम रहा। सिर्फ 31 सीटों तक सीमित नहीं रहेगा मामला? सुनवाई में अदालत ने लंबित अपीलों की स्थिति और उनके समयबद्ध निपटारे को भी महत्वपूर्ण माना। पहले की सुनवाइयों में सुप्रीम कोर्ट ने SIR से जुड़ी अपीलों के शीघ्र निपटारे पर जोर दिया था। अब मामला केवल यह नहीं है कि कितने नाम हटाए गए, बल्कि यह भी महत्वपूर्ण हो सकता है कि उनमें से कितने लोगों ने अपील की, कितनी अपीलें लंबित हैं और क्या किसी निर्वाचन क्षेत्र में इन लंबित मामलों का चुनाव परिणाम से कोई कानूनी रूप से स्थापित संबंध बनता है। आंकड़ों ने बढ़ाई चुनावी बहस SIR के आंकड़ों को लेकर पहले भी विश्लेषण सामने आया है। एक स्वतंत्र विश्लेषण में 49 विधानसभा क्षेत्रों में SIR के दौरान adjudication के तहत गए मतदाताओं की संख्या उस समय के जीत के अंतर से अधिक बताई गई थी; हालांकि यह आंकड़ा अपने-आप चुनाव परिणाम पर प्रभाव साबित नहीं करता। यही अब इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा कानूनी सवाल है—क्या मतदाता सूची में हुई ऐसी संभावित गड़बड़ी को चुनाव परिणाम से जोड़ने के लिए पर्याप्त ठोस सबूत मौजूद हैं? 📌 Case: Mostari Banu v. Election Commission of India & Ors. W.P.(C) No. 1089/2025 & Connected Matters ⚖️ कोर्ट का रुख फिलहाल: सुप्रीम कोर्ट ने नए चुनाव का आदेश नहीं दिया है। अदालत ने इस दावे को अलग आवेदन के जरिए उठाने और संबंधित कानूनी प्रक्रिया के तहत जांचे जाने की संभावना पर सवाल किए हैं। बड़ा सवाल: अगर किसी सीट पर जीत का अंतर कुछ सौ वोट हो और SIR में हटाए गए मतदाताओं की संख्या हजारों में हो, तो क्या चुनाव परिणाम की न्यायिक समीक्षा के लिए यह अपने-आप में पर्याप्त आधार है—या फिर हर मामले में अलग चुनाव याचिका और ठोस साक्ष्य जरूरी होंगे?
- नेपाल में बाढ़ का खौफनाक मंजर: छत पर फंसे शख्स ने कपड़ा घुमाकर मांगी मदद, हेलीकॉप्टर ने किया सुरक्षित रेस्क्यू नेपाल में बाढ़ का खौफनाक मंजर: छत पर फंसे शख्स ने कपड़ा घुमाकर मांगी मदद, हेलीकॉप्टर ने किया सुरक्षित रेस्क्यू नेपाल। नेपाल में भीषण फ्लैश फ्लड के बीच रेस्क्यू ऑपरेशन का एक दिल दहला देने वाला वीडियो सामने आया है। चारों तरफ पानी, कीचड़ और मलबे से घिरे एक व्यक्ति ने इमारत की छत पर फंसने के बाद आसमान में उड़ रहे हेलीकॉप्टर को कपड़ा घुमाकर मदद का संकेत दिया। हेलीकॉप्टर ने संकेत मिलने के बाद वहां पहुंचकर व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। छत बनी जिंदगी का आखिरी सहारा वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि बाढ़ की तेज धारा ने आसपास के इलाके को पूरी तरह मलबे और कीचड़ में बदल दिया है। व्यक्ति एक इमारत की छत पर फंसा हुआ था और नीचे उतरने का कोई सुरक्षित रास्ता नहीं था। इसी दौरान उसे आसमान में रेस्क्यू हेलीकॉप्टर दिखाई दिया। व्यक्ति ने कपड़ा घुमाकर हेलीकॉप्टर का ध्यान अपनी ओर खींचा। संकेत मिलने के बाद हेलीकॉप्टर ने उसके पास पहुंचकर रेस्क्यू किया। नेपाल में बड़े पैमाने पर रेस्क्यू अभियान यह घटना नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड के बीच सामने आई है। भारी मात्रा में पानी, चट्टान और मलबे की तेज धारा ने कई इलाकों में घरों, सड़कों और पुलों को तबाह कर दिया है। सड़क संपर्क टूटने के कारण कई दुर्गम क्षेत्रों में फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए हेलीकॉप्टर रेस्क्यू बेहद महत्वपूर्ण हो गया है। रिपोर्टों के मुताबिक नेपाल में राहत एवं बचाव दल हेलीकॉप्टरों की मदद से फंसे लोगों को निकालने और प्रभावित क्षेत्रों में जरूरी सामान पहुंचाने में जुटे हैं। एक नेपाली अधिकारी के अनुसार अब तक 239 लोगों को हेलीकॉप्टर से निकाला जा चुका है। एक इशारा और बच गई जिंदगी बाढ़ की तबाही के बीच छत पर फंसे व्यक्ति का हेलीकॉप्टर को कपड़ा घुमाकर संकेत देना और फिर सुरक्षित निकाला जाना इस आपदा के बीच उम्मीद और मानवीय रेस्क्यू का भावुक दृश्य बन गया है। घटना/वीडियो अपडेट: 26–27 अगस्त 20261
- गुना अंडरपास की जर्जर हालत पर उठी आवाज, DRM भोपाल से तत्काल जीर्णोद्धार की मांग गुना रेलवे स्टेशन एवं EN कार्यालय के समीप स्थित अंडरपास की जर्जर हालत को लेकर यात्री सेवा संगठन मध्य प्रदेश के अध्यक्ष एवं पूर्व पश्चिम मध्य रेलवे रेल उपभोक्ता परामर्शदात्री समिति (XZRUCC) सदस्य सुनील आचार्य ने मंडल रेल प्रबंधक (DRM) भोपाल सहित संबंधित DEN एवं EN अधिकारियों को पत्र भेजकर तत्काल निरीक्षण एवं जीर्णोद्धार की मांग की है। आचार्य ने पत्र में बताया कि यह अंडरपास गुना रेलवे स्टेशन एवं EN कार्यालय से लगभग 200 मीटर की दूरी पर स्थित है। अंडरपास के दूसरी ओर श्रीराम कॉलोनी सहित दर्जनों कॉलोनियां हैं, जिनमें रहने वाले हजारों छात्र-छात्राओं एवं आम राहगीरों के लिए यह प्रमुख आवागमन मार्ग है। कॉलोनियों को जोड़ने वाला यह मार्ग कम दूरी का होने के कारण दिन-रात लोगों के आवागमन में उपयोग होता है। उन्होंने बताया कि अंडरपास के ऊपर से कोटा-बीना एवं इंदौर रेल लाइन गुजरती हैं और लगातार रेल यातायात संचालित होता रहता है।1
- बरसाने में राधा रानी के दर्शन… क्या अब इसके लिए भी देने पड़ते हैं पैसे? 🙏 बरसाने में राधा रानी के दर्शन… क्या अब इसके लिए भी देने पड़ते हैं पैसे? 🙏 बरसाने में श्री राधा रानी के दर्शन करने पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के बीच एक सवाल चर्चा में है—क्या राधा रानी के दर्शन के लिए भी पैसे देने पड़ते हैं? आस्था के इस पावन धाम में दर्शन व्यवस्था को लेकर आपकी क्या राय है? अपनी बात कमेंट में जरूर बताएं। 🙏🌸1
- महंगाई के खिलाफ कांग्रेस का जोरदार प्रदर्शन बरसते पानी में भी सड़क पर उतरे कार्यकर्ता महंगाई के खिलाफ कांग्रेस का जोरदार प्रदर्शन बरसते पानी में भी सड़क पर उतरे कार्यकर्ता1
- भारी भीड़ सूरत में आज देखने को मिली और आप लोगों को बता दूं वीडियो को शेयर करें1
- 2036 ओलंपिक की मेजबानी को लेकर भारत की तैयारी तेज. | 2036 ओलंपिक की मेजबानी को लेकर भारत की तैयारी तेज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खेलो इंडिया और ओलंपिक मिशन को लेकर खेल विशेषज्ञों व युवा एथलीटों के साथ संवाद कार्यक्रम की रूपरेखा तय की है। 2036 ओलंपिक की दावेदारी को मजबूत करने के लिए देश भर में विश्वस्तरीय स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का निर्माण और जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं को तराशने के लिए व्यापक वित्तीय सहायता योजनाएं लागू की जा रही हैं।1
- ग्रामीणों की समस्या को लेकर विधानसभा में याचिका प्रस्तुत करेंगे विधायक इंजीनियर हरि बाबू राय, ग्रामीणों की समस्या को लेकर विधानसभा में याचिका प्रस्तुत करेंगे विधायक इंजी. हरिबाबू राय अशोकनगर। विधानसभा क्षेत्र के ग्राम कुन्दौली में भ्रमण के दौरान विधायक इंजी. हरिबाबू राय ने ग्रामीणों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। इस दौरान ग्रामीणों ने दूसरे गांव को जोड़ने वाली कच्ची सड़क पर बनी पुलिया के बरसात में क्षतिग्रस्त होकर बह जाने की समस्या से अवगत कराया। ग्रामीणों ने बताया कि पुलिया क्षतिग्रस्त होने के कारण आवागमन बाधित हो गया है और उन्हें दूसरी ओर जाने के लिए करीब 10 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ रहा है। इससे ग्रामीणों, विद्यार्थियों, किसानों एवं अन्य लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विधायक इंजी. हरिबाबू राय ने मौके पर पहुंचकर क्षतिग्रस्त पुलिया एवं मार्ग की स्थिति का जायजा लिया तथा ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि उनकी समस्या के स्थायी समाधान के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे। विधायक ने बताया कि ग्रामीणों की इस महत्वपूर्ण समस्या को याचिका के माध्यम से विधानसभा के समक्ष रखा जाएगा, ताकि संबंधित विभाग का ध्यान आकर्षित कर पुलिया के शीघ्र निर्माण एवं आवागमन की व्यवस्था सुचारू कराने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। विधायक ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क और आवागमन से जुड़ी समस्याओं का समाधान उनकी प्राथमिकता है और क्षेत्रवासियों की समस्याओं को उचित मंच पर मजबूती से उठाया जाएगा।1
- 11 गोवंश की मौत के बाद नेशनल हाइवे-46 पर बवाल,ग्रामीणों ने लगाया चक्काजाम; ट्रक चालक फरार गुना। NH-46 हाईवे पर बुधवार देर रात एक दर्दनाक हादसे में 11 गोवंश की मौत हो गई। चिंताहरण मंदिर के पास सड़क पर बैठे गोवंश को तेज रफ्तार ट्रक ने कुचल दिया। हादसे के बाद मौके पर गोवंश के शव बिखर गए, जिसके चलते ग्रामीणों और गौसेवकों में भारी आक्रोश फैल गया। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार ट्रक चालक हादसे के बाद मौके से फरार हो गया। *हादसे के बाद NH-46 पर दो घंटे चक्काजाम* घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण और गौसेवक मौके पर पहुंच गए। ग्रामीणों ने आवारा गोवंश की समस्या के स्थायी समाधान, सड़क पर स्पीड ब्रेकर, चेतावनी संकेतक और पर्याप्त स्ट्रीट लाइट लगाने की मांग को लेकर NH-46 पर चक्काजाम कर दिया। जाम के कारण हाईवे के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई और यातायात प्रभावित रहा। पुलिस एवं प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और प्रदर्शन कर रहे लोगों से बातचीत की। प्रशासन की ओर से उचित कार्रवाई का आश्वासन मिलने के बाद करीब दो घंटे बाद ग्रामीणों ने प्रदर्शन समाप्त किया। *ट्रक चालक फरार, तलाश में जुटी पुलिस* हादसे के बाद पुलिस ने सड़क से मृत गोवंश को हटवाकर आवश्यक कार्रवाई शुरू की। रिपोर्ट के मुताबिक ट्रक चालक मौके से फरार है और पुलिस ने उसके खिलाफ मामला दर्ज कर तलाश शुरू कर दी है। आसपास लगे CCTV कैमरों और अन्य माध्यमों से ट्रक की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है। *ग्रामीणों का सवाल—हादसे के बाद ही क्यों जागता है प्रशासन?* ग्रामीणों का आरोप है कि NH-46 पर सड़क किनारे बैठने वाले आवारा गोवंश की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। रात में पर्याप्त रोशनी और चेतावनी संकेत नहीं होने से वाहन चालकों को सड़क पर बैठे पशु समय पर दिखाई नहीं देते। ग्रामीणों ने प्रशासन से हादसे के बाद अस्थायी कार्रवाई के बजाय स्थायी व्यवस्था करने की मांग की है। बड़ा सवाल: जब हाईवे पर आवारा गोवंश की मौजूदगी दुर्घटनाओं का लगातार खतरा बन रही है, तो क्या प्रशासन हादसे का इंतजार किए बिना प्रभावी व्यवस्था करेगा?1