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किशनगंज जिले के पोठिया अंतर्गत छत्तरगाछ में अवैध बालू खनन के खिलाफ कैंप प्रभारी ने सख्त कार्रवाई की है। पुलिस ने एक विशेष अभियान चलाकर बालू से लदे दो ट्रैक्टर जब्त किए। इस कठोर और त्वरित कार्रवाई से स्थानीय खनन माफियाओं के बीच हड़कंप मच गया है।

10 hrs ago
user_Md Abu Farhan
Md Abu Farhan
Kishanganj, Bihar•
10 hrs ago
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किशनगंज जिले के पोठिया अंतर्गत छत्तरगाछ में अवैध बालू खनन के खिलाफ कैंप प्रभारी ने सख्त कार्रवाई की है। पुलिस ने एक विशेष अभियान चलाकर बालू से लदे दो ट्रैक्टर जब्त किए। इस कठोर और त्वरित कार्रवाई से स्थानीय खनन माफियाओं के बीच हड़कंप मच गया है।

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  • शनिवार को टेढ़ागाछ अंचल कार्यालय में एक जनता दरबार का आयोजन किया गया, जिसमें भूमि, रास्ता और राजस्व से संबंधित मामलों की सुनवाई की गई। अंचल अधिकारी शशि कुमार की अध्यक्षता में आयोजित इस दरबार में कई मामलों का सफलतापूर्वक निष्पादन किया गया, जबकि जांच और आवश्यक दस्तावेजों की अनुपलब्धता के कारण कुछ मामलों को लंबित रखा गया। इस दौरान नए आवेदन भी प्राप्त हुए। अधिकारियों ने लंबित मामलों के त्वरित निपटारे और भूमि विवादों के शांतिपूर्ण समाधान पर विशेष जोर दिया। अपनी समस्याओं को लेकर विभिन्न पंचायतों से ग्रामीण इस जनता दरबार में पहुँचे।
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    शनिवार को टेढ़ागाछ अंचल कार्यालय में एक जनता दरबार का आयोजन किया गया, जिसमें भूमि, रास्ता और राजस्व से संबंधित मामलों की सुनवाई की गई। अंचल अधिकारी शशि कुमार की अध्यक्षता में आयोजित इस दरबार में कई मामलों का सफलतापूर्वक निष्पादन किया गया, जबकि जांच और आवश्यक दस्तावेजों की अनुपलब्धता के कारण कुछ मामलों को लंबित रखा गया। इस दौरान नए आवेदन भी प्राप्त हुए। अधिकारियों ने लंबित मामलों के त्वरित निपटारे और भूमि विवादों के शांतिपूर्ण समाधान पर विशेष जोर दिया। अपनी समस्याओं को लेकर विभिन्न पंचायतों से ग्रामीण इस जनता दरबार में पहुँचे।
    user_Md Abu Farhan
    Md Abu Farhan
    Kishanganj, Bihar•
    13 hrs ago
  • वाराणसी की एक ऐतिहासिक मस्जिद को लेकर उठे विवाद ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जो सिर्फ ज़मीन के मालिकाना हक तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह भी प्रश्न उठा रहे हैं कि क्या इतिहास को नज़रअंदाज़ करके कोई फैसला किया जा सकता है। यह विवाद तब सामने आया जब यह दावा किया गया कि एक प्राचीन मस्जिद रेलवे की ज़मीन पर बनी हुई है या उसने रेलवे की भूमि पर कब्ज़ा कर रखा है। इस पर जनता पूछ रही है कि यदि यह मस्जिद वास्तव में सात-आठ सौ वर्ष पुरानी है, तो वह भारतीय रेलवे की ज़मीन पर कैसे कब्ज़ा कर सकती है, जबकि भारतीय रेलवे का इतिहास स्वयं लगभग डेढ़ से पौने दो सौ वर्ष पुराना है। यह एक ऐसा प्रश्न है जिसका उत्तर भावनाओं से नहीं, बल्कि तथ्यों और दस्तावेज़ों के आधार पर दिया जाना चाहिए। सवाल यह है कि क्या कोई इमारत अपने अस्तित्व के कई सौ वर्ष बाद बने किसी संस्थान की ज़मीन पर कब्ज़ा कर सकती है? यह भी स्पष्ट किया गया है कि चाहे ज़मीन किसी सरकारी संस्था की हो या किसी धार्मिक स्थल की, कानून सबके लिए समान होना चाहिए। यदि वास्तव में ज़मीन रेलवे की है तो उसके प्रमाण जनता के सामने रखे जाएँ, और यदि ऐतिहासिक रिकॉर्ड मस्जिद के पक्ष में हैं तो उन्हें भी ईमानदारी के साथ स्वीकार किया जाए। दुर्भाग्य से, देश में ऐसे मामलों को अक्सर तथ्यों की अपेक्षा राजनीतिक और सामाजिक पूर्वाग्रहों के आधार पर अधिक उछाला जाता है। यह देश संविधान से चलेगा, शोर-शराबे से नहीं। चाहे ऐतिहासिक विरासत हो, धार्मिक स्थल हो या सरकारी संस्थान, हर मामले का फैसला अदालतों, कानूनी दस्तावेज़ों और प्रमाणिक रिकॉर्ड के आधार पर होना चाहिए। किसी भी समुदाय की भावनाओं से खेलना या इतिहास को अपनी सुविधा के अनुसार प्रस्तुत करना देश के हित में नहीं है। आज आवश्यकता इस बात की है कि सरकार, रेलवे प्रशासन और संबंधित संस्थाएँ पूरी पारदर्शिता के साथ सभी तथ्य जनता के सामने रखें। लोकतंत्र की मांग है कि न्याय की सर्वोच्चता हो, न कि शक्ति और प्रभाव की। यदि सच्चाई किसी एक पक्ष के साथ है, तो उसे छिपाने के बजाय सामने लाया जाए, ताकि अफवाहों, शंकाओं और निराधार आरोपों का हमेशा के लिए अंत हो सके।
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    वाराणसी की एक ऐतिहासिक मस्जिद को लेकर उठे विवाद ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जो सिर्फ ज़मीन के मालिकाना हक तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह भी प्रश्न उठा रहे हैं कि क्या इतिहास को नज़रअंदाज़ करके कोई फैसला किया जा सकता है। यह विवाद तब सामने आया जब यह दावा किया गया कि एक प्राचीन मस्जिद रेलवे की ज़मीन पर बनी हुई है या उसने रेलवे की भूमि पर कब्ज़ा कर रखा है। इस पर जनता पूछ रही है कि यदि यह मस्जिद वास्तव में सात-आठ सौ वर्ष पुरानी है, तो वह भारतीय रेलवे की ज़मीन पर कैसे कब्ज़ा कर सकती है, जबकि भारतीय रेलवे का इतिहास स्वयं लगभग डेढ़ से पौने दो सौ वर्ष पुराना है। यह एक ऐसा प्रश्न है जिसका उत्तर भावनाओं से नहीं, बल्कि तथ्यों और दस्तावेज़ों के आधार पर दिया जाना चाहिए।

सवाल यह है कि क्या कोई इमारत अपने अस्तित्व के कई सौ वर्ष बाद बने किसी संस्थान की ज़मीन पर कब्ज़ा कर सकती है? यह भी स्पष्ट किया गया है कि चाहे ज़मीन किसी सरकारी संस्था की हो या किसी धार्मिक स्थल की, कानून सबके लिए समान होना चाहिए। यदि वास्तव में ज़मीन रेलवे की है तो उसके प्रमाण जनता के सामने रखे जाएँ, और यदि ऐतिहासिक रिकॉर्ड मस्जिद के पक्ष में हैं तो उन्हें भी ईमानदारी के साथ स्वीकार किया जाए। दुर्भाग्य से, देश में ऐसे मामलों को अक्सर तथ्यों की अपेक्षा राजनीतिक और सामाजिक पूर्वाग्रहों के आधार पर अधिक उछाला जाता है।

यह देश संविधान से चलेगा, शोर-शराबे से नहीं। चाहे ऐतिहासिक विरासत हो, धार्मिक स्थल हो या सरकारी संस्थान, हर मामले का फैसला अदालतों, कानूनी दस्तावेज़ों और प्रमाणिक रिकॉर्ड के आधार पर होना चाहिए। किसी भी समुदाय की भावनाओं से खेलना या इतिहास को अपनी सुविधा के अनुसार प्रस्तुत करना देश के हित में नहीं है। आज आवश्यकता इस बात की है कि सरकार, रेलवे प्रशासन और संबंधित संस्थाएँ पूरी पारदर्शिता के साथ सभी तथ्य जनता के सामने रखें। लोकतंत्र की मांग है कि न्याय की सर्वोच्चता हो, न कि शक्ति और प्रभाव की। यदि सच्चाई किसी एक पक्ष के साथ है, तो उसे छिपाने के बजाय सामने लाया जाए, ताकि अफवाहों, शंकाओं और निराधार आरोपों का हमेशा के लिए अंत हो सके।
    user_Zafar Rabbani
    Zafar Rabbani
    पोठिया, किशनगंज, बिहार•
    5 hrs ago
  • आज एक व्यक्ति बाढ़ का जायजा लेने के लिए गया, जहाँ उसने देखा कि उसके अपने आदमियों ने भारी मात्रा में तांबा तोड़ दिया है। इस घटना से उसे बहुत दुख हुआ और इसी कारण उसे उदास होकर घर वापस लौटना पड़ा।
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    आज एक व्यक्ति बाढ़ का जायजा लेने के लिए गया, जहाँ उसने देखा कि उसके अपने आदमियों ने भारी मात्रा में तांबा तोड़ दिया है। इस घटना से उसे बहुत दुख हुआ और इसी कारण उसे उदास होकर घर वापस लौटना पड़ा।
    user_Amit kumar
    Amit kumar
    Singer कुरसाकट्टा, अररिया, बिहार•
    6 hrs ago
  • एक महिला ने गहरे दुख और सदमे के साथ अपनी आपबीती साझा की है, जिसमें उसने बताया कि जिसे उसने स्वयं पाल-पोसकर बड़ा किया, उसी के पति ने उसका सुहाग उजाड़ दिया। महिला के इस बयान से स्पष्ट होता है कि वह इस अकल्पनीय विश्वासघात से स्तब्ध है, जहाँ उसके द्वारा पाले गए व्यक्ति के पति ने ही उसे ऐसा गहरा आघात दिया जिससे उसके विवाहित जीवन पर संकट आ गया है।
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    एक महिला ने गहरे दुख और सदमे के साथ अपनी आपबीती साझा की है, जिसमें उसने बताया कि जिसे उसने स्वयं पाल-पोसकर बड़ा किया, उसी के पति ने उसका सुहाग उजाड़ दिया। महिला के इस बयान से स्पष्ट होता है कि वह इस अकल्पनीय विश्वासघात से स्तब्ध है, जहाँ उसके द्वारा पाले गए व्यक्ति के पति ने ही उसे ऐसा गहरा आघात दिया जिससे उसके विवाहित जीवन पर संकट आ गया है।
    user_Niraj Kumar
    Niraj Kumar
    News Anchor Araria, Bihar•
    7 hrs ago
  • मनीष एसके झा की ओर से 'पोंडती खान सर' को बिहार से बाहर भगाने की इच्छा व्यक्त किए जाने के चौंकाने वाले दावे सामने आए हैं। इन दावों पर, खान सर की टीम ने तत्काल और करारा जवाब दिया है।
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    मनीष एसके झा की ओर से 'पोंडती खान सर' को बिहार से बाहर भगाने की इच्छा व्यक्त किए जाने के चौंकाने वाले दावे सामने आए हैं। इन दावों पर, खान सर की टीम ने तत्काल और करारा जवाब दिया है।
    user_Luck ashish
    Luck ashish
    Araria, Bihar•
    7 hrs ago
  • पूर्णिया जिले की तालबारी पंचायत के कोहबारा घाट क्षेत्र में 19 जून 2026 को नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। मिली तस्वीरों के अनुसार, नदी का पानी आसपास के निचले इलाकों और खेतों तक फैल गया है, जिससे क्षेत्र में बाढ़ आने की आशंका गहरी हो गई है। यदि लगातार बारिश जारी रहती है, तो आने वाले दिनों में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होने से इनकार नहीं किया जा सकता है। स्थानीय ग्रामीणों ने बताया है कि बरसात के मौसम में हर साल नदी का जलस्तर बढ़ने से आवागमन के साथ-साथ खेती-बाड़ी भी प्रभावित होती है। इसे देखते हुए ग्रामीणों ने प्रशासन से समय रहते आवश्यक तैयारियां करने और निगरानी बढ़ाने की मांग की है। इस स्थिति के मद्देनजर, नदी किनारे रहने वाले लोगों से सतर्क रहने, प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करने और किसी भी आपात स्थिति की सूचना तुरंत संबंधित अधिकारियों को देने की अपील की गई है।
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    पूर्णिया जिले की तालबारी पंचायत के कोहबारा घाट क्षेत्र में 19 जून 2026 को नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। मिली तस्वीरों के अनुसार, नदी का पानी आसपास के निचले इलाकों और खेतों तक फैल गया है, जिससे क्षेत्र में बाढ़ आने की आशंका गहरी हो गई है। यदि लगातार बारिश जारी रहती है, तो आने वाले दिनों में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होने से इनकार नहीं किया जा सकता है।

स्थानीय ग्रामीणों ने बताया है कि बरसात के मौसम में हर साल नदी का जलस्तर बढ़ने से आवागमन के साथ-साथ खेती-बाड़ी भी प्रभावित होती है। इसे देखते हुए ग्रामीणों ने प्रशासन से समय रहते आवश्यक तैयारियां करने और निगरानी बढ़ाने की मांग की है।

इस स्थिति के मद्देनजर, नदी किनारे रहने वाले लोगों से सतर्क रहने, प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करने और किसी भी आपात स्थिति की सूचना तुरंत संबंधित अधिकारियों को देने की अपील की गई है।
    user_कोहबारा & तालबारी पंचायत न्यूज़
    कोहबारा & तालबारी पंचायत न्यूज़
    अमौर, पूर्णिया, बिहार•
    21 hrs ago
  • दिनांक 20 जून 2026 को तलबाड़ी पंचायत के अंतर्गत स्थित कोहबारा घाट क्षेत्र में नदी का जलस्तर लगातार बढ़ता हुआ दिख रहा है। नदी के किनारे का बड़ा हिस्सा पानी से भर चुका है और आसपास के निचले इलाकों में भी जलभराव की स्थिति बनने लगी है, जिससे क्षेत्र में बाढ़ की आशंका बढ़ गई है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से पानी का बहाव तेज हुआ है। इस स्थिति पर प्रशासन और ग्रामीण लगातार नजर बनाए हुए हैं। लोगों से अपील की गई है कि वे नदी के किनारे जाने से बचें तथा किसी भी आपात स्थिति में सुरक्षित स्थानों की ओर जाने के लिए तैयार रहें। पशुपालकों और किसानों को भी विशेष रूप से सतर्क रहने की सलाह दी गई है। यदि क्षेत्र में लगातार वर्षा जारी रहती है, तो आने वाले दिनों में जलस्तर और अधिक बढ़ सकता है। फिलहाल, स्थिति चिंताजनक बनी हुई है, लेकिन प्रशासनिक निगरानी लगातार जारी है।
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    दिनांक 20 जून 2026 को तलबाड़ी पंचायत के अंतर्गत स्थित कोहबारा घाट क्षेत्र में नदी का जलस्तर लगातार बढ़ता हुआ दिख रहा है। नदी के किनारे का बड़ा हिस्सा पानी से भर चुका है और आसपास के निचले इलाकों में भी जलभराव की स्थिति बनने लगी है, जिससे क्षेत्र में बाढ़ की आशंका बढ़ गई है।

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से पानी का बहाव तेज हुआ है। इस स्थिति पर प्रशासन और ग्रामीण लगातार नजर बनाए हुए हैं। लोगों से अपील की गई है कि वे नदी के किनारे जाने से बचें तथा किसी भी आपात स्थिति में सुरक्षित स्थानों की ओर जाने के लिए तैयार रहें। पशुपालकों और किसानों को भी विशेष रूप से सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

यदि क्षेत्र में लगातार वर्षा जारी रहती है, तो आने वाले दिनों में जलस्तर और अधिक बढ़ सकता है। फिलहाल, स्थिति चिंताजनक बनी हुई है, लेकिन प्रशासनिक निगरानी लगातार जारी है।
    user_कोहबारा & तालबारी पंचायत न्यूज़
    कोहबारा & तालबारी पंचायत न्यूज़
    अमौर, पूर्णिया, बिहार•
    20 hrs ago
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