“जूनियर वकील – वो आवाज़ जो सुनाई नहीं देती…” “जूनियर वकील” अदालत में सबसे पहले आता है और सबसे आख़िर में जाता है, लेकिन उसकी मौजूदगी को सबसे कम महसूस किया जाता है… क़ानून की किताबों में उसका कोई अलग अध्याय नहीं, फिर भी हर फ़ाइल, हर तारीख़, हर मुक़दमे में उसकी छाया मौजूद रहती है… कॉलेज में सपने पढ़ाए जाते हैं – “वकील बनो, समाज बदलो”, लेकिन कोर्ट में आकर सबसे पहले इंसान टूटता है, सिस्टम नहीं… बार काउंसिल की फीस, वेलफेयर फंड, परीक्षा के फ़ॉर्म — सब भरने के बाद जेब खाली और उम्मीदें उधार में चली जाती हैं… घरवालों को लगता है – “अब तो वकील बन गया, अब कमाएगा”, पर जूनियर वकील पहले सीखे बिना कमाने का अपराध भुगतता है… सीनियर के चैंबर में दाख़िला ऐसे मिलता है जैसे कोई एहसान मिल गया हो, और बदले में आत्मसम्मान गिरवी रख दिया जाता है… मोटरसाइकिल, फाइलों का बोझ और सीनियर का गुस्सा — यही जूनियर वकील की रोज़ की किट होती है… तारीख़ लेना, पेशकार को मनाना, बाबू के आगे हाथ जोड़ना — यह सब “अनुभव” कहलाता है… सीनियर की एक डांट, पूरे दिन की मेहनत पर भारी पड़ जाती है… चाय कभी खुद के पैसों से, और कई बार सीनियर के मूड के हिसाब से… रात देर से घर लौटकर थकी आँखों में सपने सजाए रखना जूनियर वकील की मजबूरी है… वह मुस्कुराता है ताकि माँ-बाप को चिंता न हो, और चुप रहता है ताकि चैंबर बचा रहे… सालों की जूनियरशिप के बाद भी “वेतन” शब्द सिर्फ़ दूसरों के पेशों में होता है… गलत बात पर सवाल उठाओ तो सीखने वाला नहीं, “बदतमीज़ जूनियर” घोषित कर दिए जाते हो… शादी की उम्र निकलती जाती है, रिश्ते पूछते हैं – “कमाई कितनी है?”, और जवाब में सिर्फ़ खामोशी होती है… अपनी किताबें खरीदने की हैसियत नहीं, और दूसरों की किताबों पर हक़ भी नहीं… दोस्त छूटते हैं, रिश्ते टूटते हैं, क्योंकि कोर्ट कभी इंतज़ार नहीं करता… अपना लाया हुआ मुक़दमा भी जूनियर का नहीं रहता, फीस पूरी जाती है, हिस्सा शून्य… अदालत में उसे सिर्फ़ “तारीख़ वाला वकील” समझा जाता है… समाज उसे “वकील साहब” कहता है, पर उसकी कमाई मज़दूरी से भी कम होती है… दूसरा काम करने की सोचे तो लाइसेंस पर तलवार लटक जाती है… चैंबर छोड़ा तो बदनामी तय, क्योंकि मुफ्त की मेहनत जो छिन गई… जब कभी आज़ाद होकर वकालत शुरू करता है, तो यही सवाल सालता है — “इतने साल क्यों सहा?” फिर भी अगली सुबह वही काला कोट पहनकर वही उम्मीद लेकर अदालत पहुँच जाता है… क्योंकि जूनियर वकील हारता नहीं है, वह बस रोज़ थोड़ा-थोड़ा टूटता है… ✍️ एक और जूनियर वकील की कलम से
“जूनियर वकील – वो आवाज़ जो सुनाई नहीं देती…” “जूनियर वकील” अदालत में सबसे पहले आता है और सबसे आख़िर में जाता है, लेकिन उसकी मौजूदगी को सबसे कम महसूस किया जाता है… क़ानून की किताबों में उसका कोई अलग अध्याय नहीं, फिर भी हर फ़ाइल, हर तारीख़, हर मुक़दमे में उसकी छाया मौजूद रहती है… कॉलेज में सपने पढ़ाए जाते हैं – “वकील बनो, समाज बदलो”, लेकिन कोर्ट में आकर सबसे पहले इंसान टूटता है, सिस्टम नहीं… बार काउंसिल की फीस, वेलफेयर फंड, परीक्षा के फ़ॉर्म — सब भरने के बाद जेब खाली और उम्मीदें उधार में चली जाती हैं… घरवालों को लगता है – “अब तो वकील बन गया, अब कमाएगा”, पर जूनियर वकील पहले सीखे बिना कमाने का अपराध भुगतता है… सीनियर के चैंबर में दाख़िला ऐसे मिलता है जैसे कोई एहसान मिल गया हो, और बदले में आत्मसम्मान गिरवी रख दिया जाता है… मोटरसाइकिल, फाइलों का बोझ और सीनियर का गुस्सा — यही जूनियर वकील की रोज़ की किट होती है… तारीख़ लेना, पेशकार को मनाना, बाबू के आगे हाथ जोड़ना — यह सब “अनुभव” कहलाता है… सीनियर की एक डांट, पूरे दिन की मेहनत पर भारी पड़ जाती है… चाय कभी खुद के पैसों से, और कई बार सीनियर के मूड के हिसाब से… रात देर से घर लौटकर थकी आँखों में सपने सजाए रखना जूनियर वकील की मजबूरी है… वह मुस्कुराता है ताकि माँ-बाप को चिंता न हो, और चुप रहता है ताकि चैंबर बचा रहे… सालों की जूनियरशिप के बाद भी “वेतन” शब्द सिर्फ़ दूसरों के पेशों में होता है… गलत बात पर सवाल उठाओ तो सीखने वाला नहीं, “बदतमीज़ जूनियर” घोषित कर दिए जाते हो… शादी की उम्र निकलती जाती है, रिश्ते पूछते हैं – “कमाई कितनी है?”, और जवाब में सिर्फ़ खामोशी होती है… अपनी किताबें खरीदने की हैसियत नहीं, और दूसरों की किताबों पर हक़ भी नहीं… दोस्त छूटते हैं, रिश्ते टूटते हैं, क्योंकि कोर्ट कभी इंतज़ार नहीं करता… अपना लाया हुआ मुक़दमा भी जूनियर का नहीं रहता, फीस पूरी जाती है, हिस्सा शून्य… अदालत में उसे सिर्फ़ “तारीख़ वाला वकील” समझा जाता है… समाज उसे “वकील साहब” कहता है, पर उसकी कमाई मज़दूरी से भी कम होती है… दूसरा काम करने की सोचे तो लाइसेंस पर तलवार लटक जाती है… चैंबर छोड़ा तो बदनामी तय, क्योंकि मुफ्त की मेहनत जो छिन गई… जब कभी आज़ाद होकर वकालत शुरू करता है, तो यही सवाल सालता है — “इतने साल क्यों सहा?” फिर भी अगली सुबह वही काला कोट पहनकर वही उम्मीद लेकर अदालत पहुँच जाता है… क्योंकि जूनियर वकील हारता नहीं है, वह बस रोज़ थोड़ा-थोड़ा टूटता है… ✍️ एक और जूनियर वकील की कलम से
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- पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न जय जवान जय किसान का नारा बुलंद करने वाले लाल बहादुर शास्त्री जी की पुण्य तिथि पर भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं 💐💐💐🏵️🏵️1
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- मझगवा कटनी में ट्रकों का जमावड़ा। कभी भी हो सकती है दुघर्टना। जिम्मेदार बेखबर। सड़क के दोनों तरफ ट्रक ही ट्रक। कई बार वहां पर दुर्घटनाए घट चुकी है।1
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- क्रिकेट टूर्नामेंट फाइनल महा मुकाबला में ककरहटी टीम रही बिजेता मुख्य अतिथि रहे गुनौर विधानसभा विधायक डॉ राजेश वर्मा ककरहटी टीम ने किया शानदार प्रदर्शन ककरहटी प्रीमियर लीग क्रिकेट टूर्नामेंट में 16 टीमों ने लिया था भाग इसी महा मुकाबला के संबंध में ककरहटी टीम के कप्तान विनय पांडे ने दी जानकारी1
- प्रत्येक नागरिक को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध करवाएं - मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री ने किया स्वच्छ जल अभियान का शुभारंभ दो चरणों में 31 मई तक निरंतर चलेगा अभियान जीआईएस मैप आधारित एप से होगी जल शोधन यंत्र और पेयजल टंकियों की निगरानी स्वच्छ पेयजल प्रदाय के कार्य में ढिलाई बरते जाने पर की जाएगी कठोर कार्रवाई मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वीसी द्वारा प्रदेश के स्थानीय निकायों के पदाधिकारियों को दिए निर्देश उमरिया । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रत्येक नागरिक को स्वच्छ जल पेयजल उपलब्ध करवाना नगरीय निकायों का दायित्व है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में स्वच्छ जलप्रदाय सुनिश्चित किया जाए। पेयजल की गुणवत्ता की नियमित जांच हो, दूषित होने पर वैकल्पिक व्यवास्था करें। किसी भी स्थिति में दूषित पेयजल स्पलाई न हो। यह बड़ी चुनौती है लेकिन गंभीरता से सामना करें जिससे देश में एक आदर्श प्रस्तुत हो। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार की शाम सागर जिले के प्रवास से लौटने के बाद राज्य विमानतल के सभा कक्ष में उच्च स्तरीय बैठक को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रांतव्यापी स्वच्छ जल अभियान का शुभारंभ किया। मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। इस अवसर पर उमरिया एनआईसी मे कलेक्टर धरणेन्द्र कुमार जैन, सीईओ जिला पंचायत अभय सिंह, अपर कलेक्टर प्रमोद कुमार सेन गुप्ता , नगर पालिका अध्यक्ष पाली शंकुतला प्रधान, नगर पालिका अध्यक्ष चंदिया पुरूर्षाेत्तम कोल, सीएमओ उमरिया किशन सिंह , पाली सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे ।1