नए साल की रात खूनी झगड़ा : इंद्रपुरी चौक पर युवक की मौत, एक गंभीर शराब पीकर दो गुटों में मारपीट, मृतक सूरज राणा दो छोटे बच्चों का पिता हजारीबाग में नए साल का जश्न मातम में बदल गया। 1 जनवरी की रात करीब 11 बजे इंद्रपुरी चौक पर शराब के नशे में दो गुटों के बीच जमकर मारपीट हो गई। यह झगड़ा नूरा और मंडई इलाके के लोगों के बीच हुआ। मारपीट में छोटकी मंडई निवासी सूरज राणा को इतनी बेरहमी से पीटा गया कि उसकी मौके पर ही मौत हो गई। वहीं एक अन्य युवक गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे इलाज के लिए रांची के रिम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसकी हालत नाजुक बनी हुई है। सूरज राणा दो छोटे-छोटे बच्चों का पिता था। इस घटना से इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल है। फिलहाल मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए लोहसिंघना थाना द्वारा शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल लाया गया है जहां मृतक के परिजन सैकड़ों की संख्या में पहुंचे हुए हैं।
नए साल की रात खूनी झगड़ा : इंद्रपुरी चौक पर युवक की मौत, एक गंभीर शराब पीकर दो गुटों में मारपीट, मृतक सूरज राणा दो छोटे बच्चों का पिता हजारीबाग में नए साल का जश्न मातम में बदल गया। 1 जनवरी की रात करीब 11 बजे इंद्रपुरी चौक पर शराब के नशे में दो गुटों के बीच जमकर मारपीट हो गई। यह झगड़ा नूरा और मंडई इलाके के लोगों के बीच हुआ। मारपीट में छोटकी मंडई निवासी सूरज राणा को इतनी बेरहमी से पीटा गया कि उसकी मौके पर ही मौत हो गई। वहीं एक अन्य युवक गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे इलाज के लिए रांची के रिम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसकी हालत नाजुक बनी हुई है। सूरज राणा दो छोटे-छोटे बच्चों का पिता था। इस घटना से इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल है। फिलहाल मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए लोहसिंघना थाना द्वारा शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल लाया गया है जहां मृतक के परिजन सैकड़ों की संख्या में पहुंचे हुए हैं।
- एक नज़र जरूर डाले1
- #हजारीबाग #नगरनिगम की लापरवाही को देखें व समझें... यह Supply Main Pipe line Leakage पेलावल थाना के पश्चिम में स्थित है। क्या पेयजल की बर्बादी यूं हीं होती रहेगी?!? @YogendraGomia @hafizulhasan001 @DC_Hazaribag @prdjharkhand1
- पारसनाथ जैन मंदिर..1
- Post by Sahodar Mandal1
- नववर्ष 2026 पर इंसानियत की मिसाल: खालिद उमर–फराह माजिद ने जरूरतमंदों में बांटे कंबल, 53 पार्षदों को दिया खुला चैलेंज ======================================== नव वर्ष 2026 के पावन अवसर पर समाजसेवा और इंसानियत की एक शानदार मिसाल हिंदपीढ़ी वार्ड नंबर 23 में देखने को मिली। प्रख्यात समाजसेवी खालिद उमर और वार्ड नं 23 हिंदपीढ़ी की भावी पार्षद उम्मीदवार फराह माजिद के नेतृत्व में ठंड से जूझ रहे जरूरतमंदों के बीच कंबल वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर सैकड़ों गरीब, बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे लाभान्वित हुए। कंबल पाकर लोगों के चेहरों पर जो मुस्कान दिखी, वही इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी सफलता रही। कार्यक्रम के दौरान समाजसेवी खालिद उमर ने एक बड़ी राजनीतिक और सामाजिक कुर्बानी देते हुए यह ऐलान किया कि वे स्वयं चुनाव नहीं लड़ेंगे, बल्कि अपनी बड़ी भाभी फराह माजिद को वार्ड नं 23 हिंदपीढ़ी से पार्षद उम्मीदवार घोषित करते हैं। उनके इस फैसले को लोगों ने त्याग, विश्वास और परिवारिक एकता की मिसाल बताया। खालिद उमर ने मंच से 53 पार्षदों को खुली चुनौती देते हुए कहा कि अगर हर जनप्रतिनिधि अपने-अपने वार्ड में साल में कुछ दिन भी जरूरतमंदों के लिए समर्पित कर दे, तो समाज की तस्वीर बदल सकती है। यह चुनौती अब पूरे शहर में चर्चा का विषय बन गई है। स्थानीय जनता ने फराह माजिद को एक जमीनी, संवेदनशील और मजबूत नेतृत्व के रूप में देखा और कहा कि अगर ऐसे लोग राजनीति में आएं, तो हिंदपीढ़ी वार्ड की तस्वीर और तकदीर दोनों बदलेगी। नव वर्ष के इस अवसर पर यह कार्यक्रम न केवल सेवा का प्रतीक बना, बल्कि आने वाले चुनाव में जनता के भरोसे और उम्मीदों का मजबूत संदेश भी दे गया। #Hemantsoren #Irfanansari #nayabharattv24 #NavVarsh2026 #KambalVitaran #InsaniyatZindabad #KhalidUmar #FarahMajid #Ward23Hindpiri #SamajSeva #GaribonKeSaath #NayaSaalNayiSoch #ParshadChunav2026 #Ranchimunicipalcorporation #Ranchimunicipalcorporationelection2026 #Ashrafsameer #Reportbyashrafsameer #Aksameer3
- Post by Mahesh1
- सक्सेस स्टोरी सिमराजरा के विकास यात्रा की सफलता की कहानी “अंधेरे से उजाले तक: सिमराजरा की नई सुबह” हजारीबाग जिला अंतर्गत बड़कागांव प्रखंड के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में बसा सुदूरवर्ती गांव सिमराजरा...एक ऐसा गांव, जो आज़ाद भारत के 78 वर्षों बाद भी बिजली जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित था। न यहां तक पक्की सड़क पहुंची थी, न ही विकास की रोशनी। अंधेरा यहां केवल रातों तक सीमित नहीं था, बल्कि पीढ़ियों से जीवन का हिस्सा बन चुका था। माननीय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की यह स्पष्ट सोच रही है कि राज्य का कोई भी गांव विकास से अछूता न रहे और प्रत्येक नागरिक को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हों। इसी सोच को धरातल पर उतारने के क्रम में माननीय मुख्यमंत्री के निर्देश पर उपायुक्त शशि प्रकाश सिंह के जिला भ्रमण के दौरान जब सिमराजरा गांव की वास्तविक स्थिति सामने आई, तो इसे बदलने का संकल्प उसी क्षण ले लिया गया। इसके बाद जो शुरू हुआ, वह केवल एक प्रशासनिक कार्य नहीं, बल्कि एक संकल्प, संघर्ष और समर्पण की कहानी थी। सिमराजरा तक बिजली पहुंचाना आसान नहीं था। दुर्गम पहाड़ियां, घने जंगल और हाथियों से अति प्रभावित क्षेत्र,हर कदम पर चुनौती खड़ी थी। कई बार बिजली के पोल लगाए गए, लेकिन हाथियों द्वारा उन्हें क्षतिग्रस्त कर दिया गया। प्रयास बार-बार विफल होते दिखे, लेकिन प्रशासन का हौसला नहीं टूटा। जिला प्रशासन हजारीबाग ने यह साबित कर दिया कि “जहां चाह, वहां राह” केवल कहावत नहीं, बल्कि कर्म से साकार होने वाला सत्य है। सतत प्रयास, तकनीकी समाधान, सतर्कता और दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर अंततः वह दिन आया, जब सिमराजरा गांव तक बिजली पहुंच सकी। जैसे ही गांव में पहली बार बल्ब जला, मानो वर्षों का अंधेरा एक पल में छंट गया। घर रोशनी से जगमगा उठे, बच्चों की आंखों में सपने चमकने लगे और ग्रामीणों के चेहरों पर नई उम्मीद की मुस्कान फैल गई। यह केवल बिजली का आना नहीं था, बल्कि एक नए युग में प्रवेश था...शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और बेहतर जीवन की ओर बढ़ता कदम। आज सिमराजरा गांव प्रशासनिक संकल्प और जनकल्याणकारी सोच का जीवंत उदाहरण है। यह सफलता दर्शाती है कि यदि नेतृत्व संवेदनशील हो, प्रशासन प्रतिबद्ध हो और लक्ष्य स्पष्ट हो, तो देश का सबसे दूरस्थ और चुनौतीपूर्ण क्षेत्र भी विकास की मुख्यधारा से जुड़ सकता है। सिमराजरा की यह कहानी न सिर्फ एक गांव की, बल्कि विश्वास की जीत है...अंधेरे पर उजाले की जीत।1
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