लालापुर का जल रहस्य! नक्शों में दर्ज दर्जनों तालाब, जमीन पर मकान — क्या अभिलेख छुपा रहे हैं सच या दबा दी गई रिपोर्ट? जिलाधिकारी का आदेश, तहसील की खामोशी! लेखपाल-कानूनगो-तहसीलदार के कागज़ कुछ और, मौके की हकीकत कुछ और — जल संकट के पीछे किसका संरक्षण? लालापुर,प्रयागराज। यमुनानगर क्षेत्र के बारा तहसील अंतर्गत लालापुर क्षेत्र में तालाबों को लेकर उठ रहे सवाल अब सामान्य शिकायत नहीं रहे, बल्कि एक ऐसे रहस्य का रूप ले चुके हैं जिसकी परतें खुलीं तो राजस्व अभिलेखों से लेकर जमीनी निगरानी तक कई स्तरों की जांच खड़ी हो सकती है। स्थानीय लोगों का दावा है कि सरकारी नक्शा, खसरा, खतौनी और ग्राम समाज की भूमि के रजिस्टर में दर्ज कई तालाब मौके पर दिखाई ही नहीं देते। जहां जलस्रोत दर्ज हैं वहां पक्के मकान, बाउंड्रीवाल और निजी कब्जे खड़े होने की चर्चा पूरे क्षेत्र में है। ग्रामीणों के अनुसार यदि लालापुर क्षेत्र का पूरा राजस्व नक्शा निकलवाकर पुरानी खतौनी और वर्तमान स्थिति का मिलान कराया जाए तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि वर्षों में कितने तालाब गायब हुए और किन परिस्थितियों में उन पर निर्माण हुआ। लोगों का कहना है कि यह बदलाव अचानक नहीं हुआ, बल्कि धीरे-धीरे मिट्टी डालकर, सीमांकन बदलकर और रिकॉर्ड की आड़ लेकर तालाबों का स्वरूप समाप्त किया गया। सूत्र बताते हैं कि राजस्व नियमों के अनुसार तालाब, पोखरा, नाली, चरागाह और ग्राम समाज की भूमि की निगरानी लेखपाल, कानूनगो और तहसीलदार स्तर पर होती है। प्रत्येक तालाब का खाता, गाटा संख्या, क्षेत्रफल और श्रेणी अभिलेखों में दर्ज रहता है। किसी भी प्रकार का अतिक्रमण होने पर रिपोर्ट बनाना, पैमाइश कराना और कब्जा हटवाना विभागीय जिम्मेदारी मानी जाती है। इसके बावजूद यदि बड़ी संख्या में तालाबों पर कब्जे की बात सामने आ रही है तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या रिपोर्ट बनी ही नहीं, बनी तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई, और कार्रवाई हुई तो जमीन खाली क्यों नहीं हुई। कुछ समय पहले जिला प्रशासन द्वारा सभी तहसीलों को स्पष्ट आदेश दिया गया था कि सरकारी भूमि और तालाबों को चिन्हित कर कब्जा मुक्त कराया जाए तथा प्रतिदिन कम से कम एक या दो जलस्रोतों की पैमाइश कर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। आदेश के बाद भी लालापुर क्षेत्र की स्थिति में कोई बड़ा बदलाव न दिखने से लोगों में यह चर्चा है कि कहीं आदेश फाइलों में दब तो नहीं गया। ग्रामीण पूछ रहे हैं कि जब एक गांव की स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही तो पूरी तहसील में चल रही कार्रवाई का वास्तविक स्वरूप क्या है। गर्मी तेज होते ही तालाबों के गायब होने का असर भी सामने आने लगा है। क्षेत्र के कई हैंडपंप सूख चुके हैं, कई में पानी बहुत नीचे चला गया है, पशु-पक्षी पानी के लिए भटक रहे हैं और जिन स्थानों पर बरसात का पानी रुकना चाहिए था वहां समतल जमीन या निर्माण दिखाई दे रहा है। जलस्तर गिरने से खेती, पशुपालन और पेयजल व्यवस्था पर भी असर पड़ने लगा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि लालापुर क्षेत्र में विशेष अभियान चलाकर सभी तालाबों की दोबारा पैमाइश कराई जाए, नक्शा-खसरा-खतौनी का मिलान कराया जाए और ग्राम समाज की भूमि का सत्यापन कराया जाए तो कई ऐसे मामले सामने आ सकते हैं जो वर्षों से दबे हुए हैं। ग्रामीण यह भी मांग कर रहे हैं कि जांच सिर्फ कागज पर नहीं बल्कि मौके पर हो और जिसकी जिम्मेदारी बनती है उसकी भूमिका भी स्पष्ट की जाए। अब लालापुर क्षेत्र में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या तालाबों का सच सामने आएगा, या फिर सरकारी अभिलेखों में दर्ज जलस्रोत कागज़ों में ही जिंदा रहेंगे और जमीन पर कब्जे का रहस्य यूँ ही परतों में दबा रहेगा।
लालापुर का जल रहस्य! नक्शों में दर्ज दर्जनों तालाब, जमीन पर मकान — क्या अभिलेख छुपा रहे हैं सच या दबा दी गई रिपोर्ट? जिलाधिकारी का आदेश, तहसील की खामोशी! लेखपाल-कानूनगो-तहसीलदार के कागज़ कुछ और, मौके की हकीकत कुछ और — जल संकट के पीछे किसका संरक्षण? लालापुर,प्रयागराज। यमुनानगर क्षेत्र के बारा तहसील अंतर्गत लालापुर क्षेत्र में तालाबों को लेकर उठ रहे सवाल अब सामान्य शिकायत नहीं रहे, बल्कि एक ऐसे रहस्य का रूप ले चुके हैं जिसकी परतें खुलीं तो राजस्व अभिलेखों से लेकर जमीनी निगरानी तक कई स्तरों की जांच खड़ी हो सकती है। स्थानीय लोगों का दावा है कि सरकारी नक्शा, खसरा, खतौनी और ग्राम समाज की भूमि के रजिस्टर में दर्ज कई तालाब मौके पर दिखाई ही नहीं देते। जहां जलस्रोत दर्ज हैं वहां पक्के मकान, बाउंड्रीवाल और निजी कब्जे खड़े होने की चर्चा पूरे क्षेत्र में है। ग्रामीणों के अनुसार यदि लालापुर क्षेत्र का पूरा राजस्व नक्शा निकलवाकर पुरानी खतौनी और वर्तमान स्थिति का मिलान कराया जाए तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि वर्षों में कितने तालाब गायब हुए और किन परिस्थितियों में उन पर निर्माण हुआ। लोगों का कहना है कि यह बदलाव अचानक नहीं हुआ, बल्कि धीरे-धीरे मिट्टी डालकर, सीमांकन बदलकर और रिकॉर्ड की आड़ लेकर तालाबों का स्वरूप समाप्त किया गया। सूत्र बताते हैं कि राजस्व नियमों के अनुसार तालाब, पोखरा, नाली, चरागाह और ग्राम समाज की भूमि की निगरानी लेखपाल, कानूनगो और तहसीलदार स्तर पर होती है। प्रत्येक तालाब का खाता, गाटा संख्या, क्षेत्रफल और श्रेणी अभिलेखों में दर्ज रहता है। किसी भी प्रकार का अतिक्रमण होने पर रिपोर्ट बनाना, पैमाइश कराना और कब्जा हटवाना विभागीय जिम्मेदारी मानी जाती है। इसके बावजूद यदि बड़ी संख्या में तालाबों पर कब्जे की बात सामने आ रही है तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या रिपोर्ट बनी ही नहीं, बनी तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई, और कार्रवाई हुई तो जमीन खाली क्यों नहीं हुई। कुछ समय पहले जिला प्रशासन द्वारा सभी तहसीलों को स्पष्ट आदेश दिया गया था कि सरकारी भूमि और तालाबों को चिन्हित कर कब्जा मुक्त कराया जाए तथा प्रतिदिन कम से कम एक या दो जलस्रोतों की पैमाइश कर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। आदेश के बाद भी लालापुर क्षेत्र की स्थिति में कोई बड़ा बदलाव न दिखने से लोगों में यह चर्चा है कि कहीं आदेश फाइलों में दब तो नहीं गया। ग्रामीण पूछ रहे हैं कि जब एक गांव की स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही तो पूरी तहसील में चल रही कार्रवाई का वास्तविक स्वरूप क्या है। गर्मी तेज होते ही तालाबों के गायब होने का असर भी सामने आने लगा है। क्षेत्र के कई हैंडपंप सूख चुके हैं, कई में पानी बहुत नीचे चला गया है, पशु-पक्षी पानी के लिए भटक रहे हैं और जिन स्थानों पर बरसात का पानी रुकना चाहिए था वहां समतल जमीन या निर्माण दिखाई दे रहा है। जलस्तर गिरने से खेती, पशुपालन और पेयजल व्यवस्था पर भी असर पड़ने लगा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि लालापुर क्षेत्र में विशेष अभियान चलाकर सभी तालाबों की दोबारा पैमाइश कराई जाए, नक्शा-खसरा-खतौनी का मिलान कराया जाए और ग्राम समाज की भूमि का सत्यापन कराया जाए तो कई ऐसे मामले सामने आ सकते हैं जो वर्षों से दबे हुए हैं। ग्रामीण यह भी मांग कर रहे हैं कि जांच सिर्फ कागज पर नहीं बल्कि मौके पर हो और जिसकी जिम्मेदारी बनती है उसकी भूमिका भी स्पष्ट की जाए। अब लालापुर क्षेत्र में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या तालाबों का सच सामने आएगा, या फिर सरकारी अभिलेखों में दर्ज जलस्रोत कागज़ों में ही जिंदा रहेंगे और जमीन पर कब्जे का रहस्य यूँ ही परतों में दबा रहेगा।
- Post by शुरू शुरू पब्लिक न्यूज़1
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- प्रयागराज के जाने-माने न्यूरो सर्जन डॉ. कार्तिकेय शर्मा पर गुरुवार को बैडटच की FIR दर्ज की गई है। BA की छात्रा ने उन पर छेड़खानी का आरोप लगाया है। उसका कहना है कि डॉक्टर ने जबरन उसके कपड़े उतरवाए। फिर गंदी नीयत से छुआ। सिविल लाइंस पुलिस ने छात्रा की शिकायत पर मुकदमा दर्ज कर लिया। छात्रा को मेडिकल के लिए भेजा गया है। घटना बुधवार रात 10.30 बजे क्लाइव रोड इलाके की है। यहां डॉक्टर कार्तिकेय शर्मा (55) का घर है। डॉ. कार्तिकेय घर पर ही क्लिनिक चलाते हैं। देर रात तक मरीज देखते हैं। धूमनगंज की रहने वाली 24 साल की BA की छात्रा अपने भाई के साथ माइग्रेन के इलाज के लिए पहुंची थी। छात्रा को 74वां नंबर मिला था। भाई का कहना है कि मुझे जरूरी काम था। इसलिए बहन को छोड़कर चला गया था। बाद में लौटा तो हंगामा हो रहा था। बहन के पास पहुंचा तो उसने पूरी बात बताई। फिर घरवालों और पुलिस को सूचना दी।1
- Post by हिमांशु गुप्ता समाचार नेशन1
- Post by गुरु ज्ञान1
- Post by JGE News1
- Slug:डीआरएम ने की प्रेस वार्ता गिनाई उपलब्धियां Anchor:उत्तर मध्य रेल के प्रयागराज मण्डल ने वित्तीय वर्ष 2025-26 कई उपलब्धियां हासिल की हैं। प्रयागराज मंडल के डीआरएम रेल रजनीश अग्रवाल ने बताया है कि पिछले वर्ष की तुलना में कोचिंग ट्रेनों की समयपालनता 80.0% रही, जो पिछले वर्ष (74.2%) से 7.8% अधिक है। मण्डल रेल प्रबंधक ने बताया कि प्रयागराज मण्डल ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में रेल परिचालन, माल ढुलाई तथा यात्री सेवाओं के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ प्राप्त की हैं। समयपालन में सुधार, ट्रेनों की संचालन क्षमता में वृद्धि तथा यात्री सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया गया । उन्होंने बताया कि स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं का विस्तार एवं सुरक्षा उपायों को सुदृढ़ करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कार्य किए गए हैं। मण्डल द्वारा स्वच्छता, संरक्षा एवं यात्री संतुष्टि को प्राथमिकता दी गई । उन्होंने पत्रकारों को जानकारी देते हुए बताया कि वित्तीय वर्ष में 13,779 ट्रेन ऑन डिमांड सहित कुल 1,46,832 ट्रेनों का संचालन किया गया ।माघ मेला के दौरान 599 आउटवर्ड ट्रेनों एवं 205 इनवर्ड ट्रेनों का संचालन किया गया ।माघ मेला के दौरान कुल 804 विशेष ट्रेनों एवं 7490 नियमित ट्रेनों का संचालन किया गया । बाइट--- रजनीश अग्रवाल, डीआरएम प्रयागराज मंडल1
- Post by शुरू शुरू पब्लिक न्यूज़1