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प्रयागराज की बारा तहसील क्षेत्र के अंतर्गत मिट्टी का अवैध खनन लगातार जारी है, जिसने सरकारी आदेशों को पूरी तरह से बेअसर कर दिया है। इस अवैध कारोबार को रोकने में प्रशासन पूरी तरह नाकाम है और क्षेत्र के सभी थाने फेल साबित हुए हैं। पचखरा, पांडर गढ़ैया और नारीबारी में दिन और रात, दोनों समय बेखौफ होकर अवैध खनन का काम चल रहा है। इस समय कानून पूरी तरह से एक मजाक बनकर रह गया है। सरकार के निर्देशों का जमीन पर कोई असर नहीं दिख रहा है और इस अवैध मिट्टी खनन पर कब तक रोक लग पाएगी, यह अब राम ही जाने।
पुष्पराज सिंह
प्रयागराज की बारा तहसील क्षेत्र के अंतर्गत मिट्टी का अवैध खनन लगातार जारी है, जिसने सरकारी आदेशों को पूरी तरह से बेअसर कर दिया है। इस अवैध कारोबार को रोकने में प्रशासन पूरी तरह नाकाम है और क्षेत्र के सभी थाने फेल साबित हुए हैं। पचखरा, पांडर गढ़ैया और नारीबारी में दिन और रात, दोनों समय बेखौफ होकर अवैध खनन का काम चल रहा है। इस समय कानून पूरी तरह से एक मजाक बनकर रह गया है। सरकार के निर्देशों का जमीन पर कोई असर नहीं दिख रहा है और इस अवैध मिट्टी खनन पर कब तक रोक लग पाएगी, यह अब राम ही जाने।
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- प्रयागराज के घूरपुर थाना क्षेत्र में धान की रोपाई करने के दौरान हुए एक विवाद में एक लड़के द्वारा अभद्र व्यवहार किया गया।1
- प्रयागराज के मीरापुर में सार्थक बुटीक का भव्य उद्घाटन महापौर उमेश चंद्र केसरवानी द्वारा किया गया। इस शुभ अवसर पर उनके साथ उपश्रम आयुक्त सुमित कुमार भी मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान बुटीक की प्रोपराइटर रूपाली सिराणा ने मुख्य अतिथियों का पुष्प गुच्छ भेंट कर स्वागत किया। उद्घाटन के मौके पर प्रोपराइटर रूपाली सिराणा ने बताया कि बुटीक के क्षेत्र में उन्हें लगभग 12 वर्षों का अनुभव है और वह भली-भांति जानती हैं कि वर्तमान में महिलाओं के बीच फैशन का क्या ट्रेंड चल रहा है और वे क्या चाहती हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने सार्थक बुटीक को पूरी गुणवत्ता और आधुनिकता के साथ नए अंदाज में पेश किया है। उन्होंने भरोसा जताया कि उनका यह प्रयास प्रयागराज की महिलाओं को अवश्य पसंद आएगा। इस अवसर पर उपस्थित अतिथियों ने उन्हें शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह बुटीक फैशन के क्षेत्र में यहाँ की महिलाओं के लिए पूरी तरह सार्थक सिद्ध होगा। इस शुभारंभ को लेकर लोगों में भारी उत्साह देखने को मिला।4
- पहाड़ी और ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश का असर अब प्रयागराज में भी दिखाई देने लगा है, जिसके कारण गंगा और यमुना दोनों नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। बाढ़ नियंत्रण कक्ष की जारी रिपोर्ट के अनुसार, दोनों नदियों के जलस्तर में फिर से वृद्धि दर्ज की गई है। हालांकि, राहत की बात यह है कि गंगा और यमुना दोनों ही नदियां अभी खतरे के निशान 84.734 मीटर से काफी नीचे बह रही हैं और फिलहाल प्रयागराज में बाढ़ जैसी कोई स्थिति नहीं है।1
- प्रयागराज के जसरा में उत्तर प्रदेश सरकार की गोदाम शुद्धीकरण योजना के तहत वर्ष 2025-26 के लिए जसरा सहकारी समिति को गोदाम के शुद्धीकरण और मरम्मत कार्य हेतु ₹10 लाख की धनराशि आवंटित की गई है। सोमवार को जिला सहकारी बैंक के निदेशक एवं समिति अध्यक्ष प्रतिनिधि अनिल मिश्रा ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधिवत पूजन-अर्चन कर इस कार्य का शुभारंभ कराया। इस अवसर पर अनिल मिश्रा ने कहा कि सरकार की इस योजना का मुख्य उद्देश्य सहकारी समितियों के गोदामों को मजबूत बनाकर किसानों को बेहतर भंडारण की सुविधा उपलब्ध कराना है। इससे कृषि उपज का सुरक्षित भंडारण सुनिश्चित हो सकेगा और समिति की कार्यक्षमता भी बढ़ेगी। वहीं, सहायक विकास अधिकारी (सहकारिता) मनेंद्र सिंह ने योजना की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गोदामों के सुदृढ़ीकरण से किसानों को सीधा लाभ मिलेगा और सहकारी व्यवस्था को मजबूती मिलेगी। इस कार्यक्रम के दौरान समिति के उपाध्यक्ष बंसराज सिंह, संचालक विशालांत मिश्रा, अश्विनी द्विवेदी, कृष्णा, ताराशंकर कुशवाहा, संजीव कुमार आजाद, सचिव विजय राज यादव, कंप्यूटर ऑपरेटर सचिन मिश्रा और किसान राकेश पटेल सहित क्षेत्रीय किसान और समिति के अन्य सदस्य मौजूद रहे। कार्यक्रम का समापन उपस्थित लोगों के बीच प्रसाद वितरण के साथ हुआ।2
- प्रयागराज के बारा तहसील परिसर में भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के बैनर तले सोमवार को किसानों ने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। किसान शंकरगढ़ पावर हाउस की कार्यप्रणाली और क्षेत्र में व्याप्त गंभीर बिजली संकट के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी किसानों का आरोप है कि पिछले 10 से 15 दिनों से क्षेत्र में नियमित विद्युत आपूर्ति ठप है, जिससे जनजीवन और खेती-बारी बुरी तरह प्रभावित हो रही है। किसानों के अनुसार, बिजली आने पर भी वोल्टेज इतना कम रहता है कि घरों में बल्ब तक नहीं जल पाते हैं। इस लो-वोल्टेज और बिजली कटौती के कारण खेतों की सिंचाई पूरी तरह ठप हो गई है, जिससे धान समेत अन्य फसलें सूखने के कगार पर पहुंच गई हैं। किसानों ने बिजली विभाग की लापरवाही और अधिकारियों के मनमाने रवैये को इस संकट का जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि एक तरफ वे पहले से ही प्राकृतिक आपदाओं की मार झेल रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ विभाग के इस अड़ियल रुख के कारण सिंचाई के लिए पानी का गहरा संकट खड़ा हो गया है। सरकार किसानों को पर्याप्त बिजली देने के बड़े-बड़े दावे तो करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात इसके बिल्कुल विपरीत हैं। धरने पर बैठे किसानों ने चेतावनी दी है कि जब तक क्षेत्र में पर्याप्त वोल्टेज के साथ नियमित आपूर्ति सुनिश्चित नहीं की जाती, तब तक उनका यह आंदोलन जारी रहेगा। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के शंकरगढ़ ब्लॉक अध्यक्ष पंकज कुशवाहा, तहसील बारा अध्यक्ष आशीष शुक्ला, प्रयागराज मंडल महासचिव अंकुश शुक्ला सहित किसान नेता आयुष, हिमांशु, प्रिंस, लखन, रविंद्र, जगदीश और बड़ी संख्या में क्षेत्र के किसान उपस्थित रहे।1
- प्रयागराज में आंदोलनकारी किसान अपनी मांग पर पूरी तरह अड़े हुए हैं। धरना स्थल पर बैठे इन किसानों को समझाने के लिए तहसील के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे।1
- सावन शुरू होने से पहले प्रयागराज के प्राचीन श्री मनकामेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए नया ड्रेस कोड लागू कर दिया गया है। मंदिर प्रशासन ने यह फैसला लिया है कि अब गर्भगृह में प्रवेश कर रुद्राभिषेक, जलाभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना सिर्फ भारतीय पारंपरिक वेशभूषा में ही की जा सकेगी। इसके तहत जींस, टी-शर्ट, रिप्ड जींस और हाफ पैंट पहनकर आने वाले श्रद्धालुओं को गर्भगृह में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। मंदिर के महंत ब्रह्मचारी श्रीधरानंद जी महाराज ने इस नई व्यवस्था को सनातन और वैदिक परंपराओं के अनुरूप बताया है। उनका कहना है कि पूजा-अर्चना अनुशासन, शुद्धता और धार्मिक मर्यादा से जुड़ी प्रक्रिया है, इसलिए मंदिर की गरिमा बनाए रखने के लिए पारंपरिक वेशभूषा पहनना बेहद जरूरी है।1
- कौशाम्बी के चरवा थाना क्षेत्र के रहने वाले भूपेंद्र सिंह और उनके पुत्र अभिषेक सिंह पर फर्जी अधिवक्ता बनकर घूमने और अवैध वसूली करने के गंभीर आरोप लगे हैं। इनमें से भूपेंद्र सिंह पहले से ही धारा 302 के एक मामले में भी आरोपी बताए जाते हैं। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, दोनों आरोपियों पर आरोप है कि वे फर्जी तरीके से वकील का रूप धारण कर घूमते हैं और फिर सम्मानित अधिवक्ताओं के खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज करवा देते हैं। इसके बाद वे इन अधिवक्ताओं को ब्लैकमेल कर उनसे अवैध वसूली करते हैं। शिकायतकर्ताओं का यह भी कहना है कि वसूली की रकम न देने पर पीड़ितों के साथ मारपीट भी की जाती है। इस मामले को लेकर पीड़ित अधिवक्ताओं में भारी नाराजगी है। उन्होंने प्रशासन से इस पूरे प्रकरण की निष्पक्षता से जांच कराने और दोनों दोषियों के खिलाफ बेहद सख्त कार्रवाई करने की जोरदार मांग की है।1