शिक्षा के सौदागर: जब 'कलेक्टर का आदेश' बना रद्दी और किताबें बनीं 'काला बाज़ार'! "साहब, अगर आप सोच रहे हैं कि ये किसी सुपरहिट फिल्म के 'फर्स्ट डे फर्स्ट शो' की लाइन है, तो अपनी गलतफहमी दूर कर लीजिए। ये न तो किसी सेल की भीड़ है और न ही मुफ्त का राशन बंट रहा है। ये है 'विद्यार्थी डिस्ट्रीब्यूटर्स' का नजारा, जहाँ इन दिनों शिक्षा कम और अभिभावकों की मजबूरी ज्यादा बेची जा रही है!" "दुकान के बोर्ड पर बड़े-बड़े अक्षरों में CBSE और NCERT लिखा है, लेकिन इनके रेट कार्ड देखकर अच्छे-अच्छों के पसीने छूट जाएं। हमारे कलेक्टर साहब ने आदेश निकाला था कि किताबें हर दुकान पर मिलनी चाहिए ताकि जनता को सहूलियत हो। लेकिन लगता है कि साहब का आदेश इस दुकान की दहलीज लांघते ही 'रद्दी' के भाव बिक गया।" "जरा इस लूट का गणित समझिए—तीसरी और चौथी क्लास की किताबों का सेट सीधे 5 से 6 हजार रुपये में! जो किताबें ₹1500 के आसपास मिलनी चाहिए थीं, उनके दाम रातों-रात रॉकेट बन गए। स्कूल तो बच्चों को गणित बाद में सिखाएगा, ये डिस्ट्रीब्यूटर साहब अभिभावकों को पहले ही सिखा रहे हैं कि 'जेब काटने' का सही फॉर्मूला क्या होता है।" "नाग मंदिर के पास स्थित इस दुकान ने पूरे इलाके में ऐसी 'मोनोपोली' जमाई है कि दूसरी किसी दुकान पर किताबें ही गायब हैं। प्रशासन की नाक के नीचे सरेआम नियमों की धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं और रसूख के दम पर आदेशों को ठेंगा दिखाया जा रहा है।" "अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन वाकई सो रहा है या सोने का नाटक कर रहा है? इस खबर के प्रकाशन के बाद अब पूरी उम्मीद है कि मामला कलेक्टर साहब के संज्ञान में पहुंचेगा। अब देखना यह है कि क्या इन 'शिक्षा के सौदागरों' पर प्रशासन का डंडा चलता है या फिर ये लूट तंत्र इसी तरह फलता-फूलता रहेगा। जनता को इंतज़ार है एक कड़ी कानूनी कार्यवाही का, ताकि शिक्षा की आड़ में चल रहा यह काला बाज़ार हमेशा के लिए बंद हो सके!"
शिक्षा के सौदागर: जब 'कलेक्टर का आदेश' बना रद्दी और किताबें बनीं 'काला बाज़ार'! "साहब, अगर आप सोच रहे हैं कि ये किसी सुपरहिट फिल्म के 'फर्स्ट डे फर्स्ट शो' की लाइन है, तो अपनी गलतफहमी दूर कर लीजिए। ये न तो किसी सेल की भीड़ है और न ही मुफ्त का राशन बंट रहा है। ये है 'विद्यार्थी डिस्ट्रीब्यूटर्स' का नजारा, जहाँ इन दिनों शिक्षा कम और अभिभावकों की मजबूरी ज्यादा बेची जा रही है!" "दुकान के बोर्ड पर बड़े-बड़े अक्षरों में CBSE और NCERT लिखा है, लेकिन इनके रेट कार्ड देखकर अच्छे-अच्छों के पसीने छूट जाएं। हमारे कलेक्टर साहब ने आदेश निकाला था कि किताबें हर दुकान पर मिलनी चाहिए ताकि जनता को सहूलियत हो। लेकिन लगता है कि साहब का आदेश इस दुकान की दहलीज लांघते ही 'रद्दी' के भाव बिक गया।" "जरा इस लूट का गणित समझिए—तीसरी और चौथी क्लास की किताबों का सेट सीधे 5 से 6 हजार रुपये में! जो किताबें ₹1500 के आसपास मिलनी चाहिए थीं, उनके दाम रातों-रात रॉकेट बन गए। स्कूल तो बच्चों को गणित बाद में सिखाएगा, ये डिस्ट्रीब्यूटर साहब अभिभावकों को पहले ही सिखा रहे हैं कि 'जेब काटने' का सही फॉर्मूला क्या होता है।" "नाग मंदिर के पास स्थित इस दुकान ने पूरे इलाके में ऐसी 'मोनोपोली' जमाई है कि दूसरी किसी दुकान पर किताबें ही गायब हैं। प्रशासन की नाक के नीचे सरेआम नियमों की धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं और रसूख के दम पर आदेशों को ठेंगा दिखाया जा रहा है।" "अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन वाकई सो रहा है या सोने का नाटक कर रहा है? इस खबर के प्रकाशन के बाद अब पूरी उम्मीद है कि मामला कलेक्टर साहब के संज्ञान में पहुंचेगा। अब देखना यह है कि क्या इन 'शिक्षा के सौदागरों' पर प्रशासन का डंडा चलता है या फिर ये लूट तंत्र इसी तरह फलता-फूलता रहेगा। जनता को इंतज़ार है एक कड़ी कानूनी कार्यवाही का, ताकि शिक्षा की आड़ में चल रहा यह काला बाज़ार हमेशा के लिए बंद हो सके!"
- Post by पत्रकार रुद्र प्रताप सिंह1
- Post by BABLU SINGH BAIRIHAR RAWAN1
- असम के हर परिवार से अपील है - भ्रष्टाचार में एक भी और दिन नहीं गुज़ारना। हिमंता ने असम को लूटा है - यह असम जानता है, देश जानता है। कल बदलाव का दिन है। कांग्रेस गठबंधन को वोट दें।1
- Post by Bablu Namdev1
- अभय महाजन के मुख्य आतिथ्य में खंधो धाम को मिलेगी विकास कार्यों की सौगात गोविंदगढ़ 10 अप्रैल को भव्य लोकार्पण, विधायक नागेंद्र सिंह करेंगे अध्यक्षता गोविंदगढ़। दीनदयाल शोध संस्थान के माननीय संगठन सचिव एवं वरिष्ठ प्रचारक श्री अभय महाजन के मुख्य आतिथ्य में आगामी 10 अप्रैल को माँ खंधो देवी धाम में भव्य लोकार्पण समारोह आयोजित किया जाएगा। इस विशेष अवसर पर धाम के कुंड को वर्षभर जल से लबालब रखने के लिए गोविंदगढ़ तालाब से बिछाई गई पाइपलाइन का शुभारंभ किया जाएगा। कार्यक्रम की आयोजक एवं जिला पंचायत वन समिति की सभापति श्रीमती निर्मला संजीव द्विवेदी ने बताया कि यह गरिमामय आयोजन गुरुवार सुबह 8:00 बजे संपन्न होगा। समारोह की अध्यक्षता गुढ़ विधायक श्री नागेंद्र सिंह करेंगे। इन सुविधाओं का होगा लोकार्पण मुख्य अतिथि श्री अभय महाजन एवं अन्य अतिथियों द्वारा धाम परिसर में नवनिर्मित सत्संग सदन, भव्य कथा मंच और नवग्रह वाटिका में स्थापित फव्वारे का लोकार्पण किया जाएगा। इन विकास कार्यों से धाम आने वाले श्रद्धालुओं को आधुनिक सुविधाएं प्राप्त होंगी। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में रीवा कमिश्नर श्री बी.एस. जामोद (IAS), आईजी श्री गौरव राजपूत (IPS), मुख्य वन संरक्षक रीवा श्री राजेश राय तथा जनपद अध्यक्ष श्रीमती संगीता राजेश यादव की गरिमामयी उपस्थिति रहेगी। आयोजक निर्मला संजीव द्विवेदी ने समस्त धर्मप्रेमी जनता से इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बनने की अपील की है।1
- MP News: मऊगंज में मौत पर मुनाफे का खेल! संबल योजना में 20 लाख का फर्जीवाड़ा, 6 मामलों में बड़ा खुलासा, 5 लोगों को बनाया दोषी!1
- Post by Shivam Kushwaha1
- विंध्य की इस तपती धरती पर जब गेहूं की फसल कट जाती है और चारों ओर केवल धूल और सूखापन नजर आने लगता है, तब किसान के पास दो रास्ते होते हैं— या तो वह खेतों को बीरान छोड़ दे या फिर अपनी मेहनत से उस बंजर दिख रहे मंजर को हरियाली के स्वर्ग में बदल दे। विंध्य बलराम आज उन जुझारू किसानों की कहानी लेकर आया है जिन्होंने कड़ी धूप और गरम हवाओं के बीच अपने खेतों में सब्जी उगाने का साहसिक फैसला लिया है। अक्सर देखा जाता है कि रबी की फसल के बाद खेत खाली होने पर जमीन में दरारें पड़ने लगती हैं और वातावरण में एक अजीब सी वीरानी छा जाती है, लेकिन यदि इसी समय में सब्जियों की बुवाई कर दी जाए, तो न केवल आंखों को सुकून देने वाली हरियाली चारों तरफ फैलती है, बल्कि हर घर की रसोई तक ताजी, शुद्ध और रसायनों से मुक्त सब्जियां भी पहुँचती हैं। जब चारों ओर का क्षेत्र रेगिस्तान जैसा बीरान दिखने लगे, तब आपके खेतों में लहलहाती भिंडी, लौकी, तोरई और करेले की बेलें एक अलग ही जीवंतता पैदा करती हैं। यह सिर्फ खेती नहीं है, बल्कि प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाने का एक अनोखा तरीका है जिससे किसानों को आर्थिक मजबूती मिलती है और बाजार की महंगी व बासी सब्जियों पर निर्भरता खत्म हो जाती है। तपती दोपहरी में जब लू चलती है, तब ये हरे-भरे पौधे मिट्टी की नमी को बचाए रखते हैं और पर्यावरण को शीतलता प्रदान करते हैं। यह समय मायूस होकर बैठने का नहीं, बल्कि सूखी मेड़ों पर हरियाली का परचम लहराने का है। यदि हम ठान लें, तो गेहूं की कटाई के बाद का यह सन्नाटा हमारे परिश्रम से एक ऐसी सब्जी क्रांति में बदल सकता है जिसे देखकर हर गुजरने वाले की नजर ठहर जाए और हर किसान गर्व से कह सके कि उसने अपनी माटी को कभी प्यासा और बीरान नहीं छोड़ा। आइए, इस बीरान मौसम में हरियाली का संकल्प लें और विंध्य की इस पावन भूमि को ताजी सब्जियों की सुगंध से महका दें, क्योंकि जागरूक किसान ही आत्मनिर्भर भारत की असली पहचान है।3