हत्या या हादसा? हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सजा रद्द कर दो आरोपियों को किया बरी हत्या या हादसा? हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सजा रद्द कर दो आरोपियों को किया बरी अनूपपुर। हाईकोर्ट की जबलपुर खंडपीठ ने अनूपपुर जिले का एक चर्चित मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए उम्रकैद की सजा काट रहे दो आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। हाईकोर्ट ने अनूपपुर जिला अदालत के फैसले को निरस्त करते हुए आधार सिंह और पूरन सिंह को सभी आरोपों से बरी करने के आदेश सोमवार का दिया। खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में पूरी तरह विफल रहा कि बृजेश सिंह की मौत एक सुनियोजित हत्या थी। अदालत ने माना कि उपलब्ध साक्ष्यों और परिस्थितियों से यह भी संभव है कि घटना एक सड़क दुर्घटना रही हो। ऐसे में आरोपियों को संदेह का लाभ दिया जाना न्यायसंगत है। 2013 में हुई थी घटना मामला वर्ष 2013 का है। जानकारी के अनुसार घटना वाले दिन दो मोटरसाइकिलों पर चार लोग घर लौट रहे थे। पहली बाइक पर आधार सिंह और पूरन सिंह सवार थे, जबकि दूसरी बाइक पर बृजेश सिंह और कैलाश मौजूद थे। रास्ते में पान नदी के पास खड़े एक ट्रक से बाइक टकरा गई। हादसे में कैलाश घायल हो गया, जबकि बृजेश सिंह की मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस ने अंतिम बार साथ देखे जाने के आधार पर आधार सिंह और पूरन सिंह को हिरासत में लेकर हत्या का मामला दर्ज किया था। जांच के बाद दोनों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और 201 के तहत चालान पेश किया गया। ट्रायल कोर्ट ने सुनाई थी उम्रकैद अनूपपुर जिला अदालत ने 26 जून 2019 को सुनवाई पूरी करते हुए दोनों आरोपियों को दोषी ठहराया था। अदालत ने हत्या और साक्ष्य मिटाने के आरोप में दोनों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके बाद आरोपियों ने हाईकोर्ट में अपील दायर की। 11 मई 2026 को जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस ए.के. सिंह की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए ट्रायल कोर्ट के फैसले को पलट दिया। अदालत ने कहा कि पूरा मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित था और कोई प्रत्यक्षदर्शी गवाह मौजूद नहीं था। मेडिकल रिपोर्ट पर उठा सवाल बचाव पक्ष के अधिवक्ता अभिषेक पांडेय ने कोर्ट में तर्क दिया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृत्यु का स्पष्ट कारण दर्ज नहीं था। डॉक्टरों ने भी स्वीकार किया कि मृतक के शरीर पर मिली चोटें सड़क दुर्घटना में लगने वाली चोटों जैसी हो सकती हैं। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा गया कि केवल संदेह के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने माना कि अभियोजन यह साबित नहीं कर पाया कि आरोपियों और मृतक के बीच कोई पुरानी रंजिश थी या जानबूझकर टक्कर मारकर हत्या की गई थी। हाईकोर्ट ने दिए रिहाई के आदेश हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि घटनास्थल, वाहन जांच और गवाहों के बयान अभियोजन की कहानी को पूरी तरह समर्थन नहीं देते। कई महत्वपूर्ण गवाहों के बयानों में विरोधाभास पाए गए। अदालत ने कहा कि आपराधिक मामलों में दोष तभी सिद्ध माना जाता है जब आरोप संदेह से परे प्रमाणित हों। पर्याप्त और ठोस साक्ष्य के अभाव में दोनों आरोपियों को बरी किया जाता है। करीब 13 वर्ष तक जेल में रहने के बाद अब आधार सिंह और पूरन सिंह की रिहाई का रास्ता साफ हो गया है।
हत्या या हादसा? हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सजा रद्द कर दो आरोपियों को किया बरी हत्या या हादसा? हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सजा रद्द कर दो आरोपियों को किया बरी अनूपपुर। हाईकोर्ट की जबलपुर खंडपीठ ने अनूपपुर जिले का एक चर्चित मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए उम्रकैद की सजा काट रहे दो आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। हाईकोर्ट ने अनूपपुर जिला अदालत के फैसले को निरस्त करते हुए आधार सिंह और पूरन सिंह को सभी आरोपों से बरी करने के आदेश सोमवार का दिया। खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में पूरी तरह विफल रहा कि बृजेश सिंह की मौत एक सुनियोजित हत्या थी। अदालत ने माना कि उपलब्ध साक्ष्यों और परिस्थितियों से यह भी संभव है कि घटना एक सड़क दुर्घटना रही हो। ऐसे में आरोपियों को संदेह का लाभ दिया जाना न्यायसंगत है। 2013 में हुई थी घटना मामला वर्ष 2013 का है। जानकारी के अनुसार घटना वाले दिन दो मोटरसाइकिलों पर चार लोग घर लौट रहे थे। पहली बाइक पर आधार सिंह और पूरन सिंह सवार थे, जबकि दूसरी बाइक पर बृजेश सिंह और कैलाश मौजूद थे। रास्ते में पान नदी के पास खड़े एक ट्रक से बाइक टकरा गई। हादसे में कैलाश घायल हो गया, जबकि बृजेश सिंह की मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस ने अंतिम बार साथ देखे जाने के आधार पर आधार सिंह और पूरन सिंह को हिरासत में लेकर हत्या का मामला दर्ज किया था। जांच के बाद दोनों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और 201 के तहत चालान पेश किया गया। ट्रायल कोर्ट ने सुनाई थी उम्रकैद अनूपपुर जिला अदालत ने 26 जून 2019 को सुनवाई पूरी करते हुए दोनों आरोपियों को दोषी ठहराया था। अदालत ने हत्या और साक्ष्य मिटाने के आरोप में दोनों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके बाद आरोपियों ने हाईकोर्ट में अपील दायर की। 11 मई 2026 को जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस ए.के. सिंह की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए ट्रायल कोर्ट के फैसले को पलट दिया। अदालत ने कहा कि पूरा मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित था और कोई प्रत्यक्षदर्शी गवाह मौजूद नहीं था। मेडिकल रिपोर्ट पर उठा सवाल बचाव पक्ष के अधिवक्ता अभिषेक पांडेय ने कोर्ट में तर्क दिया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृत्यु का स्पष्ट कारण दर्ज नहीं था। डॉक्टरों ने भी स्वीकार किया कि मृतक के शरीर पर मिली चोटें सड़क दुर्घटना में लगने वाली चोटों जैसी हो सकती हैं। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा गया कि केवल संदेह के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने माना कि अभियोजन यह साबित नहीं कर पाया कि आरोपियों और मृतक के बीच कोई पुरानी रंजिश थी या जानबूझकर टक्कर मारकर हत्या की गई थी। हाईकोर्ट ने दिए रिहाई के आदेश हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि घटनास्थल, वाहन जांच और गवाहों के बयान अभियोजन की कहानी को पूरी तरह समर्थन नहीं देते। कई महत्वपूर्ण गवाहों के बयानों में विरोधाभास पाए गए। अदालत ने कहा कि आपराधिक मामलों में दोष तभी सिद्ध माना जाता है जब आरोप संदेह से परे प्रमाणित हों। पर्याप्त और ठोस साक्ष्य के अभाव में दोनों आरोपियों को बरी किया जाता है। करीब 13 वर्ष तक जेल में रहने के बाद अब आधार सिंह और पूरन सिंह की रिहाई का रास्ता साफ हो गया है।
- Post by Manoj Gupta Driver4
- छत्तीसगढ़ के पेंड्रा में ‘ज्ञानभारतम’ अभियान के तहत 200 से 500 साल पुरानी दुर्लभ पांडुलिपियां मिली हैं। इनमें श्रीमद् भागवत गीता और जमींदारी वंशावली जैसे कई प्राचीन ग्रंथ शामिल हैं, जिन्हें कलेक्टर की उपस्थिति में डिजिटल रूप से संरक्षित किया गया। यह पहल अमूल्य ऐतिहासिक ज्ञान को भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखेगी।4
- कलेक्ट्रेट कार्यालय के विराट सभागार में समयावधि पत्रों की समीक्षा बैठक हुई संपन्न अधिकारी कर्मचारी रहे मौजूद शहडोल नगर पालिका क्षेत्र अंतर्गत नगर की जयस्तंभ चौक स्थित कलेक्ट्रेट कार्यालय के विराट सभागार में सोमवार को समयावधि पत्रों की समीक्षा बैठक संपन्न हुई है,बैठक में जिले के कलेक्टर डॉक्टर केदार सिंह ने उपस्थित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सीएम हेल्पलाइन की प्रकरणों का समय सीमा पर निराकरण करने की निर्देश दिए हैं,इस दौरान जिले के अधिकारी कर्मचारी मौजूद रहे हैं।1
- मध्य प्रदेश के इंदौर में भारतीय श्रमजीवी पत्रकार महासंघ की जिला कार्यकारिणी की औपचारिक घोषणा की गई। विनोद शर्मा को जिलाध्यक्ष नियुक्त किया गया, जिन्होंने पत्रकार हितों की रक्षा का संकल्प लिया। इस समारोह में जिला और तहसील स्तर के पदाधिकारियों को भी शपथ दिलाई गई, जिससे संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूती मिलेगी।1
- मध्य प्रदेश के शहडोल नगर पालिका में आधी रात अधिकारियों और कर्मचारियों ने महत्वपूर्ण फाइलें चुरा लीं। इस मिडनाइट स्कैम से पूरे राज्य में हड़कंप है और बड़े खुलासे की आशंका जताई जा रही है।1
- Post by पंडित कृष्णा मिश्रा पत्रकार1
- अंबिकापुर..कामोदा रिजॉर्ट की अवैध कब्जा वाली जमीम पर प्रशासन का चला बुलडोजर1
- बिजली बिल वसूलने गए कर्मचारियों के साथ मलमाथर गांव के ग्रामीणों ने की मारपीट वीडियो वायरल शहडोल जिले के गोहपारू थाना क्षेत्र अंतर्गत मलमाथर गांव में बिजली बिल वसूलने गए कर्मचारियों के साथ ग्रामीणों ने की मारपीट वीडियो वायरल हुआ है,बता दें कि शहडोल जिले के मलमाथर गांव का यह मामला है,जहां बिजली बिल की वसूली करने गए कर्मचारियों के साथ यादव परिवार के लोगों ने मलमाथर गांव में जमकर मारपीट की है, मारपीट का वीडियो भी सोमवार को सोशल मीडिया में वायरल हुआ है।1