गाजियाबाद में 20 जून 2026 को कोरवा-यूपी के शीर्ष पदाधिकारियों की एक ऑनलाइन बैठक आयोजित की गई, जिसमें संगठन ने जोर देकर कहा कि सड़कों से अधिक महत्वपूर्ण पैदल पथ हैं और सक्षम लोगों द्वारा फुटपाथों का अतिक्रमण रेहड़ी-पटरी वालों से भी अधिक दुखदायी है। इस बैठक में सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए फुटपाथों को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग की गई। कोरवा-यूपी के मुख्य संरक्षक कर्नल तेजेंद्र पाल त्यागी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक फैसला सुनाया है, जिसमें शहरी विकास प्राधिकरणों और नगर निगमों की यह जिम्मेदारी तय की गई है कि वे फुटपाथों को चिन्हित करें, उनका निर्माण और रखरखाव करें, तथा उन्हें सुरक्षित रखें। इससे पहले, 2 सितंबर 2019 को जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस दीपक गुप्ता ने दिल्ली में प्रॉपर्टी के बाहर रैंप, सजावट और सिक्योरिटी गार्ड केबिन बनाकर फुटपाथ पर कब्जा करने वालों को 15 दिन में अतिक्रमण हटाने का नोटिस देने का फैसला सुनाया था, जिसके न पालन पर हटाने का खर्च और जुर्माना वसूलने का प्रावधान था। यह नियम पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) और भारत में लागू माना गया है। संगठन के अध्यक्ष डॉ. पवन कौशिक ने स्पष्ट किया कि सर्वोच्च न्यायालय ने पैदल चलने वालों के अधिकार को मोटर वाहन की आवाजाही से ऊपर माना है। वहीं, मुख्य सलाहकार डॉ. आर.के. आर्या ने बताया कि फुटपाथ पर चलने वाले अपने उपचार और मुआवजे की मांग भी कर सकते हैं। कोरवा-यूपी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्री प्रेम शंकर सिंह ने कानून का हवाला देते हुए कहा कि पैदल चलने वालों को सिर्फ फुटपाथ पर चलना चाहिए, सड़क पर नहीं। फुटपाथों पर कब्जे या उनके टूटे-फूटे होने के कारण पैदल चलने वालों को सड़क पर चलने के लिए मजबूर होना पड़ता है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। कोरवा-यूपी की सचिव डॉ. मधु सिंह ने फुटपाथ पर कब्जा करने वालों को तीन मुख्य श्रेणियों में बांटा: पहली श्रेणी में सड़क किनारे सामान बेचने वाले, हॉकर या अस्थायी दुकान चलाने वाले आते हैं, जो 'सबसे ज़्यादा दिखने वाले' होते हैं। दूसरी श्रेणी में छोटे, मंझोले और कुछ बड़े दुकानदार शामिल हैं, जो अपनी दुकान के आगे फुटपाथ पर अधिकार के साथ कब्जा करते हैं और ये 'थोड़े दिखने वाले' होते हैं। तीसरी और 'लगभग न दिखने वाली' श्रेणी में घर और बिल्डिंग के मालिक आते हैं, जो अपनी बिल्डिंग के सामने सजावटी बगीचे, ढलान वाले रैंप और सीढ़ियां, पेड़-पौधे लगाकर या छोटी पार्किंग बनाकर फुटपाथ की जगह पर कब्जा कर लेते हैं। ये लोग अमीर और प्रभावशाली होते हैं। बैठक में निम्नलिखित मुख्य मांगें उठाई गईं: नगर निगम 31 जुलाई 2026 तक श्रेणी 1, 2 और 3 के तहत हुए अतिक्रमण की जानकारी इकट्ठा करे और उसे सार्वजनिक करे। साथ ही, नगर निगम 31 जुलाई 2026 से पहले 'अतिक्रमण-मुक्त फुटपाथ' विषय पर एक सेमिनार का आयोजन करे। इसके अतिरिक्त, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, नगर निगम श्रेणी तीन के अतिक्रमण करने वालों को 31 जुलाई 2026 तक नोटिस जारी करे। इस बैठक में कोरवा-यूपी के कर्नल तेजेंद्र पाल त्यागी, डॉ. पवन कौशिक, डॉ. आर.के. आर्या, श्री प्रेम शंकर सिंह और डॉ. मधु सिंह अतिक्रमण मुक्त पैदल पथ की मांग करते हुए उपस्थित थे।
गाजियाबाद में 20 जून 2026 को कोरवा-यूपी के शीर्ष पदाधिकारियों की एक ऑनलाइन बैठक आयोजित की गई, जिसमें संगठन ने जोर देकर कहा कि सड़कों से अधिक महत्वपूर्ण पैदल पथ हैं और सक्षम लोगों द्वारा फुटपाथों का अतिक्रमण रेहड़ी-पटरी वालों से भी अधिक दुखदायी है। इस बैठक में सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए फुटपाथों को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग की गई। कोरवा-यूपी के मुख्य संरक्षक कर्नल तेजेंद्र पाल त्यागी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक फैसला सुनाया है, जिसमें शहरी विकास प्राधिकरणों और नगर निगमों की यह जिम्मेदारी तय की गई है कि वे फुटपाथों को चिन्हित करें, उनका निर्माण और रखरखाव करें, तथा उन्हें सुरक्षित रखें। इससे पहले, 2 सितंबर 2019 को जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस दीपक गुप्ता ने दिल्ली में प्रॉपर्टी के बाहर रैंप, सजावट और सिक्योरिटी गार्ड केबिन बनाकर फुटपाथ पर कब्जा करने वालों को 15 दिन में अतिक्रमण हटाने का नोटिस देने का फैसला सुनाया था, जिसके न पालन पर हटाने का खर्च और जुर्माना वसूलने का प्रावधान था। यह नियम पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) और भारत में लागू माना गया है। संगठन के अध्यक्ष डॉ. पवन कौशिक ने स्पष्ट किया कि सर्वोच्च न्यायालय ने पैदल चलने वालों के अधिकार को मोटर वाहन की आवाजाही से ऊपर माना है। वहीं, मुख्य सलाहकार डॉ. आर.के. आर्या ने बताया कि फुटपाथ पर चलने वाले अपने उपचार और मुआवजे की मांग भी कर सकते हैं। कोरवा-यूपी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्री प्रेम शंकर सिंह ने कानून का हवाला देते हुए कहा कि पैदल चलने वालों को सिर्फ फुटपाथ पर चलना चाहिए, सड़क पर नहीं। फुटपाथों पर कब्जे या उनके टूटे-फूटे होने के कारण पैदल चलने वालों को सड़क पर चलने के लिए मजबूर होना पड़ता है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। कोरवा-यूपी की सचिव डॉ. मधु सिंह ने फुटपाथ पर कब्जा करने वालों को तीन मुख्य श्रेणियों में बांटा: पहली श्रेणी में सड़क किनारे सामान बेचने वाले, हॉकर या अस्थायी दुकान चलाने वाले आते हैं, जो 'सबसे ज़्यादा दिखने वाले' होते हैं। दूसरी श्रेणी में छोटे, मंझोले और कुछ बड़े दुकानदार शामिल हैं, जो अपनी दुकान के आगे फुटपाथ पर अधिकार के साथ कब्जा करते हैं और ये 'थोड़े दिखने वाले' होते हैं। तीसरी और 'लगभग न दिखने वाली' श्रेणी में घर और बिल्डिंग के मालिक आते हैं, जो अपनी बिल्डिंग के सामने सजावटी बगीचे, ढलान वाले रैंप और सीढ़ियां, पेड़-पौधे लगाकर या छोटी पार्किंग बनाकर फुटपाथ की जगह पर कब्जा कर लेते हैं। ये लोग अमीर और प्रभावशाली होते हैं। बैठक में निम्नलिखित मुख्य मांगें उठाई गईं: नगर निगम 31 जुलाई 2026 तक श्रेणी 1, 2 और 3 के तहत हुए अतिक्रमण की जानकारी इकट्ठा करे और उसे सार्वजनिक करे। साथ ही, नगर निगम 31 जुलाई 2026 से पहले 'अतिक्रमण-मुक्त फुटपाथ' विषय पर एक सेमिनार का आयोजन करे। इसके अतिरिक्त, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, नगर निगम श्रेणी तीन के अतिक्रमण करने वालों को 31 जुलाई 2026 तक नोटिस जारी करे। इस बैठक में कोरवा-यूपी के कर्नल तेजेंद्र पाल त्यागी, डॉ. पवन कौशिक, डॉ. आर.के. आर्या, श्री प्रेम शंकर सिंह और डॉ. मधु सिंह अतिक्रमण मुक्त पैदल पथ की मांग करते हुए उपस्थित थे।
- गाजियाबाद के विजयनगर थाना क्षेत्र में दिनांक 19 जून 2026 को सुबह 8:00 बजे एक लगभग 22 वर्षीय युवक द्वारा आत्महत्या किए जाने की सूचना प्राप्त हुई। जानकारी मिलते ही विजयनगर थाने की पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची और मृतक के परिवारजनों को सूचित किया गया। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पंचायतनामा और पोस्टमार्टम की आवश्यक कार्रवाई को पूरा किया। साथ ही, पुलिस इस तथ्य की भी जांच कर रही है कि युवक ने सुसाइड करने से पूर्व एक वीडियो बनाई थी। इस संबंध में अन्य तथ्यों की भी पुलिस द्वारा गहन जांच की जा रही है और आवश्यक वैधानिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। मौके पर शांति एवं कानून व्यवस्था पूरी तरह कायम है। इस मामले पर सहायक पुलिस आयुक्त कोतवाली नगर, श्रीमती उपासना पाण्डेय ने एक वीडियो बाइट भी जारी की है।1
- आज शालीमार गार्डन स्थित चंद्रशेखर पार्क में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस को पूरे उत्साह और उमंग के साथ मनाया गया। इस कार्यक्रम में सांसद अतुल गर्ग और पूर्व पार्षद पवन रेड्डी सहित कई गणमान्य व्यक्तियों और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों ने भाग लिया, जहाँ सभी ने मिलकर सामूहिक योगाभ्यास किया। इस अवसर पर सभी प्रतिभागियों ने योग के महत्व को गहराई से समझा और इसे नियमित रूप से करने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि योग केवल शारीरिक स्वास्थ्य के लिए ही नहीं, बल्कि मानसिक शांति, आत्मविश्वास और एक संतुलित जीवन के लिए भी आधारभूत है। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को “योग करें और स्वस्थ रहें” का संदेश दिया गया, जिसके तहत बताया गया कि नियमित योग से शरीर स्वस्थ, मन प्रसन्न और जीवन ऊर्जावान बना रहता है।4
- जनपद गाजियाबाद के यूट्यूब चैनल 'ग्लोबल भारत' के खिलाफ धौरहरा के सपा सांसद आनंद भदौरिया ने मुकदमा दर्ज कराया है। यह कार्रवाई 'ग्लोबल भारत' द्वारा बनाई गई एक रील के बाद की गई, जिसमें 26 सांसदों की एक सूची के साथ यह दावा किया गया था कि ये सांसद समाजवादी पार्टी से अलग होने वाले हैं। इस सूची में सांसद आनंद भदौरिया का नाम भी शामिल किया गया था। सांसद आनंद भदौरिया की शिकायत पर पुलिस ने यूट्यूब चैनल 'ग्लोबल भारत' के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।1
- गाजियाबाद के विजयनगर थाना क्षेत्र के प्रताप विहार स्थित सेक्टर-9 में 22 वर्षीय छात्र जतिन कुमार ने री-नीट परीक्षा से दो दिन पहले फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। जतिन, जो विजय नगर के एच-ब्लॉक का निवासी था और 21 जून को होने वाली नीट परीक्षा की तैयारी कर रहा था, ने यह आत्मघाती कदम उठाने से ठीक पहले एक मिनट चार सेकंड का वीडियो भी बनाया। इस वीडियो में उसने खुद को किसी दबाव में न होने की बात कही, हालांकि उसने यह भी बताया कि वह थोड़ा अवसादग्रस्त महसूस कर रहा था। पुलिस ने उसके मोबाइल फोन से बरामद इस वीडियो को जांच में शामिल कर लिया है। परिजनों के अनुसार, बृहस्पतिवार रात करीब 12 बजे तक जतिन अपने कमरे में टहलता हुआ दिखाई दिया था। शुक्रवार सुबह जब परिवार उसे जगाने पहुंचा, तो वह मृत अवस्था में मिला। सूचना मिलने पर विजयनगर थाना पुलिस और फोरेंसिक टीम मौके पर पहुंची, जहां कमरे में पंखे से बंधा फंदा टूटा हुआ मिला और शव फर्श पर पड़ा था। जांच के दौरान पुलिस को छात्र के मोबाइल फोन से वह वीडियो मिला, जिसमें जतिन ने अपने स्टडी रूम का दृश्य दिखाते हुए कहा कि वह “आज कुछ अलग करने” की सोच रहा है और उसने पंखे पर लगे फंदे को भी कैमरे में दिखाया। वीडियो में उसने स्पष्ट किया कि उस पर किसी प्रकार का दबाव नहीं है और उसे नीट परीक्षा की कोई चिंता नहीं है; उसके पिता ने भी उसे परीक्षा को लेकर तनाव न लेने की सलाह दी थी। उसने यह भी कहा कि वह परीक्षा में सफल होने का प्रयास करना चाहता है और यदि सफल हुआ तो लोग यह वीडियो देखेंगे, जिसके बाद उसने अपनी बात समाप्त कर दी। मृतक जतिन अपने परिवार का इकलौता बेटा था; उसके पिता एक सरकारी विभाग में कार्यरत हैं, जबकि मां गृहिणी हैं और उसकी एक छोटी बहन इंटरमीडिएट की छात्रा है। इस घटना के बाद परिवार में गहरा कोहराम मचा हुआ है और परिजनों ने फिलहाल इस मामले में कोई बयान देने से इनकार कर दिया है। एसीपी उपासना पांडेय ने बताया कि युवक द्वारा आत्महत्या से पहले बनाया गया वीडियो बरामद हुआ है, जिसकी गहन जांच की जा रही है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और मामले के सभी पहलुओं की जांच कर आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। क्षेत्र में शांति एवं कानून व्यवस्था सामान्य बनी हुई है।1
- केंद्र सरकार ने जनस्वास्थ्य के हित में एक महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए 20 जून को नई दिल्ली में 16 फिक्स्ड डोज़ कॉम्बिनेशन (FDC) दवाओं के निर्माण, बिक्री और वितरण पर प्रतिबंध लगा दिया है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा की गई इस कार्रवाई के पीछे यह पाया जाना है कि ये दवाएं चिकित्सकीय रूप से अव्यावहारिक हैं और इनसे स्वास्थ्य को संभावित जोखिम हो सकता है। मंत्रालय ने सभी राज्यों के औषधि नियंत्रकों को इस प्रतिबंध का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं, जिसके परिणामस्वरूप ये प्रतिबंधित दवाएं अब बाजार में उपलब्ध नहीं होंगी। मंत्रालय का कहना है कि यह कदम मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और केवल वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित दवा संयोजनों की उपलब्धता बनाए रखने के लिए उठाया गया है। एफडीसी ऐसी दवा होती है, जिसमें दो या अधिक सक्रिय औषधीय तत्वों को एक तय अनुपात में मिलाकर एक ही टैबलेट, कैप्सूल या सिरप के रूप में तैयार किया जाता है।1
- गाजियाबाद के खोड़ा थाना क्षेत्र से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ बीती रात करीब 2 बजे पुलिस को 112 नंबर के ज़रिए सूचना मिली कि एक किशोरी के साथ दुष्कर्म का प्रयास किया गया है, जिसमें वह घायल हो गई है। सूचना मिलने के तुरंत बाद, थाना पुलिस मौके पर पहुँची और घायल किशोरी को पास के अस्पताल में भर्ती कराया। फिलहाल, किशोरी की हालत सुरक्षित बताई जा रही है। परिजनों ने आरोप लगाया है कि पीड़िता का परिवार जिस मकान में किराए पर रहता है, उसी की दूसरी मंजिल पर रहने वाले एक नाबालिग किशोर ने किशोरी के साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की। परिजनों के अनुसार, इसी खींचतान के दौरान गिरने से किशोरी को चोटें आईं। इस मामले में आरोपी नाबालिग किशोर को हिरासत में ले लिया गया है।1
- गाजियाबाद के खोड़ा थाना क्षेत्र के संगम पार्क इलाके में 20 जून की देर रात एक नाबालिग किशोरी के साथ कथित तौर पर दुष्कर्म के प्रयास का मामला सामने आया है। आरोप है कि एक नाबालिग युवक ने किशोरी के साथ जबरदस्ती करने का प्रयास किया, जिसके दौरान किशोरी घायल हो गई। परिजनों ने किशोरी की चीख सुनकर उसे घायल अवस्था में पाया, जिसके बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने उसे तत्काल उपचार के लिए स्थानीय अस्पताल पहुंचाया। चिकित्सकों के अनुसार, किशोरी की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। इंदिरापुरम के एसीपी अभिषेक श्रीवास्तव ने बताया कि 20 जून की रात्रि पुलिस को संगम पार्क क्षेत्र में एक नाबालिग लड़की के घायल होने की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची और घायल किशोरी को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया। उन्होंने जानकारी दी कि पीड़िता के परिजनों की शिकायत के आधार पर दुष्कर्म के प्रयास सहित संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने आरोपी नाबालिग युवक को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है, साथ ही पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया जा रहा है। मामले के सभी पहलुओं की गहनता से जांच की जा रही है, और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।1
- महाराष्ट्र के परभणी जिले में स्थित यशवाड़ी देवस्थान के हनुमान मंदिर के हॉल की छत अचानक गिर गई। इस हादसे में 30 से 40 श्रद्धालु घायल हुए हैं। शुरुआती रिपोर्ट्स के अनुसार, इस घटना में कुछ लोगों की मौत होने की खबर भी सामने आई है।1