“यमुना का सीना छलनी, सिस्टम बेखबर: कौशाम्बी में ‘रेत माफिया राज’ का विस्फोट” सराय अकिल, कौशाम्बी कौशाम्बी में कटैय्या बालू घाट इन दिनों उस खामोश सच्चाई का गवाह बन चुका है, जहां कानून की किताबें धूल खा रही हैं और जमीन पर ‘रेत का साम्राज्य’ अपने पूरे शबाब पर है। पट्टा संख्या 10/19 और 10/21 की आड़ में जिस तरह से खनन गतिविधियां संचालित हो रही हैं, उसने प्रशासनिक सख्ती की हकीकत को कटघरे में खड़ा कर दिया है। दिन में खनन, रात में ‘रेत का कारोबार’—सब कुछ खुलेआम सुबह की पहली किरण से लेकर देर रात तक घाट पर भारी मशीनों का शोर गूंजता है। पोकलैंड और जेसीबी जैसी मशीनें नदी की गहराई तक खुदाई कर रही हैं। नियमों के मुताबिक जहां मशीनों पर सख्त रोक होनी चाहिए, वहीं यहां उनका बेखौफ इस्तेमाल हो रहा है—मानो किसी ने रोकने की जिम्मेदारी ही छोड़ दी हो। हर दिन सैकड़ों गाड़ियां, लेकिन कार्रवाई शून्य स्थानीय लोगों के अनुसार, रोजाना सैकड़ों डंपर और ट्रैक्टर बालू लादकर निकलते हैं। ओवरलोडिंग की वजह से सड़कें टूट रही हैं, हादसों का खतरा बढ़ रहा है और धूल से गांवों की हवा जहरीली हो चुकी है। इसके बावजूद चेकिंग या रोकथाम की कोई ठोस व्यवस्था नजर नहीं आती। नाम चर्चा में, लेकिन हाथ ‘कानून’ के नहीं पहुंचते इस पूरे नेटवर्क में कुछ प्रभावशाली लोगों की भूमिका को लेकर क्षेत्र में चर्चाएं तेज हैं। हालांकि आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन जिस तरह से पूरा खेल बिना रुकावट जारी है, उसने लोगों के मन में एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—क्या यह सिर्फ लापरवाही है या फिर कोई ‘सिस्टमेटिक सेटिंग’? पर्यावरण पर सीधा हमला, यमुना संकट में... विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि इस तरह का अनियंत्रित खनन यमुना के अस्तित्व के लिए खतरा बन सकता है। गहराई तक खुदाई से नदी का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हो रहा है, जलस्तर गिर रहा है और तट कटाव तेजी से बढ़ रहा है। अगर यही हाल रहा, तो आने वाले समय में इसका असर पूरे इलाके की जल व्यवस्था पर पड़ सकता है। प्रशासन की चुप्पी—सबसे बड़ा सवाल इतनी बड़ी गतिविधि के बावजूद जिम्मेदार विभागों की ओर से कोई कड़ी कार्रवाई न होना सबसे बड़ा सवाल बन गया है। क्या अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं, या फिर सब कुछ जानकर भी अनदेखा किया जा रहा है? अब फैसला किसका—प्रशासन या माफिया? कटैया घाट की यह कहानी अब सिर्फ अवैध खनन की नहीं, बल्कि सिस्टम की विश्वसनीयता की भी बन चुकी है। जनता की नजर अब प्रशासन की अगली चाल पर है—क्या ‘रेत माफिया’ पर शिकंजा कसेगा या फिर यमुना यूं ही हर दिन छलनी होती रहेगी? यह कहानी अभी खत्म नहीं हुई… अगला कदम तय करेगा कि कानून जिंदा है या सिर्फ कागजों में कैद।
“यमुना का सीना छलनी, सिस्टम बेखबर: कौशाम्बी में ‘रेत माफिया राज’ का विस्फोट” सराय अकिल, कौशाम्बी कौशाम्बी में कटैय्या बालू घाट इन दिनों उस खामोश सच्चाई का गवाह बन चुका है, जहां कानून की किताबें धूल खा रही हैं और जमीन पर ‘रेत का साम्राज्य’ अपने पूरे शबाब पर है। पट्टा संख्या 10/19 और 10/21 की आड़ में जिस तरह से खनन गतिविधियां संचालित हो रही हैं, उसने प्रशासनिक सख्ती की हकीकत को कटघरे में खड़ा कर दिया है। दिन में खनन, रात में ‘रेत का कारोबार’—सब कुछ खुलेआम सुबह की पहली किरण से लेकर देर रात तक घाट पर भारी मशीनों का शोर गूंजता है। पोकलैंड और जेसीबी जैसी मशीनें नदी की गहराई तक खुदाई कर रही हैं। नियमों के मुताबिक जहां मशीनों पर सख्त रोक होनी चाहिए, वहीं यहां उनका बेखौफ इस्तेमाल हो रहा है—मानो किसी ने रोकने की जिम्मेदारी ही छोड़ दी हो। हर दिन सैकड़ों गाड़ियां, लेकिन कार्रवाई शून्य स्थानीय लोगों के अनुसार, रोजाना सैकड़ों डंपर और ट्रैक्टर बालू लादकर निकलते हैं। ओवरलोडिंग की वजह से सड़कें टूट रही हैं, हादसों का खतरा बढ़ रहा है और धूल से गांवों की हवा जहरीली हो चुकी है। इसके बावजूद चेकिंग या रोकथाम की कोई ठोस व्यवस्था नजर नहीं आती। नाम चर्चा में, लेकिन हाथ ‘कानून’ के नहीं पहुंचते इस पूरे नेटवर्क में कुछ प्रभावशाली लोगों की भूमिका को लेकर क्षेत्र में चर्चाएं तेज हैं। हालांकि आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन जिस तरह से पूरा खेल बिना रुकावट जारी है, उसने लोगों के मन में एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—क्या यह सिर्फ लापरवाही है या फिर कोई ‘सिस्टमेटिक सेटिंग’? पर्यावरण पर सीधा हमला, यमुना संकट में... विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि इस तरह का अनियंत्रित खनन यमुना के अस्तित्व के लिए खतरा बन सकता है। गहराई तक खुदाई से नदी का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हो रहा है, जलस्तर गिर रहा है और तट कटाव तेजी से बढ़ रहा है। अगर यही हाल रहा, तो आने वाले समय में इसका असर पूरे इलाके की जल व्यवस्था पर पड़ सकता है। प्रशासन की चुप्पी—सबसे बड़ा सवाल इतनी बड़ी गतिविधि के बावजूद जिम्मेदार विभागों की ओर से कोई कड़ी कार्रवाई न होना सबसे बड़ा सवाल बन गया है। क्या अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं, या फिर सब कुछ जानकर भी अनदेखा किया जा रहा है? अब फैसला किसका—प्रशासन या माफिया? कटैया घाट की यह कहानी अब सिर्फ अवैध खनन की नहीं, बल्कि सिस्टम की विश्वसनीयता की भी बन चुकी है। जनता की नजर अब प्रशासन की अगली चाल पर है—क्या ‘रेत माफिया’ पर शिकंजा कसेगा या फिर यमुना यूं ही हर दिन छलनी होती रहेगी? यह कहानी अभी खत्म नहीं हुई… अगला कदम तय करेगा कि कानून जिंदा है या सिर्फ कागजों में कैद।
- पूर्व प्रधान मनोज कुमार वाल्मीकि को गोली हत्याकांड में चक्का इमामगंज चक्का जाम 24 घंटे हो गए अभी तक कौशांबी की पुलिस नाकाम रही क्योंकि अभी तक अपराधी को गिरफ्तार नहीं किया गया Ja sakaहै ना उनकी कोई अभी तक कोई तलाश हुई है की तलाश हुई हो अभी तक मुझे को पकड़ नहीं जा सका मनोज कुमार वाल्मीकि नहस अभी 36 घंटे होने वाले हैं उनको मरे हुए 12:00 बजे टाइम 12:00 बजे उनकी मृत्यु घोषित हो गई जो कि कल उनको सोमवार को सुबह 5:00 बजे गोली मार की अभी तक डफरान में इलाज हो रहा था उ1
- यूपी के कौशांबी में पुरानी रंजिश में पूर्व प्रधान रामनरेश पर जानलेवा हमला हुआ। दबंगों ने लाठी-डंडों से जमकर पिटाई की, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस ने उन्हें इलाज के लिए अस्पताल भेजा। @kaushambipolice #Kaushambi #UPNews #Crime #Attack #Police1
- *वरिष्ठ पत्रकार फैजी जाफरी कौशाम्बी* *कौशाम्बी* जनपद के संदीपन घाट थाना क्षेत्र अंतर्गत आलमचंद गांव के पूर्व प्रधान मनोज कुमार हेला की इलाज के दौरान मौत के बाद मंगलवार को परिजनों और ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। आक्रोशित लोगों ने इमामगंज तिराहे पर जीटी रोड (नेशनल हाईवे) जाम कर जोरदार प्रदर्शन किया और पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की। बता दें कि बीते सोमवार सुबह आलमचंद गांव में मॉर्निंग वॉक पर निकले पूर्व प्रधान मनोज कुमार हेला पर अज्ञात बाइक सवार बदमाशों ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी थी। हमले में गंभीर रूप से घायल मनोज कुमार हेला को तत्काल प्रयागराज के एसआरएन अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां मंगलवार को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। मनोज कुमार हेला की मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया, वहीं पूरे गांव में शोक और आक्रोश का माहौल व्याप्त हो गया। परिजनों का आरोप है कि घटना के 24 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बावजूद पुलिस हमलावरों को गिरफ्तार नहीं कर सकी है। साथ ही पोस्टमार्टम में हुई देरी और शाम करीब 6 बजे तक शव घर न पहुंचने से परिजनों का गुस्सा और बढ़ गया। आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों ने मंगलवार शाम करीब 6 बजे संदीपन घाट थाना क्षेत्र के इमामगंज तिराहे पर नेशनल हाईवे जाम कर दिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और “पुलिस प्रशासन मुर्दाबाद” के नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जब तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होगी, उनका आंदोलन जारी रहेगा। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने परिजनों और ग्रामीणों को समझा-बुझाकर शांत कराया तथा आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी का आश्वासन दिया। इसके बाद जाम हटवाकर यातायात व्यवस्था को सुचारू रूप से बहाल कराया गया। फिलहाल क्षेत्र में तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। पुलिस मामले की जांच में जुटी है और हमलावरों की तलाश के लिए लगातार दबिश दी जा रही है। इस घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत और आक्रोश का माहौल बना हुआ है।।।1
- कौशाम्बी। संदीपन घाट थाना क्षेत्र में सोमवार सुबह हुई फायरिंग की घटना ने मंगलवार को तूल पकड़ लिया, जब घायल पूर्व प्रधान की इलाज के दौरान मौत हो गई। जानकारी के अनुसार 4 मई 2026 को सुबह करीब 5 बजे आलमचंद निवासी पूर्व प्रधान मनोज कुमार (45) पुत्र सुन्दरलाल महेश्वरी प्रसाद इंटर कॉलेज मार्ग से महुआरी बाग की ओर मॉर्निंग वॉक पर जा रहे थे। इसी दौरान महुआरी बाग के पास अज्ञात बदमाशों ने उन्हें गोली मारकर गंभीर रूप से घायल कर दिया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने घायल को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मूरतगंज पहुंचाया, जहां से हालत गंभीर होने पर प्रयागराज रेफर कर दिया गया। इलाज के दौरान मंगलवार शाम उनकी मौत हो गई। घटना की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। वहीं आक्रोशित परिजनों ने शाम करीब 6 बजे चक्का जाम कर विरोध प्रदर्शन किया और आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग की। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर हालात को संभाला और आश्वासन दिया कि जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा। फिलहाल क्षेत्र में तनाव का माहौल है और पुलिस मामले की जांच में जुटी है।4
- Post by शिव सागर मौर्य1
- दिनदहाड़े जमकर लाठी डंडो से पीटा अंदावा गांव का मामला है । #trendingreels #viralvideo #Kaushambi news1
- संदीपन घाट थाना की घटना रात में कोइलहा गांव में 50 से 60 पुलिसकर्मी गांव मे ं घुस महिलाओं के साथ मारपीट वा कपड ़ े फाड़न े और नाबालिक को डंड े पीटन े का आरोप महिला का बयान सोशल मीडिया पर वायरल @CMOffice UP @deo_kaushambi @kaushambipolice @Uppolice संदीपन घाट थाना की घटना रात में कोइलहा गांव में 50 से 60 पुलिसकर्मी गांव मे ं घुस महिलाओं के साथ मारपीट वा कपड ़ े फाड़न े और नाबालिक को डंड े पीटन े का आरोप महिला का बयान सोशल मीडिया पर वायरल1
- कौशांबी में एक पूर्व ग्राम प्रधान को सुबह मॉर्निंग वॉक करते समय गोली मारी गई स्वरूपरानी अस्पताल में इलाज के दौरान मौत परिवार वालों पर प्रशासन पैसा लेकर समझौता करने का दबाव बना रहे है, ऐसा परिवार का आरोप है इस सरकार में कोई भी सुरक्षित नहीं है, किसी की भी हत्या कभी भी हो सकती है।1