बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र में 17 जून 2026 को हुआ भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर केवल एक अपराधी या विक्षिप्त घोषित व्यक्ति की मौत का मामला नहीं है, बल्कि यह हमारी कानून व्यवस्था की पेशेवर कार्यशैली और मानवाधिकारों के संरक्षण पर एक गंभीर व डरावना प्रश्नचिह्न लगाता है। इस मामले में जहां बिहार पुलिस शुरुआत में अपनी पीठ थपथपा रही थी, वहीं अब एडीजी (मुख्यालय) सुधांशु कुमार द्वारा 'पुलिसिया लापरवाही' स्वीकार करने और सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंची जनहित याचिका ने इसे एक नया और गंभीर मोड़ दे दिया है। एडीजी सुधांशु कुमार ने स्वीकार किया है कि 16 जून को एनकाउंटर से पहले भरत भूषण से बात करने गए पुलिसकर्मी स्थिति को ठीक से संभाल नहीं पाए। जब एक व्यक्ति के पास हथियार था और वह फेसबुक लाइव कर रहा था, तब पुलिस की 'मूकदर्शक' भूमिका ने संकट को और गहरा दिया। इसके बाद एक थाना प्रभारी (SHO), दो सब-इंस्पेक्टर (SI), एक एएसआई (ASI) और एक कांस्टेबल को सस्पेंड करना प्रशासनिक लीपापोती जैसा दिखता है। यह सवाल उठाया गया है कि यदि पुलिस 16 जून को संवेदनशील रणनीति अपनाती या उचित बल प्रयोग के साथ उसे हिरासत में ले लेती, तो क्या 17 जून को एसटीएफ की गोलियों से उसकी जान जाती? यह मुठभेड़ कई मायनों में असामान्य और संदेहास्पद है। पुलिस का शुरुआती दावा था कि 28 वर्षीय मृतक भरत भूषण तिवारी 'मानसिक रूप से अस्वस्थ' था। ऐसे में, आंसू गैस, रबर की गोलियां या स्टन गन जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग करने के बजाय सीधे पैरों में चार गोलियां मारना कहां का न्याय है, यह प्रश्नचिह्न लगाता है। सोशल मीडिया पर वायरल और लाइव स्ट्रीम हुए वीडियो में साफ दिख रहा था कि मृतक आत्मसमर्पण की बात कर रहा था और उसने कथित तौर पर हथियार भी फेंक दिया था। एनडीए सरकार के भीतर से भी इस एनकाउंटर पर सवाल उठ रहे हैं और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज से न्यायिक जांच के आदेश देने से साफ होता है कि इस मामले में कुछ तो गड़बड़ है। भोजपुर एनकाउंटर का मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत में है, जहां सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता विशाल तिवारी ने एक जनहित याचिका दायर कर इसे 'फर्जी' बताते हुए निष्पक्ष सीबीआई जांच की मांग की है। हालांकि जस्टिस नागरत्ना की अध्यक्षता वाली पीठ ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है, लेकिन याचिकाकर्ता को इसे रजिस्ट्रार के सामने मेंशन करने को कहा गया है, जिससे यह स्पष्ट है कि यह मामला कानून की सर्वोच्च निगाहों से छिपने वाला नहीं है और जल्द ही इस पर गहन कानूनी विमर्श होना तय है। लेख निष्कर्ष निकालता है कि जब भी पुलिस आत्मरक्षा के नाम पर कानून हाथ में लेती है, समाज का न्याय प्रणाली से भरोसा डगमगाने लगता है। यदि भरत भूषण तिवारी का कोई आपराधिक इतिहास नहीं था और वह एक सामाजिक कार्यकर्ता था, तो उसकी इस दर्दनाक मौत ने पूरे बिहार को आक्रोशित कर दिया है। सस्पेंशन या न्यायिक जांच केवल तात्कालिक मरहम हैं, असली न्याय तभी होगा जब यह पता चलेगा कि क्या यह वास्तव में आत्मरक्षा थी या किसी बड़ी साजिश अथवा खाकी की हताशा का परिणाम। लोकतंत्र 'संविधान की नियत' से चलता है, 'ठोक दो' की नीति से नहीं, और पुलिस को समझना होगा कि बंदूक कानून की रक्षा के लिए है, किसी की जिंदगी का 'लाइव' अंत करने के लिए नहीं।
बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र में 17 जून 2026 को हुआ भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर केवल एक अपराधी या विक्षिप्त घोषित व्यक्ति की मौत का मामला नहीं है, बल्कि यह हमारी कानून व्यवस्था की पेशेवर कार्यशैली और मानवाधिकारों के संरक्षण पर एक गंभीर व डरावना प्रश्नचिह्न लगाता है। इस मामले में जहां बिहार पुलिस शुरुआत में अपनी पीठ थपथपा रही थी, वहीं अब एडीजी (मुख्यालय) सुधांशु कुमार द्वारा 'पुलिसिया लापरवाही' स्वीकार करने और सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंची जनहित याचिका ने इसे एक नया और गंभीर मोड़ दे दिया है। एडीजी सुधांशु कुमार ने स्वीकार किया है कि 16 जून को एनकाउंटर से पहले भरत भूषण से बात करने गए पुलिसकर्मी स्थिति को ठीक से संभाल नहीं पाए। जब एक व्यक्ति के पास हथियार था और वह फेसबुक लाइव कर रहा था, तब पुलिस की 'मूकदर्शक' भूमिका ने संकट को और गहरा दिया। इसके बाद एक थाना प्रभारी (SHO), दो सब-इंस्पेक्टर (SI), एक एएसआई (ASI) और एक कांस्टेबल को सस्पेंड करना प्रशासनिक लीपापोती जैसा दिखता है। यह सवाल उठाया गया है कि यदि पुलिस 16 जून को संवेदनशील रणनीति अपनाती या उचित बल प्रयोग के साथ उसे हिरासत में ले लेती, तो क्या 17 जून को एसटीएफ की गोलियों से उसकी जान जाती? यह मुठभेड़ कई मायनों में असामान्य और संदेहास्पद है। पुलिस का शुरुआती दावा था कि 28 वर्षीय मृतक भरत भूषण तिवारी 'मानसिक रूप से अस्वस्थ' था। ऐसे में, आंसू गैस, रबर की गोलियां या स्टन गन जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग करने के बजाय सीधे पैरों में चार गोलियां मारना कहां का न्याय है, यह प्रश्नचिह्न लगाता है। सोशल मीडिया पर वायरल और लाइव स्ट्रीम हुए वीडियो में साफ दिख रहा था कि मृतक आत्मसमर्पण की बात कर रहा था और उसने कथित तौर पर हथियार भी फेंक दिया था। एनडीए सरकार के भीतर से भी इस एनकाउंटर पर सवाल उठ रहे हैं और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज से न्यायिक जांच के आदेश देने से साफ होता है कि इस मामले में कुछ तो गड़बड़ है। भोजपुर एनकाउंटर का मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत में है, जहां सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता विशाल तिवारी ने एक जनहित याचिका दायर कर इसे 'फर्जी' बताते हुए निष्पक्ष सीबीआई जांच की मांग की है। हालांकि जस्टिस नागरत्ना की अध्यक्षता वाली पीठ ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है, लेकिन याचिकाकर्ता को इसे रजिस्ट्रार के सामने मेंशन करने को कहा गया है, जिससे यह स्पष्ट है कि यह मामला कानून की सर्वोच्च निगाहों से छिपने वाला नहीं है और जल्द ही इस पर गहन कानूनी विमर्श होना तय है। लेख निष्कर्ष निकालता है कि जब भी पुलिस आत्मरक्षा के नाम पर कानून हाथ में लेती है, समाज का न्याय प्रणाली से भरोसा डगमगाने लगता है। यदि भरत भूषण तिवारी का कोई आपराधिक इतिहास नहीं था और वह एक सामाजिक कार्यकर्ता था, तो उसकी इस दर्दनाक मौत ने पूरे बिहार को आक्रोशित कर दिया है। सस्पेंशन या न्यायिक जांच केवल तात्कालिक मरहम हैं, असली न्याय तभी होगा जब यह पता चलेगा कि क्या यह वास्तव में आत्मरक्षा थी या किसी बड़ी साजिश अथवा खाकी की हताशा का परिणाम। लोकतंत्र 'संविधान की नियत' से चलता है, 'ठोक दो' की नीति से नहीं, और पुलिस को समझना होगा कि बंदूक कानून की रक्षा के लिए है, किसी की जिंदगी का 'लाइव' अंत करने के लिए नहीं।
- चतरा के हंटरगंज में आगामी मुहर्रम पर्व को शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न कराने के उद्देश्य से रविवार को हंटरगंज थाना परिसर में एक शांति समिति की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता अंचल पुलिस इंस्पेक्टर विपिन कुमार ने की, जबकि थाना प्रभारी प्रभात कुमार ने इसका संचालन किया। इस दौरान दोनों समुदायों के सैकड़ों लोग उपस्थित रहे, जिन्होंने आपसी भाईचारे और सामाजिक सौहार्द के साथ मुहर्रम पर्व मनाने का निर्णय लिया। पुलिस प्रशासन ने पर्व के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के संबंध में कई आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए। थाना प्रभारी प्रभात कुमार ने इस बात पर जोर दिया कि हंटरगंज थाना क्षेत्र के लोग हमेशा से सभी पर्व-त्योहारों को आपसी भाईचारे और सौहार्द के साथ मनाते आए हैं और इस परंपरा को आगे भी कायम रखना आवश्यक है। बैठक में पंचायत स्तर पर संचालित लाइसेंसी और गैर-लाइसेंसी अखाड़ों की समीक्षा की गई। अखाड़ा समितियों के अध्यक्ष, कोषाध्यक्ष और कम से कम 10 सदस्यों के नाम तथा मोबाइल नंबर थाना में जमा करने का निर्देश दिया गया, साथ ही जिन अखाड़ों के लाइसेंस समाप्त हो चुके हैं, उन्हें शीघ्र नवीनीकरण के लिए आवेदन देने को कहा गया। पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश दिए कि मुहर्रम का जुलूस केवल निर्धारित रूट से ही निकाला जाएगा। जुलूस के दौरान असामाजिक और शरारती तत्वों पर विशेष नजर रखी जाएगी, और सामाजिक एवं धार्मिक उन्माद फैलाने वाले नारों व गीतों पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। इसके अतिरिक्त, डीजे बजाने पर भी पूरी तरह से प्रतिबंध रहेगा। बैठक में उपस्थित लोगों से यह अपील भी की गई कि किसी भी प्रकार की समस्या या विवाद की स्थिति उत्पन्न होने पर इसकी सूचना तत्काल पुलिस प्रशासन को दी जाए, ताकि समय रहते उचित कार्रवाई की जा सके। इस बैठक में पूर्व बीस सूत्री जिला उपाध्यक्ष प्रभु दयाल यादव, भाजपा के पूर्व मंडल अध्यक्ष अरुण चौरसिया, राजद कार्यकारणी प्रखंड अध्यक्ष देवलाल यादव, वकील खान, एसआई नीतीश कुमार, एएसआई वीर बहादुर सिंह, भोला साव, सुनील दुबे, रंजीत कुमार सिंह, अजय महतो, मुखिया प्रतिनिधि दिलीप दास, बृज किशोर सिंह, जिप सदस्य प्रतिनिधि बेचन पासवान, चैतू यादव, मो. मशीर आलम सहित दोनों समुदायों के काफी संख्या में लोग उपस्थित थे।1
- गया जिले के गुरुआ थाना क्षेत्र अंतर्गत शेरपुर गांव निवासी 18 वर्षीय छात्र संजीत कुमार की सड़क दुर्घटना में इलाज के दौरान मृत्यु हो गई है। यह दुखद घटना शनिवार शाम को भलुहार-मटुआ के पास हुई थी, जहाँ एक अज्ञात बाइक सवार ने उसे टक्कर मार दी थी। टक्कर से संजीत गंभीर रूप से घायल हो गया था। उसे तुरंत गुरुआ स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया, लेकिन उपचार के बाद जब उसकी स्थिति बिगड़ने लगी, तो चिकित्सकों ने उसे गया मगध मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। मगध मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान संजीत कुमार ने दम तोड़ दिया। मृतक दसवीं कक्षा का छात्र था और अपने तीन भाइयों में सबसे छोटा था। इस दर्दनाक हादसे के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे परिवार में कोहराम मचा हुआ है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए गया मगध मेडिकल कॉलेज भेजकर मामले की जांच शुरू कर दी है।2
- गया जिले के तिवारी बाजार में नल जल योजना के तहत पिछले दो से तीन साल से पानी की एक बूंद भी नहीं आई है। स्थानीय लोगों के अनुसार, जब से यह योजना शुरू हुई है, तब से आज तक पानी की आपूर्ति नहीं हुई है। इस क्षेत्र में सब कुछ 'खंडारी-खंडारी' पड़ा है, और ग्रामीणों को यह समझ नहीं आ रहा कि जब पानी आता ही नहीं, तो इस योजना को लगाने का क्या फायदा। इस गंभीर स्थिति के कारण तिवारी बाजार में पानी की समस्या विकराल रूप ले चुकी है।1
- रफीगंज रेलवे पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए एक शराब तस्कर को 16 लीटर 500 मिलीलीटर अंग्रेजी शराब के साथ गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी रफीगंज रेलवे स्टेशन पर की गई। रफीगंज रेलवे इंस्पेक्टर राम सुमेर द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, देहरादून ट्रेन के सुरक्षित गुजरने के बाद प्लेटफार्म संख्या तीन पर ओवरब्रिज के समीप एक संदिग्ध युवक दो बैगों के साथ देखा गया। पूछताछ करने पर युवक ने बैग में शराब होने की बात स्वीकार की, जिसके बाद उसके पास से बताई गई मात्रा में शराब बरामद हुई। गिरफ्तार युवक की पहचान उत्तर प्रदेश के फैजाबाद जिले के उसरु अमौना गांव निवासी मिथिलेश उपाध्याय के 21 वर्षीय पुत्र मोहित उपाध्याय के रूप में हुई है। इस मामले में मध्य निषेध अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। अग्रिम कानूनी कार्रवाई के लिए रफीगंज रेलवे पुलिस ने गिरफ्तार शराब तस्कर को रेल पुलिस सन नगर थाना को सौंप दिया, जिसके बाद उसे जेल भेज दिया गया है।1
- गया शहर के सिविल लाइन थाना में मोहर्रम पर्व को शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न कराने के उद्देश्य से एक शांति समिति की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता सिविल लाइन थाना अध्यक्ष शमीम अहमद ने की, जिन्होंने अपने संबोधन में कहा कि शांति और सद्भाव बनाए रखने के लिए सभी समुदायों का सहयोग अत्यंत आवश्यक है। बैठक में थाना अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि मोहर्रम के दौरान ताजिया रखने और जुलूस निकालने के लिए प्रशासन से लाइसेंस प्राप्त करना अनिवार्य होगा। उन्होंने यह भी बताया कि सभी संवेदनशील स्थानों पर विशेष पुलिस बल तैनात किया जाएगा ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। इस महत्वपूर्ण अवसर पर वार्ड पार्षद मोहम्मद कलाम कुरैशी, मोहन राय शर्मा, टिंकू गोस्वामी, हलीम भाई, दिनेश सिंह सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। बैठक का मुख्य जोर आपसी भाईचारे और सौहार्द को बढ़ावा देने पर रहा, जिसके साथ पर्व मनाने की अपील की गई।1
- बिहार के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में अब एक नया मोड़ आ गया है। मृतक युवक की बहनों ने हाल ही में खुलासा किया है कि भरत तिवारी को तीन नहीं, बल्कि कुल पाँच गोलियाँ लगी थीं।1
- गया जिले के चौरी बाजार में रहने वाले लोग पानी की गंभीर किल्लत का सामना कर रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, बाजार में स्थित लगभग 500 घरों में से किसी भी घर में पानी नहीं आता है। स्थिति यह है कि नल जल योजना के तहत घरों में सिर्फ नल लगा दिए गए हैं, लेकिन उनमें पानी की एक बूंद तक नहीं पहुंचती। ऐसे में, लोग इस योजना के औचित्य पर सवाल उठा रहे हैं और पूछ रहे हैं कि ऐसी योजना का क्या फायदा जब घरों में पानी ही न मिले।1
- बिहार के शेरघाटी में एक दिल दहला देने वाला सड़क हादसा हुआ है। इस दुर्घटना में एक छात्रा की अज्ञात वाहन की चपेट में आने से मौत हो गई। घटना के बाद वाहन चालक मौके से फरार हो गया, जिसकी और फरार वाहन की तलाश लगातार जारी है।1