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जिलाधिकारी नैनीताल ललित मोहन रयाल ने दी होली की शुभकामनाएं
शैल शक्ति
जिलाधिकारी नैनीताल ललित मोहन रयाल ने दी होली की शुभकामनाएं
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- डीएम ललित मोहन रयाल ने जनपद वासियों से नशामुक्त व पर्यावरण के अनुरूप होली मनाने की अपील की है। उन्होंने वीडियो जारी कर कहा कि रंगों के इस त्यौहार को सौहार्दपूर्ण मनाए। उन्होंने समस्त जनपदवासियों को होली की शुभकामनाएं दी है।1
- रामपुर में रंगोत्सव के पर्व होली और चल रहे पवित्र रमजान माह को लेकर पुलिस प्रशासन अलर्ट पर है। सोमवार को पुलिस अधीक्षक विद्यासागर मिश्र ने बताया कि होली पर निकलने वाली जनपद में शोभायात्रा आदि को लेकर पुलिस स्थलीय निरीक्षण कर रही है,जबकि वह भी एडीशनल अनुराग सिंह के साथ भ्रमण शील है। लगातार पुलिस प्रशासन त्योहार पर शांति और भाईचारे के साथ मनाने की अपील कर रहे हैं।जबकि हुड़दंग मचाने वालों पर पुलिस की पैनी नजर है।1
- Post by Mohd Kamil4
- Post by संदीप निडर1
- पीलीभीत दियोरिया कला कोतवाली क्षेत्र के गांव किशनपुर में युवक का पीट-पीट कर हत्या और पांच लोग गंभीर रूप से घायल मौके पर पहुंची पुलिस #पीलीभीत #news #UttarPradesh #MYogiAdityanath #vairalvideoシ #UPPolice #Dmpilibhit1
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- विडियो देखें- देहरादून (उत्तराखंड) नाम हिदायत… काम पूजा बैंड से? भाई की शादी के लिए हिंदू बैंड बुक करने गया व्यक्ति तो टोकन लेते समय नाम कुछ और निकला। पूछताछ में मामला गंभीर निकला और हिंदू बेटियों को बहला-फुसलाकर फँसाने की बात सामने आई।1
- वसंत में ऋतु का आगमन कब शुरू होता है, यह संशय आज भी बरकरार है। इस ऋतु के आगमन की तारीख के पीछे कई धारणाएं आज भी प्रचलित है। मौसम वैज्ञानिकों के अपने तर्क हैं तो खगोल शास्त्रियों के अलग हैं। बहरहाल ये यह रोचक विषय है, जो भी हो, दोनों ही वैज्ञानिक वर्ग हैं जिन्हें झुठलाया या नकारा नहीं जा सकता है। जानते हैं कि खगोल और मौसम वैज्ञानिको के बीच का फर्क। खगोल वैज्ञानिकों का तर्क खगोल वैज्ञानिकों के अनुसार इस वर्ष वसंत का आगमन इस वर्ष 20 मार्च को होने जा रहा है, जो भारतीय समय शाम 8.16 बजे से शुरू होगा। इसके पीछे तर्क पृथ्वी का अपने अक्ष पर 23.5 डिग्री झुकाव है। खगोल वैज्ञानिक कहते हैं कि वसंत अमूमन 19, 20 या 21 मार्च में से किसी एक दिन होता है। यह ऐसा समय होता है, जब दिन और रात लगभग बराबर लंबे होते हैं। खगोल वैज्ञानिको ने इस दिन को spring equinox नाम से पुकारते हैं और तर्वक देते हैं कि उत्तरी गोलार्ध में वसंत सूरज पृथ्वी के भूमध्य रेखा (equator) के ठीक ऊपर से उत्तर की ओर पार करने के समय से शुरू होता है। मौसम वैज्ञानिकों का तर्क मौसम वैज्ञानिक (meteorologists) और जलवायु विशेषज्ञ हर साल 1 मार्च से वसंत मानते हैं, जो 31 मई तक चलता है। इसकी वजह डेटा जैसे तापमान, बारिश की तुलना आसान हो जाती है। इसलिए वसंत की निश्चित तिथि 1 मार्च निर्धारित है और मौसम वैज्ञानिकों का आज एक मार्च से वसंत शुरू हो चुका है। बहरहाल वसंत ऋतु का आगमन उमंगों भरा होता है, जो कठोर ठंड से निजात दिलाता है और जीवन को आसान बना देता है। कहीं खत्म ही न हो जाय वसंत ऋतु वसंत आगमन की अलग तिथियों के बीच जो बड़ी गंभीर लकीर खींचती दिख रही है, वह वसंत में ग्रीष्म ऋतु का जैसा तापमान में उछाल आना है। अब मार्च में अप्रैल जैसी गर्मी का एहसास होने लगा है तो मई माह में जून जैसी गर्मी होने लगी है। इससे प्रतीत होता है कि अब वसंत में तापमान की धीमी आंच नहीं रही और मौसम के हिसाब से वसंत ऋतु के दिन कम हो चले है और वह सिकुड़ने लगा है। भविष्य में शायद वसंत ऋतु 60 की जगह 30 दिन में सिमट जाय या फिर बढ़ते ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन के साथ कहीं समाप्त ही न हो जाय। यह बड़ी ही नहीं बहुत बड़ी समस्या हो सकती है। जिसपर विचार वैज्ञानिकों को नहीं बल्कि उन्हें करनी है, जो कुदरत के साथी खिलवाड़ कर रहे हैं। श्रोत Rachel Duensing मौसम वैज्ञानिक1