अतिपिछड़ा वर्ग (EBC) बिहार की सामाजिक संरचना का एक बड़ा और महत्वपूर्ण हिस्सा है और इस समाज को भी समान अधिकार, अतिपिछड़ा वर्ग (EBC) बिहार की सामाजिक संरचना का एक बड़ा और महत्वपूर्ण हिस्सा है और इस समाज को भी समान अधिकार, संजय वर्मा बिहार नवादा बिहार में अतिपिछड़ा वर्ग (EBC) बिहार की सामाजिक संरचना का एक बड़ा और महत्वपूर्ण हिस्सा है और इस समाज को भी समान अधिकार, सुरक्षा और सम्मान मिलना चाहिए। वर्षों से यह वर्ग राजनीतिक रूप से प्रभावशाली माना जाता रहा है, लेकिन इसके बावजूद कई बुनियादी सवाल आज भी अनसुलझे हैं। जिस तरह SC/ST (Prevention of Atrocities) Act के तहत दलित या आदिवासी समाज के किसी व्यक्ति की हत्या या अत्याचार की घटना पर पीड़ित परिवार को सरकारी सहायता और कई मामलों में नौकरी देने जैसी व्यवस्थाएं हैं, उसी तर्ज पर अतिपिछड़ा वर्ग के लिए भी प्रभावी कानून बनाने की मांग समय-समय पर उठती रही है। यह मांग इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि समाज के कमजोर तबकों को सुरक्षा और न्याय का भरोसा मिलना जरूरी है। बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार ने अतिपिछड़ा वर्ग को एक बड़ी राजनीतिक ताकत के रूप में संगठित किया और लंबे समय से उनकी सरकार इस वर्ग के समर्थन पर टिकी रही है। लेकिन आलोचकों का कहना है कि इस समाज को जितना राजनीतिक महत्व मिला, उतना ठोस अधिकार और संरचनात्मक लाभ नहीं मिल पाया। पंचायत और नगर निकाय चुनावों में आरक्षण का मुद्दा भी इसी बहस का हिस्सा है। कई लोगों का मानना है कि यदि 50 प्रतिशत आरक्षण की सीमा के भीतर रहते हुए अधिक हिस्सेदारी दी जाती, तो अतिपिछड़ा समाज को और मजबूत प्रतिनिधित्व मिल सकता था। साथ ही यह भी सच है कि चाहे नैशनल Democratic Alliance हो या Mahagathbandhan, दोनों ही राजनीतिक गठबंधनों पर अक्सर यह आरोप लगता रहा है कि उन्होंने अतिपिछड़े वर्ग को स्थायी अधिकार देने के बजाय उसे एक वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया। यही कारण है कि आज इस समाज के भीतर अपने अधिकारों और हिस्सेदारी को लेकर नई जागरूकता दिखाई दे रही है। अंततः यह स्पष्ट है कि किसी भी समाज की पहचान सिर्फ उसके वोट से नहीं, बल्कि उसके अधिकार, सुरक्षा और सम्मान से तय होती है। अतिपिछड़ा समाज भी अब अपने अधिकारों को समझ रहा है और चाहता है कि उसके मुद्दे सिर्फ चुनावी वादों तक सीमित न रहें, बल्कि ठोस नीतियों और फैसलों के जरिए वास्तविक बदलाव दिखाई दे। व्यक्ति की पहचान आखिरकार उसके फैसलों से ही होती है।
अतिपिछड़ा वर्ग (EBC) बिहार की सामाजिक संरचना का एक बड़ा और महत्वपूर्ण हिस्सा है और इस समाज को भी समान अधिकार, अतिपिछड़ा वर्ग (EBC) बिहार की सामाजिक संरचना का एक बड़ा और महत्वपूर्ण हिस्सा है और इस समाज को भी समान अधिकार, संजय वर्मा बिहार नवादा बिहार में अतिपिछड़ा वर्ग (EBC) बिहार की सामाजिक संरचना का एक बड़ा और महत्वपूर्ण हिस्सा है और इस समाज को भी समान अधिकार, सुरक्षा और सम्मान मिलना चाहिए। वर्षों से यह वर्ग राजनीतिक रूप से प्रभावशाली माना जाता रहा है, लेकिन इसके बावजूद कई बुनियादी सवाल आज भी अनसुलझे हैं। जिस तरह SC/ST (Prevention of Atrocities) Act के तहत दलित या आदिवासी समाज के किसी व्यक्ति की हत्या या अत्याचार की घटना पर पीड़ित परिवार को सरकारी सहायता और कई मामलों में नौकरी देने जैसी व्यवस्थाएं हैं, उसी तर्ज पर अतिपिछड़ा वर्ग के लिए भी प्रभावी कानून बनाने की मांग समय-समय पर उठती रही है। यह मांग इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि समाज के कमजोर तबकों को सुरक्षा और न्याय का भरोसा मिलना जरूरी है। बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार ने अतिपिछड़ा वर्ग को एक बड़ी राजनीतिक ताकत के रूप में संगठित किया और लंबे समय से उनकी सरकार इस वर्ग के समर्थन पर टिकी रही है। लेकिन आलोचकों का कहना है कि इस समाज को जितना राजनीतिक महत्व मिला, उतना ठोस अधिकार और संरचनात्मक लाभ नहीं मिल पाया। पंचायत और नगर निकाय चुनावों में आरक्षण का मुद्दा भी इसी बहस का हिस्सा है। कई लोगों का मानना है कि यदि 50 प्रतिशत आरक्षण की सीमा के भीतर रहते हुए अधिक हिस्सेदारी दी जाती, तो अतिपिछड़ा समाज को और मजबूत प्रतिनिधित्व मिल सकता था। साथ ही यह भी सच है कि चाहे नैशनल Democratic Alliance हो या Mahagathbandhan, दोनों ही राजनीतिक गठबंधनों पर अक्सर यह आरोप लगता रहा है कि उन्होंने अतिपिछड़े वर्ग को स्थायी अधिकार देने के बजाय उसे एक वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया। यही कारण है कि आज इस समाज के भीतर अपने अधिकारों और हिस्सेदारी को लेकर नई जागरूकता दिखाई दे रही है। अंततः यह स्पष्ट है कि किसी भी समाज की पहचान सिर्फ उसके वोट से नहीं, बल्कि उसके अधिकार, सुरक्षा और सम्मान से तय होती है। अतिपिछड़ा समाज भी अब अपने अधिकारों को समझ रहा है और चाहता है कि उसके मुद्दे सिर्फ चुनावी वादों तक सीमित न रहें, बल्कि ठोस नीतियों और फैसलों के जरिए वास्तविक बदलाव दिखाई दे। व्यक्ति की पहचान आखिरकार उसके फैसलों से ही होती है।
- टी_20 वर्ल्ड कप जीत के बाद क्रिकेटर ईशान किशन पहुंचे दादी के घर नवादा #आप भी देखिए...!1
- गोविंदपुर प्रखंड क्षेत्र के विद्यालयों में कक्षा 1 से 8 तक की वार्षिक परीक्षा शुरू, 13,979 छात्र-छात्राएं शामिल। गोविंदपुर : बिहार शिक्षा परियोजना के निर्देशानुसार प्रखंड के सभी प्राथमिक एवं मध्य विद्यालयों में कक्षा एक से आठ तक के विद्यार्थियों की वार्षिक परीक्षा गुरुवार 12 मार्च से प्रारंभ हो गई. यह परीक्षा 19 मार्च तक दो पालियों में संचालित की जाएगी. प्रखंड के सभी विद्यालयों में परीक्षा स्वच्छ, कदाचार मुक्त और शांतिपूर्ण वातावरण में कराई जा रही है. प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी शशिकांत निराला ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रखंड के 52 प्राथमिक विद्यालय एवं 40 मध्य विद्यालयों में परीक्षा का आयोजन किया जा रहा है. पूरे प्रखंड में कुल 13,979 विद्यार्थी इस वार्षिक परीक्षा में शामिल हो रहे हैं. परीक्षा दो पालियों में आयोजित की जा रही है, जिसमें प्रथम पाली सुबह 10 बजे से 12 बजे तक तथा दूसरी पाली दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक संचालित हो रही है. विभागीय गाइडलाइन के अनुसार कक्षा 1 और 2 के विद्यार्थियों का मूल्यांकन मौखिक रूप से किया जा रहा है. वहीं कक्षा 3 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए प्रश्न पत्र ई-शिक्षा कोष पोर्टल से डाउनलोड कर विद्यालयों के प्रधानाध्यापक द्वारा निकाला जा रहा है. प्रश्नों को ब्लैकबोर्ड पर लिखकर विद्यार्थियों को बताया जा रहा है, जिसे देखकर परीक्षार्थी अपनी कॉपी में उत्तर लिख रहे हैं. परीक्षा की पारदर्शिता और शुचिता बनाए रखने के लिए विशेष व्यवस्था की गई है. एक विद्यालय में कार्यरत शिक्षकों को दूसरे विद्यालय में वीक्षक (निरीक्षक) के रूप में प्रतिनियुक्त किया गया है. वहीं विद्यालय के प्रधानाध्यापक या प्रभारी प्रधानाध्यापक अपने ही मूल विद्यालय में केंद्राधीक्षक के रूप में कार्य कर रहे हैं और परीक्षा के सफल संचालन के लिए अधिकृत हैं. इसके अतिरिक्त प्रत्येक विद्यालय के एक वरीय शिक्षक को उनके मूल विद्यालय में ही परीक्षा कार्यों में सहयोग के लिए रखा गया है. प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी ने बताया कि परीक्षा समाप्त होने के बाद 24 मार्च तक सभी उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कार्य पूरा कर लिया जाएगा, ताकि समय पर परिणाम तैयार किया जा सके. उन्होंने कहा कि परीक्षा के दौरान सभी विद्यालयों को विभागीय दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया गया है, जिससे परीक्षा पूरी तरह निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके.1
- त्योहारों से पहले प्रशासन सख्त, जुलूस के लिए लाइसेंस अनिवार्य, एंकर, नालंदा जिले में आने वाले प्रमुख पर्व-त्योहारों को लेकर प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में नजर आ रहा है। सोहसराय थाना परिसर में शुक्रवार को RAF और पुलिस अधिकारियों की संयुक्त बैठक आयोजित की गई, जिसमें सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। 13 मार्च 2026 को सोहसराय थाना परिसर में B/114 रैपिड एक्शन फोर्स के असिस्टेंट कमांडेंट देवेंद्र कुमार, असिस्टेंट कमांडेंट संजीत कुमार और सोहसराय थाना अध्यक्ष मुकेश कुमार मुकेश के नेतृत्व में शांति समिति बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में RAF और पुलिस के अधिकारी, जवान, शांति समिति के सदस्य तथा कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। बैठक के दौरान असिस्टेंट कमांडेंट देवेंद्र कुमार ने स्थानीय क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि आगामी ईद, रामनवमी पूजा, चैती दशहरा और चैती छठ महापर्व को देखते हुए संवेदनशील और महत्वपूर्ण स्थानों पर RAF और पुलिस की संयुक्त टीम द्वारा फ्लैग मार्च भी किया गया। उन्होंने कहा कि RAF समय-समय पर संवेदनशील और अति संवेदनशील क्षेत्रों में फ्लैग मार्च करती है और स्थानीय पुलिस तथा आम लोगों के साथ समन्वय स्थापित करती है, ताकि किसी भी प्रकार की दंगा या आपात स्थिति में प्रभावी ढंग से कार्रवाई की जा सके। वहीं सोहसराय थाना अध्यक्ष मुकेश कुमार मुकेश ने स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि यदि कोई भी व्यक्ति जुलूस निकालना चाहता है तो उसके लिए थाने से लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा। जुलूस के दौरान डीजे पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा और किसी भी प्रकार का हथियार ले जाना भी सख्त मना है। यदि कोई व्यक्ति बिना अनुमति के जुलूस निकालते या हथियार के साथ पकड़ा जाता है तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी अपील की कि अगर किसी भी असामाजिक तत्व पर शक हो या कोई संदिग्ध गतिविधि नजर आए तो तुरंत 112 नंबर पर डायल करें या स्थानीय थाना को सूचना दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके। इस अवसर पर मोहम्मद शमशाद हुसैन, महताब मेडिकल सहोखर, वार्ड पार्षद प्रदुमन कुमार, शैलेश कुमार, मोहम्मद गुड्डू सहित दर्जनों जनप्रतिनिधि, समाजसेवी और स्थानीय कार्यकर्ता मौजूद रहे।1
- भीम आर्मी आजाद समाज पार्टी के कार्यकर्ता उत्तर प्रदेश में हजारों की संख्या में लोगों उपस्थित हो गए हैं जहां तक की देखा जाए तो चंद्रशेखर आजाद को खुलेआम चैलेंज किया करनी सी वाले लेकिन यहां पर गोल्डन दास ने भी चैलेंज किया है कि चंद्रशेखर आजाद को थोड़ा सा भी खरोच लग गया तो पूरे भारत में और बहुचाल मच जाएगा1
- दुनिया तेज़ी से बदल रही है। संकट हमारे दरवाज़े पर है। अगर सरकार ने तुरंत कदम नहीं उठाए, तो LPG, पेट्रोल और डीज़ल करोड़ों भारतीय परिवारों के लिए बड़ी समस्या बन जाएंगे। सच्चाई साफ़ है - Compromised PM Modi ji ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा से समझौता कर दिया है। कमज़ोर और दिशाहीन विदेश नीति ने देश को इस खतरनाक स्थिति में ला खड़ा किया है। अब समय है सच बताने का और देश को तैयार करने का। वरना इसकी कीमत भारत के आम लोग चुकाएँगे।1
- ऊर्जा सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता, सरकार से तत्काल कदम उठाने की मांग1
- क्रिकेटर ईशान किशन के प्रति युवाओं की दीवानगी #नवादा स्थित घर के बाहर हजारों की भीड़ #बालकनी से ही किया अभिनंदन...!1
- दुनिया तेज़ी से बदल रही है। संकट हमारे दरवाज़े पर है। अगर सरकार ने तुरंत कदम नहीं उठाए, तो LPG, पेट्रोल और डीज़ल करोड़ों भारतीय परिवारों के लिए बड़ी समस्या बन जाएंगे। सच्चाई साफ़ है - Compromised PM Modi ji ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा से समझौता कर दिया है। कमज़ोर और दिशाहीन विदेश नीति ने देश को इस खतरनाक स्थिति में ला खड़ा किया है। अब समय है सच बताने का और देश को तैयार करने का। वरना इसकी कीमत भारत के आम लोग चुकाएँगे।1
- 201 कन्याओं की भव्य कलश शोभायात्रा से गूंजा अंदी गांव, 48 घंटे का अखंड कीर्तन शुरू, एंकर, नालंदा जिले के अस्थावां प्रखंड के अंदी गांव में आस्था और भक्ति का अनोखा नजारा देखने को मिला। यहां 48 घंटे के अखंड कीर्तन के शुभारंभ के अवसर पर 201 कन्याओं ने गाजे-बाजे के साथ भव्य कलश शोभायात्रा निकाली। जय माता दी और जय श्रीराम के जयकारों से पूरा गांव भक्तिमय हो गया। गांव स्थित देवी स्थान से कन्या कुमारी ने माथे पर कलश धारण कर शोभायात्रा की शुरुआत की। यह शोभायात्रा पूरे गांव में भ्रमण करते हुए निकाली गई। अखंड कीर्तन समिति के अध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार, उपाध्यक्ष श्रवण कुमार, सचिव राजीव कुमार रंजन, पंचायत के मुखिया धर्मेंद्र कुमार, पैक्स अध्यक्ष कर्मवीर कुमार ने बताया कि कलश में जलभरी के लिए बाढ़ से गंगाजल लाया गया था। विधि-विधान और पूजा-अर्चना के बाद कलश यात्रा पूरे गांव में निकाली गई। गांव भ्रमण के बाद देवी स्थान पर विधिवत कलश की स्थापना की गई। इसके बाद वैदिक विद्वान ब्राह्मणों के मंत्रोच्चारण के साथ 48 घंटे का अखंड कीर्तन शुरू हो गया। इस अवसर पर अंदी, धराहरा, देशना समेत आसपास के दर्जनों गांवों से कीर्तन मंडलियां भी पहुंचीं। उन लोगों ने यह भी बताया कि यह अखंड कीर्तन का आयोजन गांव में सुख शांति एवं समृद्धि के लिए की जाती है। अखंड कीर्तन समिति के अध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार, उपाध्यक्ष श्रवण कुमार, सचिव राजीव कुमार रंजन, पंचायत के मुखिया धर्मेंद्र कुमार, पैक्स अध्यक्ष कर्मवीर कुमार, लव कुश कुमार, कृष्ण कुमार, विकास कुमार, मुकेश पासवान, चंद्रविंदु पासवान, जितेंद्र कुमार, धनराज कुमार, विश्वकर्मा, विरमणी मंडल, डॉ. दिलीप कुमार, प्रवेश बिंदु और छोटू ने बताया कि यह आयोजन गांव के सभी वर्गों के सहयोग से किया गया है। बाइट:- धर्मेंद्र कुमार, अध्यक्ष बाइट:-धर्मेंद्र पासवान, मुखिया प्रतिनिधि1