चार्ल्स शोभराज के बाद शायद ही कोई और शख्स हो जिसने धनीराम मित्तल जैसे अविश्वसनीय कारनामे कर दिखाए हो। चोरी की दुनिया में ..... पढ़ें चोरों की दुनिया के बादशाह की कहानी चार्ल्स शोभराज के बाद शायद ही कोई और शख्स हो जिसने धनीराम मित्तल जैसे अविश्वसनीय कारनामे कर दिखाए हो। चोरी की दुनिया में हरियाणा के "आदरणीय धनीराम मित्तल जी" ने एक के बाद एक मिसाल कायम की और अकेले ही 1000 से ज्यादा वाहनों की चोरी कर डाली। इनमें से 150 से ज्यादा मुकदमों में नामजद हुए और कुल 95 बार गिरफ्तार होकर जेल गए। लेकिन धनीराम जी के नाम एक ऐसा रिकॉर्ड है, जब उन्होंने फर्जी जज बनकर अपने ही केस में फैसला सुना दिया और साथ ही 40 दिनों (या दो महीनों) के अंदर 2000 से अधिक कैदियों को जमानत पर छोड़ने का "सत्कार्य" भी किया। हरियाणा के भिवानी के रहने वाले आदरणीय धनीराम मित्तल जी युवावस्था में एक आम युवक की तरह ही थे, लेकिन अच्छी पढ़ाई करने और सरकारी नौकरी के लिए काफी प्रयास करने के बाद भी जब वे अच्छी नौकरी नहीं पा सके, तो उन्होंने फर्जी कागजातों के आधार पर ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने का धंधा शुरू कर दिया। नकली कागज बनवाने में सिद्धहस्त होने के बाद धनीराम जी ने अपनी इस कला से भारतीय रेल में नौकरी हासिल कर ली। लेकिन रेलवे में कुछ समय तक स्टेशन मास्टर की नौकरी करने के बाद भी उनकी पुण्यात्मा संतुष्ट नहीं हुई, तब धनीराम जी वाहन चोरी करके फर्जी कागजों के आधार पर उन्हें बेचने के धंधे में आ गए। चोरी के कई मामलों में धनीराम जी का जेल आना-जाना चलता रहा, लेकिन धनीराम जी कोई मामूली चोर या ठग नहीं थे, बल्कि वह एक अवतार पुरुष थे। चोरी के बाद अदालती कार्रवाई से बचने के लिए धनीराम मित्तल जी ने हैंडराइटिंग एक्सपर्ट और ग्राफोलॉजी की पढ़ाई की (कुछ स्रोतों में LLB का भी उल्लेख है)। यह सब उन्होंने केवल इसलिए किया ताकि अपराध करने के बाद वे पुलिस के चंगुल से बच सकें। वाहन चोरी के मामले में धनीराम इतने एक्सपर्ट हो गए कि उन्होंने 1000 से ज्यादा वाहनों को चुराकर बेच डाला। हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, राजस्थान और चंडीगढ़ के आसपास के इलाकों में उन्होंने अपना एक नेटवर्क तक तैयार कर लिया था। लेकिन 1980 के आसपास धनीराम ने एक ऐसा अद्वितीय कारनामा किया जिसने फर्जीवाड़े की दुनिया में धनीराम जी का स्थान किसी ध्रुव तारे सा अटल कर दिया। असल में हुआ ये की धनीराम जी ने अखबार में एक खबर पढ़ी, खबर यह थी की झज्जर के एडिशनल सिविल जज के खिलाफ पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने जांच बैठा दी थी। बस फिर धनीराम जी का शातिर दिमाग चल पड़ा। हाईकोर्ट रजिस्ट्रार की ओर से झज्जर के एडिशनल सिविल जज के पते पर एक पत्र लिखा गया, पत्र में जज साहब को ये निर्देश दिया गया था कि जांच पूरा होने के दो माह तक आप छुट्टी पर रहेंगे। खबर पढ़ते ही आरोपी जज साहब छुट्टी पर चले गए। धनीराम के फर्जीवाड़े का कारनामा यहीं समाप्त नहीं हुआ। उन्होंने एक और पत्र लिखा। दूसरा पत्र भी पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार की ओर से लिखा गया। इसमें लिखा था कि जब तक एडिशनल जज छुट्टी पर हैं, तब तक दूसरे इंचार्ज जज यानी धनीराम जी आगामी 40 दिनों तक उनकी जगह सुनवाई करेंगे। पत्र पहुंच गया गया,धनीराम खुद एडिशनल जज के रूप में काम करने लगे और 40 दिनों (कई जगह पर दो महीने का उल्लेख है) के अंदर उन्होंने 2000 से अधिक केसों की सुनवाई की। हत्या, रेप और कुछ अन्य संगीन मामलों को छोड़कर अधिकांश केसों में धनीराम ने सैकड़ों (कुल 2000+) आरोपियों को जमानत दे दी! इस बीच इन नए "हाई-स्पीड जज साहब" के तेजी से फैसले की चर्चा होने लगी और वकीलों को भी ताज्जुब होने लगा कि जज साहब अचानक इतने उदार क्यों हो गए कि फटाफट बिना रुके बेल दे रहे हैं। आरोपी मुजरिम भी उनसे सहानुभूति रखने लगे। जेल में अपराधियों के बीच चर्चा होने लगी कि जज साहब तो बड़े अच्छे हैं। चूंकि धनीराम को कानून की समझ थी इसलिए वे विवादों से बचते रहे। शायद यही वजह रही होगी कि उन्होंने जो फैसले दिए, उनमें कुछ फैसले कानूनी तौरपर पूरी तरह से सही भी निकले। 40 दिनों के बाद अचानक धनीराम ने कोर्ट जाना छोड़ दिया और जब इस मामले की पड़ताल हुई तब जाकर लोगों को पूरा मामला समझ में आया, धनीराम जी फिर एक बार पकड़े गए,लेकिन इस घटना ने ठगी की दुनिया में उनका स्थान किसी ध्रुव तारे सा अटल बना दिया। साल 2024 में ठगी और चोरी की दुनिया के लीजेंड धनीराम मित्तल का हार्टअटैक से निधन हुआ। ✍️A.M.QURES
चार्ल्स शोभराज के बाद शायद ही कोई और शख्स हो जिसने धनीराम मित्तल जैसे अविश्वसनीय कारनामे कर दिखाए हो। चोरी की दुनिया में ..... पढ़ें चोरों की दुनिया के बादशाह की कहानी चार्ल्स शोभराज के बाद शायद ही कोई और शख्स हो जिसने धनीराम मित्तल जैसे अविश्वसनीय कारनामे कर दिखाए हो। चोरी की दुनिया में हरियाणा के "आदरणीय धनीराम मित्तल जी" ने एक के बाद एक मिसाल कायम की और अकेले ही 1000 से ज्यादा वाहनों की चोरी कर डाली। इनमें से 150 से ज्यादा मुकदमों में नामजद हुए और कुल 95 बार गिरफ्तार होकर जेल गए। लेकिन धनीराम जी के नाम एक ऐसा रिकॉर्ड है, जब उन्होंने फर्जी जज बनकर अपने ही केस में फैसला सुना दिया और साथ ही 40 दिनों (या दो महीनों) के अंदर 2000 से अधिक कैदियों को जमानत पर छोड़ने का "सत्कार्य" भी किया। हरियाणा के भिवानी के रहने वाले आदरणीय धनीराम मित्तल जी युवावस्था में एक आम युवक की तरह ही थे, लेकिन अच्छी पढ़ाई करने और सरकारी नौकरी के लिए काफी प्रयास करने के बाद भी जब वे अच्छी नौकरी नहीं पा सके, तो उन्होंने फर्जी कागजातों के आधार पर ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने का धंधा शुरू कर दिया। नकली कागज बनवाने में सिद्धहस्त होने के बाद धनीराम जी ने अपनी इस कला से भारतीय रेल में नौकरी हासिल कर ली। लेकिन रेलवे में कुछ समय तक स्टेशन मास्टर की नौकरी करने के बाद भी उनकी पुण्यात्मा संतुष्ट नहीं हुई, तब धनीराम जी वाहन चोरी करके फर्जी कागजों के आधार पर उन्हें बेचने के धंधे में आ गए। चोरी के कई मामलों में धनीराम जी का जेल आना-जाना चलता रहा, लेकिन धनीराम जी कोई मामूली चोर या ठग नहीं थे, बल्कि वह एक अवतार पुरुष थे। चोरी के बाद अदालती कार्रवाई से बचने के लिए धनीराम मित्तल जी ने हैंडराइटिंग एक्सपर्ट और ग्राफोलॉजी की पढ़ाई की (कुछ स्रोतों में LLB का भी उल्लेख है)। यह सब उन्होंने केवल इसलिए किया ताकि अपराध करने के बाद वे पुलिस के चंगुल से बच सकें। वाहन चोरी के मामले में धनीराम इतने एक्सपर्ट हो गए कि उन्होंने 1000 से ज्यादा वाहनों को चुराकर बेच डाला। हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, राजस्थान और चंडीगढ़ के आसपास के इलाकों में उन्होंने अपना एक नेटवर्क तक तैयार कर लिया था। लेकिन 1980 के आसपास धनीराम ने एक ऐसा अद्वितीय कारनामा किया जिसने फर्जीवाड़े की दुनिया में धनीराम जी का स्थान किसी ध्रुव तारे सा अटल कर दिया। असल में हुआ ये की धनीराम जी ने अखबार में एक खबर पढ़ी, खबर यह थी की झज्जर के एडिशनल सिविल जज के खिलाफ पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने जांच बैठा दी थी। बस फिर धनीराम जी का शातिर दिमाग चल पड़ा। हाईकोर्ट रजिस्ट्रार की ओर से झज्जर के एडिशनल सिविल जज के पते पर एक पत्र लिखा गया, पत्र में जज साहब को ये निर्देश दिया गया था कि जांच पूरा होने के दो माह तक आप छुट्टी पर रहेंगे। खबर पढ़ते ही आरोपी जज साहब छुट्टी पर चले गए। धनीराम के फर्जीवाड़े का कारनामा यहीं समाप्त नहीं हुआ। उन्होंने एक और पत्र लिखा। दूसरा पत्र भी पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार की ओर से लिखा गया। इसमें लिखा था कि जब तक एडिशनल जज छुट्टी पर हैं, तब तक दूसरे इंचार्ज जज यानी धनीराम जी आगामी 40 दिनों तक उनकी जगह सुनवाई करेंगे। पत्र पहुंच गया गया,धनीराम खुद एडिशनल जज के रूप में काम करने लगे और 40 दिनों (कई जगह पर दो महीने का उल्लेख है) के अंदर उन्होंने 2000 से अधिक केसों की सुनवाई की। हत्या, रेप और कुछ अन्य संगीन मामलों को छोड़कर अधिकांश केसों में धनीराम ने सैकड़ों (कुल 2000+) आरोपियों को जमानत दे दी! इस बीच इन नए "हाई-स्पीड जज साहब" के तेजी से फैसले की चर्चा होने लगी और वकीलों को भी ताज्जुब होने लगा कि जज साहब अचानक इतने उदार क्यों हो गए कि फटाफट बिना रुके बेल दे रहे हैं। आरोपी मुजरिम भी उनसे सहानुभूति रखने लगे। जेल में अपराधियों के बीच चर्चा होने लगी कि जज साहब तो बड़े अच्छे हैं। चूंकि धनीराम को कानून की समझ थी इसलिए वे विवादों से बचते रहे। शायद यही वजह रही होगी कि उन्होंने जो फैसले दिए, उनमें कुछ फैसले कानूनी तौरपर पूरी तरह से सही भी निकले। 40 दिनों के बाद अचानक धनीराम ने कोर्ट जाना छोड़ दिया और जब इस मामले की पड़ताल हुई तब जाकर लोगों को पूरा मामला समझ में आया, धनीराम जी फिर एक बार पकड़े गए,लेकिन इस घटना ने ठगी की दुनिया में उनका स्थान किसी ध्रुव तारे सा अटल बना दिया। साल 2024 में ठगी और चोरी की दुनिया के लीजेंड धनीराम मित्तल का हार्टअटैक से निधन हुआ। ✍️A.M.QURES
- #असंवेदनशील_सरकार #बदहाल_प्रदेश 21वीं सदी में भी अंधविश्वास की भेंट चढ़ रहे हैं झारखंडवासी! हेमंत सोरेन के कुशासन में झारखंड में अंधविश्वास अब लोगों की जान लेने का बड़ा कारण बनता जा रहा है। हर साल करीब ₹2 करोड़ खर्च करने के बावजूद हालात नहीं बदले हैं और औसतन 18 बेगुनाह हर साल इसकी भेंट चढ़ रहे हैं। 2022 से 2025 के बीच 73 लोगों की मौत इस कड़वी सच्चाई को उजागर करती है कि सरकार के दावे सिर्फ कागजों तक सीमित हैं। जमीनी स्तर पर ना जागरूकता दिख रही है, ना सख्त कार्रवाई और इसी लापरवाही की कीमत झारखंड के मासूम लोग अपनी जान देकर चुका रहे हैं। झारखंड में अंधविश्वास के नाम पर हो रही मौतें हेमंत सोरेन सरकार की नाकामी को उजागर करती हैं। हर साल औसतन 18 बेगुनाहों की जान जाना और 4 साल में 73 मौतें दिखाती हैं कि करोड़ों खर्च के दावे सिर्फ कागजों तक सीमित हैं। जमीनी स्तर पर ना जागरूकता है, ना कानून का डर! इस भयावह स्थिति की जिम्मेदारी सीधे तौर पर हेमंत सरकार पर है। चिंतित संकलक:: कुमार विश्वजीत जमशेदपुर झारखंड2
- मेरी बहन-बेटियों, तुम सभी से मेरी करबद्ध विनती है कि इस👆वीडियो को कम से कम एक बार अवश्य सुने। यह वीडियो तुम्हारी जिंदगी का टर्निंग पॉइंट हो सकता है तुम्हारी सभी कठिनाइयों का समाधान करेगा यह वीडियो। प्लीज़ इसे ध्यान से सुनिए और समझें कि तुम्हारी जिंदगी कितनी अनमोल है🙏🙏1
- राजनगर: प्रखंड क्षेत्र के खैरबनी गांव में श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के बीच नवनिर्मित हरिमंदिर की भव्य प्राण प्रतिष्ठा समारोह संपन्न हुआ। इस पावन अवसर पर श्री श्री अखंड राधा गोविंद हरिनाम संकीर्तन समिति, खैरबनी के तत्वावधान में आकर्षक धार्मिक आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत मंदिर से लगभग दो किलोमीटर दूर से 108 कन्याओं द्वारा निकाली गई भव्य कलश यात्रा से हुई। सिर पर पवित्र जल से भरे कलश लेकर कन्याएं और सैकड़ों श्रद्धालु भजन-कीर्तन और "राधा नाम" का संकीर्तन करते हुए मंदिर परिसर पहुंचे। पूरे मार्ग में भक्तिमय माहौल देखने को मिला। मंदिर परिसर पहुंचने के बाद विधि-विधान के साथ कलश स्थापना की गई तथा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हरिमंदिर की प्राण प्रतिष्ठा संपन्न हुई। इस दौरान क्षेत्र में आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। समिति के सदस्य हरिहर मंडल ने बताया कि वर्षों से गांव में हरि मंदिर निर्माण की कामना थी, जो आज ग्रामीणों और समाजसेवियों के सहयोग से साकार हुई है। उन्होंने बताया कि खैरबनी गांव में वर्ष 2009 से हरिनाम संकीर्तन की परंपरा चली आ रही है, जो अब तक टेंट में आयोजित होती थी, लेकिन अब नवनिर्मित मंदिर में यह आयोजन और भव्य रूप में होगा। उन्होंने आगे बताया कि शुक्रवार को मंदिर परिसर में अष्टम पहर हरिनाम संकीर्तन का आयोजन किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की उम्मीद है। इस धार्मिक अनुष्ठान को सफल बनाने में कमेटी के मुख्य सदस्य करण मार्डी, त्रिशंक मंडल, श्रीकांत मंडल, शशांक मंडल, अंबुज मंडल, ग्राम प्रधान जयदेव मंडल, धनपति मंडल, बृहस्पति मंडल, बासुदेव मंडल, अशोक मंडल, हरिहर मंडल, सुभेन्दु मंडल, देवरंजन मंडल, निमाई मंडल, नारायण गोप, अमूल्य गोप, शक्तिपद मंडल, कनक मंडल, बुधु खंडवाल सहित अन्य ग्रामीणों का सराहनीय योगदान रहा।1
- हजारीबाग : रामनवमी जुलूस में करतब दिखाते युवक ने ली एक की जान ,आरोपी गिरफ्तार।1
- चाईबासा बरकेला मार्ग पर अनियंत्रित स्कूटी पेड़ से टकराई, दो युवकों की मौत1
- सोनाहातू: थाना क्षेत्र के बुंडू वन रेंज के सारेयाद गांव के एक कुएं में गुरुवार सुबह हाथी गिरने की जानकारी ग्रामीणों को मिली। ग्रामीणों ने तत्काल इसकी सूचना वन विभाग ओर स्थानीय प्रशासन को दिया। वन विभाग के द्वारा जेसीबी मशीन से कुआं को खोद रास्ता बनाया गया। 6 घंटे के रेस्क्यू के बाद सुरक्षित हाथी को कुआं से बाहर निकाला गया। गुरुवार सुबह घटना की सूचना मिलते ही ग्रामीणों के बीच हलचल मची। काफी संख्या में ग्रामीण कुआं के समीप जमा हुए। वन विभाग की टीम पहुंची और तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। अधिकारियों ने जेसीबी मंगवाए गए और जेसीबी की मदद से खुले कुएं के समानांतर एक रास्ता बनाया गया।कुएं में काफी देर तक फंसे रहे हाथी को जैसे ही कुएं से बाहर निकलने का रास्ता दिखा वह उछलता-कूदता हुआ खुद बाहर निकल आया। इस संबंध में प्रभारी वनपाल सिप्रियन टुटी ने बताया कि कुआं में हाथी गिरने की सूचना मिलते ही तत्काल रेस्क्यू प्रारंभ किया। कुआं मालिक को मुआवजा राशि देकर कुआं से समानांतर रास्ता बनाकर हाथी को सुरक्षित निकाला गया इस दौरान ग्रामीणों के भीड़ के कारण कुछ सुविधा भी हुई।1
- सिल्ली :रामगढ़ के गोला क्षेत्र स्थित बंदा और मुरपा इलाके में हाथियों का आतंक तीन को कुचल कर मारा एक व्यक्ति घायल परिजनों को दी गई तत्काल सहायता राशि1
- इंडोनेशिया : इंडोनेशिया में भूकंप के बाद सुनामी का खतरा1