Shuru
Apke Nagar Ki App…
अयोध्या की बीकापुर विधानसभा में योगी जी ने एक बड़ी घोषणा करते हुए भदरसा का नाम बदलने का ऐलान किया है। अब भदरसा का नाम बदलकर भरतप... कर दिया जाएगा।
Shreya mishra
अयोध्या की बीकापुर विधानसभा में योगी जी ने एक बड़ी घोषणा करते हुए भदरसा का नाम बदलने का ऐलान किया है। अब भदरसा का नाम बदलकर भरतप... कर दिया जाएगा।
More news from Ayodhya and nearby areas
- अयोध्या जनपद के हैदरगंज थाना क्षेत्र में बिहार के भोजपुर निवासी भरत तिवारी के एनकाउंटर को फेक बताकर आगामी 17 जुलाई को विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। इस घटना के विरोध में हैदरगंज के ब्रह्म बाबा चौराहे पर हवन कर रोष जताया जाएगा। इसके साथ ही पीड़ित परिवार की मदद के लिए सरकार से भी मांग की जाएगी। इस संबंध में समाजसेवी झिंगूरी दुबे ने रविवार को जानकारी देते हुए ऐलान किया है कि भरत तिवारी को न्याय दिलाने के लिए करणी सेना सहित अन्य संगठन भी 17 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़ा विरोध प्रदर्शन करेंगे।1
- उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में आगामी 12 जुलाई 2026 को पूरे प्रदेश में एक बड़ा वृक्षारोपण अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत उत्तर प्रदेश सरकार पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अग्रसर है। इसकी शुरुआत राज्य के अनेक जिलों, कस्बों और शहरों में की जा रही है, जिसका मुख्य उद्देश्य पूरे प्रदेश को हरा-भरा और सुंदर बनाना है। इस अभियान को सफल बनाने के लिए सभी प्रदेशवासियों से बढ़-चढ़कर सहभागिता दिखाने की जोरदार अपील की गई है। 'आज सुबह टाइम्स' की लखनऊ टीम से रिपोर्टर लाल चंद सोनी के अनुसार, प्रदेश की हवा को शुद्ध और सुंदर बनाने के लिए अधिक से अधिक पेड़-पौधे लगाने की जरूरत है ताकि लोगों का जीवन सफल हो सके।1
- अयोध्या की नगर पंचायत भरतकुंड भदरसा के अंतर्गत भदरसा कस्बे में हनुमान मंदिर से महज कुछ ही कदम की दूरी पर मुख्य सड़क पर बिना लाइसेंस के अवैध मांस की दुकानें धड़ल्ले से संचालित हो रही हैं। नाम बदलने के बाद भी यहाँ की व्यवस्थाएं जस की तस बनी हुई हैं। मुख्य मार्ग, मंदिर और स्कूल के पास ये दुकानें बिना किसी लाइसेंस के खुलेआम और व्यावसायिक तरीके से चलाई जा रही हैं, जिससे स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। इस गंभीर मामले को लेकर हिंदू और मुस्लिम दोनों ही समुदायों के दर्जनों लोगों ने तहसील दिवस और नगर पंचायत में शिकायत दर्ज कराई है। लोगों की मांग है कि इन अवैध दुकानों को तत्काल बंद किया जाए या फिर इन्हें कस्बे से दूर किसी जमीन पर स्थानांतरित किया जाए। इससे पहले उपजिलाधिकारी की सख्ती के बाद प्राथमिक स्कूल के बगल में चल रही दुकानें तो बंद करा दी गई थीं, लेकिन अब भी मुख्य मार्ग, मंदिर और स्कूल के पास कई दुकानें बेखौफ चल रही हैं। इतने विरोध और शिकायतों के बावजूद नगर पंचायत के ईओ विनय दुबे इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। फरियादियों का आरोप है कि ईओ विनय दुबे जानबूझकर कार्रवाई करने से भाग रहे हैं और बार-बार शिकायत के बाद भी फरियादियों की आवाज उनके कानों तक नहीं पहुंच पा रही है। आखिर ईओ विनय दुबे किसके इशारे पर मौन साधे हुए हैं और क्या उनकी नजर में ये दुकानें वैधानिक हैं? इस उदासीन रवैये को लेकर क्षेत्र के लोगों में भारी नाराजगी है।1
- अयोध्या नगर निगम के अंतर्गत 14 कोसी परिक्रमा मार्ग रामनगर पुलिस चौकी के सामने विष्णु पुरी कॉलोनी, वार्ड कौशलपुरी मोहल्ला विष्णु पुरी कॉलोनी, निराला नगर मंडी रोड के पीछे और 14 कोसी परिक्रमा मार्ग से निराला नगर एन 27 लिंक रोड पर जगह-जगह जल भराव हो गया है। नालियों को बड़े नाले से न जोड़ने और पानी की समुचित निकासी बंद होने के कारण नाली का पानी सड़कों पर बह रहा है। इस जल भराव के कारण मोहल्ले वासियों का घरों से निकलना दुश्वार हो गया है और अक्सर लोग रात के अंधेरे में गिरकर चोटिल हो रहे हैं। इस समस्या से परेशान होकर विष्णु पुरी कॉलोनी, बैंक कॉलोनी और निराला नगर कॉलोनी के वासियों ने पार्षद से फोन पर संपर्क किया है। जल भराव और नाली-नाला बंद होने के कारण इन तीनों कॉलोनियों के वासियों में प्रशासन और व्यवस्था के खिलाफ भारी रोष व्याप्त है।4
- अयोध्या में राम मंदिर से जुड़े मुद्दे पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने पहुंचे धर्म सेना प्रमुख संतोष दुबे की प्रस्तावित प्रेस वार्ता को पुलिस-प्रशासन ने रोक दिया है। मौके पर मौजूद अधिकारियों ने कार्यक्रम के लिए आवश्यक अनुमति और अन्य औपचारिकताओं का हवाला देते हुए इस प्रेस कॉन्फ्रेंस को आयोजित नहीं होने दिया। इस कार्रवाई के बाद संतोष दुबे ने आरोप लगाया कि उन्हें अपनी बात मीडिया के सामने रखने से रोका गया है और वह जल्द ही पूरे मामले का खुलासा करेंगे। वहीं, प्रशासन का कहना है कि बिना आवश्यक अनुमति के किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम या प्रेस वार्ता की इजाजत नहीं दी जा सकती। इस घटना के बाद से अयोध्या में पुलिस-प्रशासन की इस कार्रवाई को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं, लेकिन अभी तक इस संबंध में कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।1
- बस्ती के कप्तानगंज रेंज के अंतर्गत कचौलिया और रैकवार मार्ग पर वन विभाग की घोर लापरवाही और संवेदनहीनता का एक बड़ा मामला सामने आया है। बीती 11 जुलाई की रात को आई तेज आंधी-पानी के कारण कचौलिया फार्म के समीप एक विशालकाय पेड़ गिर गया, जो आज भी आधी सड़क को घेरे हुए है। 12 जुलाई का दिन ढलने को आ गया है, लेकिन जिम्मेदार विभाग की नींद अब तक नहीं टूटी है, जिससे यह मार्ग राहगीरों के लिए मुसीबत का सबब बना हुआ है। इस व्यस्त मार्ग से हर पल लोगों का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन सड़क पर गिरी पेड़ की टहनियां और झाड़ियां अंधेरे में दिखाई नहीं देतीं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा काफी बढ़ गया है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग को इस संबंध में सूचना दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसा प्रतीत होता है जैसे विभाग के अधिकारी किसी बड़ी अनहोनी या हादसे का इंतजार कर रहे हैं। वन विभाग की इस उदासीनता से स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों ने तीखे शब्दों में मांग की है कि युद्धस्तर पर कार्रवाई करते हुए अविलंब इस पेड़ को सड़क से हटाकर यातायात को सुचारू किया जाए। इसके साथ ही, इतने घंटों तक सड़क को बाधित छोड़ने वाले जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय जांच कराकर कड़ी कार्रवाई की जाए। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में कब जागता है या फिर जनता को खुद अपनी जान जोखिम में डालकर कोई कदम उठाना पड़ेगा।1
- गाजियाबाद के एक स्पा सेंटर में हुई छापेमारी और उसके बाद पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई ने कानून और समानता के दावों पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस स्पा सेंटर से पुलिस ने कथित तौर पर 'सेक्स रैकेट' चलाने के आरोप में 23 लड़कियों और 5 लड़कों को हिरासत में लिया था। लेकिन असली खेल थाने के भीतर देखने को मिला, जहां पुलिस ने इस मामले में बेहद ही पक्षपातपूर्ण और दोहरा रवैया अपनाया। हिरासत में लिए जाने के बाद, पुलिस ने लड़कियों को सिर्फ पूछताछ करके और चेतावनी देकर घर भेज दिया, जबकि हिरासत में लिए गए लड़कों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उनका चालान काट दिया गया। इस सिलेक्टिव कार्रवाई पर तीखे सवाल उठाते हुए अजीत मिश्रा (खोजी) ने पूछा है कि अगर कानून सबके लिए समान है, तो यह भेदभाव क्यों किया जा रहा है? क्या अपराध की परिभाषा जेंडर यानी लिंग के आधार पर बदल जाती है? अगर यह वास्तव में एक रैकेट था, तो इसमें शामिल हर व्यक्ति—चाहे वह लड़का हो या लड़की—बराबर का गुनहगार क्यों नहीं है? पुलिस की इस कार्रवाई को 'पितृसत्तात्मक' सोच का चश्मा बताते हुए यह सवाल उठाया गया है कि क्या लड़कियां हमेशा सिर्फ 'विक्टिम' ही होती हैं? महिलाओं के प्रति इस तरह का नरम रुख अपनाकर पुलिस असल में उन महिलाओं के साथ न्याय नहीं कर रही है जो शायद अपनी मर्जी से इस काम में थीं, बल्कि वह कानूनी प्रक्रिया का मजाक उड़ा रही है। कानून का काम निष्पक्ष होना है, न कि किसी की दया पर फैसला सुनाना। इस तरह का दोहरा रवैया न्याय व्यवस्था से भरोसा कम करता है और साबित करता है कि समानता सिर्फ कागजों तक ही सीमित है। न्याय का तराजू संतुलित होना चाहिए, जो किसी के जेंडर या प्रभाव के बोझ से न झुके।1