Suresh Chandra Agrawal: ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने प्रणतः क्लेश नाशाय गोविन्दाय नमो नमः।।🙏🌷🙏🚩🚩 प्रेम से बोलो बाँके बिहारी लाल की जय 🌹🙏 सदा जपिये हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे I हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे और हमेशा खुश रहिये Ii हमेशा प्रसन्न रहो 🌹🙏🏾 *।।श्रीकृष्ण।।* *श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारी,* *हे नाथ नारायण वासुदेवाय!!!* सभी कृष्ण भक्तों को सादर दंडवत प्रणाम 🙏🌹 जन्म-मरण का कारण? न कर्म, न भाग्य। शरीर-संसार को अपना मानना — बस यही। — श्रीरामसुखदासजी महाराज 🙏 सत्संग के बाद जब भी मन को अवकाश मिले तो उस मन से भगवान के नाम, रूप, लीला का चिंतन करना चाहिये। बिना कारण के क्रोध नहीं करना चाहिए। क्रोध की परिस्थिति आवे तो उसे मन में ही शान्त कर लेना चाहिए। यदि किसी के प्रति क्रोध द्वेष आदि विकार मन में आवें तो मन ही मन उस व्यक्ति का ध्यान करके उससे क्षमा माँगनी चाहिए। आप भगवान के अंश हैं भक्त हैं मेरे अपराधों को क्षमा कीजिए। प्रेमपूर्वक उसके सद्गुणों का स्मरण करना, दोषों की ओर ध्यान न देने से कुछ दिन बाद उस व्यक्ति के साथ मित्रता हो जायगी। प्रयास यह करना चाहिए कि सब लोग प्रसन्न रहें अपना अपमान या अपनी हानि होने पर भी क्षमा करना चाहिए। क्षमा पृथ्वी माता का रूप है। क्षमा के बिना शांति नहीं होती है। जयति श्री हरिः। जय श्रीकृष्णः। भगवान्के जो प्रेमी भक्त - सन्त होते हैं उनकी जिम्मेदारी भगवान् पर होती है। इसीलिये जिसने सन्तको हाथ पकड़वा दिया और जिसको सन्तने स्वीकार कर लिया, उसके हाथ भगवान् ने पकड़ लिये, सन्तके रूपमें भगवान् बोलते हैं। ऐसी अवस्थामें वह जो कुछ बोलता है, उसे भगवान् मानो अपनी डायरीमें नोट कर लेते हैं। मणिग्रीवसे नारदजीने कहा- इतने दिन बाद भगवान् मिलेंगे। वहाँ उन्होंने पहले श्रीकृष्णसे सलाह थोड़े ही की थी। श्रीकृष्णको स्वयं ध्यान रखना पड़ा कि नारदने ऐसा कह दिया है, अब हमें कब और कैसे मिलना है। यह मजाककी बात नहीं सिद्धान्तकी बात है। पूज्य भाई जी🙏🌸 *Bhagavad Gita App* *Chapter:* 5 *श्लोक:* 4 *श्लोक:* सांख्ययोगौ पृथग्बाला: प्रवदन्ति न पण्डिता: । एकमप्यास्थित: सम्यगुभयोर्विन्दते फलम् ॥ ४ ॥ *अनुवाद:* अज्ञानी ही भक्ति (कर्मयोग) को भौतिक जगत् के विश्लेषणात्मक अध्ययन (सांख्य) से भिन्न कहते हैं। जो वस्तुत: ज्ञानी हैं वे कहते हैं कि जो इनमें से किसी एक मार्ग का भलीभाँति अनुसरण करता है, वह दोनों के फल प्राप्त कर लेता है। *तात्पर्य:* भौतिक जगत् के विश्लेषणात्मक अध्ययन (सांख्य) का उद्देश्य आत्मा को प्राप्त करना है। भौतिक जगत् की आत्मा विष्णु या परमात्मा हैं। भगवान् की भक्ति का अर्थ परमात्मा की सेवा है। एक विधि से वृक्ष की जड़ खोजी जाती है और दूसरी विधि से उसको सींचा जाता है। सांख्यदर्शन का वास्तविक छात्र जगत् के मूल अर्थात् विष्णु को ढूँढता है और फिर पूर्णज्ञान समेत अपने को भगवान् की सेवा में लगा देता है। अत: मूलत: इन दोनों में कोई भेद नहीं है क्योंकि दोनों का उद्देश्य विष्णु की प्राप्ति है। जो लोग चरम उद्देश्य को नहीं जानते वे ही कहते हैं कि सांख्य और कर्मयोग एक नहीं हैं, किन्तु जो विद्वान् है वह जानता है कि इन दोनों भिन्न विधियों का उद्देश्य एक है। जय श्री कृष्ण 🌹🙏 .एक समय शिव जी महाराज पार्वती के साथ हरिद्वार में घूम रहे थे । पार्वती जी ने देखा कि सहस्त्रों मनुष्य गंगा में नहा-नहाकर ‘हर-हर गंगे’ कहते चले जा रहे हैं परंतु प्राय: सभी दुखी और पाप परायण हैं । तब पार्वती जी ने बड़े आश्चर्य से शिव जी से पूछा कि ” हे देव ! गंगा में इतनी बार स्नान करने पर भी इनके पाप और दुखों का नाश क्यों नहीं हुआ ? क्या गंगा में सामर्थ्य नहीं रही ?’ शिवजी ने कहा, ‘‘ प्रिये ! गंगा में तो वही सामर्थ्य है, परंतु इन लोगों ने पापनाशिनी गंगा में स्नान ही नहीं किया है तब इन्हें लाभ कैसे हो ?’’ पार्वती जी ने आश्चर्य से कहा कि – ‘‘ स्नान कैसे नहीं किया ? सभी तो नहा-नहा कर आ रहे हैं ? अभी तक इनके शरीर भी नहीं सूखे हैं ।’’ शिवजी ने कहा, ‘‘ये केवल जल में डुबकी लगाकर आ रहे हैं । तुम्हें कल इसका रहस्य समझाऊंगा ।’’ दूसरे दिन बड़े जोर की बरसात होने लगी । गलियां कीचड़ से भर गईं । एक चौड़े रास्ते में एक गहरा गड्ढा था, चारों ओर लपटीला कीचड़ भर रहा था । शिवजी ने लीला से ही वृद्ध रूप धारण कर लिया और दीन-विवश की तरह गड्ढे में जाकर ऐसे पड़ गए, जैसे कोई मनुष्य चलता-चलता गड्ढे में गिर पड़ा हो और निकलने की चेष्टा करने पर भी न निकल पा रहा हो । पार्वती जी को उन्होंने यह समझाकर गड्ढे के पास बैठा दिया कि — ” देखो, तुम लोगों को सुना-सुनाकर यूं पुकारती रहो कि मेरे वृद्ध पति अकस्मात गड्ढे में गिर पड़े हैं कोई पुण्यात्मा इन्हें निकालकर इनके प्राण बचाए और मुझ असहाय की सहायता करे । शिवजी ने यह और समझा दिया कि जब कोई गड्ढे में से मुझे निकालने को तैयार हो तब इतना और कह देना कि ‘ भाई ! मेरे पति सर्वथा निष्पाप हैं इन्हें वही छुए जो स्वयं निष्पाप हो यदि आप निष्पाप हैं तो इनके हाथ लगाइए नहीं तो हाथ लगाते ही आप भस्म हो जाएंगे ।’’ पार्वती जी ‘तथास्तु’ कह कर गड्ढे के किनारे बैठ गईं और आने-जाने वालों को सुना-सुनाकर शिवजी की सिखाई हुई बात कहने लगीं । गंगा में नहाकर लोगों के दल के दल आ रहे हैं । सुंदर युवती को यूं बैठी देख कर कइयों के मन में पाप आया, कई लोक लज्जा से डरे तो कइयों को कुछ धर्म का भय हुआ, कई कानून से डरे । कुछ लोगों ने तो पार्वती जी को यह भी सुना दिया कि ‘ मरने दे बुड्ढे को क्यों उसके लिए रोती है ?’ आगे और कुछ दयालु सच्चरित्र पुरुष थे, उन्होंने करुणावश हो युवती के पति को निकालना चाहा परंतु पार्वती के वचन सुनकर वे भी रुक गए । उन्होंने सोचा कि ‘ हम गंगा में नहाकर आए हैं तो क्या हुआ, पापी तो हैं ही, कहीं होम करते हाथ न जल जाएं । बूढ़े को निकालने जाकर इस स्त्री के कथनानुसार हम स्वयं भस्म न हो जाएं ।’ किसी का साहस नहीं हुआ । सैंकड़ों आए, सैंकड़ों ने पूछा और चले गए । संध्या हो चली । शिवजी ने कहा, ‘‘ पार्वती ! देखा, आया कोई सच्चे ह्रदय से गंगा में नहाने वाला है ?’’ थोड़ी देर बाद एक जवान हाथ में लोटा लिए हर-हर गंगे करता हुआ निकला, पार्वती ने उसे भी वही बात कही । युवक का हृदय करूणा से भर आया । उसने शिवजी को निकालने की तैयारी की । पार्वती ने रोक कर कहा कि ‘‘ भाई यदि तुम सर्वथा निष्पाप नहीं होगे तो मेरे पति को छूते ही जल जाओगे ।’’ उसने उसी समय बिना किसी संकोच के दृढ़ निश्चय के साथ पार्वती से कहा कि ” माता ! मेरे निष्पाप होने में तुझे संदेह क्यों होता है ? देखती नहीं मैं अभी गंगा नहाकर आया हूं । भला, गंगा में गोता लगाने के बाद भी कभी पाप रहते हैं ? तेरे पति को निकालता हूं । युवक ने लपककर बूढ़े को ऊपर उठा लिया “। शिव-पार्वती ने उसे अधिकारी समझकर अपना असली स्वरूप प्रकट कर उसे दर्शन देकर कृतार्थ किया । शिवजी ने पार्वती से कहा कि ‘‘इतने लोगों में से इस एक ने ही गंगा स्नान किया है ।’’ इसी दृष्टांत के अनुसार जो लोग बिना श्रद्धा और विश्वास के केवल दंभ के लिए गंगा स्नान करते हैं उन्हें वास्तविक फल नहीं मिलता परंतु इसका यह मतलब नहीं कि गंगा स्नान व्यर्थ जाता है । गंगा स्नान का बहुत पुण्य भी है । भोले वंदन आपका, और चरण स्पर्श। मेरी दुनिया आप हो, प्रभू फर्श से अर्श।। हे भोले दे दीजिए,हमको ये वरदान। इंसानों के बीच हम, बने रहें इंसान।। जैसा है प्रभु आपका, संतोषी परिवार। वैसा ही कर दो सुखद, मेरा भी घर वार।। !! हर हर गंगे हर हर महादेव ॐ नमः शिवाय 🙏🌹 🕉️ राम-राम...कहा जाता है कि ताजी की माताजी जब भी भूमियाधार में बाबा जी के दर्शन करने जाती थीं, तो कभी भी खाली हाथ नहीं जाती थीं। घर में जो भी स्नेह से बना भोजन होता—दाल, चावल, रोटी, सब्ज़ी या कोई पारंपरिक कुमाऊँनी व्यंजन—उसी को एक छोटे से बर्तन में रखकर प्रसाद के रूप में साथ ले जाती थीं। उनकी आर्थिक स्थिति बहुत साधारण थी। कई बार वाहन न मिलने पर वे कई किलोमीटर पैदल चलकर भी बाबा जी के दर्शन के लिए पहुँच जाती थीं। एक बार व्रत होने के कारण लंबी यात्रा में वे थक गईं और रास्ते में एक बड़ी चट्टान पर बैठकर कुछ देर विश्राम करने लगीं। उसी समय उनके मन में विचार आया—"मैं बाबा जी के लिए कितना साधारण भोजन लेकर जा रही हूँ। दूसरे भक्त कितने सुंदर और विविध प्रकार के भोग लाते होंगे। क्या मेरा यह छोटा-सा प्रसाद अर्पित करना उचित लगेगा?" इन विचारों के साथ वे आगे बढ़ीं और भूमियाधार पहुँचकर बाबा जी के दर्शन किए। जब उन्हें लगा कि अब शांत वातावरण है, तो उन्होंने प्रसाद अर्पित करने के लिए अपना बर्तन खोला। लेकिन यह देखकर वे हैरान रह गईं कि बर्तन पूरी तरह खाली था। वे बहुत व्याकुल हो गईं और सोचने लगीं कि प्रसाद आखिर गया कहाँ। तभी बाबा जी मुस्कुराए और प्रेम से बोले— "चिंता मत कर... जहाँ रास्ते में बैठकर तुमने प्रेम से हमें याद किया था, वहीं तुम्हारा प्रसाद हम स्वीकार कर चुके थे।" यही तो सच्ची भक्ति है—जहाँ दिखावे से अधिक महत्व श्रद्धा और निष्कपट प्रेम का होता है। जय श्री कृष्ण 🙏🌹 *वजन कम करने के आयुर्वेदिक उपाय* भोजन के पूर्व टमाटर का सूप पीने से या टमाटर कच्चे खाने से भी वजन कम होता होता है। खाना हमेशा एक रस हो जाए उतनी देर चबा कर ही निगलना चाहिए। हर ऋतु पर आने वाले फल का आहार करें। तले हुए खाने से ज्यादा भुने उए व्यंजन का आहार चुने। खाना खाने के तुरंत बाद कभी न सोएं। संरक्षित किया हुआ खाना खाने से परहेज करे। प्रोसेस्ड फूड खाना कम करें। रात का खाना सोने से 3-4 घंटे पहले लेना चाहिए।रात का खाना कम कैलोरी वाला होना चाहिए। गोभी के पत्ते वजन कम करने के लिए काफी लाभदायी होते है। कच्चे सैलड में गोभी के पत्ते उबाल कर, या फिर कच्चे खाने से वजन कम होता है। खाने के बाद तुरंत पानी पीना तेजी से वजन बढाता है। वजन नियंत्रित करने के लिए ताजा सब्जियाँ, फल और बीन्स का आहार उत्तम रहता है। जैसे कि ककड़ी, खीरा, मूली, चना, मूंग, मटर, पपीता, गाजर और हर प्रकार की दाल खाना हितकारी होता है। वजन घटाने के लिए व्यायाम ! जय श्री राधे राधे 🙏🌹
Suresh Chandra Agrawal: ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने प्रणतः क्लेश नाशाय गोविन्दाय नमो नमः।।🙏🌷🙏🚩🚩 प्रेम से बोलो बाँके बिहारी लाल की जय 🌹🙏 सदा जपिये हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे I हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे और हमेशा खुश रहिये Ii हमेशा प्रसन्न रहो 🌹🙏🏾 *।।श्रीकृष्ण।।* *श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारी,* *हे नाथ नारायण वासुदेवाय!!!* सभी कृष्ण भक्तों को सादर दंडवत प्रणाम 🙏🌹 जन्म-मरण का कारण? न कर्म, न भाग्य। शरीर-संसार को अपना मानना — बस यही। — श्रीरामसुखदासजी महाराज 🙏 सत्संग के बाद जब भी मन को अवकाश मिले तो उस मन से भगवान के नाम, रूप, लीला का चिंतन करना चाहिये। बिना कारण के क्रोध नहीं करना चाहिए। क्रोध की परिस्थिति आवे तो उसे मन में ही शान्त कर लेना चाहिए। यदि किसी के प्रति क्रोध द्वेष आदि विकार मन में आवें तो मन ही मन उस व्यक्ति का ध्यान करके उससे क्षमा माँगनी चाहिए। आप भगवान के अंश हैं भक्त हैं मेरे अपराधों को क्षमा कीजिए। प्रेमपूर्वक उसके सद्गुणों का स्मरण करना, दोषों की ओर ध्यान न देने से कुछ दिन बाद उस व्यक्ति के साथ मित्रता हो जायगी। प्रयास यह करना चाहिए कि सब लोग प्रसन्न रहें अपना अपमान या अपनी हानि होने पर भी क्षमा करना चाहिए। क्षमा पृथ्वी माता का रूप है। क्षमा के बिना शांति नहीं होती है। जयति श्री हरिः। जय श्रीकृष्णः। भगवान्के जो प्रेमी भक्त - सन्त होते हैं उनकी जिम्मेदारी भगवान् पर होती है। इसीलिये जिसने सन्तको हाथ पकड़वा दिया और जिसको सन्तने स्वीकार कर लिया, उसके हाथ भगवान् ने पकड़ लिये, सन्तके रूपमें भगवान् बोलते हैं। ऐसी अवस्थामें वह जो कुछ बोलता है, उसे भगवान् मानो अपनी डायरीमें नोट कर लेते हैं। मणिग्रीवसे नारदजीने कहा- इतने दिन बाद भगवान् मिलेंगे। वहाँ उन्होंने पहले श्रीकृष्णसे सलाह थोड़े ही की थी। श्रीकृष्णको स्वयं ध्यान रखना पड़ा कि नारदने ऐसा कह दिया है, अब हमें कब और कैसे मिलना है। यह मजाककी बात नहीं सिद्धान्तकी बात है। पूज्य भाई जी🙏🌸 *Bhagavad Gita App* *Chapter:* 5 *श्लोक:* 4 *श्लोक:* सांख्ययोगौ पृथग्बाला: प्रवदन्ति न पण्डिता: । एकमप्यास्थित: सम्यगुभयोर्विन्दते फलम् ॥ ४ ॥ *अनुवाद:* अज्ञानी ही भक्ति (कर्मयोग) को भौतिक जगत् के विश्लेषणात्मक अध्ययन (सांख्य) से भिन्न कहते हैं। जो वस्तुत: ज्ञानी हैं वे कहते हैं कि जो इनमें से किसी एक मार्ग का भलीभाँति अनुसरण करता है, वह दोनों के फल प्राप्त कर लेता है। *तात्पर्य:* भौतिक जगत् के विश्लेषणात्मक अध्ययन (सांख्य) का उद्देश्य आत्मा को प्राप्त करना है। भौतिक जगत् की आत्मा विष्णु या परमात्मा हैं। भगवान् की भक्ति का अर्थ परमात्मा की सेवा है। एक विधि से वृक्ष की जड़ खोजी जाती है और दूसरी विधि से उसको सींचा जाता है। सांख्यदर्शन का वास्तविक छात्र जगत् के मूल अर्थात् विष्णु को ढूँढता है और फिर पूर्णज्ञान समेत अपने को भगवान् की सेवा में लगा देता है। अत: मूलत: इन दोनों में कोई भेद नहीं है क्योंकि दोनों का उद्देश्य विष्णु की प्राप्ति है। जो लोग चरम उद्देश्य को नहीं जानते वे ही कहते हैं कि सांख्य और कर्मयोग एक नहीं हैं, किन्तु जो विद्वान् है वह जानता है कि इन दोनों भिन्न विधियों का उद्देश्य एक है। जय श्री कृष्ण 🌹🙏 .एक समय शिव जी महाराज पार्वती के साथ हरिद्वार में घूम रहे थे । पार्वती जी ने देखा कि सहस्त्रों मनुष्य गंगा में नहा-नहाकर ‘हर-हर गंगे’ कहते चले जा रहे हैं परंतु प्राय: सभी दुखी और पाप परायण हैं । तब पार्वती जी ने बड़े आश्चर्य से शिव जी से पूछा कि ” हे देव ! गंगा में इतनी बार स्नान करने पर भी इनके पाप और दुखों का नाश क्यों नहीं हुआ ? क्या गंगा में सामर्थ्य नहीं रही ?’ शिवजी ने कहा, ‘‘ प्रिये ! गंगा में तो वही सामर्थ्य है, परंतु इन लोगों ने पापनाशिनी गंगा में स्नान ही नहीं किया है तब इन्हें लाभ कैसे हो ?’’ पार्वती जी ने आश्चर्य से कहा कि – ‘‘ स्नान कैसे नहीं किया ? सभी तो नहा-नहा कर आ रहे हैं ? अभी तक इनके शरीर भी नहीं सूखे हैं ।’’ शिवजी ने कहा, ‘‘ये केवल जल में डुबकी लगाकर आ रहे हैं । तुम्हें कल इसका रहस्य समझाऊंगा ।’’ दूसरे दिन बड़े जोर की बरसात होने लगी । गलियां कीचड़ से भर गईं । एक चौड़े रास्ते में एक गहरा गड्ढा था, चारों ओर लपटीला कीचड़ भर रहा था । शिवजी ने लीला से ही वृद्ध रूप धारण कर लिया और दीन-विवश की तरह गड्ढे में जाकर ऐसे पड़ गए, जैसे कोई मनुष्य चलता-चलता गड्ढे में गिर पड़ा हो और निकलने की चेष्टा करने पर भी न निकल पा रहा हो । पार्वती जी को उन्होंने यह समझाकर गड्ढे के पास बैठा दिया कि — ” देखो, तुम लोगों को सुना-सुनाकर यूं पुकारती रहो कि मेरे वृद्ध पति अकस्मात गड्ढे में गिर पड़े हैं कोई पुण्यात्मा इन्हें निकालकर इनके प्राण बचाए और मुझ असहाय की सहायता करे । शिवजी ने यह और समझा दिया कि जब कोई गड्ढे में से मुझे निकालने को तैयार हो तब इतना और कह देना कि ‘ भाई ! मेरे पति सर्वथा निष्पाप हैं इन्हें वही छुए जो स्वयं निष्पाप हो यदि आप निष्पाप हैं तो इनके हाथ लगाइए नहीं तो हाथ लगाते ही आप भस्म हो जाएंगे ।’’ पार्वती जी ‘तथास्तु’ कह कर गड्ढे के किनारे बैठ गईं और आने-जाने वालों को सुना-सुनाकर शिवजी की सिखाई हुई बात कहने लगीं । गंगा में नहाकर लोगों के दल के दल आ रहे हैं । सुंदर युवती को यूं बैठी देख कर कइयों के मन में पाप आया, कई लोक लज्जा से डरे तो कइयों को कुछ धर्म का भय हुआ, कई कानून से डरे । कुछ लोगों ने तो पार्वती जी को यह भी सुना दिया कि ‘ मरने दे बुड्ढे को क्यों उसके लिए रोती है ?’ आगे और कुछ दयालु सच्चरित्र पुरुष थे, उन्होंने करुणावश हो युवती के पति को निकालना चाहा परंतु पार्वती के वचन सुनकर वे भी रुक गए । उन्होंने सोचा कि ‘ हम गंगा में नहाकर आए हैं तो क्या हुआ, पापी तो हैं ही, कहीं होम करते हाथ न जल जाएं । बूढ़े को निकालने जाकर इस स्त्री के कथनानुसार हम स्वयं भस्म न हो जाएं ।’ किसी का साहस नहीं हुआ । सैंकड़ों आए, सैंकड़ों ने पूछा और चले गए । संध्या हो चली । शिवजी ने कहा, ‘‘ पार्वती ! देखा, आया कोई सच्चे ह्रदय से गंगा में नहाने वाला है ?’’ थोड़ी देर बाद एक जवान हाथ में लोटा लिए हर-हर गंगे करता हुआ निकला, पार्वती ने उसे भी वही बात कही । युवक का हृदय करूणा से भर आया । उसने शिवजी को निकालने की तैयारी की । पार्वती ने रोक कर कहा कि ‘‘ भाई यदि तुम सर्वथा निष्पाप नहीं होगे तो मेरे पति को छूते ही जल जाओगे ।’’ उसने उसी समय बिना किसी संकोच के दृढ़ निश्चय के साथ पार्वती से कहा कि ” माता ! मेरे निष्पाप होने में तुझे संदेह क्यों होता है ? देखती नहीं मैं अभी गंगा नहाकर आया हूं । भला, गंगा में गोता लगाने के बाद भी कभी पाप रहते हैं ? तेरे पति को निकालता हूं । युवक ने लपककर बूढ़े को ऊपर उठा लिया “। शिव-पार्वती ने उसे अधिकारी समझकर अपना असली स्वरूप प्रकट कर उसे दर्शन देकर कृतार्थ किया । शिवजी ने पार्वती से कहा कि ‘‘इतने लोगों में से इस एक ने ही गंगा स्नान किया है ।’’ इसी दृष्टांत के अनुसार जो लोग बिना श्रद्धा और विश्वास के केवल दंभ के लिए गंगा स्नान करते हैं उन्हें वास्तविक फल नहीं मिलता परंतु इसका यह मतलब नहीं कि गंगा स्नान व्यर्थ जाता है । गंगा स्नान का बहुत पुण्य भी है । भोले वंदन आपका, और चरण स्पर्श। मेरी दुनिया आप हो, प्रभू फर्श से अर्श।। हे भोले दे दीजिए,हमको ये वरदान। इंसानों के बीच हम, बने रहें इंसान।। जैसा है प्रभु आपका, संतोषी परिवार। वैसा ही कर दो सुखद, मेरा भी घर वार।। !! हर हर गंगे हर हर महादेव ॐ नमः शिवाय 🙏🌹 🕉️ राम-राम...कहा जाता है कि ताजी की माताजी जब भी भूमियाधार में बाबा जी के दर्शन करने जाती थीं, तो कभी भी खाली हाथ नहीं जाती थीं। घर में जो भी स्नेह से बना भोजन होता—दाल, चावल, रोटी, सब्ज़ी या कोई पारंपरिक कुमाऊँनी व्यंजन—उसी को एक छोटे से बर्तन में रखकर प्रसाद के रूप में साथ ले जाती थीं। उनकी आर्थिक स्थिति बहुत साधारण थी। कई बार वाहन न मिलने पर वे कई किलोमीटर पैदल चलकर भी बाबा जी के दर्शन के लिए पहुँच जाती थीं। एक बार व्रत होने के कारण लंबी यात्रा में वे थक गईं और रास्ते में एक बड़ी चट्टान पर बैठकर कुछ देर विश्राम करने लगीं। उसी समय उनके मन में विचार आया—"मैं बाबा जी के लिए कितना साधारण भोजन लेकर जा रही हूँ। दूसरे भक्त कितने सुंदर और विविध प्रकार के भोग लाते होंगे। क्या मेरा यह छोटा-सा प्रसाद अर्पित करना उचित लगेगा?" इन विचारों के साथ वे आगे बढ़ीं और भूमियाधार पहुँचकर बाबा जी के दर्शन किए। जब उन्हें लगा कि अब शांत वातावरण है, तो उन्होंने प्रसाद अर्पित करने के लिए अपना बर्तन खोला। लेकिन यह देखकर वे हैरान रह गईं कि बर्तन पूरी तरह खाली था। वे बहुत व्याकुल हो गईं और सोचने लगीं कि प्रसाद आखिर गया कहाँ। तभी बाबा जी मुस्कुराए और प्रेम से बोले— "चिंता मत कर... जहाँ रास्ते में बैठकर तुमने प्रेम से हमें याद किया था, वहीं तुम्हारा प्रसाद हम स्वीकार कर चुके थे।" यही तो सच्ची भक्ति है—जहाँ दिखावे से अधिक महत्व श्रद्धा और निष्कपट प्रेम का होता है। जय श्री कृष्ण 🙏🌹 *वजन कम करने के आयुर्वेदिक उपाय* भोजन के पूर्व टमाटर का सूप पीने से या टमाटर कच्चे खाने से भी वजन कम होता होता है। खाना हमेशा एक रस हो जाए उतनी देर चबा कर ही निगलना चाहिए। हर ऋतु पर आने वाले फल का आहार करें। तले हुए खाने से ज्यादा भुने उए व्यंजन का आहार चुने। खाना खाने के तुरंत बाद कभी न सोएं। संरक्षित किया हुआ खाना खाने से परहेज करे। प्रोसेस्ड फूड खाना कम करें। रात का खाना सोने से 3-4 घंटे पहले लेना चाहिए।रात का खाना कम कैलोरी वाला होना चाहिए। गोभी के पत्ते वजन कम करने के लिए काफी लाभदायी होते है। कच्चे सैलड में गोभी के पत्ते उबाल कर, या फिर कच्चे खाने से वजन कम होता है। खाने के बाद तुरंत पानी पीना तेजी से वजन बढाता है। वजन नियंत्रित करने के लिए ताजा सब्जियाँ, फल और बीन्स का आहार उत्तम रहता है। जैसे कि ककड़ी, खीरा, मूली, चना, मूंग, मटर, पपीता, गाजर और हर प्रकार की दाल खाना हितकारी होता है। वजन घटाने के लिए व्यायाम ! जय श्री राधे राधे 🙏🌹
- राजस्थान यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ चुनाव बहाली की मांग पर टंकी पर चढ़े छात्रों का आंदोलन समाप्त, टीकाराम जूली ने तुड़वाया आमरण अनशन जयपुर। राजधानी जयपुर स्थित राजस्थान यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ चुनाव बहाली की मांग को लेकर तीन छात्र पानी की टंकी पर चढ़कर विरोध प्रदर्शन पर बैठ गए। छात्र पिछले दो दिनों से टंकी पर डटे हुए थे और आमरण अनशन भी कर रहे थे। उनका कहना था कि प्रदेश में छात्रसंघ चुनाव जल्द बहाल किए जाएं। शनिवार शाम को राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली आंदोलन स्थल पहुंचे। उन्होंने छात्रों से बातचीत कर उनकी मांगों को गंभीरता से उठाने का भरोसा दिया और आंदोलन समाप्त करने की अपील की। समझाइश के बाद छात्रों ने टंकी से नीचे उतरकर अपना आमरण अनशन समाप्त कर दिया। छात्रों ने कहा कि उनका आंदोलन छात्र हितों और लोकतांत्रिक अधिकारों की बहाली के लिए था। वहीं टीकाराम जूली ने छात्रों को आश्वस्त किया कि छात्रसंघ चुनाव बहाली के मुद्दे को सरकार के समक्ष मजबूती से उठाया जाएगा। आंदोलन के शांतिपूर्ण समापन के बाद प्रशासन ने भी राहत की सांस ली। छात्र नेताओं ने कहा कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो भविष्य में आंदोलन फिर से तेज किया जा सकता है।1
- Ruchika Singh, जिनका जंतर-मंतर प्रदर्शन का वीडियो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अभद्र भाषा के इस्तेमाल को लेकर वायरल हुआ था, ने अब सार्वजनिक रूप से माफी मांग ली है। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से बच्चों को माफ करने और उन्हें सही संस्कार व सही दिशा देने की अपील की है #NarendraModi #PMModi #RuchikaSingh #JantarMantar #CityCablenewsjaipur1
- "मोदीजी ने गालियां देने वाले Gen-Z युवाओं को भी अपना माना। ताज़ा वीडियो में उन्होंने कहा— "मुझे भद्दी-भद्दी गालियां दी गईं। मेरी स्वर्गीय माताजी को भी गालियां दी गईं। लेकिन बच्चे तो अपने हैं। दांतों के बीच जीभ आ जाए तो दांत नहीं तोड़े जाते। आइए, मिलकर आगे बढ़ें, सुधरें।" और हां, आज एक बात अलग रही... सोशल मीडिया की दुनिया में जहां कहा जाता है कि रील एक मिनट की होनी चाहिए, वहीं मोदीजी का संदेश करीब तीन मिनट तक चला। लेकिन जब बात संवाद और संदेश की हो, तो समय से ज्यादा मायने उसकी बातों के होते हैं। आपकी राय? क्या इस तरह की भाषा और संदेश राजनीति में सकारात्मक माहौल बनाने में मदद कर सकते हैं?1
- यह मानवता का ऐसा दृश्य इसको देखकर आत्मा जग उठेगी .... कैंसर की अंतिम स्टेज से जूझ रहे पिता को जब अहसास हुआ कि उनके पास अब ज्यादा वक्त नहीं बचा है, तो उन्होंने अपने बेटे मंत्र को अपने पास बुलाया. उन्होंने बहुत ही प्यार और दुलार से अपने बेटे को समझाया कि उनके जाने के बाद उसे कैसे रहना है. पिता ने बेटे से कहा कि वह अपनी मां की हर बात सुने और कभी भी बदमाशी न करे. उन्होंने मासूम को समझाया कि अब परिवार की जिम्मेदारी और मां-बहनों का ख्याल रखने का वक्त उसका ही है. वीडियो में पिता अपने मासूम बेटे का हौसला बढ़ाते नजर आ रहे हैं. जब बच्चा भावुक होने लगता है, तो पिता बड़े ही प्यार से उससे कहते हैं कि रोना नहीं है, तुम तो बहुत अच्छे और समझदार बच्चे हो ना. उन्होंने बेटे से रोने का वादा भी लिया ताकि उनके जाने के बाद बच्चा हिम्मत से काम ले सके. पिता की ये बातें सुनकर इंटरनेट पर हर कोई भावुक हो रहा है और इस पिता के जज्बे को सलाम कर रहा है. उन्होंने अपने बेटे को साफ शब्दों में कहा कि वह अपनी मां का ख्याल रखेगा और उनकी हर बात मानेगा. इसके साथ ही उन्होंने बेटे को याद दिलाया कि उसे अपनी दो छोटी बहनों का भी ध्यान रखना है और उनकी रक्षा करनी है. छोटी सी उम्र में बेटे को एक जिम्मेदार इंसान बनाने की यह कोशिश दिल छू लेने वाली है1
- पवित्र श्रावण मास में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर अयोध्या धाम में स्थाई प्रकाश व्यवस्था का शुभारंभ पवित्र श्रावण मास में श्रीरामजन्मभूमि मंदिर अयोध्या धाम में स्थायी रात्रिकालीन प्रकाश व्यवस्था का शुभारंभ हो चुका है। स्वर्णिम प्रभा से आलोकित मंदिर का उत्तुंग शिखर और दूर-दूर तक विस्तृत भव्य परिसर मानो दिव्यता का साकार रूप धारण कर श्रद्धालुओं को अलौकिक अनुभूति से अभिभूत कर देता है। रात्रि की नीरवता में ज्योतिर्मय श्रीराम मंदिर की अनुपम छटा श्रद्धा, आस्था और आध्यात्मिक वैभव का अद्वितीय संगम प्रस्तुत करती है।2
- बंदरों ने देखा बच्चों को झूलने का नजारा सुबह शाम दोनों समय मैं आते हैं यहां छोटे बच्चे झूला झूल रहे थे उनको देखकर बंदरों में भी झूलने का मन बनाया पास में आकर के बैठ गए झूला झूलते बच्चों को देखने के लिए । पावर हाउस कॉलोनी हीरापुरा में इतनी हरियाली है की सुबह शाम लोग घूमने के लिए यहां आते हैं1
- 12 दिन से अन त्याग कर पैदल चलने की वजह से महिपाल सिंह मकराना की बिगड़ी -तबीयत 12 दिन से अन त्याग कर पैदल चलने की वजह से महिपाल सिंह मकराना की बिगड़ी -तबीयत1