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रीवा को उपराजधानी बनाओ ,साथ ही रीवा वायक प्राधिकरण,स्मार्ट सिटी का दर्जा दिया जाय रीवा को उपराजधानी बनाया जाय ,यह अब रीवा के विकास के लिए जरूरी है ,1956 में जब विंध्य प्रदेश का विलय मध्य प्रदेश में किया गया तब यहाँ सभी राज्य स्तर के कार्यालय थे ,किंतु अब न कोई उद्योग है ,न रोजगार के साधन ,भोपाल 600 कि मि है ,जिससे आना जाना काफी महंगा है ,अब वह समय आ गया है ,जब यह विकास प्राधिकरण एवं उपराजधानी जरूरी है
प्रवीण शर्मा
रीवा को उपराजधानी बनाओ ,साथ ही रीवा वायक प्राधिकरण,स्मार्ट सिटी का दर्जा दिया जाय रीवा को उपराजधानी बनाया जाय ,यह अब रीवा के विकास के लिए जरूरी है ,1956 में जब विंध्य प्रदेश का विलय मध्य प्रदेश में किया गया तब यहाँ सभी राज्य स्तर के कार्यालय थे ,किंतु अब न कोई उद्योग है ,न रोजगार के साधन ,भोपाल 600 कि मि है ,जिससे आना जाना काफी महंगा है ,अब वह समय आ गया है ,जब यह विकास प्राधिकरण एवं उपराजधानी जरूरी है
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- रीवा में महाकाल ग्रुप पर धड़ल्ले से अबैध शराब बेचने का आरोप वीडियो वायरल खाकी की सरपरस्ती या सिस्टम का नाकारापन? चौरहटा के दाढ़ी गांव में फिर धड़ल्ले से बिक रही अवैध शराब, महाकाल ग्रुप और सुनील सिंह के नाम पर पुलिस मौन! रीवा। जिले के चोरहटा थाना अंतर्गत ग्राम दाढ़ी में अवैध शराब का कारोबार एक बार फिर अपनी जड़ें जमा चुका है। ग्रामीणों की बारंबार शिकायतों और मीडिया की पैनी नजर के बावजूद स्थानीय पुलिस की भूमिका गहरे संदेह के घेरे में है। भाड़े का मकान लेकर खुलेआम चलाई जा रही अवैध शराब की बिक्री और दुकानों पर कार्रवाई के नाम पर महज कागजी खानापूर्ति की जा रही है। हाल ही में सामने आए ताजा वीडियो ने चोरहटा पुलिस की कार्यप्रणाली की पूरी पोल खोलकर रख दी है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कानून-व्यवस्था को ठेंगा दिखाते हुए किस तरह गांव में निर्भीक होकर शराब बेची जा रही है। कागजों तक सीमित 34(1) की कार्रवाई, जमीन पर वही पुराना खेल बीते दिनों ग्राम दाढ़ी में जब मीडिया की टीम ग्राउंड पर पहुंची थी, तब आनन-फानन में पुलिस ने दबिश देकर लगभग 32 लीटर अवैध शराब जब्त की थी और आबकारी अधिनियम की धारा 34(1) के तहत मामला दर्ज किया था। लेकिन यह कार्रवाई महज ढोंग साबित हुई। लिखा-पढ़ी खत्म होते ही शराब माफिया ने उसी जगह से दोबारा अपना धंधा चमकाना शुरू कर दिया। सवाल यह उठता है कि क्या चोरहटा पुलिस की कार्रवाई सिर्फ दिखाने के लिए होती है । कैमरे पर खुला था राज: महाकाल ग्रुप के सुनील सिंह का नाम! पूर्व में जब मीडिया कवरेज के दौरान मौके से शराब विक्रेता पकड़े गए थे, तब उन्होंने पुलिस की मौजूदगी में ऑन-कैमरा यह कबूल किया था कि यह अवैध खेप महाकाल ग्रुप के शराब ठेकेदार सुनील सिंह की है और वे उन्हीं के इशारे व सरपरस्ती में काम कर रहे हैं। इसके बावजूद, रीवा पुलिस प्रशासन और आबकारी विभाग ने मुख्य सरगना पर हाथ डालने की हिम्मत नहीं दिखाई। छोटे-मोटे प्यादों पर मामला दर्ज कर असली आकाओं को अभयदान देना यह साबित करता है कि जिले में शराब माफिया के हौसले बुलंद क्यों हैं। जब ऑन-कैमरा शराब ठेकेदार सुनील सिंह और महाकाल ग्रुप का नाम सामने आ चुका है, तो पुलिस ने अब तक मुख्य नामजद लोगों पर शिकंजा क्यों नहीं कसा गांव के भीतर भाड़े का कमरा लेकर अवैध शराब का अड्डा चलाया जा रहा है, क्या स्थानीय पुलिस बीट प्रभारी को इसकी कोई खबर नहीं है? ग्रामीण लगातार शिकायतें कर रहे हैं, लेकिन पुलिस तब तक क्यों सोई रहती है जब तक मीडिया मौके पर पहुंचकर सच उजागर न कर दे? क्या पुलिस की यह ढिलाई महज एक इत्तेफाक है या इसके पीछे आबकारी और पुलिस महकमे के निचले कर्मचारियों की सांठगांठ और मोटी कमाई का खेल चल रहा है? रीवा एसपी की खामोशी पर सवाल: क्या रीवा पुलिस कप्तान इस खुलेआम चल रहे अवैध धंधे और चोरहटा पुलिस की संदिग्ध भूमिका का संज्ञान लेकर संबंधित अधिकारियों पर गाज गिराएंगे? ग्राम दाढ़ी में फिर से शुरू हुआ यह अवैध कारोबार सिर्फ कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि रीवा पुलिस के इकबाल को खुली चुनौती है। अब देखना यह होगा कि खबर के बाद जिला प्रशासन चेतता है या खाकी की छत्रछाया में यह गोरखधंधा यूं ही फलता-फूलता रहेगा।1
- जिला रीवा हुजूर रीवा रेलवे स्टेशन में जाम से आम जनता परेशान रीवा रेलवे स्टेशन में आये दिन जाम लगा रहता है जिससे आम जनता को परेशानी का समना करना पड़ता है बीच रोड़ में चार चक्का आटो वाईक बस रोड़ में खड़े रहने के कारण किसी दिन कोई अनहोनी हो सकती है सबसे बड़ी बात है सुरक्षा के लिए कोई बल मोजूद नहीं है1
- गुरु पुलिस की बड़ी कामयाबी, काफी दिनों से फरार चोरों को पकड़ा और जेल भेजा1
- *चार महीने से जला ट्रांसफार्मर, चिमनी की रोशनी में पढ़ने को मजबूर बच्चे* *रीवा पत्रकार पंडित विकास* *चार महीने से जला ट्रांसफार्मर, चिमनी की रोशनी में पढ़ने को मजबूर बच्चे* *रीवा पत्रकार पंडित विकास* रीवा/सिरमौर। सिरमौर जनपद के पथरी गांव में पिछले करीब चार महीने से ट्रांसफार्मर जला हुआ है। ग्रामीणों का आरोप है कि विद्युत विभाग से लगातार शिकायत करने के बावजूद अब तक ट्रांसफार्मर नहीं बदला गया। ग्रामीण शिकायत करते-करते थक चुके हैं और अब सवाल कर रहे हैं कि आखिर वे अपनी समस्या लेकर जाएं तो जाएं कहां? ग्रामीणों के मुताबिक, बिजली का बिल हर महीने आ रहा है और बिल जमा भी किया जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद घरों में बिजली की आपूर्ति नहीं हो रही है। विभाग की ओर से बिल बकाया होने की बात कही जाती है, जिसे लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है। बिजली नहीं होने का सबसे ज्यादा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चे आज भी चिमनी और दीये की रोशनी में पढ़ने को मजबूर हैं। गर्मी और अंधेरे के बीच परिवारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन और विद्युत विभाग से मांग की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल नया ट्रांसफार्मर लगाकर गांव की बिजली व्यवस्था बहाल की जाए। अब देखना होगा कि ग्रामीणों की यह समस्या कब तक दूर होती है और पथरी गांव में कब फिर से रोशनी लौटती है।1
- रामशंकर पयासी के गृह ग्राम में श्रीमद्भागवत कथा, जिलेभर से पहुंच रहे श्रद्धालु,, रामपुर बाघेलान के पूर्व विधानसभा कांग्रेस प्रत्याशी रामशंकर पयासी के गृह ग्राम मझियार में उनकी भाभी स्वर्गीय श्रीमती उषा पयासी, स्वर्गीय रामभगत पयासी जी की धर्मपत्नी, की पुण्य स्मृति में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा महापुराण में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ रहा है। कथा में पूरे रामपुर बाघेलान विधानसभा क्षेत्र के साथ-साथ सतना जिले के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर कथा का रसपान कर रहे हैं। व्यासपीठ कुलगुरु अयोध्यावासी पूज्य बाल स्वामी अवधेन्द्र प्रपन्नाचार्य जी महाराज के श्रीमुख से कथा का वाचन किया जा रहा है। महाराज श्री द्वारा श्रीमद्भागवत महापुराण के विभिन्न प्रसंगों का सरल एवं सरस वाणी में भावपूर्ण वर्णन किया जा रहा है। कथा के दौरान भजन-कीर्तन एवं भगवान के जयघोष से पूरा पंडाल भक्तिमय बना हुआ है। कथा श्रवण के लिए रामपुर बाघेलान विधानसभा क्षेत्र के साथ सतना जिले के विभिन्न गांवों एवं क्षेत्रों से श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला लगातार जारी है। बड़ी संख्या में महिला, पुरुष एवं युवा श्रद्धालु कथा पंडाल में पहुंचकर आध्यात्मिक लाभ अर्जित कर रहे हैं। इस अवसर पर राजाराम त्रिपाठी, रामपाल सिंह, नीलकंठ पांडेय, सज्जन सिंह, उर्मिला त्रिपाठी, हेमलता सिंह, शिवशंकर गोंटिया, रावेंद्र सिंह, छोटू, अखिलेश शर्मा, मृगेंद्र सिंह, कमलेश मिश्रा, अनूप त्रिपाठी, डॉ. केशव त्रिपाठी, संजय पांडेय, सत्यप्रकाश चौधरी, सतीश शुक्ला, पीयूष पाण्डेय, विनोद तिवारी, ऋषिकेश त्रिपाठी, मुकेश त्रिपाठी, संदीप गुप्ता, राजेंद्र गौतम, वीरभान पांडेय, शोभनाथ सिंह, रामचरन, साकेत, जितेंद्र सिंह, धीरेंद्र निगम, सीताशरण परौहा, सूर्यप्रकाश पयासी, मनोज परौहा, अशोक दुबेदी, के.के. गौतम, धीरू शर्मा, गीता पयासी, ध्रुवराज सिंह, सुखेंद्र सिंह, जितेंद्र त्रिपाठी, राजा बढ़ैया, रोहिणी तिवारी, धर्मेंद्र सिंह, उत्तम सिंह, गया पाठक, शिवबालक शर्मा, मनोज तिवारी, अचलेश पयासी, नवदुर्गा गुप्ता, नितिन सिंह, रामलखन सोनी, ओमप्रकाश विश्वकर्मा, सोखीलाल कोरी, विनीत मिश्रा, ब्रजेंद्र द्विवेदी, सुरेश मिश्रा एवं इंद्रपाल पांडेय सहित अनेक गणमान्यजन एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन 20 अगस्त से 28 अगस्त 2026 तक मझियार में किया जा रहा है।3
- मध्यप्रदेश से जुड़ी आज की बड़ी खबरें देखिए, #जनसंपर्क_खबरें 🗓️ 27 अगस्त 2026 मध्यप्रदेश से जुड़ी आज की बड़ी खबरें देखिए, #जनसंपर्क_खबरें1
- ग्लेशियर टूटने से नेपाल में तबाही, GLOF ने मचाई भारी तबाही ग्लेशियर टूटने से नेपाल में तबाही, GLOF ने मचाई भारी तबाही अंतरराष्ट्रीय डेस्क । नेपाल में ग्लेशियर टूटने के बाद अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई। घटना के बाद चीन का हेलीकॉप्टर उस क्षेत्र तक पहुंचा, जहां ग्लेशियर टूटने और उससे निकले पानी के कारण बाढ़ की स्थिति बनी थी। इस तरह की प्राकृतिक आपदा को ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) कहा जाता है। क्या होता है GLOF? ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी GLOF उस स्थिति को कहा जाता है, जब ग्लेशियर से बनी या ग्लेशियर द्वारा रोकी गई झील का प्राकृतिक बांध अचानक टूट जाता है। बांध टूटते ही झील में जमा भारी मात्रा में पानी बेहद तेजी से नीचे की ओर बहने लगता है। पानी के अत्यधिक दबाव, ग्लेशियर में बनी दरारों अथवा अन्य प्राकृतिक कारणों से झील का अवरोध कमजोर हो सकता है। इसके बाद पानी अपने साथ चट्टान, मिट्टी और मलबा लेकर पहाड़ी क्षेत्रों से तेज गति से नीचे की ओर आता है। कुछ ही समय में बदल सकती है स्थिति GLOF की सबसे बड़ी विशेषता इसकी अचानक आने वाली विनाशकारी बाढ़ है। पहाड़ी क्षेत्रों में झील का बांध टूटने के बाद पानी बहुत कम समय में निचले इलाकों तक पहुंच सकता है। इससे रास्तों, पुलों, घरों और अन्य बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचने के साथ जनजीवन भी प्रभावित हो सकता है। नेपाल जैसे हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियरों और उनसे बनी झीलों की निगरानी इसलिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। जलवायु परिवर्तन के कारण ग्लेशियरों में हो रहे बदलावों के बीच ऐसी घटनाओं का जोखिम भी वैज्ञानिकों के लिए गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है।1
- मैहर में कांग्रेसियों ने एसडीएम मुर्दाबाद के लगाए नारे1