आज से 301 वर्ष पूर्व, 31 मई को महारानी अहिल्याबाई होलकर का जन्म ज्येष्ठ पूर्णिमा के शुभ अवसर पर हुआ था, जिसके उपलक्ष्य में उन्हें नमन किया गया। उन्हें अपने देवी तुल्य शासन के लिए माँ अन्नपूर्णा के साक्षात अवतार के रूप में याद किया जाता है। डॉ. मुरली धर सिंह शास्त्री ने काशी धाम से उनके अतुलनीय योगदान को रेखांकित किया। इतिहास में कई राजा-रानियाँ हुईं, लेकिन महारानी अहिल्याबाई होलकर जैसा कोई नहीं हुआ। उनका जीवन व्यक्तिगत त्रासदियों से भरा रहा; बचपन में शादी, पुत्र का स्वर्गवास, और पति व ससुर का निधन। इन घटनाओं के बाद, वर्ष 1767 में महारानी ने मालवा की राजा रानी के रूप में कार्यभार संभाला और 1795 तक कुशलतापूर्वक शासन किया। महारानी अपने पूरे राज-काज को भगवान शंकर के नाम से संचालित करती थीं। उनकी झोली में हमेशा शंकर जी की सुमरनी और रुद्राक्ष की माला रहती थी। उनके राज्य में महारानी के नाम की जगह भगवान शंकर के नाम का मोहर लगता था। उन्होंने अपनी राजधानी का नाम भी शंकर जी पर ही महेश्वर रखा, जो मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में नर्मदा के उत्तर तट पर बसा एक आधुनिक और स्थापत्य कला की दृष्टि से महत्वपूर्ण शहर है। उनका सबसे महत्वपूर्ण योगदान आधुनिक भारत में काशी विश्वनाथ, ओंकारेश्वर, महाकालेश्वर, गदाधर मंदिर (गया), सोमनाथ, त्रंबकेश्वर, भीमाशंकर और गणेशवर जैसे अनेकों मंदिरों के निर्माण में रहा। यह कहा गया कि यदि महारानी न होतीं, तो ये मंदिर शायद नहीं बने होते, क्योंकि उन्होंने इनके निर्माण में अपनी पूरी शासकीय क्षमता का प्रयोग किया था, जैसा कि लगभग 300 साल पहले किसी अन्य राजा या महारानी ने नहीं किया। उनका पूरा जीवन सफलताओं से भरा रहा, लेकिन एक कोना हमेशा खाली रहा कि उनकी संतान शासन नहीं कर सकी। उन्होंने गोद लेने से भी इनकार कर दिया और शासन को योग्यता के आधार पर उस समय के योग्य लोगों को सौंप दिया। यह आजकल के नेताओं के लिए एक बड़ा सबक है, जो अपनी अयोग्य संतानों को भी सत्ता सौंप देते हैं और लोकतंत्र का मज़ाक उड़ाते हैं। महारानी की दिव्यता और तीव्रता को देखकर उस समय के राजा-महाराजा तत्काल नमन करते थे और उनके लिए अलग आसन तैयार किया जाता था। उनकी जयंती के अवसर पर केंद्रीय और राज्य सरकारों से यह मांग की गई है कि उनके कृतित्व के संरक्षण हेतु विशेष कार्य किए जाएँ, उनके द्वारा निर्मित स्थानों को सुरक्षित किया जाए, और काशी के चल रहे निर्माण कार्यों में महारानी के योगदान को और अधिक रेखांकित किया जाए। जय हिंद, जय भारत, जय सनातन धर्म! महारानी अहिल्याबाई होलकर जी का योगदान हमेशा याद रहेगा।
आज से 301 वर्ष पूर्व, 31 मई को महारानी अहिल्याबाई होलकर का जन्म ज्येष्ठ पूर्णिमा के शुभ अवसर पर हुआ था, जिसके उपलक्ष्य में उन्हें नमन किया गया। उन्हें अपने देवी तुल्य शासन के लिए माँ अन्नपूर्णा के साक्षात अवतार के रूप में याद किया जाता है। डॉ. मुरली धर सिंह शास्त्री ने काशी धाम से उनके अतुलनीय योगदान को रेखांकित किया। इतिहास में कई राजा-रानियाँ हुईं, लेकिन महारानी अहिल्याबाई होलकर जैसा कोई नहीं हुआ। उनका जीवन व्यक्तिगत त्रासदियों से भरा रहा; बचपन में शादी, पुत्र का स्वर्गवास, और पति व ससुर का निधन। इन घटनाओं के बाद, वर्ष 1767 में महारानी ने मालवा की राजा रानी के रूप में कार्यभार संभाला और 1795 तक कुशलतापूर्वक शासन किया। महारानी अपने पूरे राज-काज को भगवान शंकर के नाम से संचालित करती थीं। उनकी झोली में हमेशा शंकर जी की सुमरनी और रुद्राक्ष की माला रहती थी। उनके राज्य में महारानी के नाम की जगह भगवान शंकर के नाम का मोहर लगता था। उन्होंने अपनी राजधानी का नाम भी शंकर जी पर ही महेश्वर रखा, जो मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में नर्मदा के उत्तर तट पर बसा एक आधुनिक और स्थापत्य कला की दृष्टि से महत्वपूर्ण शहर है। उनका सबसे महत्वपूर्ण योगदान आधुनिक भारत में काशी विश्वनाथ, ओंकारेश्वर, महाकालेश्वर, गदाधर मंदिर (गया), सोमनाथ, त्रंबकेश्वर, भीमाशंकर और गणेशवर जैसे अनेकों मंदिरों के निर्माण में रहा। यह कहा गया कि यदि महारानी न होतीं, तो ये मंदिर शायद नहीं बने होते, क्योंकि उन्होंने इनके निर्माण में अपनी पूरी शासकीय क्षमता का प्रयोग किया था, जैसा कि लगभग 300 साल पहले किसी अन्य राजा या महारानी ने नहीं किया। उनका पूरा जीवन सफलताओं से भरा रहा, लेकिन एक कोना हमेशा खाली रहा कि उनकी संतान शासन नहीं कर सकी। उन्होंने गोद लेने से भी इनकार कर दिया और शासन को योग्यता के आधार पर उस समय के योग्य लोगों को सौंप दिया। यह आजकल के नेताओं के लिए एक बड़ा सबक है, जो अपनी अयोग्य संतानों को भी सत्ता सौंप देते हैं और लोकतंत्र का मज़ाक उड़ाते हैं। महारानी की दिव्यता और तीव्रता को देखकर उस समय के राजा-महाराजा तत्काल नमन करते थे और उनके लिए अलग आसन तैयार किया जाता था। उनकी जयंती के अवसर पर केंद्रीय और राज्य सरकारों से यह मांग की गई है कि उनके कृतित्व के संरक्षण हेतु विशेष कार्य किए जाएँ, उनके द्वारा निर्मित स्थानों को सुरक्षित किया जाए, और काशी के चल रहे निर्माण कार्यों में महारानी के योगदान को और अधिक रेखांकित किया जाए। जय हिंद, जय भारत, जय सनातन धर्म! महारानी अहिल्याबाई होलकर जी का योगदान हमेशा याद रहेगा।
- जयपुर के मुरलीपुरा में पूज्य सिंधी पंचायत द्वारा आयोजित 15 दिवसीय बाल संस्कार शिविर सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है। इस शिविर में बच्चों को संस्कार और मूल्य सिखाए गए।1
- पूर्व चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा भावुक होते हुए कहा कि – “यही मेरी कसम है कि जिसको मैंने जिला बनाया और इन बेईमानों ने हटाया, बीजेपी की सरकार ने हटाया, उसको वापस जिले का दर्जा रघु शर्मा दिला के रहेगा और मेरी सांस रहेगी, तो यह जिला बनेगा।”1
- जयपुर पुलिस आयुक्त सचिन मित्तल ने शनिवार, 30 मई को चित्रकूट थाने में जनसुनवाई की, जहाँ उन्होंने परिवादियों की समस्याओं को सुना और मौके पर ही संबंधित अधिकारियों को उनके निस्तारण के निर्देश दिए। इस जनसुनवाई के दौरान अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) अजय सिंह, पुलिस उपायुक्त पश्चिम प्रशांत किरन, अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त पश्चिम राजेश कुमार गुप्ता और सहायक पुलिस आयुक्त वैशालीनगर अनिल कुमार शर्मा सहित संबंधित एसएचओ और अन्य थाना अधिकारी मौजूद रहे। पुलिस आयुक्त सचिन मित्तल ने बताया कि जनसुनवाई के दौरान कई परिवादियों की समस्याओं का तत्काल समाधान किया गया। उन्हें क्षेत्र में आपसी मुकदमे, पारिवारिक और जमीनी विवाद, मकानों पर अवैध कब्जे, चोरी और मारपीट जैसी शिकायतें प्राप्त हुईं। इन सभी शिकायतों की गहन जांच कर उन्हें कम से कम समय में और निश्चित समयावधि के भीतर निपटाने के सख्त निर्देश दिए गए। साथ ही, संबंधित अधिकारियों को परिवादियों की समस्याओं पर तुरंत प्रतिक्रिया देने और उनका त्वरित निस्तारण सुनिश्चित करने को कहा गया। वैशालीनगर सर्किल के वैशालीनगर, करणी विहार और चित्रकूट पुलिस थाना क्षेत्रों के परिवादियों ने अपनी शिकायतें पुलिस आयुक्त के समक्ष रखीं और उनका समाधान पाया। जनसुनवाई की सबसे खास बात यह रही कि अधिकांश समस्याओं का मौके पर ही समाधान कर दिया गया, जबकि जिन समस्याओं के समाधान में अधिक समय लगने की संभावना थी, उनके शीघ्र निस्तारण के लिए भी निर्देश दिए गए। यह भी उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी पुलिस आयुक्त झोटवाड़ा, सांगानेर, शिप्रापथ, विद्याधरनगर, भांकरोटा, बस्सी, शिवदासपुरा, चौमू, आमेर और रामगंज जैसे विभिन्न एसीपी कार्यालयों और पुलिस थानों में जनसुनवाई कर परिवादियों को मौके पर राहत प्रदान कर चुके हैं।1
- राजस्थान में इस समय बहुत तेज तूफानी बारिश हो रही है। पूरे राजस्थान में अत्यधिक तीव्र गति से तूफान चल रहा है, जिसके कारण भयंकर बारिश देखी जा रही है।1
- जयपुर की महेश नगर थाना पुलिस ने एक बिजनेसमैन को हनीट्रैप में फंसाकर ब्लैकमेल करने वाली युवती के एक मददगार दोस्त को दिल्ली से गिरफ्तार किया है। महेश नगर थाना पुलिस ने इस मामले का खुलासा करते हुए बताया कि युवक को शुक्रवार रात को दिल्ली से पकड़ा गया। इससे पहले पुलिस मुख्य ब्लैकमेलर युवती को जोधपुर से गिरफ्तार कर चुकी थी, जिसने पूछताछ में अपने इस साथी का नाम बताया था। गिरफ्तार किए गए दिल्ली के द्वारका निवासी 30 वर्षीय युवक के बैंक खाते में ही ब्लैकमेलिंग के पैसे डलवाए गए थे। पुलिस का मानना है कि इस गिरोह में और भी लोग शामिल हो सकते हैं। महेश नगर थाना पुलिस के SHO सुरेश यादव ने बताया कि सांगानेर निवासी 42 वर्षीय बिजनेसमैन ने जुलाई 2025 में महेश नगर थाने में एक FIR दर्ज कराई थी। बिजनेसमैन के आरोप के मुताबिक, युवती ने सोशल मीडिया के जरिए उससे संपर्क करने की कोशिश की थी। जब उसने ध्यान नहीं दिया, तो युवती ने उसकी पत्नी से दोस्ती कर उससे मिलना-जुलना शुरू कर दिया। इसके बाद युवती ने बिजनेसमैन को झूठे प्रेमजाल में फंसाकर उससे रुपए वसूलना शुरू कर दिया। शादी का झांसा देकर और झूठ बोलकर युवती ने अलग-अलग तरीकों से ₹90 लाख ऐंठ लिए। जब बिजनेसमैन ने और रुपए देने से मना किया, तो युवती ने उसे झूठे रेप केस में फंसाने की धमकी देनी शुरू कर दी और ₹50 लाख की मांग की थी।1
- मूल पाठ में तबाही का उल्लेख किया गया है, जिसके साथ ही ॐ नमः शिवाय और ओम विष्णु नारायण नमः जैसे धार्मिक मंत्रों का भी जाप किया गया है।1
- सांसद हनुमान बेनीवाल, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ के खिलाफ FIR दर्ज करवा सकते हैं।1
- कल राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले के एक गाँव में भीषण आंधी-तूफान आया। इस प्राकृतिक आपदा के कारण एक किसान को भारी नुकसान हुआ है। इसके अतिरिक्त, घटना में दो व्यक्तियों के घायल होने की भी सूचना मिली है।1