23 लाख की मंडी में रखे गोबर के उपले। पीलीभीत के बीसलपुर के चुर्रा सकतपुर में 2013 से पड़ी अनुपयोगी। बीसलपुर क्षेत्र की ग्राम पंचायत चुर्रा सकतपुर के मजरा गोटिया में 23 लाख 74 हजार रुपए की लागत से बनी एक मंडी अपने मूल उद्देश्य से भटक गई है। वर्ष 2013-14 में निर्मित यह मंडी अब सब्जियों के बजाय गोबर के उपले रखने के लिए उपयोग की जा रही है। स्थानीय निवासियों राज बहादुर सिंह, RN सिंह, इदरीस, सौरभ, रामकिशन के अनुसार, इस मंडी का निर्माण किसानों और व्यापारियों को सब्जियां बेचने के लिए एक संगठित मंच प्रदान करने के उद्देश्य से किया गया था। इसका मुख्य लक्ष्य कृषि उत्पादों के विपणन को सुगम बनाना था। हालांकि, अपने निर्माण के बाद से यह मंडी कभी भी पूरी तरह से चालू नहीं हो पाई। यह अब केवल एक शोपीस बनकर रह गई है और इसका उपयोग कृषि गतिविधियों के लिए नहीं हो रहा है। मंडी परिसर के भीतर जगह-जगह गोबर के उपले रखे हुए देखे जा सकते हैं, जो इसकी अनुपयोगिता का स्पष्ट प्रमाण है। लाखों रुपए के सरकारी फंड से बनी इस संरचना का सही उपयोग न होने से स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
23 लाख की मंडी में रखे गोबर के उपले। पीलीभीत के बीसलपुर के चुर्रा सकतपुर में 2013 से पड़ी अनुपयोगी। बीसलपुर क्षेत्र की ग्राम पंचायत चुर्रा सकतपुर के मजरा गोटिया में 23 लाख 74 हजार रुपए की लागत से बनी एक मंडी अपने मूल उद्देश्य से भटक गई है। वर्ष 2013-14 में निर्मित यह मंडी अब सब्जियों के बजाय गोबर के उपले रखने के लिए उपयोग की जा रही है। स्थानीय निवासियों राज बहादुर सिंह, RN सिंह, इदरीस, सौरभ, रामकिशन के अनुसार, इस मंडी का निर्माण किसानों और व्यापारियों को सब्जियां बेचने के लिए एक संगठित मंच प्रदान करने
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- पीलीभीत के चुर्रा सकतपुर गांव में जल जीवन मिशन के तहत खोदी गई सड़कों और गलियों की मरम्मत एक साल बाद भी नहीं हो पाई है। पाइपलाइन बिछाने के लिए खोदी गई इन सड़कों के कारण ग्रामीणों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लगभग दो वर्ष पहले गांव में जल जीवन मिशन के तहत ओवरहेड टैंक निर्माण और पाइपलाइन बिछाने का काम शुरू हुआ था। इस दौरान ठेकेदारों ने गांव की अधिकांश सड़कों और गलियों को खोद दिया था। पाइपलाइन का कार्य पूरा होने के बावजूद इन सड़कों की उचित मरम्मत नहीं की गई है। टूटी हुई सड़कें और गलियां अब बदहाल स्थिति में हैं, जिससे ग्रामीणों को पैदल चलने और वाहन चलाने में कठिनाई हो रही है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि ठेकेदार जानबूझकर सड़कों की मरम्मत नहीं करवा रहा है। उन्होंने ठेकेदार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीण बुलाकी, राम, धनपाल सिंह, राजकुमार, गौतम वेद पाल के अनुसार, विश्व हिंदू महासंघ भारत युवा प्रकोष्ठ, जनपद पीलीभीत के जिला प्रभारी झंकार सिंह ने इस संबंध में अधिकारियों से कई बार शिकायत की है। हालांकि, इन शिकायतों पर अब तक कोई ध्यान नहीं दिया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि विभागीय अनदेखी के कारण स्थिति जस की तस बनी हुई है और सड़कों की तत्काल मरम्मत की आवश्यकता है। वहीं इस मामले में जल निगम ग्रामीण के अधिशासी अभियंता मनीष गंगवार द्वारा बताया गया कि शीघ्र कार्य करा दिया जाएगा।1
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- पटना के दीघा घाट से मानवता और साहस की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने पूरे शहर को भावुक कर दिया है। गंगा नदी में डूब रहे एक पिता और उसके मासूम बेटे को बचाने के लिए जहां सैकड़ों लोग किनारे पर खड़े तमाशा देख रहे थे, वहीं एक महिला ट्रैफिक पुलिसकर्मी ने अपनी जान की परवाह किए बिना नदी में छलांग लगा दी। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि पिता-पुत्र गहरे पानी में संघर्ष कर रहे थे और मदद के लिए चीख रहे थे। मौके पर मौजूद भीड़ मोबाइल से वीडियो बनाने में व्यस्त थी, लेकिन मदद के लिए कोई आगे नहीं आ रहा था। तभी ड्यूटी पर तैनात महिला पुलिसकर्मी ने हालात की गंभीरता को समझते हुए बिना देर किए गंगा में छलांग लगा दी। काफी मशक्कत के बाद उन्होंने दोनों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अगर कुछ मिनट और देर हो जाती तो बड़ा हादसा हो सकता था। महिला पुलिसकर्मी की बहादुरी और तत्परता ने दो जिंदगियों को नया जीवन दे दिया। इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर लोग महिला पुलिसकर्मी की जमकर सराहना कर रहे हैं। कई लोगों ने इसे “खाकी का असली चेहरा” बताया है। वहीं, तमाशबीन बनी भीड़ की भी आलोचना हो रही है।1