सेंट्रल दिल्ली के साइबर थाने की टीम ने 9 साइबर जालसाजो को गिरफ्तार किया 10.08.2026 दो चरणों वाले साइबर रैकेट का पर्दाफाश: दिल्ली पुलिस ने उस सिंडिकेट को पकड़ा जो मोबाइल फोन चुराकर उनसे जुड़े बैंक खातों से पैसे निकालता था; 09 लोग गिरफ्तार ● 88 साल के एक बुजुर्ग का चोरी हुआ मोबाइल फोन साइबर पुलिस स्टेशन, सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट को एक हाई-टेक अंतर-राज्यीय साइबर-धोखाधड़ी नेटवर्क का पता लगाने में मदद करता है। ● जयपुर (राजस्थान) और मेरठ-गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश) में एक साथ छापेमारी की गई। ● जयपुर में पूरी तरह से चल रहे धोखाधड़ी वाले कॉल-सेंटर पर छापा मारा गया, जिसमें सर्वर, लैपटॉप, टैब और POS डिवाइस मौजूद थे। ● 04 लैपटॉप, 02 मोबाइल टैब, 52 मोबाइल फोन, 70 डेबिट कार्ड, 145 सिम कार्ड, 06 POS मशीनें, 13 बैंक पासबुक और 4,00,000 रुपये नकद बरामद किए गए। ● दो राज्यों में 09 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिससे बैकएंड कॉल-सेंटर ऑपरेटर और 'म्यूल-अकाउंट' (धोखाधड़ी के लिए इस्तेमाल होने वाले खाते) उपलब्ध कराने वाले - दोनों नेटवर्क खत्म हो गए। घटना का विवरण और मुख्य तथ्य जांच की शुरुआत दिल्ली के वेस्ट पटेल नगर में रहने वाले 88 वर्षीय बुजुर्ग द्वारा नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCCRP) पर दर्ज कराई गई शिकायत से हुई। 19 मई, 2026 को शिकायतकर्ता का मोबाइल फोन चोरी हो गया था। दो दिन बाद, 21 मई, 2026 को जब बुजुर्ग ने अपना सिम कार्ड दोबारा जारी करवाया, तो उन्हें SMS अलर्ट मिले जिनसे पता चला कि उनके केनरा बैंक खाते से बिना उनकी इजाज़त के तीन तेज़ी से हुए ट्रांज़ैक्शन (25,000 रुपये, 20,000 रुपये और 25,000 रुपये) के ज़रिए कुल 70,000 रुपये निकाल लिए गए थे। तुरंत समझदारी दिखाते हुए, पीड़ित ने नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 (शिकायत नंबर 30805260039432 और 30805260039350) पर पैसों की चोरी की रिपोर्ट की। शिकायत की जानकारी मिलने पर, PS साइबर सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट में FIR नंबर 36/2026 (तारीख 23/07/2026, धारा 318(4) BNS के तहत) दर्ज की गई और हाई-प्रायोरिटी टेक्निकल जांच शुरू की गई। टीम और ऑपरेशन डिजिटल सबूतों के तेज़ी से नष्ट होने की संभावना को देखते हुए, SHO/PS साइबर, इंस्पेक्टर योगराज दलाल की सीधी देखरेख और ACP/पहाड़गंज, श्री सौरभ नरेंद्र की कुल देखरेख में खास टीमें बनाई गईं। ● टीम 1 (जयपुर स्ट्राइक टीम): SI नवीन (जांच अधिकारी) और कॉन्स्टेबल मुकेश की अगुवाई में, मुख्य बैंकिंग ट्रांज़ैक्शन ऑपरेटरों का पता लगाने और उन्हें पकड़ने के लिए तैनात किया गया। ● टीम 2 (NCR और UP स्ट्राइक टीम): HC संजीव, HC दीपक और कॉन्स्टेबल दीपक को मेरठ और गाजियाबाद भेजा गया ताकि 'म्यूल अकाउंट' (धोखाधड़ी के लिए इस्तेमाल होने वाले खाते) की लॉजिस्टिकल सप्लाई लाइन को टारगेट किया जा सके। काम करने का तरीका (Modus Operandi): चोरी हुए फ़ोन से बैंक अकाउंट तक पैसे निकालने का नेटवर्क जांच में एक संगठित, दो-स्तरीय अंतर-राज्यीय साइबर क्राइम सिंडिकेट का पता चला। पहले चरण में, सड़क पर काम करने वाले ऑपरेटिव होते हैं जो अनजान पीड़ितों के मोबाइल फ़ोन चुराते हैं। दूसरे चरण में, मेरठ और गाजियाबाद में मौजूद ऑपरेटिव होते हैं जिनके पास म्यूल बैंक अकाउंट, POS मशीन और नकली सिम कार्ड का बड़ा स्टॉक होता है, जिनका इस्तेमाल पीड़ित के बैंक अकाउंट से पैसे निकालने/चुराने के लिए किया जाता है। तीसरे चरण के ऑपरेटिव राजस्थान के जयपुर में एक हाई-टेक, कॉल-सेंटर जैसे सेटअप से काम करते हैं। ये मुख्य टेक्निकल हैंडलर पीड़ित के बैंकिंग अकाउंट में लॉग-इन करते थे, म्यूल अकाउंट में अनधिकृत ट्रांज़ैक्शन भेजते थे और POS मशीन व ऑनलाइन पेमेंट चैनल का इस्तेमाल करके तेज़ी से कैश निकाल लेते थे। आरोपियों के नाम और प्रोफ़ाइल (09 आरोपी गिरफ्तार) जयपुर कॉल-सेंटर मॉड्यूल (राजस्थान): 1. निखिल सोनी (उम्र 26), निवासी झोटवाड़ा, जयपुर, राजस्थान। (जयपुर सिंडिकेट का मुख्य ऑपरेटर और टेक्निकल मास्टरमाइंड) 2. अभिषेक कुमार झा (उम्र 23), निवासी कैलाश नगर, जयपुर, राजस्थान। (कॉल-सेंटर ऑपरेटर) 3. आनंद साह सोनार (उम्र 26), निवासी कैलाश नगर, जयपुर, राजस्थान। (कॉल-सेंटर ऑपरेटर) 4. प्रिंस साह सोनार (उम्र 20), निवासी कैलाश नगर, जयपुर, राजस्थान। (कॉल-सेंटर ऑपरेटर) 5. बिशेक कुमार झा (उम्र 21), निवासी कैलाश नगर, जयपुर, राजस्थान। (कॉल-सेंटर ऑपरेटर) म्यूल अकाउंट सप्लाई मॉड्यूल (दिल्ली-NCR / UP): 6. अमर जाटव (उम्र 23), निवासी हापुड़ बाईपास, मेरठ, UP. (म्यूल अकाउंट सप्लायर) 7. हर्ष (उम्र 23), निवासी सिद्धार्थ विहार, विजय नगर, गाजियाबाद, UP. (म्यूल अकाउंट सप्लायर) 8. मोहन (उम्र 24), निवासी विजय नगर, गाजियाबाद, UP. (म्यूल अकाउंट सप्लायर) 9. वाशु (उम्र 19), निवासी मेरठ, UP. (म्यूल अकाउंट सप्लायर) बरामदगी ● 04 लैपटॉप और 02 मोबाइल टैब (सर्वर ऑपरेशन और ट्रांज़ैक्शन राउटिंग के लिए इस्तेमाल किए गए) ● 52 मोबाइल फ़ोन (जिनमें पीड़ितों का आपत्तिजनक डेटा, बैंकिंग ऐप्स और WhatsApp लॉग्स थे) ● 145 सिम कार्ड (अनधिकृत UPI/बैंकिंग सेशन को मैनेज करने के लिए इस्तेमाल किए गए) ● 70 डेबिट कार्ड और 13 बैंक पासबुक (म्यूल अकाउंट इन्वेंट्री) ● 06 POS मशीनें (तेज़ी से कैश निकालने के लिए इस्तेमाल की गईं) ● 04 हाई-स्पीड इंटरनेट राउटर ● 4,00,000 रुपये कैश (साइबर अपराध से मिली रकम)
सेंट्रल दिल्ली के साइबर थाने की टीम ने 9 साइबर जालसाजो को गिरफ्तार किया 10.08.2026 दो चरणों वाले साइबर रैकेट का पर्दाफाश: दिल्ली पुलिस ने उस सिंडिकेट को पकड़ा जो मोबाइल फोन चुराकर उनसे जुड़े बैंक खातों से पैसे निकालता था; 09 लोग गिरफ्तार ● 88 साल के एक बुजुर्ग का चोरी हुआ मोबाइल फोन साइबर पुलिस स्टेशन, सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट को एक हाई-टेक अंतर-राज्यीय साइबर-धोखाधड़ी नेटवर्क का पता लगाने में मदद करता है। ● जयपुर (राजस्थान) और मेरठ-गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश) में एक साथ छापेमारी की गई। ● जयपुर में पूरी तरह से चल रहे धोखाधड़ी वाले कॉल-सेंटर पर छापा मारा गया, जिसमें सर्वर, लैपटॉप, टैब और POS डिवाइस मौजूद थे। ● 04 लैपटॉप, 02 मोबाइल टैब, 52 मोबाइल फोन, 70 डेबिट कार्ड, 145 सिम कार्ड, 06 POS मशीनें, 13 बैंक पासबुक और 4,00,000 रुपये नकद बरामद किए गए। ● दो राज्यों में 09 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिससे बैकएंड कॉल-सेंटर ऑपरेटर और 'म्यूल-अकाउंट' (धोखाधड़ी के लिए इस्तेमाल होने वाले खाते) उपलब्ध कराने वाले - दोनों नेटवर्क खत्म हो गए। घटना का विवरण और मुख्य तथ्य जांच की शुरुआत दिल्ली के वेस्ट पटेल नगर में रहने वाले 88 वर्षीय बुजुर्ग द्वारा नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCCRP) पर दर्ज कराई गई शिकायत से हुई। 19 मई, 2026 को शिकायतकर्ता का मोबाइल फोन चोरी हो गया था। दो दिन बाद, 21 मई, 2026 को जब बुजुर्ग ने अपना सिम कार्ड दोबारा जारी करवाया, तो उन्हें SMS अलर्ट मिले जिनसे पता चला कि उनके केनरा बैंक खाते से बिना उनकी इजाज़त के तीन तेज़ी से हुए ट्रांज़ैक्शन (25,000 रुपये, 20,000 रुपये और 25,000 रुपये) के ज़रिए कुल 70,000 रुपये निकाल लिए गए थे। तुरंत समझदारी दिखाते हुए, पीड़ित ने नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 (शिकायत नंबर 30805260039432 और 30805260039350) पर पैसों की चोरी की रिपोर्ट की। शिकायत की जानकारी मिलने पर, PS साइबर सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट में FIR नंबर 36/2026 (तारीख 23/07/2026, धारा 318(4) BNS के तहत) दर्ज की गई और हाई-प्रायोरिटी टेक्निकल जांच शुरू की गई। टीम और ऑपरेशन डिजिटल सबूतों के तेज़ी से नष्ट होने की संभावना को देखते हुए, SHO/PS साइबर, इंस्पेक्टर योगराज दलाल की सीधी देखरेख और ACP/पहाड़गंज, श्री सौरभ नरेंद्र की कुल देखरेख में खास टीमें बनाई गईं। ● टीम 1 (जयपुर स्ट्राइक टीम): SI नवीन (जांच अधिकारी) और कॉन्स्टेबल मुकेश की अगुवाई में, मुख्य बैंकिंग ट्रांज़ैक्शन ऑपरेटरों का पता लगाने और उन्हें पकड़ने के लिए तैनात किया गया। ● टीम 2 (NCR और UP स्ट्राइक टीम): HC संजीव, HC दीपक और कॉन्स्टेबल दीपक को मेरठ और गाजियाबाद भेजा गया ताकि 'म्यूल अकाउंट' (धोखाधड़ी के लिए इस्तेमाल होने वाले खाते) की लॉजिस्टिकल सप्लाई लाइन को टारगेट किया जा सके। काम करने का तरीका (Modus Operandi): चोरी हुए फ़ोन से बैंक अकाउंट तक पैसे निकालने का नेटवर्क जांच में एक संगठित, दो-स्तरीय अंतर-राज्यीय साइबर क्राइम सिंडिकेट का पता चला। पहले चरण में, सड़क पर काम करने वाले ऑपरेटिव होते हैं जो अनजान पीड़ितों के मोबाइल फ़ोन चुराते हैं। दूसरे चरण में, मेरठ और गाजियाबाद में मौजूद ऑपरेटिव होते हैं जिनके पास म्यूल बैंक अकाउंट, POS मशीन और नकली सिम कार्ड का बड़ा स्टॉक होता है, जिनका इस्तेमाल पीड़ित के बैंक अकाउंट से पैसे निकालने/चुराने के लिए किया जाता है। तीसरे चरण के ऑपरेटिव राजस्थान के जयपुर में एक हाई-टेक, कॉल-सेंटर जैसे सेटअप से काम करते हैं। ये मुख्य टेक्निकल हैंडलर पीड़ित के बैंकिंग अकाउंट में लॉग-इन करते थे, म्यूल अकाउंट में अनधिकृत ट्रांज़ैक्शन भेजते थे और POS मशीन व ऑनलाइन पेमेंट चैनल का इस्तेमाल करके तेज़ी से कैश निकाल लेते थे। आरोपियों के नाम और प्रोफ़ाइल (09 आरोपी गिरफ्तार) जयपुर कॉल-सेंटर मॉड्यूल (राजस्थान): 1. निखिल सोनी (उम्र 26), निवासी झोटवाड़ा, जयपुर, राजस्थान। (जयपुर सिंडिकेट का मुख्य ऑपरेटर और टेक्निकल मास्टरमाइंड) 2. अभिषेक कुमार झा (उम्र 23), निवासी कैलाश नगर, जयपुर, राजस्थान। (कॉल-सेंटर ऑपरेटर) 3. आनंद साह सोनार (उम्र 26), निवासी कैलाश नगर, जयपुर, राजस्थान। (कॉल-सेंटर ऑपरेटर) 4. प्रिंस साह सोनार (उम्र 20), निवासी कैलाश नगर, जयपुर, राजस्थान। (कॉल-सेंटर ऑपरेटर) 5. बिशेक कुमार झा (उम्र 21), निवासी कैलाश नगर, जयपुर, राजस्थान। (कॉल-सेंटर ऑपरेटर) म्यूल अकाउंट सप्लाई मॉड्यूल (दिल्ली-NCR / UP): 6. अमर जाटव (उम्र 23), निवासी हापुड़ बाईपास, मेरठ, UP. (म्यूल अकाउंट सप्लायर) 7. हर्ष (उम्र 23), निवासी सिद्धार्थ विहार, विजय नगर, गाजियाबाद, UP. (म्यूल अकाउंट सप्लायर) 8. मोहन (उम्र 24), निवासी विजय नगर, गाजियाबाद, UP. (म्यूल अकाउंट सप्लायर) 9. वाशु (उम्र 19), निवासी मेरठ, UP. (म्यूल अकाउंट सप्लायर) बरामदगी ● 04 लैपटॉप और 02 मोबाइल टैब (सर्वर ऑपरेशन और ट्रांज़ैक्शन राउटिंग के लिए इस्तेमाल किए गए) ● 52 मोबाइल फ़ोन (जिनमें पीड़ितों का आपत्तिजनक डेटा, बैंकिंग ऐप्स और WhatsApp लॉग्स थे) ● 145 सिम कार्ड (अनधिकृत UPI/बैंकिंग सेशन को मैनेज करने के लिए इस्तेमाल किए गए) ● 70 डेबिट कार्ड और 13 बैंक पासबुक (म्यूल अकाउंट इन्वेंट्री) ● 06 POS मशीनें (तेज़ी से कैश निकालने के लिए इस्तेमाल की गईं) ● 04 हाई-स्पीड इंटरनेट राउटर ● 4,00,000 रुपये कैश (साइबर अपराध से मिली रकम)
- रोहिणी ज़िले ने 'ऑपरेशन शस्त्र' को तेज़ करते हुए मिली बडी कामयाबी आर्म्स, एक्साइज़, गैंबलिंग और NDPS एक्ट के तहत 41 मामले दर्ज किए और 52 लोगों को पकड़ा। इस अभियान के दौरान 15 अवैध हथियार, 26 ज़िंदा कारतूस, 09 बटन वाले चाकू, अवैध शराब, हेरोइन और गांजा बरामद किया गया1
- भोले बाबा को जल चढ़ाते हुए भोला भक्त जल अभिषेक करते हुए यमुना पुत्र बाबा हरिदास जी। नेतृत्व में सच्ची साधना1
- अभिजीत दिपके ने अभियान का किया ऐलान ग्रामीण सरकारी स्कूलों का सोशल ऑडिट होगा दिल्ली : 15 अगस्त से CJP का राष्ट्रव्यापी अभियान अभिजीत दिपके ने अभियान का किया ऐलान ग्रामीण सरकारी स्कूलों का सोशल ऑडिट होगा बिजली, पेयजल और शौचालय की होगी जांच मिड-डे मील व्यवस्था का भी होगा जायजा-CJP अभिभावकों और ग्रामीणों से वीडियो बनाने की अपील स्कूलों की कमियों को सामने लाने की पहल सरपंचों से स्कूलों की व्यवस्था सुधारने की अपील सुधार की तस्वीरें सोशल मीडिया पर होंगी साझा1
- तालाब में करीब पांच साल से रह रहा है एक बच्चा, शरीर में जलन होने के कारण ये कदम उठाया.....1
- WhatsApp पर इन्वेस्टमेंट का जाल, फर्जी ट्रेडिंग ऐप से करोड़ों की ठगी डीसीपी अमित गोयल की देखरेख में पुलिस ने 9 आरोपियों को केरल महाराष्ट्र गुजरात पंजाब से दबोचा।34 NCRP शिकायतें 15.71 करोड़ से ज्यादा के लेनदेन का लिंक देखिए एडिशनल डीसीपी अभिमन्यु पोसवाल ने क्या कहा2
- अहमदाबाद पुलिस द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर शेयर किया गया एक वीडियो चर्चा में आ गया है। वीडियो को लेकर यूजर्स ने पुलिस को जमकर ट्रोल किया है। एक यूजर ने कमेंट करते हुए दावा किया कि वीडियो में जो दिखाया गया है, वह केवल दिखावा है और पुलिसकर्मी अंदर जाकर पैसे लेकर उसे छोड़ देते हैं। हालांकि, यह यूजर की टिप्पणी और दावा है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।1