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सुलतानपुर जिले में पिछले कई दिनों से जारी भीषण गर्मी और उमस से परेशान लोगों को आखिरकार बड़ी राहत मिली है। शनिवार को जिले भर में मौसम ने अचानक करवट ली, जब दोपहर में तेज धूल भरी आंधी चली। इस आंधी के तुरंत बाद आसमान काले घने बादलों से घिर गया, जिससे दिन में ही अंधेरे जैसा नजारा देखने को मिला। इसके बाद पूरे जिले में झमाझम बारिश शुरू हो गई, जिसने भीषण गर्मी से राहत प्रदान की और किसानों के चेहरे खुशी से खिल उठे।
ABHISHEK SINGH
सुलतानपुर जिले में पिछले कई दिनों से जारी भीषण गर्मी और उमस से परेशान लोगों को आखिरकार बड़ी राहत मिली है। शनिवार को जिले भर में मौसम ने अचानक करवट ली, जब दोपहर में तेज धूल भरी आंधी चली। इस आंधी के तुरंत बाद आसमान काले घने बादलों से घिर गया, जिससे दिन में ही अंधेरे जैसा नजारा देखने को मिला। इसके बाद पूरे जिले में झमाझम बारिश शुरू हो गई, जिसने भीषण गर्मी से राहत प्रदान की और किसानों के चेहरे खुशी से खिल उठे।
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- सुल्तानपुर के अहिबरनपुर गाँव के निवासी श्री भगवान दिन यादव ने 111 वर्ष की आयु में, अपने नाती राधेश्याम यादव और सुरेंद्र यादव के साथ हुई एक बातचीत में बताया कि पहले कार्यक्रम कैसे आयोजित किए जाते थे। उनकी इस चर्चा और अनुभवों को साझा करने से लोगों को बीते हुए कल की कल्पना आज के परिप्रेक्ष्य में करने का अवसर मिला।1
- लखनऊ में एक अजीबोगरीब वाकया सामने आया है जहाँ मात्र ₹40 के बन-मक्खन ने एक 'फर्जी आईपीएस अधिकारी' का पर्दाफाश कर दिया। उत्तर प्रदेश पुलिस ने सोशल मीडिया पर इस घटना का खुलासा करते हुए राज्य में बढ़ती ठगी की घटनाओं की याद दिलाई। मिली जानकारी के अनुसार, एक युवक, जो खुद को नोएडा में तैनात आईपीएस अधिकारी बता रहा था, एक स्थानीय दुकान पर बन-मक्खन खाने गया। खाना खाने के बाद उसने कथित तौर पर पैसे देने से इनकार कर दिया और दुकानदार के आपत्ति करने पर 'रोब' दिखाते हुए वहाँ मौजूद पुलिसकर्मियों से सैल्यूट करने की मांग कर दी। युवक के संदिग्ध व्यवहार और सैल्यूट की मांग ने मौके पर मौजूद पुलिसवालों के कान खड़े कर दिए। जब पुलिसकर्मियों ने उससे सख्ती से पूछताछ की और उसकी पहचान की पुष्टि करने की कोशिश की, तो उसकी कहानी की पोल खुल गई। जाँच में पता चला कि वह कोई आईपीएस अधिकारी नहीं है और पुलिस के रुतबे का गलत फायदा उठा रहा था। पुलिकर्मियों ने युवक को तुरंत हिरासत में ले लिया है और आगे की जाँच जारी है। यह मामला यूपी में पुलिस की सतर्कता का एक बेहतरीन उदाहरण पेश करता है, जिसने एक कथित ठग को रंगे हाथ पकड़ा। यह वाकया उत्तर प्रदेश में फर्जी अधिकारी बनकर ठगी करने की समस्याओं को उजागर करता है, जैसा कि '1000899165.jpg' में दिए गए उदाहरणों से स्पष्ट है। हाल के दिनों में राज्य में फर्जी आईएएस, आईपीएस और यहाँ तक कि सेना के अधिकारी बनकर ठगी करने के कई मामले सामने आ चुके हैं। पुलिस लगातार ऐसे मामलों को रोकने के लिए सक्रिय है और जनता को भी जागरूक रहने की सलाह देती है। उल्लेखनीय है कि यह पूरी जानकारी '1000899165.jpg' नामक छवि से मिली सूचना पर आधारित एक काल्पनिक उदाहरण है, और किसी वास्तविक समाचार एजेंसी से संबंधित नहीं है, बल्कि जागरूकता के लिए प्रस्तुत की गई है।1
- अपनी लंबी-चौड़ी पर्सनालिटी, रौबदार मूंछों और कवच जैसी अकड़ दिखाने वाले एक व्यक्ति ने लखनऊ में एक दुकानदार पर IPS अधिकारी होने का रौब झाड़ा। उसका मकसद मात्र 40 रुपये का बन मुफ्त में खाना था, लेकिन उसकी 'गली-मोहल्लों के गुंडों वाली' हरकत ने उसे एक 'बहुत बड़े वाले फ्रॉड' के रूप में उजागर कर दिया। लखनऊ के दुकानदार, जो IAS, IPS, मंत्री और विधायक जैसे अधिकारियों को नियमित रूप से देखते हैं, उसकी चाल में नहीं फंसे और फर्जी IPS साहब 40 रुपये के चक्कर में जेल पहुंच गए। मौके पर पहुंचे पुलिसकर्मियों से भी इस फर्जी अधिकारी ने 'मुझको सल्यूट करो' कहा, जिस पर पुलिसकर्मियों ने जवाब दिया कि बिना वर्दी और पहचान के वे उसे सल्यूट क्यों करेंगे। आखिरकार, 40 रुपये के बन-मक्खन के लिए दिखाया गया उसका सारा फर्जी रौब और यह पूरी कहानी थाने तक पहुंच गई, जिससे उसे जेल जाना पड़ा।1
- सुलतानपुर की सदर तहसील में राजस्व विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ गए हैं, जहाँ कथित तौर पर 'जय-वीरू' की एक जोड़ी ने उच्च अधिकारियों और न्यायालय के आदेशों को बेअसर साबित कर दिया है। ग्राम चुनहा करोंदिया के निवासी इसरार हुसैन ने लेखपाल सर्वेन्द्र पटेल और कानूनगो रामपाल मिश्रा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इसरार हुसैन के अनुसार, इन दोनों ने सदर एसडीएम और नायब तहसीलदार द्वारा पहले ही खारिज की गई एक विरासत को न केवल फर्जी तरीके से दर्ज किया, बल्कि कोर्ट के स्टे के बावजूद उसका बैनामा भी करा दिया। तहसील में चर्चा है कि लेखपाल सर्वेन्द्र पटेल और कानूनगो रामपाल मिश्रा की 'कलम में ऐसा जादू' है कि एसडीएम का खारिज आदेश भी उनके सामने 'कागज का टुकड़ा' बन जाता है। पीड़ित इसरार हुसैन ने दावा किया है कि इस जोड़ी ने साबित कर दिया है कि तहसील के असली 'डीएम' वही हैं, क्योंकि 'डीएम का आदेश ही रद्दी है, एसडीएम का खारिज आदेश मजाक है और कोर्ट का स्टे जोक है'। पीड़ित के अनुसार, वह समाधान दिवस से लेकर डीएम दफ्तर तक न्याय के लिए रो चुका है, लेकिन इस 'जय-वीरू सरकार' के सामने सब बेबस हैं। यह भी बताया गया है कि लेखपाल सर्वेन्द्र पटेल पहले भी निलंबित हो चुके हैं, बावजूद इसके तहसील में उनकी पकड़ बरकरार है। इस मामले से तहसील में भ्रष्टाचार और मिलीभगत की आशंका गहरी हो गई है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब एसडीएम और नायब तहसीलदार ने विरासत खारिज कर दी थी और जमीन पर कोर्ट का स्टे भी था, तो लेखपाल-कानूनगो ने किसके आदेश पर इसे दर्ज कर बैनामा करा दिया? पीड़ित इसरार हुसैन ने इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। यह खबर पीड़ित इसरार हुसैन पक्ष के आरोपों पर आधारित है, और लेखपाल सर्वेन्द्र पटेल, कानूनगो रामपाल मिश्रा, तथा राजस्व विभाग का पक्ष आने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।1
- शहीदों की शहादत अप्रत्याशित रूपों में सामने आती रहती है, इसी क्रम में यह बात सामने आई है कि बिहार के रहने वाले शुक्ला नाम के एक व्यक्ति ने भगत सिंह के साथियों को फांसी देने वाले शख्स को कुल्हाड़ी से तब तक मारा जब तक उसकी मौत नहीं हो गई।1
- उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में भीषण गर्मी और छात्रों के स्वास्थ्य के मद्देनज़र ग्रीष्मकालीन अवकाश को बढ़ाने का निर्णय लिया है। अब कक्षा 1 से 8 तक के सभी विद्यालय 24 जून तक बंद रहेंगे, और छात्रों की नियमित पढ़ाई 25 जून से दोबारा शुरू होगी। सरकार के निर्देशों के अनुसार, सभी शिक्षकों और विद्यालय कर्मियों को स्कूलों की साफ-सफाई, नामांकन अभियान और अन्य प्रशासनिक तैयारियों को समय पर पूरा करने के लिए 22 जून से ही विद्यालयों में उपस्थित होना अनिवार्य होगा। शिक्षा विभाग ने इस बात पर ज़ोर दिया है कि प्रदेश में जारी गर्मी के बीच बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है, और इस अवकाश विस्तार से छात्रों को राहत मिलेगी, साथ ही विद्यालयों को नए सत्र की तैयारियों के लिए अतिरिक्त समय भी मिल पाएगा।1
- इस पाठ में बारंबार "जय जय जय जय जय जय जय जय जय जय जय जय" का उद्घोष किया गया है, जिसके उपरांत "जय जय जय जय जय जय जय महाकाल" के जयकारे से गहरी भक्ति और श्रद्धा व्यक्त की गई है।1
- उत्तर प्रदेश के कानपुर में फजलगंज पुलिस ने एक नाबालिग किशोरी से दुष्कर्म के आरोपी को रिपोर्ट दर्ज होने के महज 8 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी की पहचान दर्शनपुरवा स्थित 'अशोका ज्वैलर्स प्राइवेट लिमिटेड' के मालिक अशोक कुमार रस्तोगी के रूप में हुई है, जिसे सलाखों के पीछे भेज दिया गया है। मिली जानकारी के अनुसार, अशोक कुमार रस्तोगी पर उसकी ही दुकान में काम करने वाली एक 15 वर्षीय नाबालिग लड़की का यौन शोषण करने और विरोध करने पर जान से मारने की धमकी देने का गंभीर आरोप है। पीड़िता के परिजनों को इस हैवानियत का पता चलने पर उन्होंने तुरंत फजलगंज थाने पहुंचकर आरोपी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने त्वरित जांच शुरू की और आरोप सही पाए जाने पर 16 जून को आरोपी के खिलाफ रेप, पॉक्सो (POCSO) एक्ट और जान से मारने की धमकी देने की संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। मुकदमा दर्ज होते ही पुलिस ने जाल बिछाया और बिठूर के सिंहपुर इलाके में स्थित आरोपी के फॉर्म हाउस पर छापा मारकर उसे दबोच लिया। तलाशी के दौरान पुलिस को फॉर्म हाउस से आपत्तिजनक सामान और कुछ दवाएं भी बरामद हुईं। थाना प्रभारी धनंजय पांडे ने बताया कि अशोक कुमार रस्तोगी का पुराना आपराधिक इतिहास रहा है और वह साल 2018 में भी अपनी एक महिला कर्मचारी से रेप के मामले में जेल जा चुका है, जो उसे एक आदतन अपराधी साबित करता है। गिरफ्तारी के बाद, पुलिस ने अशोक कुमार रस्तोगी को न्यायालय में पेश किया, जहाँ मामले की गंभीरता और आरोपी के पुराने रिकॉर्ड को देखते हुए अदालत ने उसे तुरंत जेल भेजने का आदेश दिया। फजलगंज पुलिस की इस त्वरित और सख्त कार्रवाई की इलाके में काफी सराहना हो रही है।1