चालियामा क्षेत्र में स्थित रूंगटा स्टील प्लांट से निकलने वाले प्रदूषण ने स्थानीय ग्रामीणों का जीवन गंभीर रूप से प्रभावित कर दिया है। उड़ने वाली धूल, धुआं और औद्योगिक प्रदूषण के कारण लोगों को अपने घरों के अंदर भी रहना मुश्किल हो गया है, जिससे क्षेत्र का जनजीवन बुरी तरह से प्रभावित है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रदूषण की मोटी परत खेतों पर जमने से फसलों की पैदावार लगभग शून्य हो गई है, जिसके चलते किसानों के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। इसके अतिरिक्त, बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं में सांस संबंधी तथा अन्य स्वास्थ्य समस्याओं में लगातार वृद्धि हो रही है। वृहद झारखण्ड मोर्चा ने झारखण्ड सरकार और संबंधित विभागों से मांग की है कि चालियामा क्षेत्र में प्रदूषण की तत्काल जांच कराई जाए। मोर्चा ने यह भी सुनिश्चित करने की मांग की है कि प्रदूषण नियंत्रण के सभी मानकों का कड़ाई से पालन हो, प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए, और क्षेत्र के लोगों के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए विशेष शिविर लगाए जाएं। साथ ही, प्रदूषण कम करने हेतु प्लांट प्रबंधन के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाए। मोर्चा ने जोर देते हुए कहा, "उद्योग विकास के लिए हैं, लेकिन जनता के स्वास्थ्य और किसानों की आजीविका की कीमत पर नहीं।" राज्य सरकार से विनम्र निवेदन किया गया है कि रूंगटा स्टील प्लांट से निकलने वाले प्रदूषण को तुरंत रोकने के लिए कार्रवाई की जाए, ताकि क्षेत्र की आम जनता को प्रदूषण से संबंधित किसी तरह की परेशानी या नुकसान न पहुंचे।
चालियामा क्षेत्र में स्थित रूंगटा स्टील प्लांट से निकलने वाले प्रदूषण ने स्थानीय ग्रामीणों का जीवन गंभीर रूप से प्रभावित कर दिया है। उड़ने वाली धूल, धुआं और औद्योगिक प्रदूषण के कारण लोगों को अपने घरों के अंदर भी रहना मुश्किल हो गया है, जिससे क्षेत्र का जनजीवन बुरी तरह से प्रभावित है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रदूषण की मोटी परत खेतों पर जमने से फसलों की पैदावार लगभग शून्य हो गई है, जिसके चलते किसानों के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। इसके अतिरिक्त, बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं में सांस संबंधी तथा अन्य स्वास्थ्य समस्याओं में लगातार वृद्धि हो रही है। वृहद झारखण्ड मोर्चा ने झारखण्ड सरकार और संबंधित विभागों से मांग की है कि चालियामा क्षेत्र में प्रदूषण की तत्काल जांच कराई जाए। मोर्चा ने यह भी सुनिश्चित करने की मांग की है कि प्रदूषण नियंत्रण के सभी मानकों का कड़ाई से पालन हो, प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए, और क्षेत्र के लोगों के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए विशेष शिविर लगाए जाएं। साथ ही, प्रदूषण कम करने हेतु प्लांट प्रबंधन के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाए। मोर्चा ने जोर देते हुए कहा, "उद्योग विकास के लिए हैं, लेकिन जनता के स्वास्थ्य और किसानों की आजीविका की कीमत पर नहीं।" राज्य सरकार से विनम्र निवेदन किया गया है कि रूंगटा स्टील प्लांट से निकलने वाले प्रदूषण को तुरंत रोकने के लिए कार्रवाई की जाए, ताकि क्षेत्र की आम जनता को प्रदूषण से संबंधित किसी तरह की परेशानी या नुकसान न पहुंचे।
- कोल्हान विश्वविद्यालय, चाईबासा के राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) ने 30 मई 2026 को "Mission LiFE" के अंतर्गत पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक दिवसीय व्याख्यान तथा वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया। यह कार्यक्रम पर्यावरण संकट के विषय पर केंद्रित था, जिसका मुख्य उद्देश्य युवाओं में पर्यावरण संरक्षण, हरित जीवनशैली और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को प्रोत्साहित करना था। कार्यक्रम की मुख्य वक्ता डॉ. सुनीता कुमारी, प्रभारी विभागाध्यक्ष, भूगोल विभाग, कोल्हान विश्वविद्यालय ने पर्यावरण संकट, जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन और पर्यावरण संरक्षण हेतु जनभागीदारी की आवश्यकता पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने सभी से "प्लास्टिक को ना कहने और शून्य प्रदूषण के सृजनकर्ता बनने" का आह्वान किया। उनके व्याख्यान के बाद, उपस्थित प्रतिभागियों ने 'Mission LiFE' के पाँच प्रमुख संकल्प बिंदुओं को अपनाने की शपथ ली। इन संकल्पों में ऊर्जा की बचत व जल संरक्षण को बढ़ावा देना, सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग बंद करना, स्वच्छता व कचरा प्रबंधन को जीवनशैली का हिस्सा बनाना, पर्यावरण अनुकूल व टिकाऊ जीवनशैली अपनाना और वृक्षारोपण व जैव विविधता संरक्षण के लिए सक्रिय योगदान देना शामिल है। इस अवसर पर माननीय कुलपति प्रो. (डॉ.) अंजिला गुप्ता ने अपनी शुभकामनाएँ भेजीं और सभी सदस्यों, शिक्षकों व विद्यार्थियों को "एक व्यक्ति–एक पौधा" अभियान अपनाने तथा अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. परशुराम सियाल, डीन, सामाजिक विज्ञान संकाय, कोल्हान विश्वविद्यालय ने युवाओं को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक व जिम्मेदार बनने का संदेश दिया। उन्होंने जोर दिया कि वृक्षारोपण केवल एक अभियान नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित पर्यावरण सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। कार्यक्रम के तहत विश्वविद्यालय परिसर में वृक्षारोपण भी किया गया, जिसमें राष्ट्रीय सेवा योजना के 100 पीजी स्वयंसेवकों ने सक्रियता से भाग लिया। वृक्षारोपण के दौरान कुलसचिव डॉ. रंजीत कुमार कर्ण ने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे केवल पौधे लगाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी न मानें, बल्कि पूरे शैक्षणिक सत्र के दौरान उनकी देखभाल भी करें। इस पूरे कार्यक्रम का संयोजन डॉ. मीनाक्षी मुंडा, निदेशक, राष्ट्रीय सेवा योजना, कोल्हान विश्वविद्यालय ने किया, जबकि डॉ. जैक्लिन तिर्की, कार्यक्रम पदाधिकारी, राष्ट्रीय सेवा योजना और सहायक प्राध्यापक डॉ. कंचन कच्छप ने सह-संयोजक के रूप में इसके सफल आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम में डॉ. तनुजा मोहंती, सहायक प्राध्यापक, भूविज्ञान विभाग; जुरा बारी, शिक्षण सहायक, मानवशास्त्र विभाग; रोहित कुड़ादा, शिक्षण सहायक, भूगोल विभाग और पीएच.डी. शोधार्थीगण सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन डॉ. कंचन कच्छप द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें उन्होंने मुख्य अतिथि, वक्ता, विश्वविद्यालय प्रशासन, शिक्षकों, स्वयंसेवकों और सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।1
- झारखंड की राजधानी रांची में 30 मई 2026 को Entrepreneurial Connect 3.0 (EC 3.0) का सफल आयोजन किया गया, जिसने राज्य के स्टार्टअप और नवाचार इकोसिस्टम को नई दिशा प्रदान की है। I-Hub Startup Jharkhand Foundation और JIIDCO के सहयोग से आयोजित इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में 600 से अधिक स्टार्टअप फाउंडर्स, निवेशकों, उद्योग विशेषज्ञों और नीति-निर्माताओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इस कार्यक्रम के दौरान स्टार्टअप ग्रोथ, निवेश, MSME विकास, AI इनोवेशन, Entrepreneurship, Fundraising, Market Expansion और स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर गहन चर्चाएँ हुईं। इस आयोजन ने राज्य में उद्यमशीलता और नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में कार्य किया।1
- झारखंड के लातेहार स्थित रिचूघूटा से प्राप्त होने वाला बॉक्साइट पत्थर काफी कीमती है। यह महत्वपूर्ण खनिज झारखंड राज्य की सीमाओं से बाहर ले जाया जाता है।1
- पुलिस ने सोनुआ-चक्रधरपुर मुख्य सड़क पर अवैध बालू से लदे तीन ट्रैक्टर ट्रॉली को पकड़ा है। यह कार्रवाई सड़क पर की गई।1
- सरायकेला जिले के चौका में शिक्षा जगत और पूर्व विद्यार्थियों के बीच एक दुखद खबर सामने आई है, जहाँ वरिष्ठ शिक्षाविद और राजकीय उच्च विद्यालय चौका के पूर्व प्रधानाध्यापक वीरेन्द्र कुमार सिंह का 96 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। उनके निधन से शिक्षा जगत, उनके पूर्व विद्यार्थियों और पूरे क्षेत्रवासियों में गहरा शोक व्याप्त है, जिससे चारों ओर शोक की लहर फैल गई है।1