बीकानेर गैस संकट से जूझ रहे प्रवासी मजदूर, छोटे कामगार भी बेहाल गरीबों की आवाज पत्रकार इकबाल खान, बीकानेर बीकानेर में गैस संकट लगातार गहराता जा रहा है। हालात ऐसे हैं कि शुरू शुरू में 170 से 200 रुपये किलो तक इधर उधर से गैस उपलब्ध हो जाया करती थी, मगर फिलहाल कहीं भी उपलब्ध नहीं हो रही है, जिससे मजदूरों और छोटे कामगारों की स्थिति बेहद खराब हो गई है। मजदूरों का कहना है कि उनके पास गैस कनेक्शन नहीं है और ब्लैक में भी गैस मिलना मुश्किल हो गया है। लगातार रसद विभाग की कार्रवाई के चलते अवैध गैस जब्त की जा रही है, लेकिन इसका असर सीधे गरीब मजदूरों पर पड़ रहा है, जो अब गैस के लिए इधर,उधर भटकने को मजबूर हैं।,बीकानेर की फैक्ट्रियों, होटलों और सौर ऊर्जा प्लांट्स में काम करने वाले मजदूर बंगाल, बिहार, मध्य प्रदेश और झारखंड के रहने वाले प्रवासी हैं, जो दिन ,रात मेहनत कर शहर की व्यवस्था संभाल रहे हैं। लेकिन अब गैस की किल्लत के कारण वे अपने परिवार के साथ गांव लौटने को मजबूर हो रहे हैं।शहर में रात के समय स्ट्रीट फूड और रेहड़ी लगाकर काम करने वाले लोगों की हालत भी खराब है। किसी तरह छोटे घरेलू सिलेंडर से काम चलाने की कोशिश करें तो वह भी कार्रवाई में जब्त हो जाता है, और कमर्शियल सिलेंडर मिल नहीं रहे हैं, जिससे उनका रोजगार प्रभावित हो रहा है।मजदूरों का कहना है कि सरकार और प्रशासन उनके लिए कोई ठोस व्यवस्था करे। उनका मानना है कि यदि 5 या 10 किलो के छोटे सिलेंडर उपलब्ध कराए जाएं, तो उन्हें राहत मिल सकती है और पलायन भी रुक सकता है। बीकानेर जिला प्रशासन से निवेदन है कि उनकी स्थिति को समझते हुए जल्द कोई व्यवस्था की जाए, ताकि वे अपने परिवार के साथ यहीं रहकर काम कर सकें। साथ ही संबंधित विभाग से भी अपील है कि इंसानियत के नाते इन गरीब मजदूरों और उनके बच्चों पर दया करें, ताकि उन्हें पलायन करने से रोका जा सके। 🙏वायरल वीडियो किसी अन्य प्रदेश का है ना कि राजस्थान का,
बीकानेर गैस संकट से जूझ रहे प्रवासी मजदूर, छोटे कामगार भी बेहाल गरीबों की आवाज पत्रकार इकबाल खान, बीकानेर बीकानेर में गैस संकट लगातार गहराता जा रहा है। हालात ऐसे हैं कि शुरू शुरू में 170 से 200 रुपये किलो तक इधर उधर से गैस उपलब्ध हो जाया करती थी, मगर फिलहाल कहीं भी उपलब्ध नहीं हो रही है, जिससे मजदूरों और छोटे कामगारों की स्थिति बेहद खराब हो गई है। मजदूरों का कहना है कि उनके पास गैस कनेक्शन नहीं है और ब्लैक में भी गैस मिलना मुश्किल हो गया है। लगातार रसद विभाग की कार्रवाई के चलते अवैध गैस जब्त की जा रही है, लेकिन इसका असर सीधे गरीब मजदूरों पर पड़ रहा है, जो अब गैस के लिए इधर,उधर भटकने को मजबूर हैं।,बीकानेर की फैक्ट्रियों, होटलों और सौर ऊर्जा प्लांट्स में काम करने वाले मजदूर बंगाल, बिहार, मध्य प्रदेश और झारखंड के रहने वाले प्रवासी हैं, जो दिन ,रात मेहनत कर शहर की व्यवस्था संभाल रहे हैं। लेकिन अब गैस की किल्लत के कारण वे अपने परिवार के साथ गांव लौटने को मजबूर हो रहे हैं।शहर में रात के समय स्ट्रीट फूड और रेहड़ी लगाकर काम करने वाले लोगों की हालत भी खराब है। किसी तरह छोटे घरेलू सिलेंडर से काम चलाने की कोशिश करें तो वह भी कार्रवाई में जब्त हो जाता है, और कमर्शियल सिलेंडर मिल नहीं रहे हैं, जिससे उनका रोजगार प्रभावित हो रहा है।मजदूरों का कहना है कि सरकार और प्रशासन उनके लिए कोई ठोस व्यवस्था करे। उनका मानना है कि यदि 5 या 10 किलो के छोटे सिलेंडर उपलब्ध कराए जाएं, तो उन्हें राहत मिल सकती है और पलायन भी रुक सकता है। बीकानेर जिला प्रशासन से निवेदन है कि उनकी स्थिति को समझते हुए जल्द कोई व्यवस्था की जाए, ताकि वे अपने परिवार के साथ यहीं रहकर काम कर सकें। साथ ही संबंधित विभाग से भी अपील है कि इंसानियत के नाते इन गरीब मजदूरों और उनके बच्चों पर दया करें, ताकि उन्हें पलायन करने से रोका जा सके। 🙏वायरल वीडियो किसी अन्य प्रदेश का है ना कि राजस्थान का,
- इक़बाल खान, ✍️ईरान में पहले हज़रत इमाम हुसैन और करबला का हवाला दिया जाता था, लेकिन अब इसके साथ सुप्रीम लीडर के परिवार का भी जिक्र होने लगा है। लोग कह रहे हैं कि उन्हें सत्ता से नहीं, बल्कि देश से प्यार था और वे अमेरिका की गलत नीतियों का विरोध करते थे।खाड़ी के अरब देशों में भी यह बात सामने आ रही है कि ईरान के सुप्रीम लीडर ने गाजा और फिलिस्तीन के लिए अपने परिवार तक का बलिदान दे दिया, वो भी सुन्नी मुस्लिमों के लिए। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या सुन्नी अरब देशों का फर्ज नहीं बनता कि ईरान का साथ दें। ओर अमेरिका का अरब देशों में विरोध भी होने लगा है।इस जंग को लेकर यह भी कहा जा रहा है कि इसमें अमेरिका और इज़राइल को हार का सामना करना पड़ेगा। दूसरी तरफ ईरान की आर्थिक स्थिति को लेकर दावा किया जा रहा है कि उसकी करेंसी मजबूत हुई है। जिन देशों पर उसका पुराना कर्ज था, वे अब भुगतान कर रहे हैं और नकद में तेल खरीद रहे हैं, वह भी रूसी और चीनी मुद्रा में। इससे यह संकेत मिलता है कि ईरान को आर्थिक रूप से कुछ फायदा हुआ है। ईरान ने साफ संकेत दिए हैं कि वह यह जंग हर हाल में जारी रखेगा, चाहे इसमें जनहानि ही क्यों न हो। हालांकि, इस संघर्ष में लोगों की मौतें हो रही हैं, लेकिन ईरान एक बड़ा देश है और क्षेत्रफल व जनसंख्या के लिहाज से इज़राइल से काफी बड़ा है।उधर इज़राइल में भी जनहानि हो रही है और वहां की जनसंख्या कम होने के कारण हर नुकसान ज्यादा भारी माना जा रहा है। यही वजह है कि वहां डर और दबाव ज्यादा महसूस किया जा रहा है।ईरान में जंग में मारे जाने वालों को शहीद’ का दर्जा दिया जाता है, जिससे लोगों में जंग के प्रति समर्थन और भावनात्मक जुड़ाव बना रहता है।1
- कोट वाली जो कुआँ जो वीरान था, उसकी टंकी की तैयारी हो चुकी है, जिसमें पानी की टंकी बन रही है। अब रामपुरिया कॉलेज के पीछे जो कुआँ पड़ा है, उससे निवेदन है कि उसको भी जल्द से जल्द टंकी की पानी की टंकी की तैयारी में करें। 🌟 यह एक अच्छा कदम है कि पुराने कुओं को पुनर्जीवित किया जा रहा है। इससे पानी की समस्या का समाधान होगा और लोगों को स्वच्छ पानी मिलेगा।1
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- बीकमपुर से एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें पुलिस एक बुजुर्ग व्यक्ति को घसीटते हुए गाड़ी में डालती नजर आ रही है। बताया जा रहा है कि मामला प्लॉट विवाद से जुड़ा है और वीडियो में सरपंच का भी जिक्र हो रहा है। आवाज़ चैनल नहीं करता वीडियो की पुष्टि1
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- वीडियो शाकिर हुसैन बीकानेर सूरसागर की वर्तमान स्थिति चिंताजनक है। थोड़े दिनों में ही कूड़ा कचरा फिर से जमा होने लगा है। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के समय यहां का निर्माण और रखरखाव बहुत अच्छा था। उस समय पानी, से भरा रहता था आसपास के इलाके में साफ सफाई और दीवारों पर सुंदर पेंटिंग का काम हुआ था। समय रहते सुधार नहीं हुआ तो सूरसागर फिर से खराब स्थिति में जा सकता है। नागरिकों की सुरक्षा और साफ सफाई के लिए प्रशासन, विधायक और न्यास को मिलकर उपाय करने की जरूरत है। सुझाव है कि सूरसागर में पुल या बच्चों के खेलने कूदने के लिए सुरक्षित और व्यवस्थित क्षेत्र बनाया जाए। ऐसा होने से बीकानेर के नागरिकों को एक नई और उपयोगी सार्वजनिक जगह मिलेगी और सूरसागर की सौंदर्य एवं सुरक्षा दोनों सुनिश्चित होंगी।1