यमुनानगर स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारा किला लोहगढ़ साहिब में आयोजित योग कार्यक्रम को लेकर सिख संगत और विभिन्न सामाजिक व धार्मिक संगठनों में गहरा रोष व्याप्त है। संगत का आरोप है कि गुरुद्वारा परिसर में योग गतिविधियाँ आयोजित कर धार्मिक मर्यादाओं की अवहेलना की गई है, जिससे सिख समुदाय की धार्मिक भावनाएँ आहत हुई हैं और क्षेत्र में लगातार विरोध के स्वर तेज हो रहे हैं। सिख संगठनों ने इस बात पर जोर दिया है कि किला लोहगढ़ साहिब बंदा सिंह बहादुर से जुड़ा सिख इतिहास का एक अत्यंत महत्वपूर्ण केंद्र है, जिसकी गरिमा और परंपराओं का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए था। उनका आरोप है कि प्रशासन और संबंधित विभागों ने कार्यक्रम से पहले धार्मिक संगठनों या स्थानीय संगत से कोई राय-मशविरा नहीं किया। विरोध जता रहे लोगों ने यह भी कहा कि प्रशासन को गुरुद्वारा परिसर में योग कार्यक्रम तो दिख जाता है, लेकिन वर्षों से चली आ रही मूलभूत समस्याओं जैसे बिजली, पेयजल, सड़क, पार्किंग और अन्य आवश्यक सुविधाओं की कमी दिखाई नहीं देती। संगत ने शिकायत की है कि कई बार ज्ञापन सौंपने के बावजूद इन समस्याओं का कोई स्थायी समाधान नहीं हुआ, जिससे देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को विशेषकर बरसात और गर्मी में परेशानी होती है। संगठनों ने यमुनानगर प्रशासन और हरियाणा सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है कि गुरुद्वारा परिसर में योग कार्यक्रम किस आधार पर आयोजित किया गया। साथ ही, उन्होंने बिजली, पानी और अन्य लंबित विकास कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने की मांग की है। सिख संगठनों और स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई, तो व्यापक स्तर पर महापंचायत बुलाई जाएगी। इस महापंचायत में विभिन्न धार्मिक, सामाजिक और किसान संगठनों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित कर आगे की रणनीति तय की जाएगी। संगठनों ने यह भी स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य टकराव पैदा करना नहीं, बल्कि ऐतिहासिक गुरुद्वारा साहिब की मर्यादा बनाए रखना और श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएँ सुनिश्चित करना है। उन्होंने प्रशासन से संवाद स्थापित कर शांतिपूर्ण समाधान निकालने की अपील की है। फिलहाल, इस पूरे मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा का माहौल बना हुआ है और सभी की निगाहें प्रशासन व सरकार की आगामी प्रतिक्रिया पर टिकी हुई हैं।
यमुनानगर स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारा किला लोहगढ़ साहिब में आयोजित योग कार्यक्रम को लेकर सिख संगत और विभिन्न सामाजिक व धार्मिक संगठनों में गहरा रोष व्याप्त है। संगत का आरोप है कि गुरुद्वारा परिसर में योग गतिविधियाँ आयोजित कर धार्मिक मर्यादाओं की अवहेलना की गई है, जिससे सिख समुदाय की धार्मिक भावनाएँ आहत हुई हैं और क्षेत्र में लगातार विरोध के स्वर तेज हो रहे हैं। सिख संगठनों ने इस बात पर जोर दिया है कि किला लोहगढ़ साहिब बंदा सिंह बहादुर से जुड़ा सिख इतिहास का एक अत्यंत महत्वपूर्ण केंद्र है, जिसकी गरिमा और परंपराओं का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए था। उनका आरोप है कि प्रशासन और संबंधित विभागों ने कार्यक्रम से पहले धार्मिक संगठनों या स्थानीय संगत से कोई राय-मशविरा नहीं किया। विरोध जता रहे लोगों ने यह भी कहा कि प्रशासन को गुरुद्वारा परिसर में योग कार्यक्रम तो दिख जाता है, लेकिन वर्षों से चली आ रही मूलभूत समस्याओं जैसे बिजली, पेयजल, सड़क, पार्किंग और अन्य आवश्यक सुविधाओं की कमी दिखाई नहीं देती। संगत ने शिकायत की है कि कई बार ज्ञापन सौंपने के बावजूद इन समस्याओं का कोई स्थायी समाधान नहीं हुआ, जिससे देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को विशेषकर बरसात और गर्मी में परेशानी होती है। संगठनों ने यमुनानगर प्रशासन और हरियाणा सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है कि गुरुद्वारा परिसर में योग कार्यक्रम किस आधार पर आयोजित किया गया। साथ ही, उन्होंने बिजली, पानी और अन्य लंबित विकास कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने की मांग की है। सिख संगठनों और स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई, तो व्यापक स्तर पर महापंचायत बुलाई जाएगी। इस महापंचायत में विभिन्न धार्मिक, सामाजिक और किसान संगठनों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित कर आगे की रणनीति तय की जाएगी। संगठनों ने यह भी स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य टकराव पैदा करना नहीं, बल्कि ऐतिहासिक गुरुद्वारा साहिब की मर्यादा बनाए रखना और श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएँ सुनिश्चित करना है। उन्होंने प्रशासन से संवाद स्थापित कर शांतिपूर्ण समाधान निकालने की अपील की है। फिलहाल, इस पूरे मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा का माहौल बना हुआ है और सभी की निगाहें प्रशासन व सरकार की आगामी प्रतिक्रिया पर टिकी हुई हैं।
- यमुनानगर में NEET परीक्षा कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच आयोजित की जा रही है, जिसके लिए जिला प्रशासन ने व्यापक इंतजामों का दावा किया है। शहर में कुल 6 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, जहां 1726 परीक्षार्थियों ने परीक्षा में भाग लिया है। पुलिस अधीक्षक, अतिरिक्त उपायुक्त सहित विभिन्न अधिकारी लगातार इन केंद्रों का दौरा कर स्थिति का जायजा ले रहे हैं, ताकि परीक्षा शांतिपूर्वक और बिना किसी दिक्कत के संपन्न हो सके। अतिरिक्त उपायुक्त नवीन आहूजा और पुलिस अधीक्षक कमलदीप गोयल, साथ ही थाना यमुनानगर प्रभारी नरेंद्र सिंह जैसे अधिकारी, अलग-अलग परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि NEET गाइडलाइन के अनुसार सभी आवश्यक इंतजाम किए गए हैं और परीक्षार्थियों को भी उसी तरह की सुविधाएँ प्रदान की जा रही हैं। परीक्षा केंद्रों पर सीनियर एचसीएस अधिकारी और डीएसपी तैनात किए गए हैं। व्यवस्था को लेकर परीक्षार्थियों से भी बातचीत की गई, जिन्होंने प्रशासन के इंतजामों पर संतोष व्यक्त किया। हालांकि, कुछ परीक्षार्थियों का यह भी कहना है कि परीक्षा लीक होने को लेकर मन में असमंजस है, जिस वजह से वे उतनी तैयारी नहीं कर पाए। इन चिंताओं के बावजूद, यमुनानगर में NEET परीक्षा के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और चप्पे-चप्पे पर पुलिस की पैनी नजर बनी हुई है।4
- अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर हरियाणा के यमुनानगर जिले में विभिन्न स्थानों पर योग कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों लोगों ने उत्साह और जोश के साथ योगाभ्यास किया। मुख्य कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद रेखा शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। 21 जून को हुए इस आयोजन में प्रशासन, जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों ने पार्कों, शिक्षण संस्थानों और सार्वजनिक स्थलों पर सामूहिक रूप से योग किया। मुख्य कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, राज्यसभा सांसद रेखा शर्मा ने योग के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल के बाद वर्ष 2015 से योग को वैश्विक पहचान मिली है और आज दुनिया के 177 देशों में योग दिवस मनाया जा रहा है। रेखा शर्मा ने यह भी कहा कि योग केवल शारीरिक अभ्यास नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति को स्वयं, समाज और प्रकृति से जोड़ने का माध्यम और स्वस्थ जीवन का आधार है। कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत में, सांसद रेखा शर्मा ने महिला आरक्षण विधेयक को लेकर उम्मीद जताई कि यह आगामी मानसून सत्र में पारित होगा, यह कहते हुए कि सरकार के पास पर्याप्त संख्या बल है, हालांकि सदन में इसे कब लाना है, इसका निर्णय सरकार करेगी। नीट परीक्षा विवाद पर उन्होंने कहा कि सरकार पूरी तरह सतर्क है, और निजी स्वार्थ के चलते परीक्षा व्यवस्था को प्रभावित करने की कोशिश करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की गई है तथा व्यवस्था को और मजबूत बनाया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने हरियाणा में बढ़ती नशे की समस्या पर चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि सरकार लगातार अभियान चला रही है और समाज को जागरूक करने का काम किया जा रहा है। यमुनानगर में योग दिवस का यह आयोजन सिर्फ योगाभ्यास तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने स्वास्थ्य, सामाजिक जागरूकता और जनभागीदारी का संदेश भी दिया।1
- यमुनानगर जिले के जगाधरी स्थित नई अनाज मंडी में 21 जून 2026 को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 का जिला स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस आयोजन में जिला अधिकारी और मान्य राज्यसभा सांसद श्रीमती रेखा शर्मा प्रमुख रूप से उपस्थित रहेंगी।1
- रादौर से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहाँ रादौर नगर निगम ने सड़क के किनारे बसे लोगों के घरों को खाली करवा दिया है। इस कार्रवाई के बाद प्रभावित लोगों का सारा सामान सड़क पर रख दिया गया।1
- रादौर की डेहा बस्ती में प्रशासन ने एक बड़ा बुलडोजर एक्शन लिया है। इस कार्रवाई के तहत 100 से अधिक अवैध कब्जों को हटाकर नगरपालिका की भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया है। यह पूरी कार्रवाई भारी पुलिस बल की मौजूदगी में संपन्न हुई। इस बुलडोजर एक्शन को हाल ही में हुई एक घटना के बड़े जवाब के तौर पर देखा जा रहा है। पिछले दिनों, एक पुलिस पार्टी पर हमला करके एक नशा तस्कर को छुड़ा लिया गया था, और यह ताजा कार्रवाई उसी घटना से जुड़ी मानी जा रही है।1
- अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर गंगोह ब्लॉक के ग्राम जानखेड़ा स्थित महर्षि दयानंद इंटर कॉलेज परिसर में एक भव्य योग कार्यक्रम आयोजित किया गया, जहाँ गंगोह के विधायक किरत चौधरी ने हजारों ग्रामीणों के साथ मिलकर योगाभ्यास किया। इस दौरान विधायक चौधरी ने स्वस्थ जीवन जीने का महत्वपूर्ण संदेश दिया। विधायक किरत सिंह ने योग को भारतीय संस्कृति की एक अमूल्य धरोहर बताते हुए कहा कि नियमित योगाभ्यास से शरीर स्वस्थ रहता है, मन शांत होता है और जीवन खुशहाल बनता है। उन्होंने सभी लोगों से अपने दैनिक जीवन में योग को अपनाने का आग्रह करते हुए "स्वस्थ और खुशहाल शरीर के लिए करो योग, रहो निरोग" का नारा दिया। योग कार्यक्रम समाप्त होने के उपरांत, विधायक किरत चौधरी ने क्षेत्र के विकास कार्यों को भी आगे बढ़ाया। उन्होंने इस्लामनगर से तीतरो राजवाहे की पटरी के चौड़ीकरण कार्य का शिलान्यास किया, साथ ही कश्यप समाज की चौपाल का उद्घाटन किया और जानखेड़ा से धर्मपुरी को जोड़ने वाले बरसाती नाले पर बने पुल को जनता को समर्पित किया। इन विकास कार्यों पर ग्रामीणों ने प्रसन्नता व्यक्त की और विधायक का स्वागत किया। इस पूरे कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण, जनप्रतिनिधि और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।1
- योगा दिवस स्पेशल के तहत, 21 जून को योग दिवस के अवसर पर सभी देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दी गई हैं। इस दौरान 'करो योग रहो निरोग' के महत्वपूर्ण संदेश पर जोर दिया गया है, जो स्वस्थ जीवन शैली अपनाने की प्रेरणा देता है।1
- संत निरंकारी मिशन ने 21 जून 2026 को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर यमुनानगर सहित अपनी सभी शाखाओं में विशेष योग शिविर का आयोजन किया। यमुनानगर के संत निरंकारी सत्संग भवन में सैकड़ों भाई-बहनों ने योगाभ्यास किया, जो भारतवर्ष के 1500 से अधिक केंद्रों पर एक साथ आयोजित किए गए योग सत्रों का हिस्सा था। संयोजक बलदेव सिंह जी ने जानकारी देते हुए बताया कि यह व्यापक योग सत्र रविवार 21 जून 2026 को सुबह 6:00 से 7:00 बजे तक संत निरंकारी सत्संग भवन, यमुनानगर, जगाधरी, जगाधरी वर्कशॉप, सरस्वती नगर, रादौर, व्यासपुर और प्रताप नगर सहित अन्य स्थानों पर आयोजित किए गए। मिशन की विभिन्न शाखाओं में स्थानीय योग प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में खुले मैदानों और पार्कों में आयोजित इन कार्यक्रमों में श्रद्धालु, सेवादल स्वयंसेवक और स्थानीय नागरिक उत्साहपूर्वक सहभागी बने। इस वर्ष संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की थीम 'स्वस्थ आयु के लिए योग' है, जो इस बात पर जोर देती है कि वास्तविक स्वास्थ्य केवल रोग मुक्त शरीर का नाम नहीं, बल्कि मानसिक स्थिरता, भावनात्मक परिपक्वता, सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक जागरूकता का समन्वित स्वरूप है। इसी दृष्टिकोण को अपनाते हुए, संत निरंकारी मिशन योग को जीवन में संतुलन, सकारात्मकता और आत्मबोध का प्रभावी माध्यम मानकर समाज में जागरूकता का प्रसार कर रहा है। संत निरंकारी चैरिटेबल फाउंडेशन के सचिव आदरणीय श्री जोगिंदर सुखीजा जी ने बताया कि फाउंडेशन वर्ष 2015 से 'योग दिवस' का राष्ट्रव्यापी अभियान नियमित रूप से संचालित कर रहा है। उन्होंने योग को भारत की प्राचीन और गौरवशाली धरोहर बताया, जो शरीर को सशक्त करने के साथ-साथ मन को स्थिरता, विचारों को सकारात्मकता और आत्मा को चेतना प्रदान करती है। श्री सुखीजा जी के अनुसार, इसके नियमित अभ्यास से व्यक्ति तनाव और जीवनशैली संबंधी चुनौतियों पर नियंत्रण पाकर आत्मिक संतोष, मानसिक प्रफुल्लता और सामाजिक सद्भाव की दिशा में अग्रसर होता है।2