मीडिया के जमीर से जनता का सवाल: "हम किसके रक्षक और काहे के पत्रकार, जब अपनों की चोट पर ही हम लाचार?" कुरुक्षेत्र की चौपालों से गूंजा कड़वा सच— "जो पत्रकार अपनों के साथ नहीं खड़ा, वो जनता की लड़ाई क्या लड़ेगा?" कुरुक्षेत्र (India News 9 Live): आज कुरुक्षेत्र की जागरूक जनता ने लोकतंत्र के चौथे स्तंभ यानी मीडिया को वह आईना दिखाया है जिसमें चेहरा देखना शायद हर पत्रकार के लिए मुश्किल होगा। जनता ने किसी राजनेता से नहीं, बल्कि सीधा पत्रकारों की बिरादरी से पूछा है कि आप किसका प्रचार कर रहे हैं और किसकी ढाल बन रहे हैं? आईने के सामने खड़े मीडिया से जनता के सीधे सवाल: लाचार पत्रकार या सरकारी प्रचारक? जनता पूछ रही है कि जब सच दिखाने वाले एक पत्रकार के परिवार को निशाना बनाया जाता है, उसे डराया-धमकाया जाता है, तो बाकी पत्रकार चुप क्यों रहते हैं? क्या हम वाकई जनता की आवाज़ हैं या सिर्फ सत्ता के गुणगान का जरिया बन कर रह गए हैं? अपनों की बेरुखी और जनता का अविश्वास: ग्रामीणों का कहना है कि जब पत्रकार ही पत्रकार के अधिकार के लिए साथ खड़ा नहीं होता, तो आम आदमी किस पर भरोसा करे? " काहे की भ्रष्टाचार विरोधी सरकार और काहे के फिर पत्रकार, जब हम ही हैं लाचार"—यह जुमला आज हर उस शख्स की ज़ुबान पर है जो मीडिया को उम्मीद की नज़रों से देखता था। भ्रष्टाचार पर मौन क्यों? फैमिली आईडी की गड़बड़ी से डेढ़ साल तक तड़पते गरीब और कटे हुए राशन कार्डों पर मीडिया का एक बड़ा हिस्सा खामोश क्यों है? क्या अधिकारियों के गैर-जिम्मेदार रवैये को उजागर करना अब पत्रकारों के एजेंडे में नहीं रहा? रक्षक या भक्षक की मंशा? जो लोग चौथे स्तंभ को टारगेट कर रहे हैं, वे हमारे बच्चों के भविष्य को अंधकार में धकेल रहे हैं। जनता पूछ रही है कि क्या मीडिया इन 'क्रिमिनल माइंडसेट' वाले लोगों के खिलाफ खड़ा होने का साहस दिखाएगा? निष्कर्ष: जनता की खरी-खरी अब वक्त आ गया है कि मीडिया अपनी भूमिका को फिर से पहचाने। जनता का साफ संदेश है—वोट मांगने वाले चेहरे पुराने हो सकते हैं, लेकिन अगर उन्हें आइना दिखाने वाला पत्रकार ही डर गया या बिक गया, तो लोकतंत्र का भविष्य क्या होगा? मीडिया के आत्ममंथन की एक रिपोर्ट— विशाल शर्मा (Freelancer Journalist Researcher) जनता की आवाज
मीडिया के जमीर से जनता का सवाल: "हम किसके रक्षक और काहे के पत्रकार, जब अपनों की चोट पर ही हम लाचार?" कुरुक्षेत्र की चौपालों से गूंजा कड़वा सच— "जो पत्रकार अपनों के साथ नहीं खड़ा, वो जनता की लड़ाई क्या लड़ेगा?" कुरुक्षेत्र (India News 9 Live): आज कुरुक्षेत्र की जागरूक जनता ने लोकतंत्र के चौथे स्तंभ यानी मीडिया को वह आईना दिखाया है जिसमें चेहरा देखना शायद हर पत्रकार के लिए मुश्किल होगा। जनता ने किसी राजनेता से नहीं, बल्कि सीधा पत्रकारों की बिरादरी से पूछा है कि आप किसका प्रचार कर रहे हैं और किसकी ढाल बन रहे हैं? आईने के सामने खड़े मीडिया से जनता के सीधे सवाल: लाचार पत्रकार या सरकारी प्रचारक? जनता पूछ रही है कि जब सच दिखाने वाले एक पत्रकार के परिवार को निशाना बनाया जाता है, उसे डराया-धमकाया जाता है, तो बाकी पत्रकार चुप क्यों रहते हैं? क्या हम वाकई जनता की आवाज़ हैं या सिर्फ सत्ता के गुणगान का जरिया बन कर रह गए हैं? अपनों की बेरुखी और जनता का अविश्वास: ग्रामीणों का कहना है कि जब पत्रकार ही पत्रकार के अधिकार के लिए साथ खड़ा नहीं होता, तो आम आदमी किस पर भरोसा करे? " काहे की भ्रष्टाचार विरोधी सरकार और काहे के फिर पत्रकार, जब हम ही हैं लाचार"—यह जुमला आज हर उस शख्स की ज़ुबान पर है जो मीडिया को उम्मीद की नज़रों से देखता था। भ्रष्टाचार पर मौन क्यों? फैमिली आईडी की गड़बड़ी से डेढ़ साल तक तड़पते गरीब और कटे हुए राशन कार्डों पर मीडिया का एक बड़ा हिस्सा खामोश क्यों है? क्या अधिकारियों के गैर-जिम्मेदार रवैये को उजागर करना अब पत्रकारों के एजेंडे में नहीं रहा? रक्षक या भक्षक की मंशा? जो लोग चौथे स्तंभ को टारगेट कर रहे हैं, वे हमारे बच्चों के भविष्य को अंधकार में धकेल रहे हैं। जनता पूछ रही है कि क्या मीडिया इन 'क्रिमिनल माइंडसेट' वाले लोगों के खिलाफ खड़ा होने का साहस दिखाएगा? निष्कर्ष: जनता की खरी-खरी अब वक्त आ गया है कि मीडिया अपनी भूमिका को फिर से पहचाने। जनता का साफ संदेश है—वोट मांगने वाले चेहरे पुराने हो सकते हैं, लेकिन अगर उन्हें आइना दिखाने वाला पत्रकार ही डर गया या बिक गया, तो लोकतंत्र का भविष्य क्या होगा? मीडिया के आत्ममंथन की एक रिपोर्ट— विशाल शर्मा (Freelancer Journalist Researcher) जनता की आवाज
- जय सिटी कॉलोनी में आज उस समय हड़कंप मच गया जब डीटीपी विभाग की टीम ने अचानक पहुंचकर कार्रवाई शुरू कर दी। बिना किसी पूर्व सूचना के हुई इस कार्रवाई से स्थानीय लोगों में भारी रोष देखने को मिला। कॉलोनीवासियों का आरोप है कि उन्हें न तो कोई नोटिस दिया गया और न ही अपनी बात रखने का मौका मिला। ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि क्या बिना प्रक्रिया पूरी किए इस तरह की कार्रवाई जायज है? जगाधरी की जय सिटी कॉलोनी में डीटीपी विभाग की टीम ने कथित अवैध निर्माण को लेकर तोड़फोड़ की कार्रवाई शुरू की। टीम के पहुंचते ही कॉलोनी के लोग इकट्टा हो गए और विरोध प्रदर्शन करने लगे। लोगों का कहना है कि उन्होंने अपनी मेहनत की कमाई से यहां मकान बनाए हैं और सरकार व नगर निगम के नाम पर सभी जरूरी शुल्क भी जमा करवाए हैं। बावजूद इसके, बिना किसी नोटिस के इस तरह की कार्रवाई करना सरासर अन्याय है। कॉलोनीवासियों का आरोप है कि अधिकारियों ने उनके घरों के सामने गड्ढे खोद दिए और तोड़फोड़ शुरू कर दी, जिससे इलाके में तनाव का माहौल बन गया।2
- Post by Ch Pankaj Chauhan1
- hum chate hai ek baar nagar nigam se koi aakar hamari gail new chilkana adda azeez colony azizya masjid ward no 06 aaye dekhe koi karwahi nhi hoti bhut sikayat laga rakhhi hai2
- Post by Ajay kumar1
- झालमुडी वाली नरेंद्र मोदी जी की वीडियो देश भर में हो रही हैं वायरल जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक दुकान पर 10 रुपए का नोट देकर झालमुडी खरीद रहे है1
- सहारनपुर के नवागत जिलाधिकारी अरविंद कुमार चौहान ने कोषागार में पदभार ग्रहण कर लिया। वर्ष 2015 बैच के आईएएस अधिकारी चौहान इससे पूर्व जिलाधिकारी शामली सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। कार्यभार ग्रहण करने के बाद उन्होंने कहा कि उनकी प्राथमिकता जन समस्याओं का त्वरित और प्रभावी समाधान सुनिश्चित करना होगा। उन्होंने निर्देश दिए कि शिकायतों का निस्तारण तय समय सीमा में किया जाए, ताकि आम जनता को राहत मिल सके। जिलाधिकारी ने यह भी कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकार की सभी प्रमुख परियोजनाओं को समयबद्ध रूप से पूरा कराया जाएगा। विकास कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने सहारनपुर को प्रगतिशील जिला बताते हुए कहा कि अधिकारियों और कर्मचारियों के सहयोग से जिले को विकास की नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया जाएगा। इस दौरान कलेक्ट्रेट के कई अधिकारी मौजूद रहे।2
- मीडिया के जमीर से जनता का सवाल: "हम किसके रक्षक और काहे के पत्रकार, जब अपनों की चोट पर ही हम लाचार?" कुरुक्षेत्र की चौपालों से गूंजा कड़वा सच— "जो पत्रकार अपनों के साथ नहीं खड़ा, वो जनता की लड़ाई क्या लड़ेगा?" कुरुक्षेत्र (India News 9 Live): आज कुरुक्षेत्र की जागरूक जनता ने लोकतंत्र के चौथे स्तंभ यानी मीडिया को वह आईना दिखाया है जिसमें चेहरा देखना शायद हर पत्रकार के लिए मुश्किल होगा। जनता ने किसी राजनेता से नहीं, बल्कि सीधा पत्रकारों की बिरादरी से पूछा है कि आप किसका प्रचार कर रहे हैं और किसकी ढाल बन रहे हैं? आईने के सामने खड़े मीडिया से जनता के सीधे सवाल: लाचार पत्रकार या सरकारी प्रचारक? जनता पूछ रही है कि जब सच दिखाने वाले एक पत्रकार के परिवार को निशाना बनाया जाता है, उसे डराया-धमकाया जाता है, तो बाकी पत्रकार चुप क्यों रहते हैं? क्या हम वाकई जनता की आवाज़ हैं या सिर्फ सत्ता के गुणगान का जरिया बन कर रह गए हैं? अपनों की बेरुखी और जनता का अविश्वास: ग्रामीणों का कहना है कि जब पत्रकार ही पत्रकार के अधिकार के लिए साथ खड़ा नहीं होता, तो आम आदमी किस पर भरोसा करे? " काहे की भ्रष्टाचार विरोधी सरकार और काहे के फिर पत्रकार, जब हम ही हैं लाचार"—यह जुमला आज हर उस शख्स की ज़ुबान पर है जो मीडिया को उम्मीद की नज़रों से देखता था। भ्रष्टाचार पर मौन क्यों? फैमिली आईडी की गड़बड़ी से डेढ़ साल तक तड़पते गरीब और कटे हुए राशन कार्डों पर मीडिया का एक बड़ा हिस्सा खामोश क्यों है? क्या अधिकारियों के गैर-जिम्मेदार रवैये को उजागर करना अब पत्रकारों के एजेंडे में नहीं रहा? रक्षक या भक्षक की मंशा? जो लोग चौथे स्तंभ को टारगेट कर रहे हैं, वे हमारे बच्चों के भविष्य को अंधकार में धकेल रहे हैं। जनता पूछ रही है कि क्या मीडिया इन 'क्रिमिनल माइंडसेट' वाले लोगों के खिलाफ खड़ा होने का साहस दिखाएगा? निष्कर्ष: जनता की खरी-खरी अब वक्त आ गया है कि मीडिया अपनी भूमिका को फिर से पहचाने। जनता का साफ संदेश है—वोट मांगने वाले चेहरे पुराने हो सकते हैं, लेकिन अगर उन्हें आइना दिखाने वाला पत्रकार ही डर गया या बिक गया, तो लोकतंत्र का भविष्य क्या होगा? मीडिया के आत्ममंथन की एक रिपोर्ट— विशाल शर्मा (Freelancer Journalist Researcher) जनता की आवाज1
- मामला रादौर क्षेत्र के भूरे का माजरा गांव का है, जहां मंगलवार-बुधवार की रात करीब 1:30 बजे तीन अज्ञात युवक पल्सर बाइक पर सवार होकर पहुंचे और पूर्व सरपंच ऋषि पाल के घर को निशाना बनाते हुए ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। बताया जा रहा है कि हमलावरों ने करीब 14 से 15 राउंड फायर किए और इसके बाद मौके से फरार हो गए। फायरिंग की यह पूरी वारदात आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई है, जिसके आधार पर पुलिस आरोपियों की पहचान करने में जुटी हुई है। घटना के समय घर में मौजूद लोग बाल-बाल बच गए, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। फायरिंग की आवाज सुनकर आसपास के लोग दहशत में आ गए और इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।1
- Post by Ch Pankaj Chauhan1