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उत्तर प्रदेश के मथुरा में 'नहरौली बारात कांड' को लेकर राजनीति गरमा गई है, जिससे राज्य में तनाव का माहौल है। यह विवाद तब और भड़क उठा जब रामजीलाल सुमन मथुरा पहुँचे, उनके आगमन पर तत्काल ठाकुर समाज में जबरदस्त गुस्सा फूट पड़ा। इस घटना, जिसे 'रामजीलाल सुमन विवाद' के रूप में भी संदर्भित किया जा रहा है, ने ठाकुर समाज में गहरे आक्रोश को जन्म दिया है, और यह मामला अब सोशल मीडिया पर भी छा गया है।
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उत्तर प्रदेश के मथुरा में 'नहरौली बारात कांड' को लेकर राजनीति गरमा गई है, जिससे राज्य में तनाव का माहौल है। यह विवाद तब और भड़क उठा जब रामजीलाल सुमन मथुरा पहुँचे, उनके आगमन पर तत्काल ठाकुर समाज में जबरदस्त गुस्सा फूट पड़ा। इस घटना, जिसे 'रामजीलाल सुमन विवाद' के रूप में भी संदर्भित किया जा रहा है, ने ठाकुर समाज में गहरे आक्रोश को जन्म दिया है, और यह मामला अब सोशल मीडिया पर भी छा गया है।
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- श्रीकान्त त्यागी, ब्रज के राजा दाऊजी महाराज के दरबार में पहुँचे, जहाँ उन्होंने ब्राह्मण हत्याओं को लेकर अपना गहरा रोष व्यक्त किया।1
- पुरुषोत्तम अधिक मास के पावन अवसर पर ब्रजमंडल एक बार फिर फागुन के रंगों में सराबोर हो उठा, जहाँ नंदगांव स्थित नंदबाबा मंदिर में सोमवार सायंकाल परंपरागत होली महोत्सव श्रद्धा, उल्लास और भक्तिरस के बीच धूमधाम से संपन्न हुआ। लगभग ढाई महीने बाद नंदभवन में रंगीली होरी की ऐसी अद्भुत छटा बिखरी कि श्रद्धालु स्वयं को द्वापर युग में पहुँचा हुआ महसूस करने लगे। संध्या बेला में ठाकुर श्रीकृष्ण-बलराम बंगली में विराजमान हुए और स्वर्ण पिचकारी से भक्तों के संग होली खेली। धवल पोशाक धारण किए दोनों भैयाओं ने केसर, गुलाब और केवड़ा जल से तैयार सुगंधित रंगों की फुहार बरसाई, जिससे पूरा मंदिर परिसर सतरंगी रंगों से भर गया और श्रद्धालु आनंद विभोर होकर भीगते नजर आए। ठाकुर जी के समक्ष मंदिर प्रांगण में नंदगांव और बरसाना के गोस्वामी जनों ने पारंपरिक होरी के पद और रसिया गाकर वातावरण को पूरी तरह से फगुआमय बना दिया। ढफ, मृदंग और झांझ की थाप पर करीब डेढ़ घंटे तक समाज गायन चलता रहा। इसी दौरान, नंदगांव के ग्वाल-बालों ने टेसू के फूलों से तैयार सुगंधित रंगों को पिचकारियों और बाल्टियों के माध्यम से भक्तों पर बरसाया, जिससे पूरा माहौल मानो फागुन मास में लौट आया। रंगों की फुहार के बीच उड़ता अबीर और गुलाल मंदिर की दिव्यता को और बढ़ा रहा था। "होली के रसिया की जय”, “नंद के लाल की जय” और “लाडली लाल की जय” के जयघोषों से नंदभवन गूंज उठा। इस होली महोत्सव के समापन पर ठाकुर जी की विशेष आरती की गई और ब्रजवासियों के प्राणधन नंदलाल की नजर उतारने के लिए परंपरागत राई-नौ उसारी गई। अधिक मास में आयोजित इस प्राचीन और दुर्लभ होली उत्सव की झांकी के दर्शन कर श्रद्धालु स्वयं को अत्यंत बड़भागी मान रहे थे। ब्रजवासियों का यह भी कहना था कि "देख-देख ब्रज की होरी ब्रह्मादिक ललचाय", जिसका अर्थ है कि देवता भी इस दिव्य ब्रजरस को पाने के लिए तरसते हैं। इस विशेष उत्सव में विजन गोस्वामी, गौरव गोस्वामी, रमेश चंद्र गोस्वामी, हुकम गोस्वामी, मथुरेश गोस्वामी, लोकेश गोस्वामी, अमित कुमार, मुकेश गोस्वामी, यज्ञ पुरुष गोस्वामी, सुशील गोस्वामी, बलराम गोस्वामी, मटरू महाराज और गुलशन गोस्वामी सहित कई प्रमुख लोग उपस्थित रहे।4
- मथुरा के नहरौली में एक 'बारात कांड' सामने आया है, जहाँ एक वृद्ध महिला को उनके घर में घुसकर बेरहमी से पीटने का गंभीर आरोप लगा है। इस घटना ने पूरे मामले को गरमा दिया है और यह सवाल उठ रहा है कि आखिर किस बात से यह पूरा मामला भड़का, जिसके चलते एक वृद्ध महिला को इतनी बेरहमी से निशाना बनाया गया।1
- गोकुल बैराज पर आयोजित 84 कोसी परिक्रमा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। यह परिक्रमा 2026 से लगती हुई है।1
- आज गंगा दशहरा के पावन पर्व पर थाना फरह क्षेत्र के गांव लतिवपुर (गड़ाया) में एक बेहद हृदय विदारक घटना घटी। इस दुखद हादसे में एक युवा साथी की यमुना नदी में डूबने से मृत्यु हो गई, जिससे पूरा क्षेत्र शोक में डूब गया है। ईश्वर से दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान देने और शोकाकुल परिवार को इस असीम दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की गई है। पूरा क्षेत्र इस दुःख की घड़ी में पीड़ित परिवार के साथ खड़ा है।1
- मथुरा के फरह थाना क्षेत्र में पुलिस ने एक कार्रवाई के दौरान तीन मोटरसाइकिल सवार अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। इन अभियुक्तों के पास से अवैध असला और लूटी हुई कुछ नगदी बरामद की गई है।1
- भूतपूर्व सैनिक परिषद मथुरा ने सभी पूर्व सैनिकों को उनसे जुड़ने के लिए आमंत्रित किया है। परिषद यह आश्वासन देती है कि पूर्व सैनिकों को उनसे जुड़ने पर पूर्ण सहयोग प्रदान किया जाएगा। इच्छुक व्यक्ति 8273422205 पर संपर्क कर सकते हैं। यह आमंत्रण 'हर हर महादेव' के जयकारे के साथ संपन्न होता है।1
- यह संदेश मनचलों के साथ नाचने का आह्वान करता है, यह बताते हुए कि यही वास्तविक आनंद और 'असली नशा' है।1