पंजाब केसरी के पत्रकार अमनदीप पिलानिया ने 28वीं बार किया रक्तदान, समाज को दिया प्रेरणादायक संदेश जींद : 11 मार्च 2026: पंजाब केसरी के युवा पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक अमनदीप पिलानिया ने आज 28वीं बार रक्तदान कर एक बार फिर मानवता की मिसाल पेश की है। ब्लड ग्रुप O+ होने के कारण वे नियमित रूप से रक्तदान करते आ रहे हैं और अब तक की इस यात्रा में उन्होंने कई बार जरूरतमंदों की जान बचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।अमनदीप ने अपने रक्तदान के बाद सोशल मीडिया पर साझा करते हुए कहा, “आज 28वीं बार रक्तदान करके जीवन बचाने की अपनी छोटी सी कोशिश जारी रखी। यह सिर्फ़ एक दान नहीं, बल्कि किसी के लिए एक नई उम्मीद है। आप भी आगे आएं!”यह उनका लगातार का प्रयास है, जो समाज में रक्तदान की भावना को बढ़ावा दे रहा है। इससे पहले उन्होंने 27वीं बार दिसंबर 2025 में, 26वीं बार सितंबर 2025 में (लाला जगत नारायण की पुण्यतिथि पर रक्तदान शिविर में) और 25वीं बार जून 2025 में रक्तदान किया था। अमनदीप का लक्ष्य भविष्य में 100 बार रक्तदान करना है, जो एक प्रेरणादायक संकल्प है। पत्रकारिता के साथ-साथ सामाजिक कार्यों में सक्रिय अमनदीप पिलानिया का यह कदम युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बन रहा है। रक्तदान एक ऐसा कार्य है जो बिना किसी खर्च के किसी की जान बचा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, एक बार रक्तदान से तीन लोगों तक की जान बचाई जा सकती है।अमनदीप जैसे लोग समाज में जागरूकता फैलाने का काम कर रहे हैं। उनकी इस मुहिम से प्रेरित होकर अधिक से अधिक लोग रक्तदान के लिए आगे आएं, यही अपेक्षा है।
पंजाब केसरी के पत्रकार अमनदीप पिलानिया ने 28वीं बार किया रक्तदान, समाज को दिया प्रेरणादायक संदेश जींद : 11 मार्च 2026: पंजाब केसरी के युवा पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक अमनदीप पिलानिया ने आज 28वीं बार रक्तदान कर एक बार फिर मानवता की मिसाल पेश की है। ब्लड ग्रुप O+ होने के कारण वे नियमित रूप से रक्तदान करते आ रहे हैं और अब तक की इस यात्रा में उन्होंने कई बार जरूरतमंदों की जान बचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।अमनदीप ने अपने रक्तदान के बाद सोशल मीडिया पर साझा करते हुए कहा, “आज 28वीं बार रक्तदान करके जीवन बचाने की अपनी छोटी सी कोशिश जारी रखी। यह सिर्फ़ एक दान नहीं, बल्कि किसी के लिए एक नई उम्मीद है। आप भी आगे आएं!”यह उनका लगातार का प्रयास है, जो समाज में रक्तदान की भावना को बढ़ावा दे रहा है। इससे पहले उन्होंने 27वीं बार दिसंबर 2025 में, 26वीं बार सितंबर 2025 में (लाला जगत नारायण की पुण्यतिथि पर रक्तदान शिविर में) और 25वीं बार जून 2025 में रक्तदान किया था। अमनदीप का लक्ष्य भविष्य में 100 बार रक्तदान करना है, जो एक प्रेरणादायक संकल्प है। पत्रकारिता के साथ-साथ सामाजिक कार्यों में सक्रिय अमनदीप पिलानिया का यह कदम युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बन रहा है। रक्तदान एक ऐसा कार्य है जो बिना किसी खर्च के किसी की जान बचा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, एक बार रक्तदान से तीन लोगों तक की जान बचाई जा सकती है।अमनदीप जैसे लोग समाज में जागरूकता फैलाने का काम कर रहे हैं। उनकी इस मुहिम से प्रेरित होकर अधिक से अधिक लोग रक्तदान के लिए आगे आएं, यही अपेक्षा है।
- सिवरेज की समस्या को लेकर पब्लिक हेल्थ के खिलाफ की नारेबाजी1
- प्राचीन श्रीदेवी मंदिर कलानौर हरियाणा में बुधवार को दुर्गा अष्टमी बड़ी धूमधाम के साथ मनाई गई । इस अवसर पर मंदिर प्रांगण में भजन कीर्तन का आयोजन किया गया । जिसमें कलाकारों द्वारा माता रानी जी का गुणगान किया गया । वहीं दुर्गा अष्टमी के मध्य नजर मंदिर प्रांगण द्वारा मंदिर में मां के भंडारे का आयोजन भी किया गया । जिसमें सैकड़ो की संख्या में मौजूद भक्तों ने प्रसाद ग्रहण कर मॉं का आशीर्वाद प्राप्त किया । इस अवसर पर डॉक्टर अनिल कुमार ,राजेश शर्मा ,राजकुमार चुघ, आशु ,सुधीर , परविंदर ,हेमंत ,सुरेंद्र ,मोनू विजय ,विनोद चुघ सहित अनेकों श्रद्धालु जन उपस्थित रहे ।1
- शारदा आयुर्वेद का विश्व में परचम: डॉ. मुकेश शारदा बने Guinness World Records पाने वाले पहले भारतीय आयुर्वेदिक डॉक्टर . #shardaayurveda1
- is ki haryana kar di1
- Post by Bhajan Lal1
- नेल कटर एक ऐसी चीज़ है जिसे हम लगभग हर हफ्ते इस्तेमाल करते हैं, लेकिन इसके डिजाइन में छिपे छोटे-छोटे फीचर्स पर हमारा ध्यान कम ही जाता है। आपने जिस छोटे छेद (hole) की बात की है, उसके पीछे कोई रॉकेट साइंस नहीं बल्कि बहुत ही व्यावहारिक और स्मार्ट कारण हैं: 1. की-चेन (Key-chain) अटैचमेंट के लिए इसका सबसे आम और प्राथमिक कारण इसे पोर्टेबल बनाना है। उस छेद के जरिए आप नेल कटर को अपनी चाबियों के गुच्छे (key-ring) में डाल सकते हैं। चूंकि नेल कटर छोटा होता है और अक्सर दराजों में खो जाता है, इसलिए की-चेन में लगाकर रखने से यह आसानी से मिल जाता है और यात्रा के दौरान ले जाने में भी सुविधा होती है। 2. मैन्युफैक्चरिंग और असेंबली जब नेल कटर कारखाने में बनते हैं, तो मशीनों में इन्हें एक साथ पकड़ने या लटकाने के लिए इस छेद का इस्तेमाल किया जाता है। पॉलिशिंग या कोटिंग की प्रक्रिया के दौरान, इन छेदों के सहारे इन्हें हुक पर टांग कर केमिकल या पेंट में डुबोया जाता है, जिससे हर तरफ समान फिनिशिंग आती है। 3. दीवार पर टांगने के लिए पुराने समय में या कई घरों में आज भी, लोग इसे कील या हुक पर टांगने के लिए उस छेद का उपयोग करते हैं ताकि यह बच्चों की पहुँच से दूर रहे और सही जगह पर सुरक्षित रहे। क्या आप जानते हैं? (एक और छिपा हुआ फीचर) नेल कटर के लीवर के पीछे जो छोटा सा गोल गड्ढा होता है, वह सिर्फ डिजाइन नहीं है। वह ग्रिप बनाने के लिए होता है ताकि काटते समय आपका अंगूठा फिसले नहीं। साथ ही, कुछ नेल कटर में एक छोटा 'नेल फाइलर' भी होता है जिसे उसी छेद के पास लगे रिवेट (Rivet) के जरिए घुमाया जाता है। क्या आप नेल कटर के साथ आने वाले उस छोटे चाकू जैसे 'नेल क्लीनर' के अन्य इस्तेमाल के बारे में जानना चाहेंगे?1
- Post by Saleem Khan gujjar1
- बाबा खाटू श्याम सेवा मंडल कलानौर द्वारा श्री बाबा खाटू श्याम जी धाम कलानौर में सभी संत महापुरुषों एवं भक्तों के सहयोग से बड़े हनुमान जी की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा के उपलक्ष श्री श्याम संकीर्तन व बालाजी महाराज के जागरण का आयोजन करवाया गया । जिसमें दूर दराज से पहुंचे कलाकारों द्वारा प्रभु कीर्तन गुणगान किया गया । कार्यक्रम में विभिन्न गुरु गद्दीयों से संत महापुरुष भी उपस्थित रहे । जिन्होंने श्री श्याम व हनुमान जी के श्री चरणों में मत्था टेक बाबा का आशीर्वाद प्राप्त किया । इस अवसर पर भंडारे का आयोजन भी किया गया । जिसमें साध संगत ने प्रभु कीर्तन रसपान करते हुए प्रसाद भी ग्रहण किया । इस अवसर पर महंत बाबा हरपाल दास जी महाराज,महंत ईश्वर शाह जी महाराज सहित संत महात्मा एवं श्रद्धालु गण उपस्थित रहे1