कौन हैं शान-ए-हिंद? डिप्टी मेयर बनते ही ऑफिस में लगाई टीपू सुल्तान की फोटो, मचा बवाल  महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर इतिहास और पहचान की बहस तेज हो गई है। मालेगांव महानगरपालिका के डिप्टी मेयर कार्यालय में टीपू सुल्तान की तस्वीर लगाए जाने के बाद शुरू हुआ विवाद और गहरा चुका है। टीपू सुल्तान की फोटो लगाने के बाद मालेगांव की डिप्टी मेयर शान-ए-हिंद निहाल अहमद लगातार सुर्खियों में हैं। हालांकि राष्ट्रवादियों के तीखे विरोध के बाद मालेगांव की डिप्टी मेयर शान-ए-हिंद निहाल अहमद को आखिरकार अपने कार्यालय से टीपू सुल्तान की विवादास्पद तस्वीर हटानी पड़ी लेकिन इस घटनाक्रम ने महाराष्ट्र में एक बार फिर 'आदर्श पुरुषों' को लेकर बहस छेड़ दी है। जानिए कौन हैं शान-ए-हिंद? जिनके एक फैसले ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया। बता दें टीपू सुल्तान की ये तस्वीरें मालेगांव की मेयर नसरीन शेख और डिप्टी मेयर दोनों को 'कट्टरपंथियों' द्वारा भेंट की गई थीं। मेयर नसरीन शेख ने तस्वीर स्वीकार तो की, पर उसे अपने दफ्तर में नहीं लगाया था। वहीं, डिप्टी मेयर ने प्रोटोकॉल तोड़कर इस तस्वीर को सरकारी कार्यालय में लगा दिया, जिससे विवाद गहरा गया। टीपू सुल्तान की फोटो लगा कर बोलीं थीं- हम अपनी सोच के महापुरुषों... मेयर शान-ए-हिंद ने शुरुआत में अपनी कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा था, "हम अपनी सोच के महापुरुषों की तस्वीरें लगाएंगे।" उन्होंने यह भी कहा कि तस्वीर रेनोवेशन के लिए हटाई गई थी और उनकी मंशा इसे फिर से लगाने की थी। हालांकि, उनके इस बयान और तस्वीर पर तुरंत आपत्ति खड़ी हो गई। कौन हैं शान-ए-हिंद निहाल अहमद? मालेगांव की सियासत में शान-ए-हिंद ऐसा नाम हैं, जो विरासत और संघर्ष-दोनों की पहचान बन चुका है। बीए एलएलबी की पढ़ाई करने के बाद उन्होंने तीन बार नगर निगम में कॉर्पोरेटर के रूप में काम किया और जमीनी राजनीति में अपनी अलग पकड़ बनाई और महाराष्ट्र के मालेगांव नगर निगम में शान-ए-हिंद निहाल अहमद को डिप्टी मेयर चुना गया है। ये समाजवादी पार्टी से जुड़ी हैं, और उन्होंने 'इस्लाम पार्टी' व 'सेक्युलर फ्रंट' के गठबंधन के माध्यम से यह पद हासिल किया है। शान-ए-हिंद के पिता पांच बार रह चुके हैं विधायक शान-ए-हिंद पांच बार विधायक रहे और मालेगांव के पहले मेयर बने निहाल अहमद की बेटी हैं। उनकी मां सजेदा निहाल अहमद भी नगर परिषद की प्रमुख रह चुकी हैं, जिससे यह साफ होता है कि राजनीति इस परिवार की विरासत का अहम हिस्सा रही है। पारिवारिक त्रासदी-पिता और भाई की मौत के बाद राजनीति में सक्रिेय हुईं। इन्होंने अपने दिवंगत भाई के करीबी सहयोगी मुस्तकीम डिग्निटी से विवाह किया, जिससे सामाजिक और राजनीतिक आधार और मजबूत हुआ। भाजपा के कारण छोड़ी थी JDS 2023 में शान-ए-हिंद ने एचडी देवेगौड़ा के नेतृत्व वाली जनता दल सेक्युलर को भाजपा से गठबंधन के विरोध में छोड़ दिया और बाद में समाजवादी पार्टी का दामन थामा। 2024 का विधानसभा चुनाव उन्होंने लड़ा, लेकिन जीत हासिल नहीं कर सकीं। मालेगांव में बदले राजनीतिक समीकरण शान-ए-हिंद बनीं मालेगांव की राजनीति लंबे समय से निहाल अहमद और दिवंगत शेख रशीद के परिवारों के इर्द-गिर्द घूमती रही है। हाल के वर्षों में एक बड़ा बदलाव तब देखने को मिला, जब शान-ए-हिंद और उनके पति ने शेख परिवार से चली आ रही पुरानी राजनीतिक खींचतान को खत्म कर दिया। उन्होंने पूर्व विधायक शेख आसिफ के साथ मिलकर नई राजनीतिक रणनीति बनाई, जिसका मकसद मुफ्ती इस्माइल के बढ़ते प्रभाव को चुनौती देना था। इस गठबंधन को नगर निगम में 40 सीटों का समर्थन मिला और बाहरी सहयोग के साथ 7 फरवरी को उनके डिप्टी मेयर बनने का मार्ग प्रशस्त हो गया।
कौन हैं शान-ए-हिंद? डिप्टी मेयर बनते ही ऑफिस में लगाई टीपू सुल्तान की फोटो, मचा बवाल  महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर इतिहास और पहचान की बहस तेज हो गई है। मालेगांव महानगरपालिका के डिप्टी मेयर कार्यालय में टीपू सुल्तान की तस्वीर लगाए जाने के बाद शुरू हुआ विवाद और गहरा चुका है। टीपू सुल्तान की फोटो लगाने के बाद मालेगांव की डिप्टी मेयर शान-ए-हिंद निहाल अहमद लगातार सुर्खियों में हैं। हालांकि राष्ट्रवादियों के तीखे विरोध के बाद मालेगांव की डिप्टी मेयर शान-ए-हिंद निहाल अहमद को आखिरकार अपने कार्यालय से टीपू सुल्तान की विवादास्पद तस्वीर हटानी पड़ी लेकिन इस घटनाक्रम ने महाराष्ट्र में एक बार फिर 'आदर्श पुरुषों' को लेकर बहस छेड़ दी है। जानिए कौन हैं शान-ए-हिंद? जिनके एक फैसले ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया। बता दें टीपू सुल्तान की ये तस्वीरें मालेगांव की मेयर नसरीन शेख और डिप्टी मेयर दोनों को 'कट्टरपंथियों' द्वारा भेंट की गई थीं। मेयर नसरीन शेख ने तस्वीर स्वीकार तो की, पर उसे अपने दफ्तर में नहीं लगाया था। वहीं, डिप्टी मेयर ने प्रोटोकॉल तोड़कर इस तस्वीर को सरकारी कार्यालय में लगा दिया, जिससे विवाद गहरा गया। टीपू सुल्तान की फोटो लगा कर बोलीं थीं- हम अपनी सोच के महापुरुषों... मेयर शान-ए-हिंद ने शुरुआत में अपनी कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा था, "हम अपनी सोच के महापुरुषों की तस्वीरें लगाएंगे।" उन्होंने यह भी कहा कि तस्वीर रेनोवेशन के लिए हटाई गई थी और उनकी मंशा इसे फिर से लगाने की थी। हालांकि, उनके इस बयान और तस्वीर पर तुरंत आपत्ति खड़ी हो गई। कौन हैं शान-ए-हिंद निहाल अहमद? मालेगांव की सियासत में शान-ए-हिंद ऐसा नाम हैं, जो विरासत और संघर्ष-दोनों की पहचान बन चुका है। बीए एलएलबी की पढ़ाई करने के बाद उन्होंने तीन बार नगर निगम में कॉर्पोरेटर के रूप में काम किया और जमीनी राजनीति में अपनी अलग पकड़ बनाई और महाराष्ट्र के मालेगांव नगर निगम में शान-ए-हिंद निहाल अहमद को डिप्टी मेयर चुना गया है। ये समाजवादी पार्टी से जुड़ी हैं, और उन्होंने 'इस्लाम पार्टी' व 'सेक्युलर फ्रंट' के गठबंधन के माध्यम से यह पद हासिल किया है। शान-ए-हिंद के पिता पांच बार रह चुके हैं विधायक शान-ए-हिंद पांच बार विधायक रहे और मालेगांव के पहले मेयर बने निहाल अहमद की बेटी हैं। उनकी मां सजेदा निहाल अहमद भी नगर परिषद की प्रमुख रह चुकी हैं, जिससे यह साफ होता है कि राजनीति इस परिवार की विरासत का अहम हिस्सा रही है। पारिवारिक त्रासदी-पिता और भाई की मौत के बाद राजनीति में सक्रिेय हुईं। इन्होंने अपने दिवंगत भाई के करीबी सहयोगी मुस्तकीम डिग्निटी से विवाह किया, जिससे सामाजिक और राजनीतिक आधार और मजबूत हुआ। भाजपा के कारण छोड़ी थी JDS 2023 में शान-ए-हिंद ने एचडी देवेगौड़ा के नेतृत्व वाली जनता दल सेक्युलर को भाजपा से गठबंधन के विरोध में छोड़ दिया और बाद में समाजवादी पार्टी का दामन थामा। 2024 का विधानसभा चुनाव उन्होंने लड़ा, लेकिन जीत हासिल नहीं कर सकीं। मालेगांव में बदले राजनीतिक समीकरण शान-ए-हिंद बनीं मालेगांव की राजनीति लंबे समय से निहाल अहमद और दिवंगत शेख रशीद के परिवारों के इर्द-गिर्द घूमती रही है। हाल के वर्षों में एक बड़ा बदलाव तब देखने को मिला, जब शान-ए-हिंद और उनके पति ने शेख परिवार से चली आ रही पुरानी राजनीतिक खींचतान को खत्म कर दिया। उन्होंने पूर्व विधायक शेख आसिफ के साथ मिलकर नई राजनीतिक रणनीति बनाई, जिसका मकसद मुफ्ती इस्माइल के बढ़ते प्रभाव को चुनौती देना था। इस गठबंधन को नगर निगम में 40 सीटों का समर्थन मिला और बाहरी सहयोग के साथ 7 फरवरी को उनके डिप्टी मेयर बनने का मार्ग प्रशस्त हो गया।
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