मैहर जिले की ग्राम पंचायत बदेरा में मुख्य मार्ग से शासकीय महाविद्यालय तक बनाई जा रही पीसीसी सड़क के निर्माण पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों और ग्राम पंचायत के सरपंच ने इस निर्माणाधीन सड़क में गुणवत्ता मानकों की घोर अनदेखी का आरोप लगाया है, जिसके चलते सड़क की मजबूती और उसके टिकाऊपन को लेकर संदेह व्यक्त किया जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, सड़क निर्माण में निर्धारित गुणवत्ता की सामग्री का उपयोग नहीं किया जा रहा है, बल्कि 6 एमएम और 12 एमएम गिट्टी के साथ अत्यधिक मात्रा में डस्ट (एम-सैंड) मिलाया जा रहा है। उनका कहना है कि इस घटिया निर्माण से सड़क बहुत जल्द क्षतिग्रस्त हो सकती है, जिससे सरकारी धन की भारी बर्बादी होगी और क्षेत्र की जनता को खराब सड़क का खामियाजा भुगतना पड़ेगा। आरोप है कि निर्माण एजेंसी कोरदर नाथ एंड कंपनी मनमाने तरीके से काम कर रही है। स्थानीय लोगों द्वारा अनियमितता की जानकारी मिलने पर, सरपंच ने ग्रामीणों के साथ मौके पर पहुँचकर कार्य का निरीक्षण किया। उन्होंने निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए संबंधित विभाग के अधिकारियों और ठेकेदार को इसकी सूचना दी और जांच होने तक कार्य रोकने की मांग की। हालांकि, ठेकेदार ने सरपंच की बात मानने के बजाय कथित तौर पर अपनी 'ऊंची पहुंच' का हवाला देते हुए कहा कि सड़क जैसी बन रही है, वैसी ही बनेगी। उसने सरपंच को चुनौती देते हुए यह भी कहा कि "आपको जो करना है कर लीजिए, हमारी पहुंच बहुत ऊपर तक है। आप भी सरपंच हैं, हम भी आपके कामों की जांच करवा देंगे।" ग्रामीणों ने लोक निर्माण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से तत्काल मौके पर पहुंचकर सड़क निर्माण में उपयोग हो रही सामग्री की गुणवत्ता की तकनीकी जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कार्य के नमूने प्रयोगशाला भेजने और अनियमितता पाए जाने पर संबंधित ठेकेदार व जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की अपील की है। ग्रामीणों ने जोर दिया कि यह मार्ग शासकीय महाविद्यालय तक पहुंचने का एक महत्वपूर्ण रास्ता है, जिसका उपयोग विद्यार्थी, शिक्षक और सैकड़ों स्थानीय लोग करते हैं, और घटिया निर्माण से लाखों रुपये व्यर्थ जाएंगे। फिलहाल इस पूरे मामले पर विभागीय अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। अब देखना होगा कि सरपंच और ग्रामीणों की इन गंभीर शिकायतों पर संबंधित विभाग द्वारा कब तक जांच और आवश्यक कार्रवाई की जाती है।
मैहर जिले की ग्राम पंचायत बदेरा में मुख्य मार्ग से शासकीय महाविद्यालय तक बनाई जा रही पीसीसी सड़क के निर्माण पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों और ग्राम पंचायत के सरपंच ने इस निर्माणाधीन सड़क में गुणवत्ता मानकों की घोर अनदेखी का आरोप लगाया है, जिसके चलते सड़क की मजबूती और उसके टिकाऊपन को लेकर संदेह व्यक्त किया जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, सड़क निर्माण में निर्धारित गुणवत्ता की सामग्री का उपयोग नहीं किया जा रहा है, बल्कि 6 एमएम और 12 एमएम गिट्टी के साथ अत्यधिक मात्रा में डस्ट (एम-सैंड) मिलाया जा रहा है। उनका कहना है कि इस घटिया निर्माण से सड़क बहुत जल्द क्षतिग्रस्त हो सकती है, जिससे सरकारी धन की भारी बर्बादी होगी और क्षेत्र की जनता को खराब सड़क का खामियाजा
भुगतना पड़ेगा। आरोप है कि निर्माण एजेंसी कोरदर नाथ एंड कंपनी मनमाने तरीके से काम कर रही है। स्थानीय लोगों द्वारा अनियमितता की जानकारी मिलने पर, सरपंच ने ग्रामीणों के साथ मौके पर पहुँचकर कार्य का निरीक्षण किया। उन्होंने निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए संबंधित विभाग के अधिकारियों और ठेकेदार को इसकी सूचना दी और जांच होने तक कार्य रोकने की मांग की। हालांकि, ठेकेदार ने सरपंच की बात मानने के बजाय कथित तौर पर अपनी 'ऊंची पहुंच' का हवाला देते हुए कहा कि सड़क जैसी बन रही है, वैसी ही बनेगी। उसने सरपंच को चुनौती देते हुए यह भी कहा कि "आपको जो करना है कर लीजिए, हमारी पहुंच बहुत ऊपर तक है। आप भी सरपंच हैं, हम भी आपके कामों की जांच करवा देंगे।" ग्रामीणों
ने लोक निर्माण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से तत्काल मौके पर पहुंचकर सड़क निर्माण में उपयोग हो रही सामग्री की गुणवत्ता की तकनीकी जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कार्य के नमूने प्रयोगशाला भेजने और अनियमितता पाए जाने पर संबंधित ठेकेदार व जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की अपील की है। ग्रामीणों ने जोर दिया कि यह मार्ग शासकीय महाविद्यालय तक पहुंचने का एक महत्वपूर्ण रास्ता है, जिसका उपयोग विद्यार्थी, शिक्षक और सैकड़ों स्थानीय लोग करते हैं, और घटिया निर्माण से लाखों रुपये व्यर्थ जाएंगे। फिलहाल इस पूरे मामले पर विभागीय अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। अब देखना होगा कि सरपंच और ग्रामीणों की इन गंभीर शिकायतों पर संबंधित विभाग द्वारा कब तक जांच और आवश्यक कार्रवाई की जाती है।
- एक श्रद्धालु ने प्रातःकालीन दिव्य श्रृंगार दर्शन किए, जहाँ 'ॐ जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी। दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते॥' श्लोक के साथ देवी का आह्वान किया गया। भक्त ने भावपूर्ण तरीके से अपनी कृतज्ञता व्यक्त की, यह कहते हुए कि माँ शारदा मैया की कृपा से ही उनके सभी कार्य संपन्न हो रहे हैं और उनका नाम हो रहा है। इस भक्तिमय अवसर पर, 'जय माँ शारदा भवानी', 'जय माई की' और 'जय हो माई शारदा की' जैसे जयघोषों के साथ माँ शारदा मैया का गुणगान किया गया।2
- मैहर जिले में RCCPL प्राइवेट लिमिटेड (एमपी बिरला कंपनी) के माइंस क्षेत्र स्थित कार्यालय के बाहर स्थानीय युवाओं ने बड़े पैमाने पर इकट्ठा होकर धरना प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन रोजगार के अवसरों में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता देने और क्षेत्रीय जनसमस्याओं के त्वरित समाधान की मांग को लेकर किया गया। प्रदर्शनकारियों ने शांतिपूर्ण ढंग से 'सीताराम' कीर्तन कर अपनी मांगों को प्रशासन और कंपनी प्रबंधन तक पहुँचाने का प्रयास किया। युवाओं ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। फिलहाल, कंपनी प्रबंधन और प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।1
- मैहर जिले की ग्राम पंचायत तिघरा खुर्द स्थित शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय तक जाने वाला रास्ता आज भी बदहाल स्थिति में है। मीडिया में खबर प्रकाशित होने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है, जिससे बच्चों के भविष्य से जुड़ा यह गंभीर मामला प्रशासनिक लापरवाही की भेंट चढ़ रहा है। बारिश के मौसम में यह मार्ग पूरी तरह कीचड़ और जलभराव से भर जाता है, जिसके कारण छोटे स्कूली बच्चों को जान जोखिम में डालकर विद्यालय पहुँचना पड़ता है। कई बार बच्चे फिसलकर गिर भी जाते हैं, जिससे उनके अभिभावकों की चिंता लगातार बढ़ रही है। विद्यालय के शिक्षकों और ग्रामीणों को भी इसी रास्ते से आवागमन में रोज़ाना भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों को इस समस्या से अवगत कराया है, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला है, कोई समाधान नहीं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन की यह उदासीनता समझ से परे है, खासकर जब बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा का सवाल हो। यदि समय रहते इस मार्ग का निर्माण या मरम्मत नहीं की गई, तो किसी दिन बड़ा हादसा हो सकता है। इसी को देखते हुए, ग्रामीणों और अभिभावकों ने प्रशासन से तत्काल सड़क निर्माण की मांग की है, ताकि बच्चों को सुरक्षित और सुगम रास्ता मिल सके और वे शिक्षा के अधिकार से वंचित न हों। समाचार प्रकाशित होने के बाद भी यदि जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई नहीं करते, तो यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। अब देखना होगा कि प्रशासन कब जागता है और तिघरा खुर्द के स्कूली बच्चों को इस बदहाल रास्ते से आखिर कब राहत मिलती है।2
- मैहर जनपद पंचायत क्षेत्र के ग्राम कंचनपुर के जहला गांव में सीसी सड़क के ठीक बीच में खड़े एक बिजली के पोल को सफलतापूर्वक हटा दिया गया है। यह कार्रवाई मैहर कलेक्टर बिदिशा मुखर्जी द्वारा मामले का तत्काल संज्ञान लेने और संबंधित अधिकारियों को पोल हटाने के निर्देश जारी करने के बाद की गई। इस समस्या को लेकर प्रकाशित खबर सामने आने के बाद कलेक्टर ने इसे गंभीरता से लिया था। कलेक्टर के निर्देशों का पालन करते हुए, संबंधित विभाग की एक टीम तुरंत घटनास्थल पर पहुंची और सड़क के बीचोंबीच स्थित बिजली के पोल को हटाने की प्रक्रिया पूरी की। स्थानीय ग्रामीणों ने इस कार्रवाई पर गहरी राहत व्यक्त की है, क्योंकि सड़क निर्माण के बाद बीच में खड़ा यह पोल भविष्य में बड़ी दुर्घटनाओं का कारण बन सकता था। प्रशासन की यह त्वरित कार्रवाई उसकी तत्परता का एक प्रमुख उदाहरण मानी जा रही है। साथ ही, इससे यह भी स्पष्ट हुआ कि जब जनहित से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जाता है, तो प्रशासन उनके समाधान के लिए प्रभावी कदम उठाने को आगे आता है। स्थानीय नागरिकों ने 'मध्यप्रदेश तक न्यूज़' की खबर पर त्वरित संज्ञान लेने और समस्या का समाधान करने के लिए जिला कलेक्टर बिदिशा मुखर्जी का विशेष आभार प्रकट किया है।3
- मध्य प्रदेश सरकार की नगरीय विकास एवं आवास राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी के कथित अनुसूचित जाति (एससी) प्रमाण-पत्र को लेकर चल रहा विवाद अब एक निर्णायक मोड़ पर आ गया है। हाई कोर्ट के कड़े निर्देशों के बाद प्रशासनिक अमले ने गांवों का रुख कर डुगडुगी (मुनादी) पिटवाकर आम जनता से इस मामले से संबंधित साक्ष्य मांगे हैं। राज्य स्तरीय जाति छानबीन समिति के निर्देश पर सतना जिले की नागौद तहसील के ग्राम वसुधा में प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा यह मुनादी की गई, जिसमें ग्रामीणों से अपील की गई कि यदि उनके पास मंत्री प्रतिमा बागरी की जाति या उनके परिवार से संबंधित कोई भी प्रासंगिक दस्तावेज या साक्ष्य हैं, तो वे उन्हें समिति के सामने प्रस्तुत करें। जानकारी के अनुसार, शनिवार को हरदुआ और मझोल गांवों में भी यह प्रक्रिया दोहराई जाएगी। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च स्तरीय छानबीन समिति ने 6 जुलाई को एक बैठक बुलाई है, जिसमें राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपने सभी मूल दस्तावेज और साक्ष्य पेश करने का नोटिस जारी किया गया है। नियमों के मुताबिक, मध्य प्रदेश में अनुसूचित जाति का वैधानिक लाभ या प्रमाण-पत्र पाने के लिए यह प्रमाणित करना होता है कि संबंधित व्यक्ति का परिवार वर्ष 1950 की स्थिति के अनुसार उस क्षेत्र का मूल निवासी रहा हो, और छानबीन समिति मुख्य रूप से इसी बिंदु की जांच कर रही है। यह पूरा विवाद कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार द्वारा हाई कोर्ट में दायर की गई एक याचिका से जुड़ा है। शिकायतकर्ता का दावा है कि प्रतिमा बागरी ने गलत तरीके से अनुसूचित जाति का प्रमाण-पत्र बनवाकर रैगांव (सुरक्षित) विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और मंत्री पद हासिल किया। याचिका में आरोप है कि संबंधित क्षेत्र में 'बागरी' समुदाय अनुसूचित जाति की सूची में शामिल नहीं है और उनका संबंध कथित तौर पर राजपूत या ठाकुर समुदाय से है। हाई कोर्ट द्वारा दिए गए सख्त निर्देशों के बाद से ही इस मामले में प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाएं काफी तेज हो गई हैं, और अब राजनीतिक व कानूनी गलियारों की नजरें 6 जुलाई को होने वाली इस सुनवाई पर टिकी हुई हैं, जो मंत्री प्रतिमा बागरी के राजनीतिक भविष्य की दिशा तय कर सकती है।1
- पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने 'चंदा चोरों' के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए घोषणा की है कि वे आज अपने घर पर एक बैनर लगा रहे हैं। इस बैनर पर यह स्पष्ट रूप से लिखा होगा कि उनके घर में 'चंदा चोरों' का प्रवेश वर्जित है और उन्हें उनके घर नहीं आना चाहिए। इसके साथ ही, सिंह ने आम जनता से भी अपील की है कि वे मंदिरों में भी इसी तरह के बैनर लगाएं, जिन पर 'चंदा चोरों से सावधान' का संदेश लिखा हो, ताकि लोग ऐसे तत्वों से सतर्क रहें।1
- सतना के कोलगवां में, तीन महीने का वेतन ₹45,000 न मिलने और मोबाइल छीनने से परेशान होकर ड्राइवर कमलेश सिंह ने जहर खाकर अपनी जान दे दी। भोपाल की क्यूडी शाखा द्वारा सुसाइड नोट की पुष्टि किए जाने के बाद, कोलगवां पुलिस ने इस मामले में आरोपी कार मालिक प्रकाश पाण्डेय को बीएनएस की धारा 108 के तहत गिरफ्तार कर लिया है।1
- राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी के कथित अनुसूचित जाति (एससी) प्रमाण-पत्र से जुड़े विवाद में प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई तेज हो गई है। राज्य स्तरीय जाति छानबीन समिति के निर्देश पर, शुक्रवार को सतना जिले की नागौद तहसील के ग्राम बसुधा और हरदुआ मझगवां सहित अन्य संबंधित क्षेत्रों में डुगडुगी बजवाकर आम लोगों को इस संबंध में सूचना दी गई। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि यदि उनके पास मंत्री की जाति से संबंधित कोई भी तथ्य, दस्तावेज या साक्ष्य मौजूद हों, तो वे उन्हें समिति के समक्ष प्रस्तुत कर सकते हैं। राज्य स्तरीय छानबीन समिति ने राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी को नोटिस जारी करते हुए 6 जुलाई को अनुसूचित जाति विकास आयुक्त कार्यालय में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए हैं। समिति ने सतना कलेक्टर को विशेष निर्देश दिए थे ताकि इस नोटिस की तामील सुनिश्चित की जा सके। प्रशासन ने इस मामले में नोटिस बोर्ड से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में डोंडी पिटवाकर कार्रवाई शुरू कर दी है। जारी निर्देशों के तहत, इश्तहार की प्रतियां तहसील कार्यालय नागौद, जनपद पंचायत कार्यालय और संबंधित ग्राम पंचायतों के नोटिस बोर्ड पर चस्पा की गई हैं। ग्राम पंचायत बसुधा और हरदुआ के सचिवों द्वारा डोंडी/डुगडुगी पिटवाकर वीडियोग्राफी भी कराई गई। वहीं, राजस्व निरीक्षक वृत्त डम्हा को ग्राम हरदुआ मझगवां और बसुधा में सूचना का सार्वजनिक प्रकाशन करने के साथ-साथ पंचनामा एवं फोटोग्राफी कराने के भी निर्देश दिए गए हैं।1
- मैहर के अमरपाटन क्षेत्र के खरमसेड़ा गांव में एक कुएं में गिरे बैल को बचाने उतरे तीन युवकों की दर्दनाक मौत के बाद हादसे की वजह पर चर्चा तेज हो गई है। वैज्ञानिक टीम की शुरुआती जांच में आशंका जताई गई है कि कुएं के भीतर मीथेन जैसी जहरीली गैस जमा होने और ऑक्सीजन का स्तर घटने के कारण दम घुटने से इन युवकों की जान गई। यह दुर्घटना तब हुई जब एक युवक कुएं में गिरे बैल को बचाने उतरा, और उसे बचाने के लिए दो अन्य युवक भी नीचे चले गए, जिसके बाद तीनों अचेत हो गए। हालांकि, वैज्ञानिकों के इस दावे पर संदेह जताते हुए, ग्रामीणों ने एक बकरी को कुएं में उतारकर एक परीक्षण किया। इस जोखिम भरे प्रयोग के बावजूद, बकरी को कोई नुकसान नहीं हुआ। इस घटना के बाद, प्रशासन ने नागरिकों से ऐसे खतरनाक प्रयोगों से बचने की अपील की है। फिलहाल, इस मामले में विस्तृत जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।1