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More news from उत्तर प्रदेश and nearby areas
- आगरा में ताजमहल के रात्रि दर्शन के दौरान ताज सुरक्षा पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करते हुए यलो जोन परिसर में पैदल गश्त की। कार्यवाहक प्रभारी निरीक्षक शिवराज सिंह के नेतृत्व में एक पुलिस टीम ने पर्यटकों की सुरक्षा, सुविधा और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए यह विशेष अभियान चलाया। इस कदम के साथ, ताज सुरक्षा पुलिस रात्रि दर्शन के लिए पूरी तरह अलर्ट पर है।1
- तेतरी दुर्गा स्थान से संजीव कुमार तेतरी से जुड़ी ताज़ा ख़बर मिली है।1
- Post by Tara miya1
- amit Pandey Uttar Pradesh amit Pandey Uttar Pradesh2
- फतेहाबाद के चर्रपुरा गांव में जल निकासी के मुद्दे पर ग्रामीणों का गुस्सा भड़क उठा है, जहां गंदे पानी को खेतों में छोड़े जाने को लेकर बवाल हो गया। इस विवाद को सुलझाने पहुंची प्रशासनिक टीम का महिलाओं ने घेराव किया और तहसीलदार के साथ उनकी तीखी बहस हुई। ग्रामीणों, खासकर महिलाओं, का आरोप है कि नाली का गंदा पानी उनके खेतों में छोड़ा जा रहा है, जिससे उनकी फसलें बर्बाद हो रही हैं और जलभराव की समस्या गंभीर रूप ले चुकी है। यह पूरा मामला उस वक्त और गरमा गया जब जलभराव की समस्या का समाधान करने पहुंचे अधिकारियों को ग्रामीणों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने स्पष्ट कर दिया कि वे किसी भी कीमत पर गंदा पानी अपने खेतों में नहीं बहने देंगे। हालात तब और तनावपूर्ण हो गए जब एक किसान नेता को हिरासत में ले लिया गया, जिसके बाद गांव में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की भारी मौजूदगी कर दी गई और चौकसी बढ़ा दी गई। इस पूरी घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें महिलाएं तहसीलदार से नोकझोंक करती और खेतों को बचाने के लिए कड़ा विरोध दर्ज कराती दिख रही हैं। वीडियो में साफ दिख रहा है कि महिलाएं प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठा रही हैं और अपने खेतों को बर्बाद होने से बचाने के लिए अडिग हैं। गांव में जल निकासी को लेकर छिड़ा यह विवाद फिलहाल हाईवोल्टेज ड्रामा में बदल चुका है, जहां प्रशासन और ग्रामीण आमने-सामने डटे हुए हैं।1
- आगरा के थाना सिकंदरा क्षेत्र में यमुना नदी किनारे, कैलाश मंदिर के पास वृद्ध आश्रम के पीछे स्थित नगला नाथू स्वामी क्षेत्र में कथित अवैध खनन का बड़ा मामला सामने आया है। स्थानीय ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि दिन-रात ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से मिट्टी और बालू निकाली जा रही है। उनका कहना है कि यदि यह खनन वैध अनुमति के बिना हो रहा है, तो यह कानून का उल्लंघन और यमुना नदी तथा पर्यावरण के साथ गंभीर खिलवाड़ है। ग्रामीणों के अनुसार, सामने आए वीडियो में ट्रैक्टर-ट्रॉलियां लगातार खनन सामग्री ढोती दिख रही हैं। इससे यह सवाल उठ रहा है कि यदि खनन वैध है तो इसकी अनुमति किसके पास है, और यदि अवैध है तो अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई। ग्रामीणों ने बैजनाथ और प्रेमवीर नामक व्यक्तियों की कथित संलिप्तता की आशंका जताई है, हालांकि प्रशासन ने अभी तक किसी नाम की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। विशेषज्ञों के मुताबिक, नदी किनारे अनियंत्रित खनन से यमुना का प्राकृतिक स्वरूप बिगड़ सकता है, जिससे नदी में गहरे गड्ढे बनने से डूबने और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ता है। इसके साथ ही, नदी के बहाव, भूजल स्तर, कृषि भूमि और आसपास के पर्यावरण पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। भारत में बिना अनुमति नदी, नदी तट और सरकारी भूमि से मिट्टी या बालू निकालना गंभीर अपराध माना जाता है, जिसके लिए खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957, उत्तर प्रदेश उपखनिज (परिहार) नियमावली और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत दंड का प्रावधान है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) और सुप्रीम कोर्ट भी समय-समय पर अवैध खनन रोकने के निर्देश जारी कर चुके हैं, जिसमें वाहनों को जब्त करने, जुर्माना लगाने और आपराधिक मुकदमा दर्ज करने के प्रावधान शामिल हैं। ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जिला प्रशासन, खनन विभाग और पुलिस प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। उनका मानना है कि यमुना केवल एक नदी नहीं बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था, पर्यावरण और जीवन का आधार है, और इसके अस्तित्व से खिलवाड़ करने वालों पर कानून का कठोर शिकंजा कसना ही समय की मांग है। यमुना को बचाने के लिए अवैध खनन पर रोक लगाना आवश्यक है, ताकि नदी बचे और पर्यावरण सुरक्षित रहे तथा आने वाली पीढ़ियां भी सुरक्षित रहें।4