भांडेर अनुभाग के तिधारा हनुमान मंदिर में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की बाल लीला से लेकर उनके विवाह प्रसंग तक की मनोहारी झांकियां सजीं, जिसने दर्शकों को भक्ति भाव में डुबो दिया। इस श्री राम कथा में जनसैलाब उमड़ पड़ा। कथा प्रसंग में महर्षि विश्वामित्र अयोध्या नरेश दशरथ के दरबार पहुंचे और अपने यज्ञ की रक्षा के लिए राम-लक्ष्मण को मांगा। राजा दशरथ ने भारी मन से दोनों पुत्रों को ऋषि के साथ वन भेजा। मार्ग में भगवान राम ने राक्षसी ताड़का का वध कर ऋषि-मुनियों को भयमुक्त किया, जिसके बाद यज्ञ में विघ्न डाल रहे मारीच को बिना फल के बाण से दूर फेंका और सुबाहु को यमलोक पहुंचाया। इन जीवंत अभिनय प्रस्तुतियों पर श्रोताओं ने खूब तालियां बजाईं। जनकपुरी प्रसंग में राजा जनक के शिव धनुष को कोई भी राजा हिला तक न सका। गुरु विश्वामित्र की आज्ञा पाकर श्रीराम ने धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाई और पल भर में उसे तोड़ दिया। धनुष टूटते ही माता सीता ने जयमाला लेकर श्रीराम के गले में डाल दी। विवाह प्रसंग का यह मंचन देख पूरा पंडाल "सियावर रामचंद्र की जय" के नारों से गूंज उठा। कार्यक्रम के समापन पर, रामजीशरण आचार्य ने व्यास देवी अखिलेश्वरी जी को शॉल और श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया, साथ ही उन्हें अपनी स्वरचित कविता भी भेंट की। आचार्य ने इस अवसर पर कहा कि रामकथा का रस श्रोताओं तक पहुंचाने में व्यास पीठ का बड़ा योगदान है। व्यासपीठ देवी अखिलेश्वरी जी ने भी सभी उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त किया।
भांडेर अनुभाग के तिधारा हनुमान मंदिर में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की बाल लीला से लेकर उनके विवाह प्रसंग तक की मनोहारी झांकियां सजीं, जिसने दर्शकों को भक्ति भाव में डुबो दिया। इस श्री राम कथा में जनसैलाब उमड़ पड़ा। कथा प्रसंग में महर्षि विश्वामित्र अयोध्या नरेश दशरथ के दरबार पहुंचे और अपने यज्ञ की रक्षा के लिए राम-लक्ष्मण को मांगा। राजा दशरथ ने भारी मन से दोनों पुत्रों को ऋषि के साथ वन भेजा। मार्ग में भगवान राम ने राक्षसी ताड़का का वध कर ऋषि-मुनियों को भयमुक्त किया, जिसके बाद यज्ञ में विघ्न डाल रहे मारीच को बिना फल के बाण से दूर फेंका और सुबाहु को यमलोक पहुंचाया। इन जीवंत अभिनय प्रस्तुतियों पर श्रोताओं ने खूब तालियां बजाईं। जनकपुरी प्रसंग में राजा जनक के शिव धनुष को कोई भी राजा हिला तक न सका। गुरु विश्वामित्र की आज्ञा पाकर श्रीराम ने धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाई और पल भर में उसे तोड़ दिया। धनुष टूटते ही माता सीता ने जयमाला लेकर श्रीराम के गले में डाल दी। विवाह प्रसंग का यह मंचन देख पूरा पंडाल "सियावर रामचंद्र की जय" के नारों से गूंज उठा। कार्यक्रम के समापन पर, रामजीशरण आचार्य ने व्यास देवी अखिलेश्वरी जी को शॉल और श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया, साथ ही उन्हें अपनी स्वरचित कविता भी भेंट की। आचार्य ने इस अवसर पर कहा कि रामकथा का रस श्रोताओं तक पहुंचाने में व्यास पीठ का बड़ा योगदान है। व्यासपीठ देवी अखिलेश्वरी जी ने भी सभी उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त किया।
- भांडेर नगर के चतुर्भुज मंदिर में हिंदू साम्राज्य दिवस और गुरु पूर्णिमा महोत्सव के भव्य आयोजन को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। यह महोत्सव आगामी 29 जुलाई को मनाया जाएगा। इस बैठक में नगर के निवासियों और स्वयंसेवकों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। खंड प्रमुख ने दीप प्रज्वलित कर बैठक का शुभारंभ किया, जहाँ महोत्सव को भव्य रूप से मनाने की तैयारियों पर विस्तार से चर्चा की गई।1
- दतिया जिले के हरिजन मोहल्ले में पानी का नल खराब होने के कारण स्थानीय निवासियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।1
- सेवढ़ा क्षेत्र की ग्राम पंचायत भगुवापुरा में मोहर्रम का मातमी जुलूस पूरी आस्था और पुरानी परंपरा के साथ निकाला गया। भगुवापुरा में मस्जिद वाली गली से ताजिया उठाया गया, जिसे मुस्लिम समाज सहित समस्त परिवारों ने कंधा देकर सेवढ़ा के लिए रवाना किया। इस अवसर पर भगुवापुरा थाना प्रभारी शाकिर अली खान ने अपने पुलिस बल के साथ ताजियों के लिए सुरक्षा व्यवस्था के इंतजाम किए, यह सुनिश्चित करते हुए कि कहीं ट्रैफिक की समस्या न हो। थाना प्रभारी ने यह भी बताया कि हिंदू और मुस्लिम भाई 'भाई चेहरे' के साथ तालियों में शामिल हैं। ग्रामीणों ने जानकारी दी कि 'काजियों' से ताजिया उठने के बाद मोहर्रम के दौरान गांव में आपसी भाईचारे और सौहार्द का माहौल दिखाई दिया। पुलिस प्रशासन द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे।1
- दतिया जिले के सेंवढ़ा में मोहर्रम पर्व पर सदियों पुरानी परंपरा का निर्वहन किया गया। शुक्रवार को सेंवढ़ा किला प्रांगण में विभिन्न इमामबाड़ों के ताजिए और बुर्राकें पारंपरिक रूप से एकत्रित हुईं। दतिया राज परिवार की वर्षों पुरानी परंपरा के अनुसार, पूर्व विधायक महाराज घनश्याम सिंह जूदेव ने ताजियों पर अगरबत्ती लगाकर तबर्रुक चढ़ाया और श्रद्धापूर्वक कंधा देकर उन्हें करबला के लिए रवाना किया। किला प्रांगण से निकले मातमी जुलूस में विभिन्न अखाड़ों के युवाओं ने मुख्य बाजार मार्ग पर लाठी, तलवार और अन्य पारंपरिक हैरतअंगेज करतबों का प्रदर्शन किया, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। इस अवसर पर वरिष्ठ नेता अपरवल साहनी, राजेंद्र नोनेरिया, देशराज कुशवाहा, बादशाह खान, कमल किशोर शर्मा, रहीस खान, दिग्विजय सिंह सहित मुस्लिम समाज के बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे। मोहर्रम का यह जुलूस आपसी भाईचारे, सौहार्द और परंपराओं के बीच शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।1
- एक कार्य जो 2014 में शुरू किया गया था, उसे अब 2020 में पूरा किया जा रहा है। यह कार्य लक्ष्य यादव द्वारा पूरा किया जा रहा है, जिन्हें उनके पिता ने अपना लड़का बताया है। कार्य पूरा होने के इस अवसर पर, लक्ष्य के लिए सभी से आशीर्वाद की कामना की गई है।1
- भाण्डेर तहसील के ग्राम बड़ेरा सोपान में नालियां चोक होने के कारण सड़कों पर पानी भर गया है, जिससे स्थानीय ग्रामीणों को आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सड़क पर जलभराव के चलते दोपहिया और चारपहिया वाहनों की आवाजाही बाधित हो गई है, वहीं पैदल चलने वाले लोगों को भी गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है। शुक्रवार शाम करीब 04 बजे ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने इस गंभीर समस्या को लेकर कई बार संबंधित अधिकारियों को अवगत कराया, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की अनदेखी के चलते अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। लगातार पानी जमा रहने से आसपास गंदगी फैल रही है और मच्छरों का प्रकोप बढ़ने की आशंका भी बनी हुई है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल नालियों की सफाई करवाकर जल निकासी की उचित व्यवस्था करने की मांग की है, ताकि उन्हें जल्द राहत मिल सके और दैनिक आवागमन सुचारु हो सके।1
- दतिया में हुए विशाल हत्याकांड के संबंध में दामोदर यादव ने पुलिस प्रशासन को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने इस मामले पर पुलिस प्रशासन को अल्टीमेटम जारी किया है।1
- भांडेर अनुभाग के तिधारा हनुमान मंदिर में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की बाल लीला से लेकर उनके विवाह प्रसंग तक की मनोहारी झांकियां सजीं, जिसने दर्शकों को भक्ति भाव में डुबो दिया। इस श्री राम कथा में जनसैलाब उमड़ पड़ा। कथा प्रसंग में महर्षि विश्वामित्र अयोध्या नरेश दशरथ के दरबार पहुंचे और अपने यज्ञ की रक्षा के लिए राम-लक्ष्मण को मांगा। राजा दशरथ ने भारी मन से दोनों पुत्रों को ऋषि के साथ वन भेजा। मार्ग में भगवान राम ने राक्षसी ताड़का का वध कर ऋषि-मुनियों को भयमुक्त किया, जिसके बाद यज्ञ में विघ्न डाल रहे मारीच को बिना फल के बाण से दूर फेंका और सुबाहु को यमलोक पहुंचाया। इन जीवंत अभिनय प्रस्तुतियों पर श्रोताओं ने खूब तालियां बजाईं। जनकपुरी प्रसंग में राजा जनक के शिव धनुष को कोई भी राजा हिला तक न सका। गुरु विश्वामित्र की आज्ञा पाकर श्रीराम ने धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाई और पल भर में उसे तोड़ दिया। धनुष टूटते ही माता सीता ने जयमाला लेकर श्रीराम के गले में डाल दी। विवाह प्रसंग का यह मंचन देख पूरा पंडाल "सियावर रामचंद्र की जय" के नारों से गूंज उठा। कार्यक्रम के समापन पर, रामजीशरण आचार्य ने व्यास देवी अखिलेश्वरी जी को शॉल और श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया, साथ ही उन्हें अपनी स्वरचित कविता भी भेंट की। आचार्य ने इस अवसर पर कहा कि रामकथा का रस श्रोताओं तक पहुंचाने में व्यास पीठ का बड़ा योगदान है। व्यासपीठ देवी अखिलेश्वरी जी ने भी सभी उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त किया।1