मनिहार गोठ की नन्ही गौसियानाज, जिन्हें परिवार और करीबी प्यार से 'गुन्नू' कहकर बुलाते हैं, की मासूम मुस्कान ने लोगों को वर्ष 2015 की सुपरहिट फिल्म 'बजरंगी भाईजान' की बाल कलाकार 'मुन्नी' की याद दिला दी है। फिल्म में बाल कलाकार हर्षाली मल्होत्रा ने 'मुन्नी' (शाहिदा) का ऐसा जीवंत किरदार निभाया था, जिसने लाखों दर्शकों का दिल जीत लिया था, और अब गुन्नू की मासूमियत व भोला-भाला चेहरा उसी किरदार की यादें ताज़ा कर रहा है। इन दिनों गुन्नू अपने परिवार के साथ लोहाघाट क्षेत्र के खूबसूरत गांव खूना मलक की तीन दिवसीय यात्रा पर हैं। पहाड़ों की ठंडी वादियों, हरियाली और शांत वातावरण के बीच उनकी खिलखिलाती मुस्कान हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच रही है। गुन्नू के माता-पिता मकबूल हुसैन और अजरा खातून उत्तराखंड पुलिस में कार्यरत हैं, और वे अपनी व्यस्त दिनचर्या से समय निकालकर अपने पैतृक क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता का आनंद ले रहे हैं। परिवार का कहना है कि बच्चों को अपनी जड़ों, गांव और पहाड़ की संस्कृति से जोड़ना भी इस यात्रा का एक प्रमुख उद्देश्य है। सोशल मीडिया पर गुन्नू की तस्वीरें देखने वाले कई लोगों ने भी उनकी तुलना फिल्म 'बजरंगी भाईजान' की 'मुन्नी' से की है। उनकी मासूमियत, निश्छल मुस्कान और भोलेपन से भरा यह चेहरा हर किसी के चेहरे पर मुस्कान ले आता है। बचपन की मासूमियत किसी पहचान की मोहताज नहीं होती, और जैसे कभी फिल्मी पर्दे पर 'मुन्नी' ने लोगों का दिल जीता था, वैसे ही आज पहाड़ की वादियों में घूमती नन्ही 'गुन्नू' अपनी सहज मुस्कान से हर किसी को वही अपनापन और मासूमियत महसूस करा रही हैं।
मनिहार गोठ की नन्ही गौसियानाज, जिन्हें परिवार और करीबी प्यार से 'गुन्नू' कहकर बुलाते हैं, की मासूम मुस्कान ने लोगों को वर्ष 2015 की सुपरहिट फिल्म 'बजरंगी भाईजान' की बाल कलाकार 'मुन्नी' की याद दिला दी है। फिल्म में बाल कलाकार हर्षाली मल्होत्रा ने 'मुन्नी' (शाहिदा) का ऐसा जीवंत किरदार निभाया था, जिसने लाखों दर्शकों का दिल जीत लिया था, और अब गुन्नू की मासूमियत व भोला-भाला चेहरा उसी किरदार की यादें ताज़ा कर रहा है। इन दिनों गुन्नू अपने परिवार के साथ लोहाघाट क्षेत्र के खूबसूरत गांव खूना मलक की तीन दिवसीय यात्रा पर हैं। पहाड़ों की ठंडी वादियों, हरियाली और शांत वातावरण के बीच उनकी खिलखिलाती मुस्कान हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच रही है। गुन्नू के माता-पिता मकबूल हुसैन और अजरा खातून उत्तराखंड पुलिस में कार्यरत हैं, और वे अपनी व्यस्त दिनचर्या से समय निकालकर अपने पैतृक क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता का आनंद ले रहे हैं। परिवार का कहना है कि बच्चों को अपनी जड़ों, गांव और पहाड़ की संस्कृति से जोड़ना भी इस यात्रा का एक प्रमुख उद्देश्य है। सोशल मीडिया पर गुन्नू की तस्वीरें देखने वाले कई लोगों ने भी उनकी तुलना फिल्म 'बजरंगी भाईजान' की 'मुन्नी' से की है। उनकी मासूमियत, निश्छल मुस्कान और भोलेपन से भरा यह चेहरा हर किसी के चेहरे पर मुस्कान ले आता है। बचपन की मासूमियत किसी पहचान की मोहताज नहीं होती, और जैसे कभी फिल्मी पर्दे पर 'मुन्नी' ने लोगों का दिल जीता था, वैसे ही आज पहाड़ की वादियों में घूमती नन्ही 'गुन्नू' अपनी सहज मुस्कान से हर किसी को वही अपनापन और मासूमियत महसूस करा रही हैं।
- उत्तराखंड के ऋषिकेश में एक पर्यावरण-अनुकूल रेस्टोरेंट 'वेस्ट टू बेस्ट' (कचरे से सर्वोत्तम) की अवधारणा को बढ़ावा दे रहा है। यह अनूठी पहल, जिसे संभवतः तुलसी रेस्टोरेंट चला रहा है, स्थिरता, पुनर्चक्रण और प्लास्टिक-मुक्त जीवन को प्रोत्साहित करती है। इसका उद्देश्य हरित जीवनशैली और पर्यावरणीय जागरूकता को बढ़ावा देना है, जिससे स्थानीय स्तर पर पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोग प्रेरित हों।1
- उत्तर प्रदेश की राजनीति से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहाँ मेरठ के मवाना में समाजवादी पार्टी (सपा) के PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) मंच पर भारी हंगामा देखा गया। इस घटनाक्रम में, पूर्व विधायक योगेश वर्मा और प्रभुदयाल वाल्मीकि की मौजूदगी में, सपा के ही सेक्टर प्रभारी सतपाल यादव मंच पर चढ़ गए और बवाल काट दिया। सतपाल यादव का आरोप था कि यादवों की पार्टी होने के बावजूद मंच से यादव नेताओं को गायब कर दिया गया था। इस हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या मिशन 2027 से पहले सपा की यह अंदरूनी कलह अखिलेश यादव का खेल बिगाड़ सकती है।1
- नैनीताल के ताकुला-हल्द्वानी मुख्य मार्ग पर अचानक एक विशालकाय पेड़ गिरने से यातायात पूरी तरह से बाधित हो गया, जिससे सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। डिस्ट्रिक्ट कंट्रोल रूम (DCR) को सुबह 06:01 बजे इस घटना की सूचना मिली, जिसके तत्काल बाद नैनीताल फायर स्टेशन से एक रेस्क्यू यूनिट को मौके पर भेजा गया। मौके पर पहुँचने पर टीम ने पाया कि गिरा हुआ पेड़ अत्यधिक भारी और विशाल था, जिसे सीधे हटाना संभव नहीं था। फायर यूनिट के जवानों ने बिना देरी किए, आधुनिक वुडन कटर का उपयोग करते हुए बचाव अभियान शुरू किया। कड़कड़ाती सुबह और जोखिम भरे हालातों के बावजूद, टीम ने कड़ी मेहनत कर पेड़ को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटा और उन्हें सुरक्षित रूप से सड़क के किनारे हटाया। इस त्वरित और सफल अभियान के बाद, बाधित हुए यातायात को सुचारू रूप से बहाल किया जा सका। इस रेस्क्यू टीम में लीडिंग फायरमैन (LFM) श्री प्रकाश मेर, ड्राइवर श्री जय प्रकाश आर्य, फायरमैन रमेश चंद, और महिला फायर वर्कर (FW) बीना परिहार व कविता सकलानी शामिल थीं। सुबह के समय दिखाई गई इस मुस्तैदी और प्रभावी कार्य के लिए स्थानीय लोगों और यात्रियों ने फायर ब्रिगेड टीम की भरपूर सराहना की है।1
- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को पीलीभीत के बरखेड़ा विधानसभा क्षेत्र के पतरासा कुंवरपुर गांव में ₹569.11 करोड़ की 66 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इस दौरान उन्होंने लगभग ढाई हजार विस्थापित परिवारों को भूमि अधिकार पत्र भी सौंपे। जनसभा को संबोधित करते हुए, मुख्यमंत्री ने बताया कि 55-56 वर्ष पहले बांग्लादेश से प्रताड़ित कर निकाले गए इन परिवारों को पीलीभीत में पुनर्वासित किया गया था, और अब उन्हें भारतीय नागरिकता मिल गई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह उनके लिए एक नया जीवन है, और इन प्रमाणपत्रों के बाद कोई भी शक्ति उन्हें वहां से नहीं निकाल सकती, न ही कोई उन्हें पराया कह सकता। मुख्यमंत्री के अनुसार, इन परिवारों को अपनी विरासत संरक्षित करने का मंच मिला है। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला और पूर्वी पाकिस्तान (बांग्लादेश) के निर्माण के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराया, इसे कांग्रेस के पाप का परिणाम बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान सत्ता की लालच के कारण बना था, और यदि उस समय कांग्रेस का नेतृत्व अडिग रहता तो भारत का विभाजन नहीं होता। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जिन्ना अपनी मौत मर गया था, लेकिन लाखों हिंदुओं का कत्लेआम हुआ और उन्हें अपनी पैतृक भूमि छोड़नी पड़ी। उन्होंने समाजवादी पार्टी (सपा) पर भी निशाना साधा, यह कहते हुए कि उन्हें चार बार प्रदेश में शासन करने का अवसर मिला, लेकिन उन्हें गरीबों की पीड़ा सुनने की आदत नहीं थी। उन्होंने व्यंगात्मक लहजे में कहा कि वे तब सुनते जब "बबुआ" को समय पर उठने की आदत होती – 12 बजे सोकर उठेंगे, दो बजे तक तैयार होंगे, फिर पांच बजे जिम चले जाएंगे, तो गरीबों की पीड़ा सुनने की आदत कहां होगी। मुख्यमंत्री के अनुसार, सपा के एजेंडे में केवल सैफई का विकास था। पीलीभीत में मुख्यमंत्री ने प्रदेश की कानून व्यवस्था पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में अब दंगे नहीं होते, और उन्होंने मंच से घोषणा की "नो दंगा नो कर्फ्यू अब यूपी में सब चंगा"। उन्होंने दोहराया कि उनकी सरकार व्यापारियों, बहन-बेटियों और आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, और अपराधियों को संरक्षण देने का सवाल ही नहीं उठता।4
- बागेश्वर जिला अस्पताल एक बार फिर विवादों में है, जहाँ अस्पताल परिसर में मरीज के परिजनों द्वारा वीडियो बनाने का मामला गरमा गया है। इस घटना के बाद, नर्सिंग स्टाफ ने इसे अपने कार्य में बाधा, अभद्रता और दुर्व्यवहार बताते हुए संबंधित परिजनों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। दूसरी ओर, मरीज के परिजनों का आरोप है कि उनके मरीज के सिर पर गंभीर चोट लगी है और कई टांके भी आए हैं। उनका यह भी कहना है कि हमले के आरोपी मेडिकल प्रोफेशन से जुड़े हुए हैं और उन्हें बचाने के लिए पूरे मामले को जानबूझकर दूसरी दिशा दी जा रही है। फिलहाल, इस पूरे प्रकरण पर दोनों पक्ष आमने-सामने हैं।1
- Post by Atma Gandhi1
- मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यह संकल्प लिया है कि चम्पावत को उत्तराखण्ड का एक मॉडल जनपद बनाया जाएगा।1
- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पीलीभीत जिले को ₹569 करोड़ रुपये की सौगात दी है। यह घोषणा प्रदेश के विकास से जुड़ी एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आई है।1
- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी और उसके नेता अखिलेश यादव पर गरीबों की समस्याओं के प्रति संवेदनहीनता का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी को चार-चार बार शासन का अवसर मिला, लेकिन वह गरीबों की पीड़ा से अपनी संवेदना नहीं जोड़ पाई। मुख्यमंत्री योगी ने कटाक्ष करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी तब गरीबों की बात सुन सकती थी, जब 'बबुआ' (अखिलेश यादव का जिक्र करते हुए) को समय से जगने की आदत होती।1