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उत्तर प्रदेश की राजनीति से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहाँ मेरठ के मवाना में समाजवादी पार्टी (सपा) के PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) मंच पर भारी हंगामा देखा गया। इस घटनाक्रम में, पूर्व विधायक योगेश वर्मा और प्रभुदयाल वाल्मीकि की मौजूदगी में, सपा के ही सेक्टर प्रभारी सतपाल यादव मंच पर चढ़ गए और बवाल काट दिया। सतपाल यादव का आरोप था कि यादवों की पार्टी होने के बावजूद मंच से यादव नेताओं को गायब कर दिया गया था। इस हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या मिशन 2027 से पहले सपा की यह अंदरूनी कलह अखिलेश यादव का खेल बिगाड़ सकती है।
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उत्तर प्रदेश की राजनीति से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहाँ मेरठ के मवाना में समाजवादी पार्टी (सपा) के PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) मंच पर भारी हंगामा देखा गया। इस घटनाक्रम में, पूर्व विधायक योगेश वर्मा और प्रभुदयाल वाल्मीकि की मौजूदगी में, सपा के ही सेक्टर प्रभारी सतपाल यादव मंच पर चढ़ गए और बवाल काट दिया। सतपाल यादव का आरोप था कि यादवों की पार्टी होने के बावजूद मंच से यादव नेताओं को गायब कर दिया गया था। इस हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या मिशन 2027 से पहले सपा की यह अंदरूनी कलह अखिलेश यादव का खेल बिगाड़ सकती है।
More news from उत्तराखंड and nearby areas
- उत्तराखंड के चंपावत जिले से एक मामला सामने आया है, जहाँ तीन बच्चों की माँ अपने जीजा के साथ घर छोड़कर चली गई।1
- मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने 29 जून, सोमवार को चम्पावत के दौरे पर जनपद को स्वास्थ्य, पर्यटन, आधारभूत संरचना और शहरी विकास के क्षेत्र में बड़ी सौगातें दीं। इस दौरान उन्होंने ₹163 करोड़ से अधिक की विभिन्न विकास योजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया, जिसके तहत कुल 17 परियोजनाओं को गति मिली। मुख्यमंत्री ने जिला चिकित्सालय में लगभग ₹6 करोड़ की लागत से स्थापित अत्याधुनिक एमआरआई मशीन का लोकार्पण किया। उन्होंने स्वास्थ्य क्षेत्र में ₹40 करोड़ से अधिक की विभिन्न परियोजनाओं को गति देने की घोषणा भी की। श्री धामी ने जोर देते हुए कहा कि स्वस्थ उत्तराखंड ही समर्थ और विकसित उत्तराखंड की आधारशिला है। एमआरआई मशीन शुरू होने से अब चम्पावत सहित पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, नैनीताल और सीमांत क्षेत्रों के मरीजों को गंभीर जांच के लिए बड़े शहरों की ओर रुख नहीं करना पड़ेगा। इसके अतिरिक्त, जिला चिकित्सालय में 50 बेड का आधुनिक क्रिटिकल केयर ब्लॉक, डायग्नोस्टिक विंग, आधुनिक ऑपरेशन थिएटर, अमोड़ी में पीएचसी, नर्सिंग छात्रावास और प्रस्तावित पैरामेडिकल कॉलेज जैसी योजनाएँ स्वास्थ्य सेवाओं को नई मजबूती प्रदान करेंगी। विकास कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने ₹123.79 करोड़ की 17 योजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। उन्होंने जिम कॉर्बेट ट्रेल का शुभारंभ किया और प्रस्तावित सिटी सेंटर का भूमि पूजन भी किया। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर चम्पावत को उत्तराखंड का मॉडल जनपद बनाने के अपने संकल्प को दोहराया। भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि चम्पावत में आधुनिक बहुमंजिला पार्किंग एवं शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, महिला स्पोर्ट्स कॉलेज, साइंस सेंटर, पुस्तकालय, महिला प्रौद्योगिकी पार्क, धार्मिक पर्यटन परियोजनाएँ और कृषि विकास योजनाएँ जनपद की नई पहचान बनेंगी। उन्होंने यह भी बताया कि विकास का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुँचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में विभिन्न जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों तथा बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।1
- मनिहार गोठ की नन्ही गौसियानाज, जिन्हें परिवार और करीबी प्यार से 'गुन्नू' कहकर बुलाते हैं, की मासूम मुस्कान ने लोगों को वर्ष 2015 की सुपरहिट फिल्म 'बजरंगी भाईजान' की बाल कलाकार 'मुन्नी' की याद दिला दी है। फिल्म में बाल कलाकार हर्षाली मल्होत्रा ने 'मुन्नी' (शाहिदा) का ऐसा जीवंत किरदार निभाया था, जिसने लाखों दर्शकों का दिल जीत लिया था, और अब गुन्नू की मासूमियत व भोला-भाला चेहरा उसी किरदार की यादें ताज़ा कर रहा है। इन दिनों गुन्नू अपने परिवार के साथ लोहाघाट क्षेत्र के खूबसूरत गांव खूना मलक की तीन दिवसीय यात्रा पर हैं। पहाड़ों की ठंडी वादियों, हरियाली और शांत वातावरण के बीच उनकी खिलखिलाती मुस्कान हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच रही है। गुन्नू के माता-पिता मकबूल हुसैन और अजरा खातून उत्तराखंड पुलिस में कार्यरत हैं, और वे अपनी व्यस्त दिनचर्या से समय निकालकर अपने पैतृक क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता का आनंद ले रहे हैं। परिवार का कहना है कि बच्चों को अपनी जड़ों, गांव और पहाड़ की संस्कृति से जोड़ना भी इस यात्रा का एक प्रमुख उद्देश्य है। सोशल मीडिया पर गुन्नू की तस्वीरें देखने वाले कई लोगों ने भी उनकी तुलना फिल्म 'बजरंगी भाईजान' की 'मुन्नी' से की है। उनकी मासूमियत, निश्छल मुस्कान और भोलेपन से भरा यह चेहरा हर किसी के चेहरे पर मुस्कान ले आता है। बचपन की मासूमियत किसी पहचान की मोहताज नहीं होती, और जैसे कभी फिल्मी पर्दे पर 'मुन्नी' ने लोगों का दिल जीता था, वैसे ही आज पहाड़ की वादियों में घूमती नन्ही 'गुन्नू' अपनी सहज मुस्कान से हर किसी को वही अपनापन और मासूमियत महसूस करा रही हैं।1
- नैनीताल के ताकुला-हल्द्वानी मुख्य मार्ग पर अचानक एक विशालकाय पेड़ गिरने से यातायात पूरी तरह से बाधित हो गया, जिससे सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। डिस्ट्रिक्ट कंट्रोल रूम (DCR) को सुबह 06:01 बजे इस घटना की सूचना मिली, जिसके तत्काल बाद नैनीताल फायर स्टेशन से एक रेस्क्यू यूनिट को मौके पर भेजा गया। मौके पर पहुँचने पर टीम ने पाया कि गिरा हुआ पेड़ अत्यधिक भारी और विशाल था, जिसे सीधे हटाना संभव नहीं था। फायर यूनिट के जवानों ने बिना देरी किए, आधुनिक वुडन कटर का उपयोग करते हुए बचाव अभियान शुरू किया। कड़कड़ाती सुबह और जोखिम भरे हालातों के बावजूद, टीम ने कड़ी मेहनत कर पेड़ को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटा और उन्हें सुरक्षित रूप से सड़क के किनारे हटाया। इस त्वरित और सफल अभियान के बाद, बाधित हुए यातायात को सुचारू रूप से बहाल किया जा सका। इस रेस्क्यू टीम में लीडिंग फायरमैन (LFM) श्री प्रकाश मेर, ड्राइवर श्री जय प्रकाश आर्य, फायरमैन रमेश चंद, और महिला फायर वर्कर (FW) बीना परिहार व कविता सकलानी शामिल थीं। सुबह के समय दिखाई गई इस मुस्तैदी और प्रभावी कार्य के लिए स्थानीय लोगों और यात्रियों ने फायर ब्रिगेड टीम की भरपूर सराहना की है।1
- महान भारतीय स्वतंत्रता सेनानी और क्रांतिकारी मनिंद्रनाथ नायक का जन्म 30 जून 1897 को ब्रिटिश भारत के हुगली जिले के चंदननगर में हुआ था और उनका निधन 28 दिसंबर 1982 को हुआ। चंदननगर, पश्चिम बंगाल के मूल निवासी मनिंद्रनाथ अपने शहर के पहले विज्ञान स्नातक थे, जिन्होंने 1913 में स्कॉटिश चर्च कॉलेज से बी.एससी की डिग्री प्राप्त की थी। हालांकि, क्रांतिकारी गतिविधियों में उनकी संलिप्तता के कारण मिली पुलिस रिपोर्ट के कारण उन्हें प्रेसीडेंसी कॉलेज, कलकत्ता में एम.एससी में प्रवेश नहीं मिल पाया था। उनके पिता का नाम भूषण चंद्र नायक था। मनिंद्रनाथ छात्र जीवन से ही स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय हो गए थे और वे रासबिहारी बोस के नेतृत्व वाले गुप्त क्रांतिकारी समूह के एक प्रमुख सदस्य थे। उन्होंने बम बनाने में विशेषज्ञता हासिल की और कई उन्नत किस्म के बम तैयार किए। 1912 में लाहौर और दिल्ली में वायसराय लॉर्ड हार्डिंग पर हुए हमले (दिल्ली षड्यंत्र) में उनके बनाए बमों का उपयोग किया गया था। यह ऐतिहासिक बम क्रांतिकारी बसंत कुमार विश्वास द्वारा फेंका गया था। देश की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाले इस गुमनाम नायक का योगदान भारत के स्वतंत्रता संग्राम में सदैव याद किया जाता है।1
- उत्तर प्रदेश के स्वार-टांडा स्थित अकबराबाद क्षेत्र में लंबे इंतजार के बाद आखिरकार खनन पट्टे का संचालन शुरू हो गया है। खनन कार्य प्रारंभ होते ही इस क्षेत्र में वाहनों की आवाजाही में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जिसके साथ ही खनिज के परिवहन का सिलसिला भी तेज हो गया है। हालांकि, स्थानीय लोगों और राहगीरों ने यह भी बताया है कि खनन शुरू होने के साथ ही कई वाहनों में निर्धारित क्षमता से अधिक सामग्री भरकर ले जाने के मामले सामने आने लगे हैं। एक ओर जहां खनन पट्टा चालू होने से क्षेत्र के लोगों में रोजगार मिलने की उम्मीद जगी है, वहीं दूसरी ओर ओवरलोड वाहनों के संचालन को लेकर लोगों ने गंभीर चिंता जताई है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि क्षमता से अधिक भार लेकर चलने वाले वाहन न केवल सड़क सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन सकते हैं, बल्कि इनसे सड़कों को भी भारी नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है। नागरिकों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि ओवरलोडिंग पर प्रभावी निगरानी रखी जाए और निर्धारित नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराया जाए। उनकी अपेक्षा है कि खनन कार्य नियमानुसार संचालित हो, ताकि रोजगार और राजस्व के लाभ के साथ-साथ सड़क सुरक्षा और कानून व्यवस्था भी सुचारु बनी रहे। फिलहाल, प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।2
- मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यह संकल्प लिया है कि चम्पावत को उत्तराखण्ड का एक मॉडल जनपद बनाया जाएगा।1
- उत्तराखंड के ऋषिकेश में एक पर्यावरण-अनुकूल रेस्टोरेंट 'वेस्ट टू बेस्ट' (कचरे से सर्वोत्तम) की अवधारणा को बढ़ावा दे रहा है। यह अनूठी पहल, जिसे संभवतः तुलसी रेस्टोरेंट चला रहा है, स्थिरता, पुनर्चक्रण और प्लास्टिक-मुक्त जीवन को प्रोत्साहित करती है। इसका उद्देश्य हरित जीवनशैली और पर्यावरणीय जागरूकता को बढ़ावा देना है, जिससे स्थानीय स्तर पर पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोग प्रेरित हों।1
- बरेली जिले की बहेड़ी तहसील के वर्गवा गाँव में जल निकासी की समस्या सामने आई है। गाँव की मुख्य नाली पूरी तरह से बंद हो गई है, जिसके कारण पानी का रास्ता अवरुद्ध हो गया है और जल निकासी पूर्णतः ठप पड़ गई है।2