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छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की सदस्य अधिवक्ता दीपिका शोरी पालोड़ी पहुंचीं। उन्हें इस बात के लिए याद किया गया और सम्मानित किया गया कि छत्तीसगढ़ उन्हीं के प्रयासों की बदौलत नक्सलमुक्त हो सका। उनके सम्मान में क्षेत्र की वीडियो फुटेज साझा की गई।
अंचल की खबरें(Rintoo Bhadouriy
छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की सदस्य अधिवक्ता दीपिका शोरी पालोड़ी पहुंचीं। उन्हें इस बात के लिए याद किया गया और सम्मानित किया गया कि छत्तीसगढ़ उन्हीं के प्रयासों की बदौलत नक्सलमुक्त हो सका। उनके सम्मान में क्षेत्र की वीडियो फुटेज साझा की गई।
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- छत्तीसगढ़ के बस्तर से एक सकारात्मक खबर सामने आई है, जहाँ राज्य महिला आयोग की सदस्य अधिवक्ता दीपिका शोरी ने सुकमा जिले के करीगुंडम गांव का दौरा किया। घने जंगलों के बीच जिला मुख्यालय से करीब 160 किलोमीटर दूर स्थित यह क्षेत्र, कभी हिड़मा और पापाराव जैसे दुर्दांत नक्सलियों का गढ़ माना जाता था, अब विकास की नई राह पर है। दीपिका शोरी ने किसी बड़े मंच या वीआईपी तामझाम के बिना, जमीन पर चटाई पर बैठकर ग्रामीणों की समस्याएँ सुनीं। ग्रामीणों ने इस पहल पर उम्मीद जताते हुए कहा कि पहली बार उनके गांव में कोई बड़ा अधिकारी या नेता इस तरह उनकी बात सुन रहा है। इस दौरे की सबसे महत्वपूर्ण खबर यह रही कि करीगुंडम पंचायत को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत शत-प्रतिशत स्वीकृति मिल गई है। 8 गांवों और 4500 की आबादी वाली इस पंचायत में 719 नए पक्के मकान स्वीकृत किए गए हैं, जिससे जल्द ही इस गांव से कच्चे मकानों का नामोनिशान मिट जाएगा। दीपिका शोरी ने इसे नक्सलवाद के साये से मुक्त हो रहे करीगुंडम के लिए एक ऐतिहासिक शुरुआत बताया। हालांकि, नक्सलवाद के साये से बाहर आए करीगुंडम में विकास तो पहुंचा है, लेकिन एक बड़ी समस्या अब भी बाकी है। पड़ोसी गांव पालोड़ी से बिजली की लाइन महज 5 किलोमीटर दूर होने के बावजूद, 'नियद नेल्लानार' योजना में शामिल करीगुंडम आज भी अंधेरे में है। ग्रामीणों ने महिला आयोग सदस्य के सामने बिजली की इस मांग को प्रमुखता से उठाया, जिस पर दीपिका शोरी ने समस्याओं को शासन तक पहुंचाकर जल्द से जल्द दूर करने का आश्वासन दिया। यह साफ है कि जिस करीगुंडम में कभी सरकार और प्रशासन का पहुंचना असंभव माना जाता था, वहां अब संवाद और विश्वास की नई रोशनी पहुंच रही है। बिजली की समस्या दूर होते ही यह पंचायत सुकमा जिले की एक आदर्श और विकसित पंचायत बनकर उभरेगी।1
- छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में, कभी दुर्दांत नक्सलियों का गढ़ रहे करीगुंडम गाँव में अब विकास की नई बयार बह रही है। छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की सदस्य अधिवक्ता दीपिका शोरी ने इस धुर नक्सल प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया, जो जिला मुख्यालय से करीब 160 किलोमीटर दूर स्थित है। उन्होंने बिना किसी बड़े मंच या वीआईपी तामझाम के, ज़मीन पर चटाई बिछाकर ग्रामीणों की समस्याएँ सुनीं। इस दौरे की सबसे महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक खबर यह रही कि करीगुंडम पंचायत को प्रधानमंत्री आवास योजना की 100 प्रतिशत स्वीकृति मिल चुकी है। 8 गांवों और 4500 की आबादी वाली इस पंचायत में 719 नए पक्के मकान स्वीकृत किए गए हैं, जिससे जल्द ही इस गाँव से कच्चे मकानों का नामोनिशान मिट जाएगा। हालाँकि, नक्सलवाद के साये से बाहर आ चुके करीगुंडम में विकास तो पहुँचा है, लेकिन एक बड़ी कमी अभी भी बाकी है। पड़ोसी गाँव पालोड़ी से बिजली की लाइन महज 5 किलोमीटर दूर है, लेकिन 'नियद नेल्लानार' योजना में शामिल होने के बावजूद करीगुंडम आज भी अंधेरे में है। ग्रामीणों ने महिला आयोग की सदस्य के सामने बिजली की इस मांग को प्रमुखता से उठाया और कहा कि, "पहली बार हमारे गांव में कोई बड़ा अधिकारी या नेता इस तरह जमीन पर बैठकर हमारी बात सुन रहा है। हमें बहुत उम्मीद जागी है।" दीपिका शोरी ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि करीगुंडम अब नक्सलवाद के साये से मुक्त हो रहा है और 100% पीएम आवास मिलना एक ऐतिहासिक शुरुआत है। उन्होंने यह भी कहा कि बिजली और सड़कों की जो भी समस्याएँ हैं, उन्हें शासन तक पहुँचाकर जल्द से जल्द दूर किया जाएगा। यह साफ है कि जिस करीगुंडम में कभी सरकार और प्रशासन का पहुँचना असंभव माना जाता था, वहाँ अब संवाद और विश्वास की नई रोशनी पहुँच रही है, और बिजली की समस्या दूर होते ही यह पंचायत सुकमा जिले की एक आदर्श और विकसित पंचायत बनकर उभरेगी।4
- किरंदुल नगर में स्थानीय युवाओं, ठेकेदारों और व्यापारियों को रोजगार में प्राथमिकता देने की लगातार उठ रही जनआवाज के बीच, नगर पालिका उपाध्यक्ष बबलू सिद्दीकी ने इस मुद्दे पर कड़ा और बड़ा विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने समानता कंपनी, देव माइनिंग कंपनी और एल एंड टी कंपनी सहित क्षेत्र में कार्यरत अन्य बाहरी कंपनियों के रवैये पर तीखी आपत्ति जताई है और साफ कहा कि स्थानीय हितों की अनदेखी अब किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बबलू सिद्दीकी ने तर्क दिया कि बैलाडीला की खदानें, यहाँ के प्राकृतिक संसाधन और सभी विकास कार्य स्थानीय लोगों के अधिकारों और उनकी भागीदारी के बिना अधूरे हैं। इसलिए, उनकी मांग है कि क्षेत्र के शिक्षित युवाओं, स्थानीय ठेकेदारों और व्यापारियों को रोजगार तथा कार्यों में सबसे पहले प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उन्होंने कंपनियों पर स्थानीय लोगों के हितों की अनदेखी का आरोप लगाया है। पालिका उपाध्यक्ष ने चेतावनी दी कि यदि कोई भी कंपनी स्थानीय लोगों की लगातार उपेक्षा करती है या स्थानीय युवाओं, ठेकेदारों और व्यापारियों को अवसर देने में भेदभाव करती है, तो उसका पुरजोर विरोध किया जाएगा। उन्होंने सभी कंपनियों से स्थानीय युवाओं को रोजगार, स्थानीय ठेकेदारों को काम और स्थानीय व्यापारियों को व्यावसायिक अवसर देने के लिए एक स्पष्ट नीति अपनाने की मांग की। सिद्दीकी ने कहा कि क्षेत्र के विकास में स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करना कंपनियों की जिम्मेदारी है, और ऐसा न होने पर वे जनप्रतिनिधियों और आम जनता के साथ मिलकर आंदोलन को और तेज करेंगे।4
- साल 2016 में अचानक हुई नोटबंदी के साथ ही 2000 के नोट में एक नैनो-चिप होने की अफ़वाह भी तेज़ी से फैली। यह दावा किया गया कि यह चिप सैटेलाइट से नोट को ट्रैक कर सकती है, जिससे काला धन छुपाने वाले पकड़े जाएंगे। इस झूठ को करोड़ों लोगों ने सच मान लिया, और यह व्हाट्सएप से लेकर परिवार के सदस्यों के बीच खूब फैलाया गया। हालांकि, यह अफ़वाह किसी अनपढ़ चाचा या व्हाट्सएप से नहीं आई थी, बल्कि इसे प्राइमटाइम टीवी पर, स्टूडियो में बैठे टाई लगाए एंकरों द्वारा, ग्राफिक्स के साथ और 'सूत्रों के अनुसार' की चादर ओढ़कर प्रसारित किया गया था। यह सवाल उठाया गया है कि यह अफ़वाह आखिर फैलाई क्यों गई थी। पोस्ट के अनुसार, असली चिप नोट में नहीं, बल्कि लोगों के दिमाग़ में थी। यह वह चिप है जो लोगों को यह सोचने पर मजबूर करती है कि 'सरकार ने किया है तो कुछ सोचकर किया होगा', 'हम क्या जानें, बड़े लोग हैं', या 'चुप रहो, देशद्रोही मत कहलाओ'। यह दिमागी चिप लोगों को सवाल पूछने से रोकती है, आँखें बंद करवाती है, और अफ़वाह को सच तथा सच को अफ़वाह बना देती है। इस चिप को कोई सैटेलाइट ट्रैक नहीं करती, बल्कि इसे लोग ख़ुद ही अपने साथ लेकर चलते हैं। आज जब 2000 का नोट बंद हो चुका है, यह दिमागी चिप अभी भी काम कर रही है। 'तीसरी आँख' नामक इस पोस्ट में अंत में यह संदेश दिया गया है कि जिस दिन लोग बिना प्रमाण के किसी भी बात को 'सत्य' मानना बंद कर देंगे, उस दिन यह दिमागी चिप अपने आप निकल जाएगी। इसके लिए प्रश्न पूछने, प्रमाण मांगने और पक्ष के बजाय सच को चुनने का आग्रह किया गया है।1
- नारायणपुर जिले के ओरछा-टेकला क्षेत्र में नक्सलियों के एक हथियार डंप को ध्वस्त कर दिया गया है। यह कार्रवाई नक्सलियों के खिलाफ की गई है।1
- छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के टेकला जंगल में सुरक्षाबलों को एक नक्सल विरोधी अभियान के दौरान बड़ी सफलता मिली है। क्षेत्र में लगातार चलाए जा रहे सर्च ऑपरेशन और एरिया डॉमिनेशन अभियान के तहत, जवानों ने नक्सलियों द्वारा छिपाकर रखे गए हथियारों और गोला-बारूद का एक विशाल डंप बरामद किया। सुरक्षाबलों को जंगल में संदिग्ध स्थान की तलाशी के दौरान हथियार, विस्फोटक सामग्री और नक्सली उपयोग की अन्य कई सामग्रियां मिलीं, जिन्हें अपने कब्जे में लेकर सुरक्षित कर लिया गया है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इस डंप को नक्सलियों ने भविष्य में किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने के उद्देश्य से छिपाकर रखा था। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि लगातार चल रहे अभियानों के कारण नक्सलियों की गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा रहा है। सुरक्षाबलों की इस कार्रवाई को नक्सल विरोधी अभियान में एक महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है। इलाके में अभी भी सर्च ऑपरेशन जारी है और आसपास के जंगलों की गहन तलाशी ली जा रही है, ताकि नक्सलियों के अन्य ठिकानों और छिपाए गए हथियारों का भी पता लगाया जा सके। अधिकारियों के अनुसार, क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत किया जाएगा तथा नक्सल गतिविधियों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा।1
- कांकेर में नए बस स्टैंड के करीब पसरा लगाने को लेकर दो महिलाओं के बीच विवाद हो गया। इस दौरान दोनों महिलाओं ने एक-दूसरे को कथित तौर पर गाली-गलौज की और खूब हंगामा किया। इस पूरे विवाद का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।1
- छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की सदस्य अधिवक्ता दीपिका शोरी पालोड़ी पहुंचीं। उन्हें इस बात के लिए याद किया गया और सम्मानित किया गया कि छत्तीसगढ़ उन्हीं के प्रयासों की बदौलत नक्सलमुक्त हो सका। उनके सम्मान में क्षेत्र की वीडियो फुटेज साझा की गई।1