देवास कलेक्टर ऋतुराज सिंह ने जिले में संचालित समस्त कोचिंग सेंटरों में विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष जांच दल का गठन किया है। इस दल का मुख्य कार्य इन कोचिंग सेंटरों में स्थापित अग्नि शमन यंत्रों, आपातकालीन निकास मार्गों और फायर एनओसी/अग्नि सुरक्षा प्रमाण पत्रों की सघन जांच करना है। इस जांच दल में शहरी क्षेत्र के लिए देवास नगर पालिक निगम आयुक्त या उनके प्रतिनिधि और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी या उनके प्रतिनिधि शामिल हैं। ग्रामीण और नगरीय निकायों के लिए नगर पालिक निगम देवास के फॉयर अधिकारी को नियुक्त किया गया है। शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के लिए लोक निर्माण विभाग (विद्युत सुरक्षा एवं संधारण) देवास के कार्यपालन यंत्री या उनके प्रतिनिधि तथा संबंधित तहसील क्षेत्र के कार्यपालिक दण्डाधिकारी भी दल का हिस्सा होंगे। संबंधित नगर परिषद के लिए मुख्य नगर पालिक अधिकारी/प्रतिनिधि और संबंधित अनुभाग क्षेत्र के लिए खंड चिकित्सा अधिकारी/प्रतिनिधि को भी इसमें शामिल किया गया है। समस्त संबंधित अनुविभागीय दण्डाधिकारियों को उनके अनुभाग क्षेत्र का नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। जांच दल यह सुनिश्चित करेगा कि संबंधित कोचिंग सेंटरों के पास वैध फायर एनओसी (अग्नि सुरक्षा प्रमाण पत्र) उपलब्ध है या नहीं, और परिसर में लगे अग्नि शमन उपकरण (जैसे फायर एक्स्टिंग्विशर, होज़ रील, स्प्रिंकलर) क्रियाशील हैं या एक्सपायर हो चुके हैं। वे आपातकालीन निकास मार्गों की चौड़ाई और अवरोध-मुक्त स्थिति का भी आकलन करेंगे, साथ ही यह भी जांचेंगे कि स्टाफ को अग्नि सुरक्षा उपकरणों के संचालन का प्रशिक्षण दिया गया है या नहीं। इलेक्ट्रिकल ऑडिट की स्थिति, जिसमें शॉर्ट सर्किट की संभावनाओं की जांच भी शामिल है, सहित अन्य आवश्यक जांचें भी की जाएंगी। इस दल को तत्काल प्रभाव से अपने-अपने क्षेत्राधिकार के निजी और शासकीय अस्पतालों का भी आकस्मिक निरीक्षण कर 10 दिनों के भीतर संयुक्त जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी, और इसके बाद आगामी प्रत्येक छह माह में निरीक्षण रिपोर्ट देना अनिवार्य होगा।
देवास कलेक्टर ऋतुराज सिंह ने जिले में संचालित समस्त कोचिंग सेंटरों में विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष जांच दल का गठन किया है। इस दल का मुख्य कार्य इन कोचिंग सेंटरों में स्थापित अग्नि शमन यंत्रों, आपातकालीन निकास मार्गों और फायर एनओसी/अग्नि सुरक्षा प्रमाण पत्रों की सघन जांच करना है। इस जांच दल में शहरी क्षेत्र के लिए देवास नगर पालिक निगम आयुक्त या उनके प्रतिनिधि और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी या उनके प्रतिनिधि शामिल हैं। ग्रामीण और नगरीय निकायों के लिए नगर पालिक निगम देवास के फॉयर अधिकारी को नियुक्त किया गया है। शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के लिए लोक निर्माण विभाग (विद्युत सुरक्षा एवं संधारण) देवास के कार्यपालन यंत्री या उनके प्रतिनिधि तथा संबंधित तहसील क्षेत्र के कार्यपालिक दण्डाधिकारी भी दल का हिस्सा होंगे। संबंधित नगर परिषद के लिए मुख्य नगर पालिक अधिकारी/प्रतिनिधि और संबंधित अनुभाग क्षेत्र के लिए खंड चिकित्सा अधिकारी/प्रतिनिधि को भी इसमें शामिल किया गया है। समस्त संबंधित अनुविभागीय दण्डाधिकारियों को उनके अनुभाग क्षेत्र का नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। जांच दल यह सुनिश्चित करेगा कि संबंधित कोचिंग सेंटरों के पास वैध फायर एनओसी (अग्नि सुरक्षा प्रमाण पत्र) उपलब्ध है या नहीं, और परिसर में लगे अग्नि शमन उपकरण (जैसे फायर एक्स्टिंग्विशर, होज़ रील, स्प्रिंकलर) क्रियाशील हैं या एक्सपायर हो चुके हैं। वे आपातकालीन निकास मार्गों की चौड़ाई और अवरोध-मुक्त स्थिति का भी आकलन करेंगे, साथ ही यह भी जांचेंगे कि स्टाफ को अग्नि सुरक्षा उपकरणों के संचालन का प्रशिक्षण दिया गया है या नहीं। इलेक्ट्रिकल ऑडिट की स्थिति, जिसमें शॉर्ट सर्किट की संभावनाओं की जांच भी शामिल है, सहित अन्य आवश्यक जांचें भी की जाएंगी। इस दल को तत्काल प्रभाव से अपने-अपने क्षेत्राधिकार के निजी और शासकीय अस्पतालों का भी आकस्मिक निरीक्षण कर 10 दिनों के भीतर संयुक्त जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी, और इसके बाद आगामी प्रत्येक छह माह में निरीक्षण रिपोर्ट देना अनिवार्य होगा।
- देवास जिले के कन्नौद विकास खंड के सतवास में मोहर्रम पर्व पर मनाए जाने वाले हाथी के इतिहास और परंपरा को हिंदू-मुस्लिम एकता (सांप्रदायिक सद्भाव) तथा स्थानीय मराठा संस्कृति का एक अनूठा प्रतीक बताया गया है। यह परंपरा इस क्षेत्र में सदियों से चली आ रही है, जिसमें मराठा समुदाय सक्रिय रूप से मोहर्रम के जुलूसों और आयोजनों में हिस्सा लेता है। मोहर्रम के दौरान मराठा समाज द्वारा एक विशालकाय हाथी का निर्माण किया जाता है। संजय दाभाड़े द्वारा पुश्तैनी समय से यह भीमकाय हाथी बनाया जा रहा है, जिसमें सर्वसमाज बढ़-चढ़कर सहयोग करता है। यह हाथी कलात्मकता और धार्मिक आस्था का मुख्य केंद्र माना जाता है। मोहर्रम की मेहंदी की रात को इस हाथी को एक जुलूस में शामिल किया जाता है, जहाँ पारंपरिक वाद्ययंत्रों की थाप पर हाथी के प्रतीक को आगे-पीछे कर नृत्य कराया जाता है। मोहर्रम के आखिरी दिन बड़ी संख्या में लोग इस हाथी के नीचे से गुजरते हैं, यह मानते हुए कि ऐसा करने से उन्हें अच्छे स्वास्थ्य का आशीर्वाद मिलता है और उनकी मन्नतें पूरी होती हैं। यह परंपरा सतवास में विभिन्न संस्कृतियों और धर्मों के लोगों द्वारा एक साथ मिलकर त्योहार मनाने के गहरे सांस्कृतिक महत्व को दर्शाती है।2
- सीहोर में साइबर जागरूकता अभियान "सेफ क्लिक 2.0 – 2026" के अंतर्गत दर्शन एकेडमी में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान सीहोर की SDOP श्रीमती पूजा शर्मा और साइबर सेल प्रभारी श्री सुशील साल्वे ने छात्र-छात्राओं तथा स्टाफ को संबोधित करते हुए विभिन्न साइबर अपराधों से बचाव के महत्वपूर्ण उपाय बताए। इसमें डिजिटल अरेस्ट, KYC, OTP, UPI और निवेश धोखाधड़ी जैसे विषयों पर विस्तृत जानकारी दी गई। कार्यक्रम में साइबर सुरक्षा से संबंधित पेम्फलेट भी वितरित किए गए और व्याख्यान के माध्यम से सभी प्रतिभागियों को सुरक्षित डिजिटल व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। अधिकारियों ने नागरिकों से विशेष अपील की कि किसी भी संदिग्ध कॉल, लिंक या OTP को साझा न करें। साथ ही, साइबर ठगी का शिकार होने की स्थिति में तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराने का आग्रह भी किया गया।1
- भगवान के प्रति अटूट आस्था और श्रद्धा का एक अनूठा उदाहरण सामने आया है, जहाँ बालाघाट जिले की कटंगी तहसील निवासी आकाश कुमरे 800 किलोमीटर की दंडवत यात्रा पर ओंकारेश्वर और महाकालेश्वर के दर्शन के लिए निकले हैं। उन्होंने यह यात्रा 17 मार्च को बालाघाट जिले से शुरू की थी। अपनी इस अनोखी श्रद्धा यात्रा के दौरान आकाश कुमरे प्रतिदिन अपनी क्षमता अनुसार 5 से 10 किलोमीटर का सफर तय करते हैं। शुक्रवार को वे अपनी यात्रा के 102वें दिन मुंदी पहुँचे।1
- देवास जिले के उदयनगर में पुलिस ने एक खास पहल की है, जिसका नाम 'सेफ क्लिक अभियान' है। इस अभियान के माध्यम से पुलिस ने छात्र-छात्राओं को साइबर सुरक्षा के महत्वपूर्ण पहलुओं से अवगत कराया और उन्हें इसकी विस्तृत जानकारी दी।1
- सीहोर स्थित भारत मल्टी हॉस्पिटल में शाहजहांपुर जिले के ग्राम आनंदीखेड़ी निवासी मरीज अमन मीना की उपचार के दौरान मृत्यु हो गई। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में इंजेक्शन लगाए जाने के तुरंत बाद ही अमन मीना की तबीयत अचानक बिगड़ी और उनकी मौत हो गई। अमन मीना को पुलिया से गिरने के बाद इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इस घटना से आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया और आरोप लगाया कि गलत इंजेक्शन तथा कथित लापरवाही के कारण मरीज की जान गई है। परिजनों की मांग है कि यदि समय पर सही उपचार मिलता और कोई लापरवाही न होती, तो अमन मीना की जान बच सकती थी। वे दोषी डॉक्टर और संबंधित स्टाफ के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।2
- बरखेड़ा हसन ग्राम में गुरुवार को मोहर्रम माह की 9 तारीख पर हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी 'कत्ल की रात' पूरे अकीदत के साथ मनाई गई। इस अवसर पर एक भव्य जुलूस निकाला गया। यह जुलूस चौकी इमाम बाड़े से शुरू हुआ, जिसमें अखाड़े के पहलवानों द्वारा ताजिया और सवारी के साथ भागीदारी की गई। जुलूस विभिन्न प्रमुख स्थानों जैसे सिंधी चौक, लाला जी चौक, राय अयान मोहल्ला, जामा मस्जिद और बस स्टैंड से होता हुआ कब्रिस्तान तक पहुँचा। कब्रिस्तान में पहुँचने पर ताजियों को सलामी दी गई, जिसके बाद जुलूस वापस चौकी इमाम बाड़ा आकर समाप्त हुआ।3
- मध्य प्रदेश के हरसूद में मुहर्रम का त्योहार अमन और भाईचारे के माहौल में मनाया गया। इस अवसर पर शहर में ताज़िये भी निकाले गए।1
- कन्नौद जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत बामनीखुर्द में प्रधानमंत्री सड़क योजना के तहत बनी एक पुलिया लगातार बारिश के कारण क्षतिग्रस्त हो गई है, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों का आवागमन बेहद जोखिम भरा हो गया है। ग्रामीणों ने शुक्रवार को बताया कि किसी भी दिन यहां कोई बड़ा हादसा हो सकता है। ग्रामीणों के अनुसार, क्षेत्र में पिछले दो दिनों से हो रही लगातार बारिश के चलते यह पुलिया टूट गई है। उन्होंने प्रशासन से तत्काल इस पुलिया पर यातायात बंद करने और बैरिकेडिंग लगाने की मांग की है, ताकि किसी भी अनहोनी से बचा जा सके। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री सड़क योजना के जिम्मेदार अधिकारियों को पुलिया की जर्जर स्थिति के बारे में कई बार सूचित किया गया था, लेकिन उन्होंने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया, जिसके परिणामस्वरूप पुलिया अब क्षतिग्रस्त हो चुकी है। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया है कि वहां बैरिकेडिंग या चेतावनी बोर्ड लगाकर आमजन को सावधानीपूर्वक निकलने के निर्देश दिए जाएं, जिससे किसी भी तरह के हादसे को टाला जा सके।3