देवास जिले के कन्नौद विकास खंड के सतवास में मोहर्रम पर्व पर मनाए जाने वाले हाथी के इतिहास और परंपरा को हिंदू-मुस्लिम एकता (सांप्रदायिक सद्भाव) तथा स्थानीय मराठा संस्कृति का एक अनूठा प्रतीक बताया गया है। यह परंपरा इस क्षेत्र में सदियों से चली आ रही है, जिसमें मराठा समुदाय सक्रिय रूप से मोहर्रम के जुलूसों और आयोजनों में हिस्सा लेता है। मोहर्रम के दौरान मराठा समाज द्वारा एक विशालकाय हाथी का निर्माण किया जाता है। संजय दाभाड़े द्वारा पुश्तैनी समय से यह भीमकाय हाथी बनाया जा रहा है, जिसमें सर्वसमाज बढ़-चढ़कर सहयोग करता है। यह हाथी कलात्मकता और धार्मिक आस्था का मुख्य केंद्र माना जाता है। मोहर्रम की मेहंदी की रात को इस हाथी को एक जुलूस में शामिल किया जाता है, जहाँ पारंपरिक वाद्ययंत्रों की थाप पर हाथी के प्रतीक को आगे-पीछे कर नृत्य कराया जाता है। मोहर्रम के आखिरी दिन बड़ी संख्या में लोग इस हाथी के नीचे से गुजरते हैं, यह मानते हुए कि ऐसा करने से उन्हें अच्छे स्वास्थ्य का आशीर्वाद मिलता है और उनकी मन्नतें पूरी होती हैं। यह परंपरा सतवास में विभिन्न संस्कृतियों और धर्मों के लोगों द्वारा एक साथ मिलकर त्योहार मनाने के गहरे सांस्कृतिक महत्व को दर्शाती है।
देवास जिले के कन्नौद विकास खंड के सतवास में मोहर्रम पर्व पर मनाए जाने वाले हाथी के इतिहास और परंपरा को हिंदू-मुस्लिम एकता (सांप्रदायिक सद्भाव) तथा स्थानीय मराठा संस्कृति का एक अनूठा प्रतीक बताया गया है। यह परंपरा इस क्षेत्र में सदियों से चली आ रही है, जिसमें मराठा समुदाय सक्रिय रूप से मोहर्रम के जुलूसों और आयोजनों में हिस्सा लेता है। मोहर्रम के दौरान मराठा समाज द्वारा एक विशालकाय हाथी का निर्माण किया जाता है। संजय दाभाड़े द्वारा पुश्तैनी समय से यह भीमकाय हाथी बनाया जा रहा है, जिसमें सर्वसमाज बढ़-चढ़कर सहयोग करता है। यह हाथी कलात्मकता और
धार्मिक आस्था का मुख्य केंद्र माना जाता है। मोहर्रम की मेहंदी की रात को इस हाथी को एक जुलूस में शामिल किया जाता है, जहाँ पारंपरिक वाद्ययंत्रों की थाप पर हाथी के प्रतीक को आगे-पीछे कर नृत्य कराया जाता है। मोहर्रम के आखिरी दिन बड़ी संख्या में लोग इस हाथी के नीचे से गुजरते हैं, यह मानते हुए कि ऐसा करने से उन्हें अच्छे स्वास्थ्य का आशीर्वाद मिलता है और उनकी मन्नतें पूरी होती हैं। यह परंपरा सतवास में विभिन्न संस्कृतियों और धर्मों के लोगों द्वारा एक साथ मिलकर त्योहार मनाने के गहरे सांस्कृतिक महत्व को दर्शाती है।
- सीहोर में अनुभाग सीएसपी सीहोर के अंतर्गत आने वाले सभी थाना क्षेत्रों में 'सेफ क्लिक 2.0' साइबर जागरूकता अभियान के तहत व्यापक जन जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में आमजन को डिजिटल अरेस्ट, फर्जी केवाईसी अपडेट, ओटीपी साझा करने के जोखिम, यूपीआई फ्रॉड और निवेश धोखाधड़ी जैसे विभिन्न साइबर अपराधों से बचाव के तरीकों के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। इस दौरान, पुलिस अधिकारियों और वक्ताओं ने साइबर ठगी के नए-नए तरीकों से अवगत कराते हुए लोगों से विशेष रूप से सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने नागरिकों को किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ ओटीपी, बैंकिंग संबंधी या अन्य व्यक्तिगत जानकारी साझा न करने के लिए प्रेरित किया। अभियान के तहत, साइबर सुरक्षा से जुड़े पेम्फलेट भी वितरित किए गए और लोगों को यह जानकारी दी गई कि साइबर अपराध होने पर तुरंत हेल्पलाइन 1930 या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। इस पूरे अभियान का मुख्य उद्देश्य आमजन को साइबर अपराधों के प्रति जागरूक करना और उन्हें सुरक्षित डिजिटल लेनदेन के लिए प्रेरित करना है।1
- आज दिनांक 25/6/2026 को सीहोर जिले के ग्राम शाहजहाँपुर में आवेदक/आवेदिका फरमुन्दा सुल्तान और नावेद खान की खसरा नंबर 130/1, 130/2, 130/3, 130/4/1, 130/4/2 कुल 6.071 हेक्टेयर भूमि पर राजस्व विभाग और पुलिस बल की उपस्थिति में हकाई-जुताई और बोवनी कराई गई, जिसके बाद यह जमीन दबंगों के कब्जे से मुक्त होकर आवेदकगणों को सौंप दी गई। इस दौरान, मौके पर मौजूद अनावेदक पर्वत सिंह, देवकरण और उनके पुत्र गोपी आदि ने शासकीय कार्य में बाधा डालने और शांति भंग करने का प्रयास किया। देवकरण द्वारा यह धमकी भी दी गई कि "इस भूमि को मैं ही बोयूंगा और काटूंगा भी मैं ही", साथ ही आवेदकगणों को जान से मारने की धमकी भी दी गई, जिससे क्षेत्र में दहशत का माहौल बन गया है और शांति भंग होने का पूरा-पूरा अंदेशा है। यह जानकारी सामने आई है कि फरमुन्दा सुल्तान और अन्य ने पूर्व में यह भूमि क्रय की थी, जिस पर क्रेतागण कुछ वर्षों तक फसल का लाभ लेते रहे। हालांकि, पिछले एक-दो वर्षों से दबंग व्यक्ति अजब सिंह पटेल, उनके पुत्र देवकरण और तुलसीराम द्वारा इस भूमि पर कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा था। भूमि स्वामी द्वारा बोई गई फसल को अनावेदक अजब सिंह, देवकरण आदि दबंगई से काट लेते थे और उन्हें जान से मारने की धमकी देते थे। इसी परेशानी के चलते भूमि स्वामी ने आयुक्त महोदय के कार्यालय में दबंगों द्वारा अपनी भूमि के कब्जे के संबंध में आवेदन किया था। इस घटना के संबंध में थाना प्रभारी दोराहा को उचित दंडात्मक कार्यवाही हेतु एक पत्र भी लिखा गया है। यह भी ज्ञात हुआ है कि तहसील दोराहा में कई ऐसी भूमियाँ हैं जिन्हें विक्रेता द्वारा विक्रय करने के बाद पुनः कब्जा कर लिया जाता है और क्रेता को डरा-धमकाकर भगा दिया जाता है। भविष्य में भी तहसील स्तर पर इस तरह की कार्रवाइयाँ जारी रखी जाएँगी।2
- पुणे के युवा कारोबारी केतन अग्रवाल की नवंबर में होने वाली शादी की तैयारियाँ जोरों पर थीं, जिसके लिए परिवार ने राजस्थान में करीब 17 करोड़ रुपये का एक लग्ज़री पैलेस बुक किया था। लेकिन शादी से पहले ही केतन की मौत हो गई, जिसने पूरे परिवार की खुशियों को मातम में बदल दिया और पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 18 जून को केतन अपनी मंगेतर सिया गोयल के साथ लोहागढ़ किले गए थे। कुछ समय बाद सूचना मिली कि केतन गहरी खाई में गिर गए हैं। शुरुआत में इसे एक हादसा बताया गया, लेकिन पुलिस जांच में मोबाइल डेटा, कॉल रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर मामला संदिग्ध पाया गया। इसके बाद पुलिस ने सिया गोयल और उनके कथित प्रेमी चेतन चौधरी को गिरफ्तार किया, आरोप है कि दोनों ने मिलकर केतन की हत्या की साजिश रची थी। इस मामले में हर दिन नए खुलासे सामने आ रहे हैं। पुलिस का कहना है कि पूछताछ के दौरान दोनों आरोपी एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। आज की रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस का दावा है कि चेतन चौधरी ने सिया को इस अपराध के लिए उकसाया था। हालांकि, दोनों के अलग-अलग बयानों के कारण जांच और भी जटिल हो गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की है। उन्होंने फास्ट-ट्रैक कोर्ट में इस केस की सुनवाई कराने के निर्देश दिए हैं और वरिष्ठ अधिवक्ता उज्ज्वल निकम को विशेष लोक अभियोजक नियुक्त करने का निर्णय भी लिया गया है। कानूनी पहलुओं पर बात करें तो, यदि अदालत में यह साबित होता है कि हत्या पहले से योजना बनाकर की गई थी, तो भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत हत्या और आपराधिक साजिश से संबंधित गंभीर धाराएँ लागू हो सकती हैं। हालांकि, भारतीय कानून का मूल सिद्धांत यह है कि जब तक अदालत किसी आरोपी को दोषी घोषित नहीं करती, तब तक वह केवल आरोपी है, अपराधी नहीं। यह केस कई सवाल खड़े करता है कि क्या यह सिर्फ एक प्रेम प्रसंग का मामला था, क्या वास्तव में पहले से साजिश रची गई थी, या जांच में अभी और तथ्य सामने आने बाकी हैं। इन सभी सवालों के जवाब पुलिस की पूरी जांच और अदालत की सुनवाई के बाद ही सामने आएंगे।1
- मध्य प्रदेश के रतलाम में मुहर्रम के जुलूस के दौरान एक बड़ा हादसा हो गया। यह घटना तब हुई जब जुलूस में शामिल एक ताजिया हाईटेंशन बिजली की लाइन से टकरा गया। इस दुखद हादसे में तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दस अन्य लोग गंभीर रूप से झुलस गए।1
- देवास कलेक्टर ऋतुराज सिंह ने जिले में संचालित समस्त कोचिंग सेंटरों में विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष जांच दल का गठन किया है। इस दल का मुख्य कार्य इन कोचिंग सेंटरों में स्थापित अग्नि शमन यंत्रों, आपातकालीन निकास मार्गों और फायर एनओसी/अग्नि सुरक्षा प्रमाण पत्रों की सघन जांच करना है। इस जांच दल में शहरी क्षेत्र के लिए देवास नगर पालिक निगम आयुक्त या उनके प्रतिनिधि और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी या उनके प्रतिनिधि शामिल हैं। ग्रामीण और नगरीय निकायों के लिए नगर पालिक निगम देवास के फॉयर अधिकारी को नियुक्त किया गया है। शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के लिए लोक निर्माण विभाग (विद्युत सुरक्षा एवं संधारण) देवास के कार्यपालन यंत्री या उनके प्रतिनिधि तथा संबंधित तहसील क्षेत्र के कार्यपालिक दण्डाधिकारी भी दल का हिस्सा होंगे। संबंधित नगर परिषद के लिए मुख्य नगर पालिक अधिकारी/प्रतिनिधि और संबंधित अनुभाग क्षेत्र के लिए खंड चिकित्सा अधिकारी/प्रतिनिधि को भी इसमें शामिल किया गया है। समस्त संबंधित अनुविभागीय दण्डाधिकारियों को उनके अनुभाग क्षेत्र का नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। जांच दल यह सुनिश्चित करेगा कि संबंधित कोचिंग सेंटरों के पास वैध फायर एनओसी (अग्नि सुरक्षा प्रमाण पत्र) उपलब्ध है या नहीं, और परिसर में लगे अग्नि शमन उपकरण (जैसे फायर एक्स्टिंग्विशर, होज़ रील, स्प्रिंकलर) क्रियाशील हैं या एक्सपायर हो चुके हैं। वे आपातकालीन निकास मार्गों की चौड़ाई और अवरोध-मुक्त स्थिति का भी आकलन करेंगे, साथ ही यह भी जांचेंगे कि स्टाफ को अग्नि सुरक्षा उपकरणों के संचालन का प्रशिक्षण दिया गया है या नहीं। इलेक्ट्रिकल ऑडिट की स्थिति, जिसमें शॉर्ट सर्किट की संभावनाओं की जांच भी शामिल है, सहित अन्य आवश्यक जांचें भी की जाएंगी। इस दल को तत्काल प्रभाव से अपने-अपने क्षेत्राधिकार के निजी और शासकीय अस्पतालों का भी आकस्मिक निरीक्षण कर 10 दिनों के भीतर संयुक्त जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी, और इसके बाद आगामी प्रत्येक छह माह में निरीक्षण रिपोर्ट देना अनिवार्य होगा।1
- अनुभाग बुदनी के अंतर्गत आने वाले सभी थाना क्षेत्रों में 'सेफ क्लिक 2.0' नामक एक साइबर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अभियान का उद्देश्य लोगों को विभिन्न प्रकार की डिजिटल धोखाधड़ी के प्रति सचेत करना था। कार्यक्रम के दौरान डिजिटल अरेस्ट, केवाईसी (KYC), ओटीपी (OTP), यूपीआई (UPI) संबंधित धोखाधड़ी और निवेश से जुड़ी जालसाजी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से जानकारी दी गई। इस जागरूकता अभियान के तहत वक्ताओं ने व्याख्यान दिए और लोगों में जानकारी फैलाने के लिए पैम्फलेट भी वितरित किए गए।1
- सोशल मीडिया पर 'अजब मध्यप्रदेश के गजब ज्ञानी' शीर्षक से एक पोस्ट साझा की गई है, जिसमें मध्य प्रदेश के कुछ लोगों पर कटाक्ष किया गया है। पोस्ट इस बात पर हैरानी और व्यंग्य व्यक्त करती है कि जब किसी व्यक्ति विशेष पर आरोप लगते हैं, तो उसे सीधे सनातन धर्म पर हमला मान लिया जाता है। यह पोस्ट ऐसे बयानों की तर्कहीनता पर सवाल उठाती है, इस बात पर ज़ोर देते हुए कि यह “कुछ भी दिए जाओ” वाली स्थिति है।1
- मुंदी में जलवा और दैत फाटे के बीच कुछ देर पहले एक सड़क हादसा हो गया, जिसमें चार लोग घायल हो गए। बताया जा रहा है कि यह दुर्घटना तब हुई जब एक मोड़ पर दो बाइकें अनियंत्रित होकर सड़क से नीचे उतर गईं। घटना के तुरंत बाद, मौके पर मौजूद स्थानीय लोगों ने राहत कार्य शुरू कर दिया। मुंदी निवासी मुबारिक मंसूरी और अन्य लोगों ने मानवता का परिचय देते हुए घायलों की सहायता की और उन्हें उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया। हालांकि, घायलों की पहचान और दुर्घटना के विस्तृत कारणों की जानकारी फिलहाल प्राप्त नहीं हो सकी है। इस हादसे को देखने के लिए मौके पर राहगीरों की भीड़ जमा हो गई थी।1