आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का 12 वे दिन भी धरना प्रदर्शन जारी।! कालाढूंगी। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का मानदेय बढ़ाने और अन्य कई मांगों को लेकर चल रहे धरना प्रदर्शन 14 दिन भी जारी रहा । कालाढूंगी के दीन दयाल पार्क में चल रहे आंगनबाड़ी कार्यकत्री के धरने पर पहुंचे यू,के, डी,के कार्यकर्ताओं ने धरने को अपना पूर्ण समर्थन देते हुए भीषण गर्मी में अपनी जायज मांगों को लेकर धरने बैठी कार्यकत्रीयो को पेयजल पिलाया वही इस दौरान ये,के,डी के कालाढूंगी विधानसभा अध्यक्ष प्रमोद जोशी ने कहा राज्य सरकार को इनकी जायज मांगों को तुरंत मानकर धरना समाप्त करवाना चाहिए।वही कालाढूंगी,प्रभारी रवी बोरा, व पुष्कर बिष्ट ने कहा आज के महंगाई के दौर में इतने कम खर्चे में परिवार पालना मुश्किल है जबकि कार्यकर्त्री बहन अपना कार्य पूरा ईमानदारी से करती हैं इनका मानदेय तुरंत बढ़ना चाहिए वहीं उन्होंने कहा हम इनके आंदोलन में हमेशा इनके साथ खड़े रहेंगे।वही आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का कहना है कि उन्हें मात्र 9 हजार 300 रुपया मानदेय दिया जाता है जो बहुत कम है, उन्होंने 24 हजार रुपए वेतन के रूप में दिए जाने की मांग की।कहा कि उनके द्वारा कई तरह का फील्ड का काम भी किया जाता है, इसलिए बायोमेट्रिक मशीन की उपयोगिता को खत्म किया जाए। सेवानिवृत्ति पर 10 लाख रुपए के शासनादेश होने के बाद ही 300 रुपए की कटौती की जाए। आंगनबाड़ी कार्यकत्री सेविका मिनी कर्मचारी संगठन का कहना है कि उनकी मांगों को नहीं माना जाता है तो धरना प्रदर्शन को उग्र रूप दिया जाएगा।इस दौरान अध्यक्ष गीता मोमी, रमा पांडे, गंगा बिष्ट, शबनम परवीन, पुष्पा राठौर, द्रोपदी कुंवर, निर्मला कार्की, सना परवीन, सरस्वती, मंजू बोहरा, जीवंती देवी, रशीदा, पुष्पा पंत, मंजू सामंत, किरन, गीता बोरा, तनुजा, गीता देवी, विमला जोशी आदि उपस्थित रही।
आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का 12 वे दिन भी धरना प्रदर्शन जारी।! कालाढूंगी। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का मानदेय बढ़ाने और अन्य कई मांगों को लेकर चल रहे धरना प्रदर्शन 14 दिन भी जारी रहा । कालाढूंगी के दीन दयाल पार्क में चल रहे आंगनबाड़ी कार्यकत्री के धरने पर पहुंचे यू,के, डी,के कार्यकर्ताओं ने धरने को अपना पूर्ण समर्थन देते हुए भीषण गर्मी में अपनी जायज मांगों को लेकर धरने बैठी कार्यकत्रीयो को पेयजल पिलाया वही इस दौरान ये,के,डी के कालाढूंगी विधानसभा अध्यक्ष प्रमोद जोशी ने कहा राज्य सरकार को इनकी जायज मांगों को तुरंत मानकर धरना समाप्त करवाना चाहिए।वही कालाढूंगी,प्रभारी रवी बोरा, व पुष्कर बिष्ट ने कहा आज के महंगाई के दौर में इतने कम खर्चे में परिवार पालना मुश्किल है जबकि कार्यकर्त्री बहन अपना कार्य पूरा ईमानदारी से करती हैं इनका मानदेय तुरंत बढ़ना चाहिए वहीं उन्होंने कहा हम इनके आंदोलन में हमेशा इनके साथ खड़े रहेंगे।वही आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का कहना है कि उन्हें मात्र 9 हजार 300 रुपया मानदेय दिया जाता है जो बहुत कम है, उन्होंने 24 हजार रुपए वेतन के रूप में दिए जाने की मांग की।कहा कि उनके द्वारा कई तरह का फील्ड का काम भी किया जाता है, इसलिए बायोमेट्रिक मशीन की उपयोगिता को खत्म किया जाए। सेवानिवृत्ति पर 10 लाख रुपए के शासनादेश होने के बाद ही 300 रुपए की कटौती की जाए। आंगनबाड़ी कार्यकत्री सेविका मिनी कर्मचारी संगठन का कहना है कि उनकी मांगों को नहीं माना जाता है तो धरना प्रदर्शन को उग्र रूप दिया जाएगा।इस दौरान अध्यक्ष गीता मोमी, रमा पांडे, गंगा बिष्ट, शबनम परवीन, पुष्पा राठौर, द्रोपदी कुंवर, निर्मला कार्की, सना परवीन, सरस्वती, मंजू बोहरा, जीवंती देवी, रशीदा, पुष्पा पंत, मंजू सामंत, किरन, गीता बोरा, तनुजा, गीता देवी, विमला जोशी आदि उपस्थित रही।
- कालाढूंगी। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का मानदेय बढ़ाने और अन्य कई मांगों को लेकर चल रहे धरना प्रदर्शन 14 दिन भी जारी रहा । कालाढूंगी के दीन दयाल पार्क में चल रहे आंगनबाड़ी कार्यकत्री के धरने पर पहुंचे यू,के, डी,के कार्यकर्ताओं ने धरने को अपना पूर्ण समर्थन देते हुए भीषण गर्मी में अपनी जायज मांगों को लेकर धरने बैठी कार्यकत्रीयो को पेयजल पिलाया वही इस दौरान ये,के,डी के कालाढूंगी विधानसभा अध्यक्ष प्रमोद जोशी ने कहा राज्य सरकार को इनकी जायज मांगों को तुरंत मानकर धरना समाप्त करवाना चाहिए।वही कालाढूंगी,प्रभारी रवी बोरा, व पुष्कर बिष्ट ने कहा आज के महंगाई के दौर में इतने कम खर्चे में परिवार पालना मुश्किल है जबकि कार्यकर्त्री बहन अपना कार्य पूरा ईमानदारी से करती हैं इनका मानदेय तुरंत बढ़ना चाहिए वहीं उन्होंने कहा हम इनके आंदोलन में हमेशा इनके साथ खड़े रहेंगे।वही आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का कहना है कि उन्हें मात्र 9 हजार 300 रुपया मानदेय दिया जाता है जो बहुत कम है, उन्होंने 24 हजार रुपए वेतन के रूप में दिए जाने की मांग की।कहा कि उनके द्वारा कई तरह का फील्ड का काम भी किया जाता है, इसलिए बायोमेट्रिक मशीन की उपयोगिता को खत्म किया जाए। सेवानिवृत्ति पर 10 लाख रुपए के शासनादेश होने के बाद ही 300 रुपए की कटौती की जाए। आंगनबाड़ी कार्यकत्री सेविका मिनी कर्मचारी संगठन का कहना है कि उनकी मांगों को नहीं माना जाता है तो धरना प्रदर्शन को उग्र रूप दिया जाएगा।इस दौरान अध्यक्ष गीता मोमी, रमा पांडे, गंगा बिष्ट, शबनम परवीन, पुष्पा राठौर, द्रोपदी कुंवर, निर्मला कार्की, सना परवीन, सरस्वती, मंजू बोहरा, जीवंती देवी, रशीदा, पुष्पा पंत, मंजू सामंत, किरन, गीता बोरा, तनुजा, गीता देवी, विमला जोशी आदि उपस्थित रही।1
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- *जलवायु परिवर्तन से लड़ने के लिए जन समुदाय की भागीदारी और पर्यावरण अनुकूल जीवन शैली जरूरी : लोकसभा अध्यक्ष* *जैव विविधता संरक्षण में स्थानीय समुदायों की भूमिका महत्वपूर्ण है : लोकसभा अध्यक्ष* *उत्तराखंड की पर्यावरण संरक्षण में समृद्ध विरासत है: लोकसभा अध्यक्ष* *लोक सभा अध्यक्ष ने नैनीताल में वन पंचायत प्रतिनिधियों तथा त्रिस्तरीय पंचायत व स्थानीय शहरी निकाय के निर्वाचित सदस्यों को संबोधित किया* नैनीताल, 29 अप्रैल 2026 सूवि। लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने बुधवार को सतत विकास एवं पारिस्थितिक संतुलन सुनिश्चित करने के लिए सभी हितधारकों - सरकारी संस्थानों, पंचायती राज संस्थाओं, नगरीय निकायों, वन पंचायतों तथा नागरिकों - की संयुक्त एवं सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाना और पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों का सम्मान करना दीर्घकालिक पर्यावरणीय स्थिरता और राष्ट्रीय प्रगति के लिए अत्यंत आवश्यक है। नैनीताल स्थित डॉ. रघुनंदन सिंह टोलिया प्रशासनिक अकादमी में वन पंचायत प्रतिनिधियों तथा त्रिस्तरीय पंचायत व स्थानीय शहरी निकाय के निर्वाचित सदस्यों को संबोधित करते हुए श्री बिरला ने कहा कि उत्तराखंड की वन पंचायतें सामुदायिक भागीदारी आधारित वन प्रबंधन का एक सफल मॉडल बनकर उभरी हैं, जो न केवल वन संरक्षण एवं संवर्धन में योगदान दे रही हैं, बल्कि रोजगार सृजन और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को भी साकार कर रही हैं। इस दौरान उन्होंने प्रतिनिधियों से सीधे संवाद कर उनके अनुभव, चुनौतियों और सुझावों को भी सुना। वन पंचायतों को “भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे सशक्त कड़ी” बताते हुए श्री बिरला ने कहा कि जमीनी स्तर की संस्थाएं संरक्षण और सुशासन में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। वन पंचायत से संवाद करना मेरे लिए लोकतंत्र की सबसे सशक्त कड़ी से मिलने जैसा है। *उन्होंने कहा कि यहॉं की पंचायतों का अनुभव दिल्ली की पंचायत से कम नहीं है।* जल, जंगल और जमीन के पारस्परिक संबंध को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि ये प्राकृतिक संसाधन पारिस्थितिक संतुलन और मानव जीवन के आधार हैं। इनका संरक्षण केवल पर्यावरणीय आवश्यकता नहीं, बल्कि सामूहिक दायित्व है, जिसके लिए जमीनी स्तर पर सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक एवं पर्यावरणीय विरासत की सराहना करते हुए श्री बिरला ने कहा कि यह राज्य मानव और प्रकृति के सामंजस्यपूर्ण सह-अस्तित्व का जीवंत उदाहरण है। उन्होंने स्थानीय समुदायों के अमूल्य योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि जल और वृक्षों के प्रति श्रद्धा जैसी परंपराएं आज भी सतत जीवनशैली का मार्गदर्शन कर रही हैं। राज्य के ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि औपनिवेशिक काल में वन संसाधनों के दोहन के विरुद्ध स्थानीय समुदायों ने प्रभावी प्रतिरोध किया। 1930 के दशक से वन संरक्षण, सुरक्षा और अधिकारों के लिए निरंतर कानून एवं नीतिगत प्रयास किए गए हैं। उन्होंने कहा कि इन नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में शेष चुनौतियों का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए। उन्होंने स्थानीय समुदायों की भूमिका पर बल देते हुए कहा कि वन और वन्यजीवों का संरक्षण तभी संभव है जब इनसे जुड़े लोगों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित हो। उन्होंने पंचायती राज संस्थाओं, नगरीय निकायों और वन पंचायतों से आह्वान किया कि वे जनभागीदारी को बढ़ावा दें, पर्यावरण अनुकूल आजीविका के अवसर विकसित करें तथा संतुलित एवं सतत विकास सुनिश्चित करें। योग और आयुर्वेद की वैश्विक बढ़ती स्वीकार्यता का उल्लेख करते हुए श्री बिरला ने कहा कि उत्तराखंड इन पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों का प्रमुख केंद्र है। उन्होंने वन पंचायतों के सहयोग से औषधीय पौधों के लिए व्यापक कार्ययोजना बनाने, उनके वैल्यू एडिशन, शोध और आधुनिक स्वास्थ्य प्रणाली के साथ एकीकरण पर बल दिया। उन्होंने कहा कि एलोपैथी में व्यापक शोध हुआ है, किंतु औषधीय पौधों और पारंपरिक ज्ञान पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि स्थानीय समुदायों के पास व्यावहारिक और अनुभवजन्य ज्ञान का भंडार है, विशेषकर वनाग्नि जैसी चुनौतियों से निपटने में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। यही लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति है, जहां अंतिम व्यक्ति की आवाज भी शासन-प्रशासन तक पहुंचती है और उसे महत्व दिया जाता है। जलवायु परिवर्तन की वैश्विक चुनौती का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इससे निपटने के लिए जनभागीदारी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली के संदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तराखंड का वन पंचायत मॉडल विश्व के लिए उदाहरण बन सकता है। उन्होंने राज्य में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि वन संरक्षण में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री रामसिंह कैड़ा, सांसद अजय भट्ट, आयुक्त कुमाऊं व सचिव मुख्यमंत्री दीपक रावत, जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल, अपर प्रमुख वन संरक्षक विवेक पाण्डे द्वारा भी अपने विचार व्यक्त किए। संवाद कार्यक्रम में विभिन्न वन पंचायतों,त्रिस्तरीय पंचायत,नगर विकास से आए प्रतिनिधियों द्वारा अनेक सुझाव, समस्याओं आदि को रखा गया। माननीय अध्यक्ष ने सभी प्रतिनिधियों के अनुभवों को दिल्ली तक ले जाने का आश्वासन दिया। कहा कि उत्तराखंड ने जंगल बचाने के लिए बलिदान दिए हैं और आज भी यहाँ के लोग प्रकृति संरक्षण के लिए समर्पित हैं। कार्यक्रम के दौरान प्रतिनिधियों ने वनाग्नि की रोकथाम, वन पंचायतों के सुदृढ़ीकरण, पंचायतों व नगर निकायों को वित्तीय सहायता एवं तकनीकी सहयोग व विभिन्न अधिकार दिए जाने से संबंधित बात रखी व अपने अनुभव एवं समस्याएं साझा कीं। इससे पूर्व लोकसभा अध्यक्ष श्री बिरला के नैनीताल आगमन पर सांसद नैनीताल उधमसिंह नगर संसदीय क्षेत्र अजय भट्ट, आयुक्त कुमाऊँ मंडल व सचिव माननीय मुख्यमंत्री दीपक रावत,आईजी रिद्धिम अग्रवाल, जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल द्वारा उनका स्वागत किया। संवाद कार्यक्रम के अवसर पर अध्यक्ष जिला पंचायत नैनीताल दीपा दरमवाल,मेयर हल्द्वानी गजराज बिष्ट, काशीपुर दीपक बाली, उत्तराखंड सरकार में डाईत्वधारी शांति मेहरा सहित विभिन्न क्षेत्र प्रमुख, नगर पालिका व नगर पंचायत के अध्यक्ष,पार्षद, सदस्य जिला पंचायत, क्षेत्र पंचायत व ग्राम पंचायत सहित त्रिस्तरीय पंचायत के प्रतिनिधि एवं अपर प्रमुख वन संरक्षक विवेक कुमार पांडे,मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं तेजस्विनी पाटिल, मुख्य विकास अधिकारी अरविंद कुमार पांडे,नीतीश मणि त्रिपाठी वन संरक्षक,संयुक्त निदेशक एटीआई महेश कुमार,अपर जिलाधिकारी विवेक राय सहित बड़ी संख्या में प्रतिनिधि एवं अधिकारीगण उपस्थित रहे।4
- बिलासपुर में चलती ट्रेन से गिरकर एक राजमिस्त्री गंभीर रूप से घायल हो गया।जिसे प्राथमिक उपचार के बाद हायर सेंटर रेफर किया गया है।परिजनों के अनुसार घायल हरियाणा में गुरदेव के दर्शन करने के लिए जा रहा था।नगर के डाकखाना रोड पर सरकारी नलकूप के पास रहने वाले सोनू कश्यप की उत्तराखंड के किच्छा में ससुराल है।वह अपनी पत्नी के साथ ससुराल गया हुआ था।बताया जाता है कि वहां उसने अपने साले सतीश के साथ हरियाणा जाकर गुरदेव के दर्शन करने का प्रोग्राम बनाया।बृहस्पतिवार सुबह वह लालकुआं रेलवे स्टेशन से पुरानी दिल्ली तक पहुंचने के लिए अपने साले के साथ संपर्क क्रांति एक्सप्रेस में सवार हुए। ट्रेन के डिब्बे में वह गेट पर खड़े हो गए।ट्रेन जब स्थानीय रेलवे स्टेशन पर पहुंचने वाली थी,तभी अचानक उन्हें चक्कर आ गया और वह चलती ट्रेन में डिब्बे से बाहर पटरियों पर गिर पड़े। स्थानीय रेलवे स्टेशन और कुर्थिया फाटक के बीच पड़ने वाले श्मशान घाट के पास सड़क निर्माण कार्य हो रहा था। वहां काम कर रहे मजदूरों ने घायल को रेल पटरियों पर पड़े देखा और रेलवे स्टेशन व एंबुलेंस को इसकी सूचना दी।मौकें पर पहुंची जीआरपी ने घायल को नगर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया।सीएचसी के चिकित्साधिकारी डॉ मणिक अग्रवाल ने बताया घायल के चेहरे पर कई घाव है,इसकी वजह से टांके लगाने पड़े और जबड़े में भी गंभीर चोट आई है जिससे हायर सेंटर रेफर किया गया है।इस संबंध में प्रभारी निरीक्षक जीत सिंह ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है जांच के उपरांत ही अग्रिम कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।1
- Post by Junaid Junaid1
- बिलासपुर में एसडीएम ने स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ नगर में संचालित एक अल्ट्रासाउंड सेंटर पर छापेमारी की। इस दौरान बिना प्रशिक्षित चिकित्सक और अनियमितताएं पाए जाने पर उसे सील कर दिया। दरअसल क्षेत्र में फर्जी अस्पतालों, अल्ट्रासाउंड सेंटरों और लैब आदि की बाढ़ सी आई हुई है। बताया जाता है कि बिना किसी डिग्री डिप्लोमा कोर्स किए यह लोग इलाज के नाम पर मोटी रकम तो वसूल रहे हैं, बल्कि जिंदगियों से खिलवाड़ भी कर रहे।बुधवार की दोपहर उप जिलाधिकारी अरूण कुमार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्साधीक्षक डॉ.पदम सिंह सहित स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ अचानक अस्पताल रोड स्थित मेट्रो केयर डायग्नोस्टिक अल्ट्रासाउंड सेंटर पर पहुंचें।इसे संचालक और स्टाफ में खलबली मच गई।वही एसडीएम ने टीम के साथ सेंटर का निरीक्षण किया इस जहां प्रशिक्षित चिकित्सक के न मिलने तथा अल्ट्रासाउंड सेंटर पर अनियमितताएं पाए जाने पर उसे सील कर दिया। उधर मौके से संचालक को भी हिरासत में लिया गया लेकिन इसकी कोई पुष्टि नही की गई थी।एसडीएम ने बताया कि अल्ट्रासाउंड सेंटर पर सीलिंग की कार्रवाई करते हुए अग्रिम कार्रवाई हेतु आंख्या जिलाधिकारी को प्रेषित की गई है।गौरतलब हो कि स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई से नगर में संचालित अन्य अवैध अल्ट्रासाउंड सेंटर संचालकों में खलबली मची हुई है।जिसके चलते अधिकांश अल्ट्रासाउंड संचालक अपनी अपनी दुकानें बंद कर भाग निकले।1