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- *संघर्ष, संकल्प और सफलता की मिसाल बनीं उलूम फातिमा — ऑल इंडिया बार काउंसिल एग्जाम पास कर हिंडौन सिटी की पहली मुस्लिम महिला वकील बनकर रचा इतिहास* संवाददाता हनीस शेख कुतकपुर हिंडौन। शहर के इतिहास में शुक्रवार का दिन स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया, जब हिंडौन सिटी की होनहार बेटी उलूम फातिमा ने ऑल इंडिया बार काउंसिल एग्जाम पास कर न सिर्फ अपने परिवार बल्कि पूरे शहर और समाज का नाम रोशन कर दिया। यह उपलब्धि इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि उलूम फातिमा हिंडौन सिटी की पहली मुस्लिम महिला वकील बनकर उभरी हैं। उनकी यह सफलता उन तमाम बेटियों के लिए उम्मीद की नई किरण है, जो सपने तो देखती हैं लेकिन हालात से लड़ने का साहस नहीं जुटा पातीं। शिक्षाविद अतीक अहमद ने जानकारी देते हुए बताया कि उलूम फातिमा, रिटायर्ड शारीरिक शिक्षक इदरीश अहमद बादशाह की सुपुत्री हैं। सीमित संसाधनों, सामाजिक चुनौतियों और कड़े परिश्रम के बीच उन्होंने यह मुकाम हासिल किया, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्तंभ बनेगा। इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर 9 जनवरी, शुक्रवार को शहर के पूर्व उपसभापति नफीस अहमद के आवास पर एक भव्य सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में एडवोकेट उलूम फातिमा का माला पहनाकर और शॉल ओढ़ाकर भव्य अभिनंदन किया गया। पूरे माहौल में गर्व, खुशी और आत्मविश्वास की झलक साफ दिखाई दी। समारोह को संबोधित करते हुए पूर्व सभापति नफीस अहमद ने कहा— “उलूम फातिमा ने ऑल इंडिया बार काउंसिल एग्जाम पास कर यह साबित कर दिया है कि अगर बेटियों को मौका और भरोसा मिले, तो वे हर क्षेत्र में परचम लहरा सकती हैं। यह सफलता सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे हिंडौन की जीत है।” उन्होंने आगे कहा कि उलूम फातिमा की यह उपलब्धि समाज में शिक्षा, विशेषकर बालिका शिक्षा को लेकर नई सोच और नई दिशा देने का काम करेगी। इस अवसर पर शहर के गणमान्य नागरिकों ने भी अपने विचार रखे और उलूम फातिमा के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। कार्यक्रम में डॉ. अरबाज खान, शिक्षाविद अतीक अहमद, रिटायर्ड शारीरिक शिक्षक इदरीश अहमद, अख्तर भाई, सॉफ्टबॉल के नेशनल प्लेयर अदीब, अरमान क़मर, दुआ फातिमा, ज़ारून खाना, एनिश खान, मुआज़ रईस, माहताब आलम, अमन खान सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे। खुशी के इस अवसर पर सभी ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाई, पटाखे फोड़कर जश्न मनाया और पूरे माहौल को उत्सव में बदल दिया। समारोह में मौजूद हर शख्स की आंखों में गर्व और चेहरे पर मुस्कान साफ झलक रही थी। उलूम फातिमा की यह सफलता सिर्फ एक परीक्षा पास करने की कहानी नहीं है, बल्कि यह हिम्मत, मेहनत और आत्मविश्वास की जीत है। उन्होंने यह साबित कर दिया कि बेटियां किसी से कम नहीं — बस उन्हें उड़ान के लिए खुला आसमान चाहिए। आज हिंडौन की यह बेटी उन हजारों बेटियों की आवाज़ बन गई है, जो कानून, शिक्षा और नेतृत्व के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहती हैं। उलूम फातिमा की यह कामयाबी आने वाले समय में समाज को नई दिशा और नई सोच देने का काम करेगी। हिंडौन को गर्व है — उलूम फातिमा पर। बेटी हो तो ऐसी, जो इतिहास बना दे।1