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लोहरदगा जिले के सेन्हा थाना क्षेत्र के डोका गांव में शनिवार देर शाम ट्रैक्टर चालक की घोर लापरवाही के कारण एक दर्दनाक हादसा हुआ, जिसमें दो वृद्ध महिलाओं की मौके पर ही मौत हो गई। चिकित्सकों ने जांच के बाद इन महिलाओं की मृत्यु की पुष्टि की। घटना के उपरांत, पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए ट्रैक्टर को अपने कब्जे में ले लिया और लापरवाह चालक को गिरफ्तार कर लोहरदगा जेल भेज दिया है।
आलोक कुमार
लोहरदगा जिले के सेन्हा थाना क्षेत्र के डोका गांव में शनिवार देर शाम ट्रैक्टर चालक की घोर लापरवाही के कारण एक दर्दनाक हादसा हुआ, जिसमें दो वृद्ध महिलाओं की मौके पर ही मौत हो गई। चिकित्सकों ने जांच के बाद इन महिलाओं की मृत्यु की पुष्टि की। घटना के उपरांत, पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए ट्रैक्टर को अपने कब्जे में ले लिया और लापरवाह चालक को गिरफ्तार कर लोहरदगा जेल भेज दिया है।
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- लोहरदगा जिले के सेन्हा थाना क्षेत्र के डोका गांव में शनिवार देर शाम ट्रैक्टर चालक की घोर लापरवाही के कारण एक दर्दनाक हादसा हुआ, जिसमें दो वृद्ध महिलाओं की मौके पर ही मौत हो गई। चिकित्सकों ने जांच के बाद इन महिलाओं की मृत्यु की पुष्टि की। घटना के उपरांत, पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए ट्रैक्टर को अपने कब्जे में ले लिया और लापरवाह चालक को गिरफ्तार कर लोहरदगा जेल भेज दिया है।1
- गर्मी के दिनों में एक सड़क तालाब का रूप ले चुकी है, जिसके कारण आम लोगों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं।1
- झारखंड के एक अति पिछड़े क्षेत्र में असुर भवन का निर्माण कार्य चल रहा है, लेकिन इस परियोजना पर काम कर रहे मजदूरों को उनका भुगतान नहीं दिया जा रहा है।1
- झारखंड के माननीय राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने चूल्हा पानी गांव का दौरा किया। इस दौरान उनसे गांव के विकास से संबंधित प्रश्न पूछे गए, जिस पर उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की।1
- गुमला के सिसई में झारखंड राज्य किसान सभा की जिला कमेटी ने प्रखंड सह अंचल कार्यालय परिसर में अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया। इस विरोध प्रदर्शन से पहले किसान मोर्चा ने थाना चौक सरना स्थल से एक रैली निकाली, जो मेन रोड होते हुए प्रखंड मुख्यालय पहुंची। प्रदर्शनकारियों ने इस दौरान 'बीडीओ, सीओ की मनमानी नहीं चलेगी', 'जो अधिकारी काम करेंगे वहीं रहेंगे' जैसे नारे लगाए, जो कार्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार और मनमानी के खिलाफ उनके आक्रोश को दर्शाता है। किसान सभा जिला कमेटी के अध्यक्ष शंकर उरांव ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि प्रखंड सह अंचल कार्यालय में भ्रष्टाचार अपनी चरम सीमा पर है। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों को समय पर धान बीज और खाद-यूरिया नहीं मिलते, जिससे वे अपनी खेती नहीं कर पाते और रोजी-रोटी की तलाश में दूसरे राज्यों में पलायन करने को मजबूर होते हैं। इसके साथ ही, उन्होंने सड़क, बिजली और पानी की बढ़ती समस्याओं का जिक्र करते हुए प्रशासन से इन ज्वलंत मुद्दों का जल्द समाधान करने की मांग की। झारखंड राज्य किसान सभा प्रदेश कमेटी सदस्य मधुवा कश्यप ने केंद्र और राज्य सरकारों पर निरंकुश होने का आरोप लगाया, जिसके कारण उन्हें बारिश के मौसम में भी सड़क पर उतरना पड़ा। उन्होंने मानसून के आगमन के बावजूद खाद, बीज, यूरिया और डीएपी पर सरकार का कोई ध्यान न होने की बात कही और सभी किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड देने तथा उनका कर्ज माफ करने की मांग की। कश्यप ने जंगली हाथियों के आतंक का भी मुद्दा उठाया, जिससे कई गरीब किसानों के घर ध्वस्त हो गए हैं, फसलें नष्ट हो गई हैं और कई लोगों की जान जा चुकी है। उन्होंने प्रशासन से हाथियों द्वारा मारे गए व्यक्तियों के परिजनों को तत्काल मुआवजा देने, जमीन का ऑनलाइनकरण करने, अवैध कब्जा वाली जमीन पर रैयतों को दखल दिलाने और पंचायत स्तर पर संचालित योजनाओं में ग्रामीण जनता की भागीदारी सुनिश्चित करने की पुरजोर मांग की। झारखंड राज्य किसान सभा ने किसानों के हक और अधिकार के लिए अपनी लड़ाई जारी रखने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष तब तक चलेगा जब तक प्रखंड सह अंचल कार्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाता। इस विरोध प्रदर्शन में आयता उरांव, अनिल उरांव, पूनम उरांव, रवि उरांव, लखवा उरांव, अवतार किंडो, बिरशमुनी उरांव, करमिला उरांव, सुमन उरांव सहित सैकड़ों ग्रामीण किसान मौजूद रहे।3
- लातेहार के सदर प्रखंड की पेशारार, देदरिया और भूसूर पंचायत के ग्रामीणों ने रविवार को रिचूघुटा गांव में एक बैठक आयोजित कर हिंडालको बॉक्साइट साइडिंग और डीवीसी कंपनी की प्रस्तावित नई कोयला साइडिंग परियोजना का जोरदार विरोध किया। इस बैठक की अध्यक्षता विधायक प्रतिनिधि पवन कुमार ने की। पवन कुमार ने अपने संबोधन में आरोप लगाया कि हिंडालको कंपनी पिछले लगभग 70 वर्षों से इस क्षेत्र में कार्यरत है, लेकिन आज भी तीनों पंचायतों के ग्रामीण बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जीवन यापन करने को मजबूर हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी ने स्थानीय गांवों और पंचायतों के विकास के लिए अपेक्षित कार्य नहीं किए हैं। डीवीसी कंपनी द्वारा प्रस्तावित कोल साइडिंग परियोजना पर चेतावनी देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक क्षेत्र के बेरोजगार युवाओं को रोजगार और ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जातीं, तब तक साइडिंग का कार्य शुरू नहीं होने दिया जाएगा। बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि आगामी 9 जून को एक बड़ी जनसभा आयोजित की जाएगी, जिसमें लगभग पांच हजार ग्रामीण शामिल होंगे। इस सभा के बाद, ग्रामीण उपायुक्त को अपनी मांगों से संबंधित आवेदन सौंपेंगे। ग्रामीणों ने कंपनी प्रबंधन को चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों को नजरअंदाज किया जाता है, तो वे सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन करेंगे। उपस्थित ग्रामीणों ने कंपनी प्रबंधन के खिलाफ स्थानीय हितों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए जमकर नारेबाजी की। उनका कहना था कि क्षेत्र के संसाधनों का तो दोहन किया जा रहा है, लेकिन इसका लाभ स्थानीय लोगों को नहीं मिल रहा है। इस बैठक में सूरज कुमार गुप्ता, उमेश कुमार सिंह, राजेंद्र सिंह, कारू प्रसाद, बबलू प्रसाद, बसंत सिंह, अरुण कुमार सिंह, राहुल सिंह, राजदेव प्रसाद, राहुल कुमार, श्यामलाल उरांव, बीरबल सिंह, जमुना लोहार, कलदेव गझू, संजय गुप्ता, बसंत प्रसाद, राजेंद्र प्रसाद समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।2
- झारखंड के लोहरदगा जिले में एक तालाब के सुंदरीकरण कार्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। वायरल हो रही जानकारी के अनुसार, आरोप लगाया जा रहा है कि तालाब का सुंदरीकरण ‘थूक पॉलिश’ लगाकर किया जा रहा है, जिससे कार्य की गुणवत्ता पर गहरी चिंता जताई जा रही है।1
- झारखंड के बसिया प्रखंड स्थित ओकबा गांव में शुक्रवार देर रात एक भीषण अग्निकांड में एक घर में संचालित टेंट हाउस और किराना दुकान पूरी तरह जलकर खाक हो गए। इस घटना में लाखों रुपये मूल्य की संपत्ति के नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है। ओकबा निवासी हीरालाल साहू अपने परिवार के साथ घर में सो रहे थे, जब देर रात उनकी नजर दुकान की ओर गई जहां आग की लपटें उठ रही थीं। जब तक परिवार और आसपास के लोग स्थिति को समझ पाते, तब तक आग ने विकराल रूप धारण कर लिया था। बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचे और आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन आग की तीव्रता इतनी अधिक थी कि उस पर काबू नहीं पाया जा सका। अग्निशमन विभाग को सूचना दी गई, परंतु दमकल वाहन के पहुंचने से पहले ही टेंट हाउस का सामान, किराना सामग्री सहित अधिकांश जरूरी वस्तुएं जलकर राख हो चुकी थीं। आग लगने के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। इस हृदय विदारक घटना के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से पीड़ित परिवार को तत्काल उचित मुआवजा और सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।1